| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 233560 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
ಅಭಿಷೇಕ್ ಮತ್ತು ಆರಾಧನೆ ಗೆ SAME. ಕಲರ್ ಸೀರೆ |
|
2026-06-16 05:59:31 |
|
| 233561 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
ಅಭಿಷೇಕ್ ಮತ್ತು ಆರಾಧನೆ ಗೆ SAME. ಕಲರ್ ಸೀರೆ |
|
2026-06-16 05:59:31 |
|
| 233558 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
|
|
2026-06-16 05:59:27 |
|
| 233559 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
|
|
2026-06-16 05:59:27 |
|
| 233557 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
|
|
*आत्मनिरीक्षण - (नं. 2640)*
*******************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*250*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं -
*|| तीसरा अध्याय II*
*चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृत्ता गंगासिन्ध्वायो नद्य: ॥*
( चैप्टर 3 / सूत्र 24 )
*चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदयः नद्यः ॥2/24॥*
*कमेंट्री -*
~~~~~~
गंगा और सिंधु जैसी 14 नदियाँ (चतुर्दश सहस्त्र =) 14000 सहायक परिवारों (परिवृत्त =) के साथ हैं। उत्तर और दक्षिण दिशा में एक के बाद एक बहने वाली सभी नदियाँ, संख्या में दोगुनी नदियों के परिवारों से जुड़ी हुई हैं, और वे और उनके परिवारों की नदियाँ इस प्रकार हैं -
*दक्षिणी नदियाँ -*
~~~~~~~~~~~
1) गंगा, सिंधु नदियाँ - 14/14 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
2) रोहित, रोहितास्य नदियाँ 28 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
3) हरित, हरिकांता नदियाँ 56 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
4) सीता, सितोदा नदियाँ एक लाख 12 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
*उत्तरी नदियाँ -*
~~~~~~~~~~~~
5) रक्ता, रक्तोदा नदियाँ 14000 सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
6) सुवर्णकुला, रूप्यकुला नदियाँ 28 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
7) नारी, नरकान्ता नदियाँ 56 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं सहायक नदियाँ।
*(क्रमशः) ( ता. 16/06/2026 )*
*--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9891/आ.3308) |
|
2026-06-16 05:58:14 |
|
| 233556 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
|
|
*आत्मनिरीक्षण - (नं. 2640)*
*******************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*250*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं -
*|| तीसरा अध्याय II*
*चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृत्ता गंगासिन्ध्वायो नद्य: ॥*
( चैप्टर 3 / सूत्र 24 )
*चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदयः नद्यः ॥2/24॥*
*कमेंट्री -*
~~~~~~
गंगा और सिंधु जैसी 14 नदियाँ (चतुर्दश सहस्त्र =) 14000 सहायक परिवारों (परिवृत्त =) के साथ हैं। उत्तर और दक्षिण दिशा में एक के बाद एक बहने वाली सभी नदियाँ, संख्या में दोगुनी नदियों के परिवारों से जुड़ी हुई हैं, और वे और उनके परिवारों की नदियाँ इस प्रकार हैं -
*दक्षिणी नदियाँ -*
~~~~~~~~~~~
1) गंगा, सिंधु नदियाँ - 14/14 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
2) रोहित, रोहितास्य नदियाँ 28 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
3) हरित, हरिकांता नदियाँ 56 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
4) सीता, सितोदा नदियाँ एक लाख 12 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
*उत्तरी नदियाँ -*
~~~~~~~~~~~~
5) रक्ता, रक्तोदा नदियाँ 14000 सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
6) सुवर्णकुला, रूप्यकुला नदियाँ 28 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं,
7) नारी, नरकान्ता नदियाँ 56 हज़ार सहायक नदियों से जुड़ी हुई हैं सहायक नदियाँ।
*(क्रमशः) ( ता. 16/06/2026 )*
*--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9891/आ.3308) |
|
2026-06-16 05:58:13 |
|
| 233554 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-16 05:57:02 |
|
| 233555 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-16 05:57:02 |
|
| 233552 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
Jai Jinendra ?? |
|
2026-06-16 05:56:54 |
|
| 233553 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
Jai Jinendra ?? |
|
2026-06-16 05:56:54 |
|