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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 72345 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*सत्य: प्रचण्ड सूर्य की तरह — जिसे देखने के लिए सम्यक दृष्टि आवश्यक है*
सत्य प्रचण्ड सूर्य की तरह होता है। वह अपने तेज से सब कुछ स्पष्ट कर देता है, परंतु उसे देखने और स्वीकार करने के लिए हर किसी में सामर्थ्य नहीं होती। जैसे सूर्य की ओर सीधे देखना आसान नहीं होता, वैसे ही सत्य को स्वीकार करना भी सरल नहीं होता। सत्य न तो किसी के पक्ष में होता है और न ही विपक्ष में, वह केवल सत्य होता है—निर्भीक, निष्पक्ष और अडिग।
आज के समय में मनुष्य अपनी सुविधा के अनुसार सत्य को बदलने की कोशिश करता है। जब तक बात उसके अनुकूल होती है, वह उसे सत्य मानता है, लेकिन जैसे ही वही सत्य उसके स्वार्थ या अहंकार पर प्रहार करता है, वह उससे आँखें मूँद लेता है। यही कारण है कि समाज में भ्रम, विवाद और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
सत्य को स्वीकार करने के लिए सम्यक बुद्धि और सम्यक दृष्टि का होना अत्यंत आवश्यक है। सम्यक बुद्धि हमें यह समझने की क्षमता देती है कि क्या उचित है और क्या अनुचित, जबकि सम्यक दृष्टि हमें वास्तविकता को उसी रूप में देखने की शक्ति देती है जैसी वह है, बिना किसी विकार या पूर्वाग्रह के। जब इन दोनों का संगम होता है, तभी मनुष्य सत्य के प्रकाश को सहन कर पाता है।
जैन दर्शन में भी सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को मोक्ष मार्ग का आधार बताया गया है। यदि सम्यक दृष्टि ही नहीं होगी, तो मनुष्य सत्य को पहचान ही नहीं पाएगा। वह मिथ्या भ्रमों में उलझा रहेगा और अपने ही बनाए हुए झूठ के जाल में फँसता जाएगा।
वर्तमान समय में सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग सत्य सुनना नहीं चाहते। उन्हें मीठे शब्द, झूठी प्रशंसा और दिखावटी आडंबर अधिक प्रिय लगते हैं। जो व्यक्ति सत्य बोलता है, उसे अक्सर कठोर, असंवेदनशील या विरोधी मान लिया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि सत्य ही वह शक्ति है जो समाज को सही दिशा दिखा सकती है।
हमें यह समझना होगा कि सत्य से भागने से समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं, बल्कि और अधिक जटिल हो जाती हैं। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से ही अंधकार दूर होता है, उसी प्रकार सत्य को स्वीकार करने से ही जीवन और समाज में स्पष्टता और शांति आ सकती है।
अतः आवश्यक है कि हम अपने भीतर सम्यक बुद्धि और सम्यक दृष्टि का विकास करें। अपने अहंकार, पूर्वाग्रह और स्वार्थ को त्याग कर सत्य को स्वीकार करने का साहस जुटाएँ। क्योंकि अंततः सत्य ही वह आधार है, जिस पर स्थायी और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-09 15:01:00 |
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| 72346 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*सत्य: प्रचण्ड सूर्य की तरह — जिसे देखने के लिए सम्यक दृष्टि आवश्यक है*
सत्य प्रचण्ड सूर्य की तरह होता है। वह अपने तेज से सब कुछ स्पष्ट कर देता है, परंतु उसे देखने और स्वीकार करने के लिए हर किसी में सामर्थ्य नहीं होती। जैसे सूर्य की ओर सीधे देखना आसान नहीं होता, वैसे ही सत्य को स्वीकार करना भी सरल नहीं होता। सत्य न तो किसी के पक्ष में होता है और न ही विपक्ष में, वह केवल सत्य होता है—निर्भीक, निष्पक्ष और अडिग।
आज के समय में मनुष्य अपनी सुविधा के अनुसार सत्य को बदलने की कोशिश करता है। जब तक बात उसके अनुकूल होती है, वह उसे सत्य मानता है, लेकिन जैसे ही वही सत्य उसके स्वार्थ या अहंकार पर प्रहार करता है, वह उससे आँखें मूँद लेता है। यही कारण है कि समाज में भ्रम, विवाद और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
सत्य को स्वीकार करने के लिए सम्यक बुद्धि और सम्यक दृष्टि का होना अत्यंत आवश्यक है। सम्यक बुद्धि हमें यह समझने की क्षमता देती है कि क्या उचित है और क्या अनुचित, जबकि सम्यक दृष्टि हमें वास्तविकता को उसी रूप में देखने की शक्ति देती है जैसी वह है, बिना किसी विकार या पूर्वाग्रह के। जब इन दोनों का संगम होता है, तभी मनुष्य सत्य के प्रकाश को सहन कर पाता है।
जैन दर्शन में भी सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को मोक्ष मार्ग का आधार बताया गया है। यदि सम्यक दृष्टि ही नहीं होगी, तो मनुष्य सत्य को पहचान ही नहीं पाएगा। वह मिथ्या भ्रमों में उलझा रहेगा और अपने ही बनाए हुए झूठ के जाल में फँसता जाएगा।
वर्तमान समय में सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग सत्य सुनना नहीं चाहते। उन्हें मीठे शब्द, झूठी प्रशंसा और दिखावटी आडंबर अधिक प्रिय लगते हैं। जो व्यक्ति सत्य बोलता है, उसे अक्सर कठोर, असंवेदनशील या विरोधी मान लिया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि सत्य ही वह शक्ति है जो समाज को सही दिशा दिखा सकती है।
हमें यह समझना होगा कि सत्य से भागने से समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं, बल्कि और अधिक जटिल हो जाती हैं। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से ही अंधकार दूर होता है, उसी प्रकार सत्य को स्वीकार करने से ही जीवन और समाज में स्पष्टता और शांति आ सकती है।
