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Message
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| 80320 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
❤️??❤️??❤️??❤️??❤️
*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
?????????
*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
?????????
*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
?????????
*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
?????????
*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
??????
??
*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
??❤️??❤️??❤️??❤️??
*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
??????????
*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
??????????
*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:34 |
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| 80319 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
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*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
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*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
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*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
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*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:33 |
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| 80317 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
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*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
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*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
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*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
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*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:31 |
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| 80318 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
?????????
*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
?????????
*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
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*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
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*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:31 |
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| 80316 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जब मार्गदर्शक ही भटक जाएं — जैन समाज के वर्तमान हालात पर एक सरल चिंतन*
“जहाँ बन्दरों के हाथों में बन्दूकें आ जाती हैं।
रोटी के बँटवारे में खुद बिल्ली खाई जाती है।
पुच्छल तारे जब अम्बर को ज्ञान सिखाने लगते हैं।
तो जुगनू चन्दा मामा में दोष गिनाने लगते हैं।।”
आज का समय बहुत विचित्र हो गया है। कभी जिस जैन धर्म की पहचान त्याग, संयम और आत्मशुद्धि से होती थी, आज उसी के नाम पर कई स्थानों पर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं जो मन को विचलित कर देती हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि एक साधारण अनुभव है जिसे समाज का हर सजग व्यक्ति कहीं न कहीं महसूस कर रहा है।
उपरोक्त पंक्तियाँ वर्तमान हालात को बेहद सरल और सटीक रूप में समझा देती हैं। जब बन्दरों के हाथ में बन्दूक आ जाती है, तो वह शक्ति का सही उपयोग नहीं करता, बल्कि अनर्थ की संभावना बढ़ जाती है। आज कुछ स्थानों पर यही स्थिति दिखाई देती है। जो व्यक्ति स्वयं साधना और अनुशासन में परिपक्व नहीं हैं, वे समाज का मार्गदर्शन करने लगते हैं। परिणाम यह होता है कि दिशा देने के बजाय भ्रम फैलता है।
साधु का जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन जब वही जीवन दिखावे और भीड़ जुटाने का माध्यम बन जाए, तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। समाज के कर्णधार, जो व्यवस्था और मर्यादा के रक्षक माने जाते हैं, जब वे भी स्वार्थ और प्रतिष्ठा की दौड़ में शामिल हो जाते हैं, तब स्थिति और गंभीर हो जाती है। धर्मस्थल, जो शांति और साधना के केंद्र होने चाहिए, वे कई बार प्रबंधन, प्रभाव और आर्थिक संतुलन के संघर्ष का मैदान बन जाते हैं।
आजकल एक और प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—दिखावा। प्रवचन, जो आत्मचिंतन का माध्यम होना चाहिए था, वह कई बार लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ाने का साधन बन गया है। शंका समाधान, जो जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है, वह भी कई बार मंचीय प्रदर्शन जैसा प्रतीत होने लगता है। जब ज्ञान का स्थान प्रदर्शन ले लेता है, तब गहराई स्वतः समाप्त हो जाती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि समाज स्वयं भी कई बार बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हो जाता है। साधु का मूल्य उसके वेश या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उसके आचरण और संयम से होना चाहिए, लेकिन आज कई बार इसका उल्टा होता दिखता है। भीड़ देखकर हम प्रभावित हो जाते हैं, जबकि सच्चाई अक्सर शांति और सादगी में छिपी होती है।
