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76938 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन लाल मन्दिर आरती दिल्ली 2026-04-11 11:09:45
76937 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन लाल मन्दिर आरती दिल्ली 2026-04-11 11:09:44
76935 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE ??⬜?? Ratnagiri Devgad Hapus Mangoes. Mango Box from Pune to Bangalore courier expense on me And from Bangalore office to your home expense on me. Today Rate 1600/. One dozen. ರತ್ನಗಿರಿ ದೇವಗಡ ಹಾಪೂಸ್ ಮಾವಿನ ಹಣ್ಣುಗಳು. Jai Gomtesh Organic Mangoes HSR layout Bangaluru. R R Mone 7829430188. You can pay after tasting. Thank You ? 2026-04-11 11:09:30
76936 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE ??⬜?? Ratnagiri Devgad Hapus Mangoes. Mango Box from Pune to Bangalore courier expense on me And from Bangalore office to your home expense on me. Today Rate 1600/. One dozen. ರತ್ನಗಿರಿ ದೇವಗಡ ಹಾಪೂಸ್ ಮಾವಿನ ಹಣ್ಣುಗಳು. Jai Gomtesh Organic Mangoes HSR layout Bangaluru. R R Mone 7829430188. You can pay after tasting. Thank You ? 2026-04-11 11:09:30
76934 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *भगवान महावीर की जन्मभूमि पर बना 70 वर्ष पुराना शोध संस्थान बंद — क्या यह उचित है?* ???? जब पूरा देश भगवान महावीर की जयंती मना रहा है, उसी समय उनकी जन्मभूमि वैशाली में स्थित *प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान, बासोकुंड* को बिहार सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है। यह निर्णय केवल एक संस्थान को बंद करने का निर्णय नहीं है, बल्कि भगवान महावीर की वाणी, प्राकृत भाषा और जैन दर्शन की ज्ञान परंपरा को समाप्त करने जैसा है। *यह संस्थान क्यों महत्वपूर्ण है?* यह संस्थान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर *भगवान महावीर की जन्मस्थली* क्षेत्र वैशाली के बासोकुंड में स्थित है। इसकी स्थापना 1950 के दशक में बिहार सरकार और जैन समाज के संयुक्त प्रयासों से हुई थी। इसके भवन निर्माण के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय *श्री साहू शांति प्रसाद जैन* ने उदारतापूर्वक दान दिया था, जिसका आज का मूल्य लगभग 90 करोड़ रुपये के बराबर माना जा सकता है। इस संस्थान का शिलान्यास 23 अप्रैल 1956 को भारत के *प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद* ने किया था। स्वतंत्र भारत में यह प्राकृत भाषा और जैन दर्शन का पहला सरकारी शोध संस्थान था, जहाँ से न केवल भारत बल्कि विदेशों के जैन और गैर-जैन विद्वानों ने अध्ययन और शोध किया। *बिहार में तीन भाषा शोध संस्थान बने* थे जब यह संस्थान बना, उसी समय बिहार में तीन भाषा शोध संस्थान स्थापित किए गए थे— • संस्कृत शोध संस्थान – दरभंगा • पाली शोध संस्थान – नालंदा • प्राकृत शोध संस्थान – वैशाली आज भी संस्कृत और पाली के सरकारी संस्थान चल रहे हैं, जबकि प्राकृत शोध संस्थान को बंद किया जा रहा है। *संस्थान को कमजोर किसने किया?* पिछले लगभग 20 वर्षों से यहाँ नियुक्तियाँ ही नहीं की गईं। प्रोफेसर और कर्मचारियों की कमी के कारण संस्थान की गतिविधियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती गईं। अब उसी स्थिति को आधार बनाकर इसे बंद किया जा रहा है। सरकार ने इस संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को बंद कर दिया है तथा इसके भवन एवं परिसर को शिक्षा विभाग से हटाकर निदेशालय संग्रहालय, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार को हस्तांतरित कर दिया है। *यह केवल एक संस्थान नहीं है* . यह संस्थान लगभग 13 एकड़ भूमि में फैला हुआ है, जिसमें • छात्रावास • प्राध्यापकों के आवास • पुस्तकालय • शोध सुविधाएँ मौजूद हैं। यहाँ से अनेक प्रतिष्ठित