अतः आवश्यक है कि हम अपने भीतर सम्यक बुद्धि और सम्यक दृष्टि का विकास करें। अपने अहंकार, पूर्वाग्रह और स्वार्थ को त्याग कर सत्य को स्वीकार करने का साहस जुटाएँ। क्योंकि अंततः सत्य ही वह आधार है, जिस पर स्थायी और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-09 15:01:00 |
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| 72344 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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*?दिगंम्बर जैन परवार मंदिर?*
*?नागपुर,महाराष्ट्र ?*
*आहार अपडेट*
*?संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज* के
*परम शिष्य*
*?विद्या कुल शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी*
*पडगाहन-दृष्य.*
------‐---------‐-----------------------
---------------------------------------
संकलन-
*?शांति विद्या धर्म प्रभावना संघ?* |
|
2026-04-09 15:00:53 |
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| 72343 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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*?दिगंम्बर जैन परवार मंदिर?*
*?नागपुर,महाराष्ट्र ?*
*आहार अपडेट*
*?संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज* के
*परम शिष्य*
*?विद्या कुल शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी*
*पडगाहन-दृष्य.*
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संकलन-
*?शांति विद्या धर्म प्रभावना संघ?* |
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2026-04-09 15:00:52 |
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| 72342 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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*??मनुष्य जीवन मात्र स्वार्थ पूर्ति हेतु नहीं है ??* ☺️लोग कुछ पढ़ाई करते हैं। डिग्रियां लेते हैं। पैसे कमाते हैं। बंगला बनाते हैं। कार खरीदते हैं। खाते पीते हैं। डांस करते हैं, और सो जाते हैं। लोग समझते हैं, कि मनुष्य जीवन इतना ही है। परंतु ध्यान देने की बात यह है, कि *"मनुष्य जीवन इतना ही नहीं है। यह तो केवल स्वार्थ पूर्ति है।"☺️* ☺️मनुष्य जीवन में सबसे विशेष बात यह है, कि *"स्वार्थ पूर्ति करते हुए कुछ परोपकार भी करना चाहिए। दूसरों की सेवा भी करनी चाहिए। कुछ दान करन... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183788032?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183788032?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 14:57:14 |
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| 72341 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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*??मनुष्य जीवन मात्र स्वार्थ पूर्ति हेतु नहीं है ??* ☺️लोग कुछ पढ़ाई करते हैं। डिग्रियां लेते हैं। पैसे कमाते हैं। बंगला बनाते हैं। कार खरीदते हैं। खाते पीते हैं। डांस करते हैं, और सो जाते हैं। लोग समझते हैं, कि मनुष्य जीवन इतना ही है। परंतु ध्यान देने की बात यह है, कि *"मनुष्य जीवन इतना ही नहीं है। यह तो केवल स्वार्थ पूर्ति है।"☺️* ☺️मनुष्य जीवन में सबसे विशेष बात यह है, कि *"स्वार्थ पूर्ति करते हुए कुछ परोपकार भी करना चाहिए। दूसरों की सेवा भी करनी चाहिए। कुछ दान करन... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183788032?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183788032?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 14:57:13 |
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| 72339 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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समस्त संसार तो क्या वास्तव में_मैं स्वयं को भी सुधारने में असमर्थ हूं <a href="https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M" target="_blank">https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 14:56:24 |
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| 72340 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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समस्त संसार तो क्या वास्तव में_मैं स्वयं को भी सुधारने में असमर्थ हूं <a href="https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M" target="_blank">https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 14:56:24 |
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| 72337 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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समस्त संसार तो क्या वास्तव में_मैं स्वयं को भी सुधारने में असमर्थ हूं <a href="https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M" target="_blank">https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 14:56:23 |
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40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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समस्त संसार तो क्या वास्तव में_मैं स्वयं को भी सुधारने में असमर्थ हूं <a href="https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M" target="_blank">https://youtube.com/shorts/XF-0fdmG5fw?si=TfHVhMS0v_Gb1F8M</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 14:56:23 |
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