WhatsApp Messages Dashboard

Total Records in Table: 15200

Records Matching Filters: 15200

From: To: Global Search:

Messages

ID Chat ID
Chat Name
Sender
Phone
Message
Status
Date View
74472 40449660 Acharya PulakSagarji 07 ??? *प्रार्थना सदा* *कुछ माँगने के लिए* *नहीं* *अपितु* *ईश्वर ने जो कुछ दिया है* *उसके प्रति आभार* *व्यक्त करने के लिए होनी चाहिए* ! ?? 2026-04-10 11:27:19
74471 40449660 Acharya PulakSagarji 07 ??? *प्रार्थना सदा* *कुछ माँगने के लिए* *नहीं* *अपितु* *ईश्वर ने जो कुछ दिया है* *उसके प्रति आभार* *व्यक्त करने के लिए होनी चाहिए* ! ?? 2026-04-10 11:27:18
74470 40449749 जिनोदय?JINODAYA *पाखंड के विरुद्ध आवाज़ या धर्म विरोध? — एक कटु सत्य, जिसे अब अनसुना नहीं किया जा सकता* हम बार-बार एक ही बात कहते हैं, और पूरे साहस के साथ कहते हैं—हम जैन धर्म के विरोधी नहीं हैं। हम उस पाखंड, उस आडंबर, उस दिखावे के विरोधी हैं, जिसने धीरे-धीरे जैन धर्म की पवित्र आत्मा को जकड़ लिया है। लेकिन जैसे ही कोई इस सड़ांध को उजागर करता है, उसे तुरंत “धर्म विरोधी” घोषित कर दिया जाता है। और यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज जैन समाज में पाखंड और आडंबर ही धर्म का पर्याय बन चुके हैं? क्या अब सच्चाई बोलना, सवाल पूछना, और गलत को गलत कहना ही अपराध हो गया है? अगर ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार है। जैन धर्म की नींव त्याग, तप, संयम और सत्य पर रखी गई थी। हमारे तीर्थंकरों ने नंगे पैर तप किया, भूखे रहकर आत्मा को शुद्ध किया, और संसार को यह सिखाया कि धर्म भीतर की यात्रा है, बाहर का प्रदर्शन नहीं। लेकिन आज स्थिति क्या है? आज धर्म के नाम पर मंच सजाए जा रहे हैं, भीड़ इकट्ठा की जा रही है, चंदे के आंकड़े गिनाए जा रहे हैं, और भक्ति को भी प्रतिस्पर्धा बना दिया गया है। आज अगर कोई साधु या प्रवचनकर्ता सादगी से जीवन जीता है, तो वह पीछे छूट जाता है, और जो आडंबर करता है, प्रचार करता है, वही “महान” बन जाता है। क्या यही जैन धर्म है? क्या यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमारे तीर्थंकरों ने सब कुछ त्याग दिया था? सच्चाई यह है कि आज धर्म नहीं, “धर्म का व्यापार” चल रहा है। और इस व्यापार को बचाने के लिए, हर उस आवाज़ को दबाया जाता है जो सवाल उठाती है। क्योंकि सवाल उठेगा तो जवाब देना पड़ेगा, और जवाब देने के लिए ईमानदारी चाहिए—जो आज दुर्लभ होती जा रही है। जब हम लिखते हैं, तो हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाना नहीं होता। हम उस मानसिकता पर प्रहार करते हैं, जिसने धर्म को एक तमाशा बना दिया है। लेकिन दुख इस बात का है कि समाज सच्चाई सुनने के बजाय, सच्चाई कहने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर देता है। लोग कहते हैं—“आप धर्म के खिलाफ लिखते हैं।” हम पूछते हैं—“क्या पाखंड ही धर्म है?” अगर हाँ, तो हम सच में उसके खिलाफ हैं। लेकिन अगर धर्म सच्चाई, संयम और आत्मशुद्धि का नाम है, तो हम उसी के पक्ष में खड़े हैं—और पूरी ताकत से खड़े हैं। यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं है, यह लड़ाई उस आत्मा की है, जो धीरे-धीरे दिखावे के बोझ तले दबती जा रही है। यह संघर्ष उस सत्य का है, जो शोर में कहीं खो गया है। अब समय आ गया है कि समाज खुद से सवाल पूछे—क्या हम सच में धर्म का पालन कर रहे हैं, या केवल उसका अभिनय कर रहे हैं? क्या हम तीर्थंकरों के मार्ग पर चल रहे हैं, या केवल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं? अगर आज भी हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। वे