यह स्थिति पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। आज भी अनेक सच्चे साधु और संत हैं जो पूरी निष्ठा से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। वे प्रचार से दूर रहकर साधना में लीन हैं और समाज को सही दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि समाज उन्हें पहचाने और उनके मार्गदर्शन को महत्व दे।
समाधान बहुत कठिन नहीं है, लेकिन उसके लिए ईमानदारी चाहिए। हमें साधु और नेता दोनों का मूल्यांकन उनके कार्य और आचरण से करना होगा। प्रश्न पूछना गलत नहीं है, लेकिन वह मर्यादा और विवेक के साथ होना चाहिए। अंधभक्ति और अंधविरोध दोनों ही हानिकारक हैं। सही मार्ग बीच का है—जहाँ सम्मान भी हो और सत्य की खोज भी।
अंततः धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं होता। धर्म अपने मूल सिद्धांतों में स्थिर रहता है—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो कोई भी परिस्थिति हमें विचलित नहीं कर सकती।
आज आवश्यकता है जागरूकता की, न कि आलोचना की; सुधार की, न कि केवल विरोध की। यदि समाज स्वयं सजग हो जाए, तो कोई भी गलत प्रवृत्ति लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 15:53:24 |
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| 80315 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जब मार्गदर्शक ही भटक जाएं — जैन समाज के वर्तमान हालात पर एक सरल चिंतन*
“जहाँ बन्दरों के हाथों में बन्दूकें आ जाती हैं।
रोटी के बँटवारे में खुद बिल्ली खाई जाती है।
पुच्छल तारे जब अम्बर को ज्ञान सिखाने लगते हैं।
तो जुगनू चन्दा मामा में दोष गिनाने लगते हैं।।”
आज का समय बहुत विचित्र हो गया है। कभी जिस जैन धर्म की पहचान त्याग, संयम और आत्मशुद्धि से होती थी, आज उसी के नाम पर कई स्थानों पर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं जो मन को विचलित कर देती हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि एक साधारण अनुभव है जिसे समाज का हर सजग व्यक्ति कहीं न कहीं महसूस कर रहा है।
उपरोक्त पंक्तियाँ वर्तमान हालात को बेहद सरल और सटीक रूप में समझा देती हैं। जब बन्दरों के हाथ में बन्दूक आ जाती है, तो वह शक्ति का सही उपयोग नहीं करता, बल्कि अनर्थ की संभावना बढ़ जाती है। आज कुछ स्थानों पर यही स्थिति दिखाई देती है। जो व्यक्ति स्वयं साधना और अनुशासन में परिपक्व नहीं हैं, वे समाज का मार्गदर्शन करने लगते हैं। परिणाम यह होता है कि दिशा देने के बजाय भ्रम फैलता है।
साधु का जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन जब वही जीवन दिखावे और भीड़ जुटाने का माध्यम बन जाए, तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। समाज के कर्णधार, जो व्यवस्था और मर्यादा के रक्षक माने जाते हैं, जब वे भी स्वार्थ और प्रतिष्ठा की दौड़ में शामिल हो जाते हैं, तब स्थिति और गंभीर हो जाती है। धर्मस्थल, जो शांति और साधना के केंद्र होने चाहिए, वे कई बार प्रबंधन, प्रभाव और आर्थिक संतुलन के संघर्ष का मैदान बन जाते हैं।
आजकल एक और प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—दिखावा। प्रवचन, जो आत्मचिंतन का माध्यम होना चाहिए था, वह कई बार लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ाने का साधन बन गया है। शंका समाधान, जो जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है, वह भी कई बार मंचीय प्रदर्शन जैसा प्रतीत होने लगता है। जब ज्ञान का स्थान प्रदर्शन ले लेता है, तब गहराई स्वतः समाप्त हो जाती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि समाज स्वयं भी कई बार बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हो जाता है। साधु का मूल्य उसके वेश या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उसके आचरण और संयम से होना चाहिए, लेकिन आज कई बार इसका उल्टा होता दिखता है। भीड़ देखकर हम प्रभावित हो जाते हैं, जबकि सच्चाई अक्सर शांति और सादगी में छिपी होती है।
यह स्थिति पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। आज भी अनेक सच्चे साधु और संत हैं जो पूरी निष्ठा से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। वे प्रचार से दूर रहकर साधना में लीन हैं और समाज को सही दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि समाज उन्हें पहचाने और उनके मार्गदर्शन को महत्व दे।
समाधान बहुत कठिन नहीं है, लेकिन उसके लिए ईमानदारी चाहिए। हमें साधु और नेता दोनों का मूल्यांकन उनके कार्य और आचरण से करना होगा। प्रश्न पूछना गलत नहीं है, लेकिन वह मर्यादा और विवेक के साथ होना चाहिए। अंधभक्ति और अंधविरोध दोनों ही हानिकारक हैं। सही मार्ग बीच का है—जहाँ सम्मान भी हो और सत्य की खोज भी।
अंततः धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं होता। धर्म अपने मूल सिद्धांतों में स्थिर रहता है—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो कोई भी परिस्थिति हमें विचलित नहीं कर सकती।
आज आवश्यकता है जागरूकता की, न कि आलोचना की; सुधार की, न कि केवल विरोध की। यदि समाज स्वयं सजग हो जाए, तो कोई भी गलत प्रवृत्ति लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 15:53:23 |
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| 80314 |
45683126 |
+120363281507952396 |
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? *विहार अपडेट- 12 अप्रैल 2026* ?
