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जैन युवा सेना? |
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में असहमत हूँ
जैन साधु को चमत्कार तंत्र मन्त्र निषेध हैं,
मात्र चातुर्मास में ही जैन समाज के नेता पकड़ में आते हैं,
स्थानीय कमजोर लोगो को चातुर्मास में भोजन ज्ञान सेवा का लाभ मिल जाता हैं, साथ इस समय ज़ब सभी समाज मोबाईल में रिश्ते रखते हैं, चातुर्मास में सम्पर्क बनते हैं,
गुरु अपनी तप निधि का प्रयोग कर श्रावको से धन का सदुपयोग करवाए.
किसी भव्य शादि की तरह भोजन सजावट हो.
निम्न या सामान्य वर्ग जो लिफाफा दें नही सकते, उन्हें कोई अपना भी विवाह ओर कार्क्रम में निमंत्रण नही देता.
लेकिन गुरु अपने भक्तो की अभिलाषाओ की पूर्ति करते हैं.
वृद्धवस्था आने के साथ साधु भी अपनी सिद्ध की क्षमताओं को समेटने के प्रयास में लग जाते हैं,
सच में अंत समय केसा होगा वे भी इसमें निश्चिंत नही होते।
संथारा आएगा या नही??
ओर युद्ध हो या ना हो, मृत्यु कब आ जाये, कौन जानता है।
मेरे दो मित्र दोनों ही बुलेट मोटरसाइकल के शौकीन दोनों ही कोई दवा नही खाते थे,
जिसमे पुरुसोतम ji आचार्य तो पहलावानी का अभ्यास भी नित करते थे,
सुबह कोदमदेसर जाकर दोपहर को फार्म हॉउस में पार्टी करते हैं, शाम को घर से अस्पताल गए, ओर सो वर्ष पुरे कर लिए।
मूलचंद ji डागा मोटरसाइकल से गिर कर सो वर्ष कर गए।
शुगर से कितने ही मित्र सो वर्ष कर गए।
कल समय ऐसा आएगा चाहकर भी हम शायद भव्य चातुर्मास नही कर पाएंगे।
ज्योतिषी वो जो जन्मसमय देखकर अंत समय की भविष्यवानी कर सके।
बाकि सब नोशिखिए हैं।
आज अच्छा हो रहा हैं तो अच्छा करो।
पिछले चातुर्मास में मेरे चाचा के लडके ने 9 की तपस्या की,
इतने लोगो को देखकर उसे भी अपनी क्षमता का बौद्ध हुआ।
भविष्य आचार्य भगवान देख सकते हैं, यून्हे ज्ञान देना या अपनी मनमानी करवाना उचित नही।।
संजय जैन
12-06-2026
14-35-00 pm |
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2026-06-12 14:36:59 |
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