विद्वान निकले हैं, जैसे— डॉ नेमिचंद्र शास्त्री डॉ लाल चंद जैन डॉ राजा राम जैन डॉ गोकुल चंद जैन डॉ प्रेम सुमन जैन डॉ विमल प्रकाश डॉ श्री रंजन सूरिदेव *वैशाली का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व* बासोकुंड (कुंडलपुर) से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर वैशाली गढ़ के ध्वंसावशेष हैं. विश्व के पहले गणतंत्र -वैशाली- की इसी पवित्र भूमि पर • महारानी त्रिशला • चेलना • चंदनबाला जैसी महान श्राविकाओं का जन्म हुआ था। *वैशाली का अति गौरवशाली इतिहास रहा है* विशेष जानकारी के लिए “ *बिहार में जैन धर्म”* – डॉ. लाल चंद जैन-पुस्तक पढ़ें। *स्थानीय समाज की आस्था* स्थानीय राजपूत समाज सदियों से इस जन्मस्थल को अहल्य मानकर भगवान महावीर के प्रति गहरी श्रद्धा रखता आया है। वे भी इस क्षेत्र में बढ़ती ईसाई गतिविधियों का विरोध करते रहे हैं। आज स्थिति यह है कि • क्षेत्र में दर्जनों बौद्ध मंदिर बन चुके हैं • जन्मस्थल से लगभग 300 मीटर दूरी पर चर्च बन चुका है और अब बौद्ध प्रभाव के बाद ईसाइयों द्वारा धर्म परिवर्तन के प्रयास भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे समय में भगवान महावीर की जन्मभूमि पर स्थित जिनवाणी के अध्ययन का यह एकमात्र संस्थान बंद किया जा रहा है। *एक बड़ा विरोधाभास* जैन समाज किसी विश्वविद्यालय में जैन चेयर स्थापित होने पर गौरवान्वित अनुभव करता है। लेकिन एक ऐसा शोध संस्थान, जो दशकों तक जैन दर्शन एवं प्राकृत का अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र रहा, उसे ही समाप्त किया जा रहा है, जैन समाज चुप है। यदि आज यह संस्थान बंद हो गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। *आप क्या कर सकते हैं?* कृपया बिहार के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को पत्र लिखकर निवेदन करें कि इस ऐतिहासिक संस्थान को बंद करने का निर्णय वापस लिया जाए। *पत्र के ड्राफ्ट के लिए मुझसे या एन के जीवमित्र (9910378087) से संपर्क करें।* निम्न लिंक को क्लिक भी कर सकते हैं।<a href="https://effulgent-cajeta-bbf4eb.netlify.app/" target="_blank">https://effulgent-cajeta-bbf4eb.netlify.app/</a> ??? अब जिनवाणी के प्रसार पर भी आघात होने लगा है। आइए, इस मातृ संस्थान को बचाने के लिए आवाज उठाएँ। ?? सादर- *प्रदीप बड़कुल* +91 8310768635 2026-04-11 11:08:32
76933 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *भगवान महावीर की जन्मभूमि पर बना 70 वर्ष पुराना शोध संस्थान बंद — क्या यह उचित है?* ???? जब पूरा देश भगवान महावीर की जयंती मना रहा है, उसी समय उनकी जन्मभूमि वैशाली में स्थित *प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान, बासोकुंड* को बिहार सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है। यह निर्णय केवल एक संस्थान को बंद करने का निर्णय नहीं है, बल्कि भगवान महावीर की वाणी, प्राकृत भाषा और जैन दर्शन की ज्ञान परंपरा को समाप्त करने जैसा है। *यह संस्थान क्यों महत्वपूर्ण है?* यह संस्थान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर *भगवान महावीर की जन्मस्थली* क्षेत्र वैशाली के बासोकुंड में स्थित है। इसकी स्थापना 1950 के दशक में बिहार सरकार और जैन समाज के संयुक्त प्रयासों से हुई थी। इसके भवन निर्माण के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय *श्री साहू शांति प्रसाद जैन* ने उदारतापूर्वक दान दिया था, जिसका आज का मूल्य लगभग 90 करोड़ रुपये के बराबर माना जा सकता है। इस संस्थान का शिलान्यास 23 अप्रैल 1956 को भारत के *प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद* ने किया था। स्वतंत्र भारत में यह प्राकृत भाषा और जैन दर्शन का पहला सरकारी शोध संस्थान था, जहाँ से न केवल भारत बल्कि विदेशों के जैन और गैर-जैन विद्वानों ने अध्ययन और शोध किया। *बिहार में तीन भाषा शोध संस्थान बने* थे जब यह संस्थान बना, उसी समय बिहार में तीन भाषा शोध संस्थान स्थापित किए गए थे— • संस्कृत शोध संस्थान – दरभंगा • पाली शोध संस्थान – नालंदा • प्राकृत शोध संस्थान – वैशाली आज भी संस्कृत और पाली के सरकारी संस्थान चल रहे हैं, जबकि प्राकृत शोध संस्थान को बंद किया जा रहा है। *संस्थान को कमजोर किसने किया?