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? _महाकवि, *दादागुरु आचार्य प्रवर श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज* जिनके प्रथम शिष्य *संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज* एवं उनके द्वितीय शिष्य अद्भुत चर्या के धनी *समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री 108 विवेक सागर जी महाराज*_
⭐ _*अभिनवाचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज* के मंगल आशीर्वाद से_
*▫️आर्यिका मां १०५ विज्ञानमति माताजी ससंघ (10 पिच्छी)*
का मंगल विहार 3.45 पे *खातेगांव म प्र* से हुआ....
? रात्रि विश्राम :-
? कल की आहारचर्या :- *सिद्ध क्षेत्र नेमावर म प्र*
▫️ विहार दिशा :- *नेमावर होते हुए सिद्ध क्षेत्र मुक्तगिरि*
*_आर्यिका मां १०५ विज्ञान मति माताजी ससंघ के आहार विहार की समस्त जानकारी के लिए नीचे दी गई सोशल मीडिया पेज से आप जुड़ सकते है_*
? *व्हाट्सएप चैनल की लिंक:* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b</a> |
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2026-04-12 15:46:42 |
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| 80313 |
45683126 |
+120363281507952396 |
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? *विहार अपडेट- 12 अप्रैल 2026* ?
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? _महाकवि, *दादागुरु आचार्य प्रवर श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज* जिनके प्रथम शिष्य *संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज* एवं उनके द्वितीय शिष्य अद्भुत चर्या के धनी *समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री 108 विवेक सागर जी महाराज*_
⭐ _*अभिनवाचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज* के मंगल आशीर्वाद से_
*▫️आर्यिका मां १०५ विज्ञानमति माताजी ससंघ (10 पिच्छी)*
का मंगल विहार 3.45 पे *खातेगांव म प्र* से हुआ....
? रात्रि विश्राम :-
? कल की आहारचर्या :- *सिद्ध क्षेत्र नेमावर म प्र*
▫️ विहार दिशा :- *नेमावर होते हुए सिद्ध क्षेत्र मुक्तगिरि*
*_आर्यिका मां १०५ विज्ञान मति माताजी ससंघ के आहार विहार की समस्त जानकारी के लिए नीचे दी गई सोशल मीडिया पेज से आप जुड़ सकते है_*
? *व्हाट्सएप चैनल की लिंक:* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b</a> |
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2026-04-12 15:46:41 |
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| 80312 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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*विषय~ तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ बनने के पूर्व के तीसरे भव से लेकर गृहस्थ अवस्था तक का परिचय...*
*(1) तीर्थंकर नाम~* _श्री_ _मुनिसुव्रतनाथ जी।_
*(2) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के द्वीप का नाम~* _जम्बूद्वीप।_
*(3) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के क्षेत्र का नाम~* _भरत क्षेत्र।_
*(4) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के देश या प्रांत का नाम~* _अंग देश।_
*(5) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर का नाम~* _चम्पापुरी_ _नगर।_
*(6) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर की सीमा~* _सीता नदी के दक्षिण तट पर।_
*(7) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव का नाम~* _श्रीधर्म (हरिवर्म)।_
*(8) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट पद पर आसीन थे ~* _मांडलीक राजा।_
