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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 69408 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-06 15:01:16 |
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| 69407 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-06 15:01:15 |
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| 69406 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-06 15:01:14 |
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| 69402 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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? |
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2026-04-06 15:01:13 |
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| 69403 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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_आज की *देव वंदना* एवं *आहारचर्या* (पड़गाहन), 6/4/26, नागपुर, वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ)_
???
_*सच्चा सुख क्या है❓* विषय पर वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* का आज का मंगल उद्बोधन_
<a href="https://youtu.be/PFzeIqIKZAw?si=MKxeqnm5lcNfbbqm" target="_blank">https://youtu.be/PFzeIqIKZAw?si=MKxeqnm5lcNfbbqm</a>
????
*मिलन नहीं; मिला लो !*
काया के मिलन से
माया के छलन से
ऊब गया है यह
भटकता-भटकता
विपरीत दिशा में
खूब गया है यह
*सहचर हैं बहुत सारे*
*पर ! कैसे लूँ ?*
*सहयोग उनसे*
*अंधों से कंधों का सहारा*
*मिल सकता है*
*किन्तु*
*पथ का दर्शन-प्रदर्शन संभव नहीं है*
यह भी अंधा है
इसे आँख मत दो..... भले ही
मत दो प्रकाश
किन्तु
हस्तावलम्बन तो दो !
इसे ऊपर उठा लो गर्त से
और मिलन नहीं
अपने आलोक में मिला लो
हे सब द्वन्द्वों से अतीत !
अजित ! अभीत !
- *३२, तोता क्यों रोता ?*
- *आचार्य श्री विद्यासागर जी* |
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2026-04-06 15:01:13 |
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| 69404 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-06 15:01:13 |
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| 69405 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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_आज की *देव वंदना* एवं *आहारचर्या* (पड़गाहन), 6/4/26, नागपुर, वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ)_
???
_*सच्चा सुख क्या है❓* विषय पर वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* का आज का मंगल उद्बोधन_
<a href="https://youtu.be/PFzeIqIKZAw?si=MKxeqnm5lcNfbbqm" target="_blank">https://youtu.be/PFzeIqIKZAw?si=MKxeqnm5lcNfbbqm</a>
????
*मिलन नहीं; मिला लो !*
काया के मिलन से
माया के छलन से
ऊब गया है यह
भटकता-भटकता
विपरीत दिशा में
खूब गया है यह
*सहचर हैं बहुत सारे*
*पर ! कैसे लूँ ?*
*सहयोग उनसे*
*अंधों से कंधों का सहारा*
*मिल सकता है*
*किन्तु*
*पथ का दर्शन-प्रदर्शन संभव नहीं है*
यह भी अंधा है
इसे आँख मत दो..... भले ही
मत दो प्रकाश
किन्तु
हस्तावलम्बन तो दो !
इसे ऊपर उठा लो गर्त से
और मिलन नहीं
अपने आलोक में मिला लो
हे सब द्वन्द्वों से अतीत !
अजित ! अभीत !
- *३२, तोता क्यों रोता ?*
- *आचार्य श्री विद्यासागर जी* |
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2026-04-06 15:01:13 |
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| 69401 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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? |
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2026-04-06 15:01:12 |
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| 69400 |
40449718 |
विनय गुरु ? |
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2026-04-06 15:00:00 |
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| 69399 |
40449718 |
विनय गुरु ? |
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2026-04-06 14:59:59 |
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