पूछेंगी—जब धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ रहा था, तब आप क्या कर रहे थे? और उस दिन हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा। इसलिए हम लिखेंगे, बार-बार लिखेंगे, और तब तक लिखेंगे जब तक समाज जाग नहीं जाता। चाहे हमें कुछ भी कहा जाए—“धर्म विरोधी”, “विवादित”, या कुछ और—लेकिन हम सच का साथ नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि हमारे लिए धर्म कोई दिखावा नहीं है, धर्म एक साधना है… और साधना में सत्य से बड़ा कोई आभूषण नहीं होता। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-10 11:24:56
74469 40449749 जिनोदय?JINODAYA *पाखंड के विरुद्ध आवाज़ या धर्म विरोध? — एक कटु सत्य, जिसे अब अनसुना नहीं किया जा सकता* हम बार-बार एक ही बात कहते हैं, और पूरे साहस के साथ कहते हैं—हम जैन धर्म के विरोधी नहीं हैं। हम उस पाखंड, उस आडंबर, उस दिखावे के विरोधी हैं, जिसने धीरे-धीरे जैन धर्म की पवित्र आत्मा को जकड़ लिया है। लेकिन जैसे ही कोई इस सड़ांध को उजागर करता है, उसे तुरंत “धर्म विरोधी” घोषित कर दिया जाता है। और यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज जैन समाज में पाखंड और आडंबर ही धर्म का पर्याय बन चुके हैं? क्या अब सच्चाई बोलना, सवाल पूछना, और गलत को गलत कहना ही अपराध हो गया है? अगर ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार है। जैन धर्म की नींव त्याग, तप, संयम और सत्य पर रखी गई थी। हमारे तीर्थंकरों ने नंगे पैर तप किया, भूखे रहकर आत्मा को शुद्ध किया, और संसार को यह सिखाया कि धर्म भीतर की यात्रा है, बाहर का प्रदर्शन नहीं। लेकिन आज स्थिति क्या है? आज धर्म के नाम पर मंच सजाए जा रहे हैं, भीड़ इकट्ठा की जा रही है, चंदे के आंकड़े गिनाए जा रहे हैं, और भक्ति को भी प्रतिस्पर्धा बना दिया गया है। आज अगर कोई साधु या प्रवचनकर्ता सादगी से जीवन जीता है, तो वह पीछे छूट जाता है, और जो आडंबर करता है, प्रचार करता है, वही “महान” बन जाता है। क्या यही जैन धर्म है? क्या यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमारे तीर्थंकरों ने सब कुछ त्याग दिया था? सच्चाई यह है कि आज धर्म नहीं, “धर्म का व्यापार” चल रहा है। और इस व्यापार को बचाने के लिए, हर उस आवाज़ को दबाया जाता है जो सवाल उठाती है। क्योंकि सवाल उठेगा तो जवाब देना पड़ेगा, और जवाब देने के लिए ईमानदारी चाहिए—जो आज दुर्लभ होती जा रही है। जब हम लिखते हैं, तो हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाना नहीं होता। हम उस मानसिकता पर प्रहार करते हैं, जिसने धर्म को एक तमाशा बना दिया है। लेकिन दुख इस बात का है कि समाज सच्चाई सुनने के बजाय, सच्चाई कहने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर देता है। लोग कहते हैं—“आप धर्म के खिलाफ लिखते हैं।” हम पूछते हैं—“क्या पाखंड ही धर्म है?” अगर हाँ, तो हम सच में उसके खिलाफ हैं। लेकिन अगर धर्म सच्चाई, संयम और आत्मशुद्धि का नाम है, तो हम उसी के पक्ष में खड़े हैं—और पूरी ताकत से खड़े हैं। यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं है, यह लड़ाई उस आत्मा की है, जो धीरे-धीरे दिखावे के बोझ तले दबती जा रही है। यह संघर्ष उस सत्य का है, जो शोर में कहीं खो गया है। अब समय आ गया है कि समाज खुद से सवाल पूछे—क्या हम सच में धर्म का पालन कर रहे हैं, या केवल उसका अभिनय कर रहे हैं? क्या हम तीर्थंकरों के मार्ग पर चल रहे हैं, या केवल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं? अगर आज भी हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। वे