*(9) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में वहाँ के गुरु का नाम~* _सुनन्द (अनन्तवीर्य) मुनिराज।_
*(10) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे में शरीर का रंग~* _सुवर्ण रंग।_
*(11) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट ज्ञान के वेत्ता थे ~*
_11अंग के वेत्ता थे।_
*(12) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में किस प्रकार के व्रत का आचरण किया था~*
_सिंहनिष्क्रीड़ित व्रत को किया था।_
*(13) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में किस प्रकार के मरण को धारण किया हुआ था~*
_प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(14) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में कितने समय तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया हुआ था~*
_एक मास पर्यन्त तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(15) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में प्रायोपगमन सन्यास को धारणकर मरण करके किस गति को प्राप्त करते हैं~*
_देवगति को।_
*(16) किस स्वर्ग से चयकर तीर्थंकर हुए~*
_प्राणत स्वर्ग से।_
*(17) स्वर्ग में वहाँ किस पद पर आसीन थे~*
_इन्द्र पद पर आसीन थे।_
*(18) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मभूमि/ देश का नाम~* _अंगदेश देश।_
*(19) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मपुरी (नगर या पट्टन) का नाम~* _कुशाग्रपुर।_
*(20) तीर्थंकर के वर्तमान भव में वंश का नाम~* _यादववंश।_
*(21) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जनक (पिता)~*
_राजा सुमित्र।_
*(22) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जननी (माता)~*
_रानी सोमा (पद्मावती)।_
*(23) तीर्थंकर के वर्तमान भव की गर्भ तिथि~*
_श्रावण कृष्ण द्वितीया।_
*(24) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ समय~*
_अष्टमासिया।_
*(25) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ नक्षत्र~*
_श्रवण नक्षत्र।_
*(26) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म तिथि~*
_अश्विनी शुक्ल 12 तिथि।_
*(27) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म समय~*
_आग्नेय योग।_
*(28) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म नक्षत्र~*
_श्रवण नक्षत्र।_
*(29) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म राशि~*
_मकर राशि।_
*(30) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर का वर्ण (रंग)~* _प्रियंगुप्रभा इन्द्र नील (श्याम वर्ण)।_
*(31) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर की ऊँचाई का माप धनुष में ~* _20 धनुष।_
*(32) तीर्थंकर के वर्तमान भव में लांछन (चिह्न)~*
_कूर्म (कछवा)।_
*(33) तीर्थंकर के वर्तमान भव में कुमार काल प्रमाण~*
_7500 वर्ष।_
*(34) तीर्थंकर के वर्तमान भव में राज्यावस्था का काल प्रमाण~* _15 हजार वर्ष।_
*(35) दीक्षाकाल में छद्मस्थ अवस्था का काल प्रमाण~* _11 महीना।_
*(36) दीक्षाकाल में केवली अवस्था का काल प्रमाण~* _11 महीना कम 7500 वर्ष।_
*(37) पूर्ण आयु काल प्रमाण वर्ष~* _30,000 वर्ष।_
*(38) दीक्षा तिथि~* _वैशाख कृष्ण दसमीं।_
*(39) दीक्षा समय~* _अपराह्न काल।_
*(40) दीक्षा नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(41) दीक्षा पालकी का नाम~* _अपराजिता पालकी।_
*(42) दीक्षा नगर का नाम~* _राजगृही नगर।_
*(43) दीक्षा वन (उद्यान) का नाम~* _नीलवन-नीलगुफा वन।_
*(44) दीक्षा वृक्ष का नाम~* _चम्पक वृक्ष।_
*(45) दीक्षा वृक्ष की ऊँचाई धनुष में~* _240 धनुष।_
