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48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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??? *आज का विशेष क्षण* ???
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक
*श्री मोहन भागवत जी* ने
*प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* के
दर्शन कर राष्ट्रहित विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
? *वीडियो देखें व शेयर करें* ?
? राष्ट्रहितचिंतक आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वचन
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg</a>
? मोहन भागवत जी का उद्बोधन
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0</a>
? अधिक से अधिक शेयर करें ? |
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2026-04-13 13:47:23 |
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| 82651 |
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आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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??? *आज का विशेष क्षण* ???
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक
*श्री मोहन भागवत जी* ने
*प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* के
दर्शन कर राष्ट्रहित विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
? *वीडियो देखें व शेयर करें* ?
? राष्ट्रहितचिंतक आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वचन
<a href="https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg" target="_blank">https://youtu.be/ZRJ6pGZADrg</a>
? मोहन भागवत जी का उद्बोधन
<a href="https://youtu.be/VlKPcyIAOy0" target="_blank">https://youtu.be/VlKPcyIAOy0</a>
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2026-04-13 13:47:22 |
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| 82649 |
43516760 |
Divya_tapasvi-2 |
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✨ कल्याण मंदिर विधान ✨
? स्थान – मालवीय नगर सेक्टर 3 ✨ |
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2026-04-13 13:45:30 |
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| 82650 |
43516760 |
Divya_tapasvi-2 |
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✨ कल्याण मंदिर विधान ✨
? स्थान – मालवीय नगर सेक्टर 3 ✨ |
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2026-04-13 13:45:30 |
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| 82647 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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[4/13, 12:28 PM] Khushi Jain: <a href="https://youtu.be/6RNoobqbILA" target="_blank">https://youtu.be/6RNoobqbILA</a>
[4/13, 12:29 PM] Khushi Jain: ?????????
भगवान के चरण ऐसे छुए… तो होगा पाप!
भूलकर भी भगवान के चरण इस तरह न छुएं ⚠️
क्या आप भी गलत तरीके से छूते हैं भगवान के चरण?
भगवान के चरण स्पर्श करने की सही और गलत विधि
इस तरीके से चरण छूना बन सकता है पाप!
????????? |
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2026-04-13 13:44:20 |
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| 82648 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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[4/13, 12:28 PM] Khushi Jain: <a href="https://youtu.be/6RNoobqbILA" target="_blank">https://youtu.be/6RNoobqbILA</a>
[4/13, 12:29 PM] Khushi Jain: ?????????
भगवान के चरण ऐसे छुए… तो होगा पाप!
भूलकर भी भगवान के चरण इस तरह न छुएं ⚠️
क्या आप भी गलत तरीके से छूते हैं भगवान के चरण?
भगवान के चरण स्पर्श करने की सही और गलत विधि
इस तरीके से चरण छूना बन सकता है पाप!
????????? |
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2026-04-13 13:44:20 |
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| 82646 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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Day 02
✨गर्भ कल्याणक खंडवा✨
??Youtube Live??
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<a href="https://www.youtube.com/live/f00iorxHd0A?si=sNhJIrVIf4A231cH" target="_blank">https://www.youtube.com/live/f00iorxHd0A?si=sNhJIrVIf4A231cH</a>
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2026-04-13 13:43:52 |
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| 82645 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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Day 02
✨गर्भ कल्याणक खंडवा✨
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2026-04-13 13:43:51 |
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| 82644 |
40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
???????
_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
???????
दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
??????
आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:43:00 |
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| 82643 |
40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
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_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
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_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
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दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
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आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:42:59 |
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