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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*?✍️सच्चा राही ✍️?*
*????✍️कहानी सभी के काम की*
*??? पाप की गठरी ✍️?*
*?????↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना?*
*??????? फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, 13 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के प्रथम तीर्थंकर सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, 13 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के 11 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*??????? फाल्गुन कृष्ण बारस , 14 फरवरी शनिवार 2025 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से सर्व सुख समृद्धि प्रदाता शनि की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के,धनके सभी विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*? फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07, 08,13,14, 16,17,22, 23 व 24 फरवरी ( 10 व 11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी ) तारीख को कल्याणक महोत्सव है। ?✅विशेष :- 5,8,14, 22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*??????इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को है।*
*?? अष्टान्हिका महापर्व 24 फरवरी से प्रारंभ है।*
*?????? शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21 फरवरी माह में मुहूर्त है। ?? वाहन खरीद मुहूर्त 1,6,18, 26,27 फरवरी को है।?? प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅? गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*?✍️ पंचक 23 से 26 जनवरी को है।*
*?यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*पाप की गठरी*
मानव जीवन में सच्ची महानता संपत्ति या पद से नहीं, बल्कि दूसरों की सहायता करने की भावना से मापी जाती है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जिनसे हम सबसे कम उम्मीद रखते हैं, वही सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आते हैं और यही संदेश इस कहानी के माध्यम से मिलता है।
एक नगर में सेठ और एक गरीब का घर आमने-सामने था। सेठ को कभी इस बात की परवाह नहीं थी कि उसका पड़ोसी गरीब है। गरीब की बेटी रुक्मणि अब विवाह योग्य हो चुकी थी।
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*?️?✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️????अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र रजिस्टर संस्था के ? W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक दिन गरीब पड़ौसी ने सेठ से बेटी के विवाह के लिए कुछ धन उधार माँगा, लेकिन सेठ ने यह सोचकर मना कर दिया कि गरीब आदमी ऋण लौटा नहीं पाएगा।
उसी रात सेठ के घर एक चोर घुस आया। संयोगवश सेठ और सेठानी जाग रहे थे, इसलिए चोर छिपकर उनकी बातें सुनने लगा।
सेठानी बोली—“देखते ही देखते देखो ना पड़ौसी की रुक्मणि सयानी हो गई है। अब उसके पिता को शादी कर देनी चाहिए।”
सेठ ने उत्तर दिया—“आज उन्होंने मुझसे धन माँगा था, पर मैंने इनकार कर दिया। अब सोचता हूँ, शायद मुझे उसकी मदद करनी चाहिए थी।”
यह सुनकर चोर के मन में हलचल हुई, पर कुछ देर बाद दोनों पति-पत्नी सो गए और चोर ने घर से धन चुरा लिया।
घर से निकलते समय चोर को याद आया कि उसकी पत्नी ने बर्तन लाने को कहा था। जोखिम उठाकर दोबारा सेठ के घर जाना ठीक न लगा, तो वह पड़ौसी गरीब के घर पहुँच गया। वहाँ भी पति पत्नी जाग रहे थे। माता-पिता बेटी के भविष्य की चिंता में व्याकुल थे।
गरीब ने कहा—“सेठ ने मदद से इनकार कर दिया, पर अपनी जगह वो सही भी है।”
पत्नी की आँखों में आँसू थे—“चार महीने में रुक्मणि की शादी करनी है, वरना…” गरीब की लाचारी देखकर चोर को अपनी संतान को खोने का दर्द याद आ गया। उसका हृदय पिघल गया।
उसने कुछ बर्तन झोली में डाले और आँगन की मिट्टी पर कोयले से लिख दिया—
“सेठ की तरफ से रुक्मणि के विवाह के लिए दिया गया धन – एक चोर”
और धन की पोटली वहीं छोड़कर वह चला गया।
सुबह को जब यह बात फैली तो हलचल मच गई—सेठ के घर चोरी और गरीब के यहाँ धन!
गरीब पहले तो दुविधा में पड़ा, पर फिर ईमानदारी से वह पोटली लेकर सेठ के पास पहुँचा और सारी बात बता दी।
सेठ ने संदेश पढ़ा और गहरे विचार में डूब गया।
“एक चोर भी इतना नेक हो सकता है कि चुराया हुआ धन किसी की भलाई में लगा दे, और मैं इतना धनी सेठ होते हुए भी मदद न कर सका!”
यह सोचकर सेठ ने गरीब को पोटली का आधा धन विवाह हेतु दे दिया और कहा— “इसे लौटाने की कोई आवश्यकता नहीं। यह बेटी रुक्मणि की शादी के लिए है।”
गरीब भावुक होकर बोला—“सेठ जी, आप सचमुच महान हैं।”
सेठ मुस्कराए—“न मैं महान हूँ, न तुम। महान तो वह चोर है, जिसने हमें भलाई का असली अर्थ समझा दिया। काश, ऐसे भले चोर दुनिया में और भी होते।”
इतना कहकर सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया।
? विशेष?:- सच्ची भलाई वही है, जो बिना स्वार्थ और दिखावे के की जाए। कभी-कभी अच्छाई वहाँ से मिलती है, जहाँ से हम सबसे कम उम्मीद करते हैं। इसलिए हमें भी अपने मन में करुणा और मदद की भावना जीवित रखनी चाहिए।
*????⏰?समझें:- आज वर्तमान में सभी व्यापार नौकरी करते है।उस व्यापार नौकरी में बहुत कुछ करना आज के मानव अनिवार्य हो गया है।उस अनिवार्य के कारण व्यक्ति विशेष को कुछ पाप भी संग्रह हो रहें है।उस संग्रहीत पाप की गठरी को समाप्त करने के लिए पूर्वाचार्यों ने अत्यंत ही सरल विधि बताई। व्यक्ति विशेष को अपनी आमदनी का छठवां हिस्सा ( याने जैसे किसी की किसी भी माध्यम से सौ रुपए की आमदनी होगी तो उसे सत्रह रुपए धर्म कार्य में खर्च करना अनिवार्य है।)धर्म कार्य में खर्च करने से वह पाप की गठरी का भार बढ़ता नहीं है। अतः सभी अपनी पाप की गठरी को अपने ही हाथों से उसका वजन कम करते जाओ।*
*????✍️➡️?️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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2026-02-12 17:12:28 |
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