*(46) वैराग्य का निमित्त कारण~* _पूर्वभव का स्मरण।_
*(47) दीक्षा कितने उपवास का नियम लेकर ग्रहण की(उत्तर पुराण/ हरिवंश पुराण)~* _तेला (बेला)।_
*(48) दीक्षा के समय कितने राजाओं ने साथ में दीक्षा ली थी?~* _1,000 राजाओं ने।_
*(49) दीक्षा के बाद कितने दिनों बाद आहार लिया था~* _तीन दिन के बाद।_
*(50) दीक्षा के बाद पारणा में कौन सा आहार लिया था~* _खीर।_
*(51) दीक्षा के बाद पारणा कराने वाले दाता का नाम~* _राजा वृषभसेन (दत्त)।_
*(52) दीक्षा के बाद पारणा किस नगर में हुई थी~*
_राज्यगृही (मिथिलापुर) नगर।_
*(53) मुनि अवस्था से अयोगकेवली तक के तप काल का प्रमाण~* _75,000 वर्ष।_
*(54) केवलज्ञान के पहले उपवास अर्थात् धारणा का नियम~* _अष्टमभक्त (3)_
*(55) केवलज्ञान तिथि~* _चैत्र कृष्ण दसमीं।_
*(56) केवलज्ञान समय~* _पूर्वाह्न काल।_
*(57) केवलज्ञान नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(58) मानस्तम्भ की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(59) सिद्धार्थ वृक्ष की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(60) कोट की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(61) चैत्यवृक्षों की ऊँचाई (धनुष मे)~* _240 धनुष।_
*(62) वनों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(63) स्तूपों की ऊँचाई (धनुष में )~* _240 धनुष।_
*(64) ध्वजाओं की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(65) वन वृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(66) प्रासादों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(67) तोरणद्वार की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(68) पर्वतों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(69) वेदिका की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(70) पर्वतों की चौड़ाई (धनुष में)~* _160 धनुष।_
*(71) स्तूपों की चौड़ाई (धनुष में)~* _20 धनुष से कुछ अधिक।_
*(72) कोट की चौड़ाई (धनुष में)~* _60 धनुष।_
*(73) वेदिका की चौड़ाई (धनुष में)~* _60 धनुष।_
*(74) विशेष पद~* _मण्डलीक राजा।_
*(75) केवलज्ञान वन का नाम~* _नील वन।_
*(76) केवलज्ञान वृक्ष का नाम~* _चम्पक वृक्ष।_
*(77) समवशरण का विस्तार (योजन प्रमाण)~* _2.5 योजन।_
*(78) समवशरण का विस्तार (कोस प्रमाण)~* _10 कोस।_
*(79) समवशरण में तीर्थंकर भगवान का आसन~* _पद्मासन_
*(80) समवशरण में रहने वाले सामान्य केवलियों की संख्या~* _1,800 केवली_
*(81) समवशरण में रहने वाले पूर्व धारी मुनिराजों की संख्या~* _500 पूर्व धारी मुनिराज।_
*(82) समवशरण में रहने वाले शिक्षक मुनिराजों की संख्या~* _21,000 शिक्षक मुनिराज।_
*(83) समवशरण में रहने वाले विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _1,500 विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराज।_
*(84) समवशरण में रहने वाले विक्रिया ऋद्धिधारी योगियों की संख्या~* _2,200 विक्रिया ऋद्धिधारी योगी।_
*(85) समवशरण में रहने वाले अवधिज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _1,800 अवधिज्ञानी मुनिराज।_
*(86) समवशरण में रहने वाले वादी मुनिराजों की संख्या~*
_1,200 वादी मुनिराज।_
*(87) समवशरण में स्थित मुनि संघ की कुल संख्या~* _30,000 मुनि संघ।_
*(88) मुख्य गणधर का नाम~* _मल्ली।_
*(89) सब गणधर की संख्या~* _18_
*(90) गणिनी आर्यिकाओं की संख्या~* _50,000 आर्यिकाएं।_
*(91) मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम~*
_पुष्पदत्ता आर्यिका।_
*(92) मुख्य श्रोता का नाम~* _राजा अजितंजय।_
*(93) श्रावकों की संख्या~* _श्रावक 1 लाख।_
