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संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि में संभावित दीक्षा महोत्सव – 19 फरवरी 2026
सिद्धों की पावन वंदनभूमि, साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों की निर्वाण स्थली, तीर्थंकर शीतलनाथ स्वामी के समवशरण से पावन हुआ सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि (बैतूल, मध्यप्रदेश) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है।
दिनांक – 19 फरवरी 2026
आचार्य परमेष्ठी, परम्पराचार्य श्री समयसागर मुनिराज के कर-कमलों से मुनि तथा एलक/क्षुल्लक दीक्षाओं की पूर्ण संभावना ने सम्पूर्ण जैन समाज में अद्भुत उत्साह और आध्यात्मिक स्पंदन भर दिया है।
संभावित दीक्षार्थी
ऐलक श्री
1. उपशमसागर जी महाराज
2. औचित्यसागर जी महाराज
3. गहनसागर जी महाराज
4. कैवल्यसागर जी महाराज
5. सुदृढ़सागर जी महाराज
6. समकितसागर जी महाराज
7. उचितसागर जी महाराज
8. अथाहसागर जी महाराज
9. उत्साहसागर जी महाराज
10. अमापसागर जी महाराज
11. उद्यमसागर जी महाराज
12. गरिष्ठसागर जी महाराज
13. गौरवसागर जी महाराज
क्षुल्लकश्री
14. जाग्रतसागर जी महाराज
15. आदरसागर जी महाराज
16. चिद्रूपसागर जी महाराज
17. स्वरूपसागर जी महाराज
18. सुभगसागर जी महाराज
19. सविनयसागर जी महाराज
20. समन्वयसागर जी महाराज
21. हीरकसागर जी महाराज
इनके अतिरिक्त अनेक ब्रह्मचारी भाइयों ने भी गुरुचरणों में निवेदन किया है कि उन्हें मोक्षमार्ग पर अग्रसर होने का सौभाग्य प्रदान किया जाए। यह केवल वस्त्र परिवर्तन नहीं—यह आत्मा के जागरण का उत्सव है, यह संसार से निवृत्ति और आत्मकल्याण की उद्घोषणा है।
मुक्तागिरि क्यों विशेष?
52 जिनालयों से अलंकृत यह सिद्धभूमि केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि तप, त्याग और वैराग्य का जीवंत प्रतीक है। यहाँ की वायु में तपस्या की गंध है, यहाँ की शिलाओं पर साधना की छाप है, और यहाँ की नीरवता में मोक्ष का आह्वान सुनाई देता है।
जब अतिथि आचार्य गुरुश्रेष्ठ के चरणचिह्नों का अनुसरण करते हुए उनके ही पथानुग |
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2026-02-13 03:51:46 |
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