* पिछले लगभग 20 वर्षों से यहाँ नियुक्तियाँ ही नहीं की गईं। प्रोफेसर और कर्मचारियों की कमी के कारण संस्थान की गतिविधियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती गईं। अब उसी स्थिति को आधार बनाकर इसे बंद किया जा रहा है। सरकार ने इस संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को बंद कर दिया है तथा इसके भवन एवं परिसर को शिक्षा विभाग से हटाकर निदेशालय संग्रहालय, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार को हस्तांतरित कर दिया है। *यह केवल एक संस्थान नहीं है* . यह संस्थान लगभग 13 एकड़ भूमि में फैला हुआ है, जिसमें • छात्रावास • प्राध्यापकों के आवास • पुस्तकालय • शोध सुविधाएँ मौजूद हैं। यहाँ से अनेक प्रतिष्ठित विद्वान निकले हैं, जैसे— डॉ नेमिचंद्र शास्त्री डॉ लाल चंद जैन डॉ राजा राम जैन डॉ गोकुल चंद जैन डॉ प्रेम सुमन जैन डॉ विमल प्रकाश डॉ श्री रंजन सूरिदेव *वैशाली का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व* बासोकुंड (कुंडलपुर) से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर वैशाली गढ़ के ध्वंसावशेष हैं. विश्व के पहले गणतंत्र -वैशाली- की इसी पवित्र भूमि पर • महारानी त्रिशला • चेलना • चंदनबाला जैसी महान श्राविकाओं का जन्म हुआ था। *वैशाली का अति गौरवशाली इतिहास रहा है* विशेष जानकारी के लिए “ *बिहार में जैन धर्म”* – डॉ. लाल चंद जैन-पुस्तक पढ़ें। *स्थानीय समाज की आस्था* स्थानीय राजपूत समाज सदियों से इस जन्मस्थल को अहल्य मानकर भगवान महावीर के प्रति गहरी श्रद्धा रखता आया है। वे भी इस क्षेत्र में बढ़ती ईसाई गतिविधियों का विरोध करते रहे हैं। आज स्थिति यह है कि • क्षेत्र में दर्जनों बौद्ध मंदिर बन चुके हैं • जन्मस्थल से लगभग 300 मीटर दूरी पर चर्च बन चुका है और अब बौद्ध प्रभाव के बाद ईसाइयों द्वारा धर्म परिवर्तन के प्रयास भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे समय में भगवान महावीर की जन्मभूमि पर स्थित जिनवाणी के अध्ययन का यह एकमात्र संस्थान बंद किया जा रहा है। *एक बड़ा विरोधाभास* जैन समाज किसी विश्वविद्यालय में जैन चेयर स्थापित होने पर गौरवान्वित अनुभव करता है। लेकिन एक ऐसा शोध संस्थान, जो दशकों तक जैन दर्शन एवं प्राकृत का अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र रहा, उसे ही समाप्त किया जा रहा है, जैन समाज चुप है। यदि आज यह संस्थान बंद हो गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। *आप क्या कर सकते हैं?* कृपया बिहार के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को पत्र लिखकर निवेदन करें कि इस ऐतिहासिक संस्थान को बंद करने का निर्णय वापस लिया जाए। *पत्र के ड्राफ्ट के लिए मुझसे या एन के जीवमित्र (9910378087) से संपर्क करें।* निम्न लिंक को क्लिक भी कर सकते हैं।<a href="https://effulgent-cajeta-bbf4eb.netlify.app/" target="_blank">https://effulgent-cajeta-bbf4eb.netlify.app/</a> ??? अब जिनवाणी के प्रसार पर भी आघात होने लगा है। आइए, इस मातृ संस्थान को बचाने के लिए आवाज उठाएँ। ?? सादर- *प्रदीप बड़कुल* +91 8310768635 2026-04-11 11:08:31
76931 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE 2026-04-11 11:08:19
76932 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE 2026-04-11 11:08:19
76930 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन 2026-04-11 11:08:07
76929 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन 2026-04-11 11:08:06