*श्राविकाओं की संख्या~* _श्राविकाएं 3 लाख।_
*(95) तीर्थंकरों का निर्वाण अंतर~* _6,00,000 वर्ष।_
*(96) आयु के अंत में योग निरोध या विहार कब बंद किया था~* _एक मास पहले।_
*(97) निर्वाण की तिथि~* _फाल्गुन कृष्ण द्वादशी।_
*(98) निर्वाण का समय (हरिवंश पुराण अध्याय 60 से)~* _अपराह्न।_
*(99) निर्वाण का नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(100) निर्वाण भूमि~* _सम्मेद शिखर जी।_
*(101) निर्वाण क्षेत्र का विशिष्ट स्थान (चूलिका)~* _निर्जरकूट।_
*(102) किस आसन से मोक्ष गए~* _कायोत्सर्गासन।_
*(103) सौधर्म स्वर्ग से लेकर ऊर्ध्व ग्रैवेयक तक जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _2,000 मुनिराज।_
*(104) अनुत्तर विमान में जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _8,800 मुनिराज।_
*(105) तीर्थंकर के साथ सिद्ध होने वाले मुनिराजों की संख्या~* _1,000 मुनिराज।_
*(106) अनुबद्ध केवलियों की संख्या प्रथम मत के अनुसार~* _12 अनुबद्ध केवली।_
*(107) अनुबद्ध केवलियों की संख्या द्वितीय मत के अनुसार~* _12 अनुबद्ध केवली।_
*(108) धर्म का विच्छेद काल~* _मुनिसुव्रतनाथ भगवान के समय धर्मतीर्थ का विच्छेद नहीं हुआ।_
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2026-04-12 15:45:14 |
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श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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*विषय~ तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ बनने के पूर्व के तीसरे भव से लेकर गृहस्थ अवस्था तक का परिचय...*
*(1) तीर्थंकर नाम~* _श्री_ _मुनिसुव्रतनाथ जी।_
*(2) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के द्वीप का नाम~* _जम्बूद्वीप।_
*(3) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के क्षेत्र का नाम~* _भरत क्षेत्र।_
*(4) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के देश या प्रांत का नाम~* _अंग देश।_
*(5) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर का नाम~* _चम्पापुरी_ _नगर।_
*(6) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर की सीमा~* _सीता नदी के दक्षिण तट पर।_
*(7) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव का नाम~* _श्रीधर्म (हरिवर्म)।_
*(8) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट पद पर आसीन थे ~* _मांडलीक राजा।_
*(9) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में वहाँ के गुरु का नाम~* _सुनन्द (अनन्तवीर्य) मुनिराज।_
*(10) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे में शरीर का रंग~* _सुवर्ण रंग।_
*(11) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट ज्ञान के वेत्ता थे ~*
_11अंग के वेत्ता थे।_
*(12) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में किस प्रकार के व्रत का आचरण किया था~*
_सिंहनिष्क्रीड़ित व्रत को किया था।_
*(13) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में किस प्रकार के मरण को धारण किया हुआ था~*
_प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(14) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में कितने समय तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया हुआ था~*
_एक मास पर्यन्त तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(15) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में प्रायोपगमन सन्यास को धारणकर मरण करके किस गति को प्राप्त करते हैं~*
_देवगति को।_
*(16) किस स्वर्ग से चयकर तीर्थंकर हुए~*
_प्राणत स्वर्ग से।_