पूछेंगी—जब धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ रहा था, तब आप क्या कर रहे थे? और उस दिन हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा। इसलिए हम लिखेंगे, बार-बार लिखेंगे, और तब तक लिखेंगे जब तक समाज जाग नहीं जाता। चाहे हमें कुछ भी कहा जाए—“धर्म विरोधी”, “विवादित”, या कुछ और—लेकिन हम सच का साथ नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि हमारे लिए धर्म कोई दिखावा नहीं है, धर्म एक साधना है… और साधना में सत्य से बड़ा कोई आभूषण नहीं होता। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-10 11:24:55
74468 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप *? LIVE तीर्थंकर बालक का जन्माभिषेक । जन्म कल्याणक | पंचकल्याणक महोत्सव शांतोदय तीर्थ ?* *?पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज?* ? Watch *?LIVE* Now? ? <a href="https://www.youtube.com/live/z1lQtUHM_4U?si=DAzexewifbYlGYCA" target="_blank">https://www.youtube.com/live/z1lQtUHM_4U?si=DAzexewifbYlGYCA</a> *?Subscribe &amp; Follow?* ? *Sudhakalash Channel | Jin Darshan Channel* ? 2026-04-10 11:24:39
74467 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप *? LIVE तीर्थंकर बालक का जन्माभिषेक । जन्म कल्याणक | पंचकल्याणक महोत्सव शांतोदय तीर्थ ?* *?पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज?* ? Watch *?LIVE* Now? ? <a href="https://www.youtube.com/live/z1lQtUHM_4U?si=DAzexewifbYlGYCA" target="_blank">https://www.youtube.com/live/z1lQtUHM_4U?si=DAzexewifbYlGYCA</a> *?Subscribe &amp; Follow?* ? *Sudhakalash Channel | Jin Darshan Channel* ? 2026-04-10 11:24:38
74465 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? आज ,??? *उपाध्याय श्री विरंजन सागर मुनिराज एंव मुनि विसौमय सागर क्षुविशीला श्री माता जी संसघ ** ?????? श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर खार मुम्बई महाराष्ट्र मैं विराजमान हैं ???????? ? शाम 7,30आनंद यात्रा 8,30 गुरु सेवा सुबह 7,30अभीषेक शांतिधारा 8,बजे मंगल प्रवचन 9,30अहार चया 2026-04-10 11:23:21
74466 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? आज ,??? *उपाध्याय श्री विरंजन सागर मुनिराज एंव मुनि विसौमय सागर क्षुविशीला श्री माता जी संसघ ** ?????? श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर खार मुम्बई महाराष्ट्र मैं विराजमान हैं ???????? ? शाम 7,30आनंद यात्रा 8,30 गुरु सेवा सुबह 7,30अभीषेक शांतिधारा 8,बजे मंगल प्रवचन 9,30अहार चया 2026-04-10 11:23:21
74464 43516760 Divya_tapasvi-2 ? मंगल केशलोच आराधना ?? आर्यिका श्री सुरम्य मति माताजी? ? क्षुल्लिका ? श्री सुमन्य मति माताजी?? क्षुल्लिका ?श्री सुतत्य मति माताजी ✨ आज के शुभ प्रभात में? आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज के ससंग के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ? यह पवित्र क्षण मन को शांति, श्रद्धा और ऊर्जा से भर देने वाला है।जय जिनेन्द्र ?? 2026-04-10 11:21:18
74463 43516760 Divya_tapasvi-2 ? मंगल केशलोच आराधना ?? आर्यिका श्री सुरम्य मति माताजी? ? क्षुल्लिका ? श्री सुमन्य मति माताजी?? क्षुल्लिका ?श्री सुतत्य मति माताजी ✨ आज के शुभ प्रभात में? आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज के ससंग के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ? यह पवित्र क्षण मन को शांति, श्रद्धा और ऊर्जा से भर देने वाला है।जय जिनेन्द्र ?? 2026-04-10 11:21:17