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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 81016 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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इन्हें जंगल में छोड़ो ये हमारे बीच क्यों रहते....
#anamikamber #poetry #viral #anamikaamberlovers #reels
<a href="https://www.instagram.com/reel/DXCJKtdE1aq/?igsh=MWNxcXRwcWZmd2o2YQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXCJKtdE1aq/?igsh=MWNxcXRwcWZmd2o2YQ==</a> |
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2026-04-12 22:37:59 |
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| 81015 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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इन्हें जंगल में छोड़ो ये हमारे बीच क्यों रहते....
#anamikamber #poetry #viral #anamikaamberlovers #reels
<a href="https://www.instagram.com/reel/DXCJKtdE1aq/?igsh=MWNxcXRwcWZmd2o2YQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXCJKtdE1aq/?igsh=MWNxcXRwcWZmd2o2YQ==</a> |
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2026-04-12 22:37:58 |
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| 81014 |
40449741 |
07 विशुद्ध देशना प्रसारण केंद्र |
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*पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य महोत्सव पर वरिष्ठ वयोवृद्ध छठ रस त्यागी आचार्य संभव सागर जी का मंगल आर्शीवाद*
<a href="https://www.instagram.com/reel/DXCXtt2CYMv/?igsh=NWt6NGI2eGc4M2xy" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXCXtt2CYMv/?igsh=NWt6NGI2eGc4M2xy</a> |
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2026-04-12 22:37:10 |
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| 81013 |
40449741 |
07 विशुद्ध देशना प्रसारण केंद्र |
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*पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य महोत्सव पर वरिष्ठ वयोवृद्ध छठ रस त्यागी आचार्य संभव सागर जी का मंगल आर्शीवाद*
<a href="https://www.instagram.com/reel/DXCXtt2CYMv/?igsh=NWt6NGI2eGc4M2xy" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DXCXtt2CYMv/?igsh=NWt6NGI2eGc4M2xy</a> |
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2026-04-12 22:37:09 |
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| 81012 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:03 |
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| 81011 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:02 |
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| 81007 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:00 |
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| 81008 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:00 |
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| 81009 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:00 |
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| 81010 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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सत्ता,संपत्ति,परिजनों के राग से दुःख उतपन्न होता है सुखानुभव नहीं होता सुखानुभव तो पंच परमेष्ठी गुरुओं के अनुचरण,अनुकरण से होता है। तप रूपी राग से ज्ञानावरण होता है ज्ञान का वरण गुरु चरण वंदन से होता है यही सच्चा सुख है सत्ता के लालच में झुकना तो दुख को बढ़ाने का हेतु है। यह स्वार्थ रूप चरण वंदन करने का राग है गुरु से अनुराग नहीं है स्वार्थ है। जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1184021010?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-12 22:37:00 |
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