*(17) स्वर्ग में वहाँ किस पद पर आसीन थे~*
_इन्द्र पद पर आसीन थे।_
*(18) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मभूमि/ देश का नाम~* _अंगदेश देश।_
*(19) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मपुरी (नगर या पट्टन) का नाम~* _कुशाग्रपुर।_
*(20) तीर्थंकर के वर्तमान भव में वंश का नाम~* _यादववंश।_
*(21) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जनक (पिता)~*
_राजा सुमित्र।_
*(22) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जननी (माता)~*
_रानी सोमा (पद्मावती)।_
*(23) तीर्थंकर के वर्तमान भव की गर्भ तिथि~*
_श्रावण कृष्ण द्वितीया।_
*(24) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ समय~*
_अष्टमासिया।_
*(25) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ नक्षत्र~*
_श्रवण नक्षत्र।_
*(26) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म तिथि~*
_अश्विनी शुक्ल 12 तिथि।_
*(27) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म समय~*
_आग्नेय योग।_
*(28) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म नक्षत्र~*
_श्रवण नक्षत्र।_
*(29) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म राशि~*
_मकर राशि।_
*(30) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर का वर्ण (रंग)~* _प्रियंगुप्रभा इन्द्र नील (श्याम वर्ण)।_
*(31) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर की ऊँचाई का माप धनुष में ~* _20 धनुष।_
*(32) तीर्थंकर के वर्तमान भव में लांछन (चिह्न)~*
_कूर्म (कछवा)।_
*(33) तीर्थंकर के वर्तमान भव में कुमार काल प्रमाण~*
_7500 वर्ष।_
*(34) तीर्थंकर के वर्तमान भव में राज्यावस्था का काल प्रमाण~* _15 हजार वर्ष।_
*(35) दीक्षाकाल में छद्मस्थ अवस्था का काल प्रमाण~* _11 महीना।_
*(36) दीक्षाकाल में केवली अवस्था का काल प्रमाण~* _11 महीना कम 7500 वर्ष।_
*(37) पूर्ण आयु काल प्रमाण वर्ष~* _30,000 वर्ष।_
*(38) दीक्षा तिथि~* _वैशाख कृष्ण दसमीं।_
*(39) दीक्षा समय~* _अपराह्न काल।_
*(40) दीक्षा नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(41) दीक्षा पालकी का नाम~* _अपराजिता पालकी।_
*(42) दीक्षा नगर का नाम~* _राजगृही नगर।_
*(43) दीक्षा वन (उद्यान) का नाम~* _नीलवन-नीलगुफा वन।_
*(44) दीक्षा वृक्ष का नाम~* _चम्पक वृक्ष।_
*(45) दीक्षा वृक्ष की ऊँचाई धनुष में~* _240 धनुष।_
*(46) वैराग्य का निमित्त कारण~* _पूर्वभव का स्मरण।_
*(47) दीक्षा कितने उपवास का नियम लेकर ग्रहण की(उत्तर पुराण/ हरिवंश पुराण)~* _तेला (बेला)।_
*(48) दीक्षा के समय कितने राजाओं ने साथ में दीक्षा ली थी?~* _1,000 राजाओं ने।_
*(49) दीक्षा के बाद कितने दिनों बाद आहार लिया था~* _तीन दिन के बाद।_
*(50) दीक्षा के बाद पारणा में कौन सा आहार लिया था~* _खीर।_
*(51) दीक्षा के बाद पारणा कराने वाले दाता का नाम~* _राजा वृषभसेन (दत्त)।_
*(52) दीक्षा के बाद पारणा किस नगर में हुई थी~*
_राज्यगृही (मिथिलापुर) नगर।_
*(53) मुनि अवस्था से अयोगकेवली तक के तप काल का प्रमाण~* _75,000 वर्ष।_
*(54) केवलज्ञान के पहले उपवास अर्थात् धारणा का नियम~* _अष्टमभक्त (3)_
*(55) केवलज्ञान तिथि~* _चैत्र कृष्ण दसमीं।_
*(56) केवलज्ञान समय~* _पूर्वाह्न काल।_
*(57) केवलज्ञान नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(58) मानस्तम्भ की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(59) सिद्धार्थ वृक्ष की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(60) कोट की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(61) चैत्यवृक्षों की ऊँचाई (धनुष मे)~* _240 धनुष।_
*(62) वनों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(63) स्तूपों की ऊँचाई (धनुष में )~* _240 धनुष।_
*(64) ध्वजाओं की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(65) वन वृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(66) प्रासादों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(67) तोरणद्वार की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(68) पर्वतों की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(69) वेदिका की ऊँचाई (धनुष में)~* _240 धनुष।_
*(70) पर्वतों की चौड़ाई (धनुष में)~* _160 धनुष।_
*(71) स्तूपों की चौड़ाई (धनुष में)~* _20 धनुष से कुछ अधिक।_
*(72) कोट की चौड़ाई (धनुष में)~* _60 धनुष।_
*(73) वेदिका की चौड़ाई (धनुष में)~* _60 धनुष।_
*(74) विशेष पद~* _मण्डलीक राजा।_
*(75) केवलज्ञान वन का नाम~* _नील वन।_
*(76) केवलज्ञान वृक्ष का नाम~* _चम्पक वृक्ष।_
*(77) समवशरण का विस्तार (योजन प्रमाण)~* _2.5 योजन।_
*(78) समवशरण का विस्तार (कोस प्रमाण)~* _10 कोस।_
*(79) समवशरण में तीर्थंकर भगवान का आसन~* _पद्मासन_
*(80) समवशरण में रहने वाले सामान्य केवलियों की संख्या~* _1,800 केवली_
*(81) समवशरण में रहने वाले पूर्व धारी मुनिराजों की संख्या~* _500 पूर्व धारी मुनिराज।_
*(82) समवशरण में रहने वाले शिक्षक मुनिराजों की संख्या~* _21,000 शिक्षक मुनिराज।_
*(83) समवशरण में रहने वाले विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _1,500 विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराज।_
*(84) समवशरण में रहने वाले विक्रिया ऋद्धिधारी योगियों की संख्या~* _2,200 विक्रिया ऋद्धिधारी योगी।_
*(85) समवशरण में रहने वाले अवधिज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _1,800 अवधिज्ञानी मुनिराज।_
*(86) समवशरण में रहने वाले वादी मुनिराजों की संख्या~*
_1,200 वादी मुनिराज।_
*(87) समवशरण में स्थित मुनि संघ की कुल संख्या~* _30,000 मुनि संघ।_
*(88) मुख्य गणधर का नाम~* _मल्ली।_
*(89) सब गणधर की संख्या~* _18_
*(90) गणिनी आर्यिकाओं की संख्या~* _50,000 आर्यिकाएं।_
*(91) मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम~*
_पुष्पदत्ता आर्यिका।_
*(92) मुख्य श्रोता का नाम~* _राजा अजितंजय।_
*(93) श्रावकों की संख्या~* _श्रावक 1 लाख।_
*श्राविकाओं की संख्या~* _श्राविकाएं 3 लाख।_
*(95) तीर्थंकरों का निर्वाण अंतर~* _6,00,000 वर्ष।_
*(96) आयु के अंत में योग निरोध या विहार कब बंद किया था~* _एक मास पहले।_
*(97) निर्वाण की तिथि~* _फाल्गुन कृष्ण द्वादशी।_
*(98) निर्वाण का समय (हरिवंश पुराण अध्याय 60 से)~* _अपराह्न।_
*(99) निर्वाण का नक्षत्र~* _श्रवण नक्षत्र।_
*(100) निर्वाण भूमि~* _सम्मेद शिखर जी।_
*(101) निर्वाण क्षेत्र का विशिष्ट स्थान (चूलिका)~* _निर्जरकूट।_
*(102) किस आसन से मोक्ष गए~* _कायोत्सर्गासन।_
*(103) सौधर्म स्वर्ग से लेकर ऊर्ध्व ग्रैवेयक तक जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _2,000 मुनिराज।_
*(104) अनुत्तर विमान में जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _8,800 मुनिराज।_
*(105) तीर्थंकर के साथ सिद्ध होने वाले मुनिराजों की संख्या~* _1,000 मुनिराज।_
*(106) अनुबद्ध केवलियों की संख्या प्रथम मत के अनुसार~* _12 अनुबद्ध केवली।_
*(107) अनुबद्ध केवलियों की संख्या द्वितीय मत के अनुसार~* _12 अनुबद्ध केवली।_
*(108) धर्म का विच्छेद काल~* _मुनिसुव्रतनाथ भगवान के समय धर्मतीर्थ का विच्छेद नहीं हुआ।_
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