| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 1465 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
|
|
शाबाश इंडिया ?? पत्रिका में मेरे लेख |
|
2026-02-13 06:11:53 |
|
| 1464 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
नमोस्तु भगवन् |
|
2026-02-13 06:11:11 |
|
| 1463 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
नमोस्तु गुरुदेव |
|
2026-02-13 06:10:45 |
|
| 1462 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
*आज ज्ञान कल्याणक दिवस की बधाई शुभकामनाएं??????आज फाल्गुन कृष्णपक्ष तिथि ११ एकादषी तारीख १३ फरवरी वार शुक्रवार को तीर्थंकर श्री १००८ ऋषभ देव जी का आज ज्ञान कल्याणक दिवस प्रयागराज में संगम पर हुआ आज के ही दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र में वट व्रक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई आप सब को तीर्थकर ऋषभ के ज्ञान कल्याणक की बहुत बहुत बधाई शुभकामनाएं?????????????* |
|
2026-02-13 06:10:01 |
|
| 1461 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
??????? *आज देवाधिदेव ग्यारहवे तीर्थंकर श्री १००८श्रेयांसनाथ भगवान का*??
*जन्म ओर तप कल्याणक महोत्सव दिनांक १३ फ़रवरी वार शुक्रवार २०२६ वीर निर्वाण सम्वत २५५२ फाल्गुन कृष्णा एकादशी*
- *सभी धर्मप्रेमियोंको हार्दिक बधाई और ढेरों मंगल शुभकामनाएं* ????????????
*श्री १००८श्रेयांसनाथ भगवान के जन्म ,तप कल्याणक की जय जय जय नमोस्तु*??? |
|
2026-02-13 06:09:43 |
|
| 1460 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
*आज शुक्रवार है १००८श्री पुष्पदंत भगवान की जय बोले*
*जय -जय विदेही आप जिनवर, पुष्पदंत जिनेश्वरम् |*
*श्री सुविधिनाथ जिनेश जय जय, भंवोदघि तारणम्*.
मैं करुॅ निर्मल भाव पूजन, ज्ञान सूर्यप्रकाशम्
मम आतमा में आ पधारो,हे मेरे परमेश्वरम्||
????????
*ॐ ह्रीं श्री पुष्पदंतजिनेन्द्राय् नमः*
????????????
*दिन की शुरुवात सोनगीर बाले बाबा पुष्पदंत भगवन् के दर्शन से,* ????????
पुष्पदंत भगवन् के पावन चरणों में त्रिवार वंदन
नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु। ?❤❤❤❤❤?साध्य की सिद्धि साधन से है, पर साधन साध्य नहीं...?
जो जीव साध्य को प्राप्त करने से पहले साधन को छोड़कर बैठ जाता है, वह बालकवत् है..!!
??????
*श्रमण संघ जयवंत हो, नमोस्तु शासन जयवंत हो, जयवंत हो वीतराग श्रमण संस्कृति.*
??????
*?आपका आज दिन शुक्रवार मंगलमय हो?*
*? जय जिनेन्द्र ?*
?❤❤❤❤❤?
*आप और आपके परिवार के यशस्वी वर्चस्वी स्वस्थ जीवन के लिए बहुत बहुत मंगल शुभकामनाएं*?????????? |
|
2026-02-13 06:09:29 |
|
| 1459 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
??Vandami Mataji ??? |
|
2026-02-13 06:07:53 |
|
| 1458 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
*।। कषायजय भावना।।*
*मूल लेखक - श्रमणरत्न श्री कनककीर्ति जी महाराज*
*रचयिता - परम पूज्य शब्द शिल्पी आचार्य श्री सुविधि सागर जी महाराज*
___&&&&&___&&&&&&&__
*कषाय आत्मा का वैरी है*
*_मान कषाय_*
_आचार्यों ने क्रोध को खारा जहर कहा है, जबकि मान को मीठा। अपने तुच्छ उपलब्धि पर दूसरों को अपने से हीन समझने का भाव मान कषाय कहलाता है। मान का अर्थ है सफलता की प्राप्ति पर मन में उभरता हुआ ज्वार, मैं-मैं का आग्रह दूसरों में विद्यमान रहने वाले गुणों की अवहेलना करने वाली वृत्ति, अपने आप को परिपूर्ण मानने की मूढ़ता, सच्चाई से आंख मूंदने की आदत अथवा मन की मृदुता का विनाश करने वाली शक्ति। इस कषाय के कारण मनुष्य के मन में दूसरों के प्रति तिरस्कार की अथवा दूसरों को नीचा दिखाने की भावना उत्पन्न होती है। मान से ईर्ष्या, द्वेष,कलह आदि बुराइयां धीरे-धीरे बढ़ती रहती है, जिसके फल से दुःख भी बढ़ता जाता है।_
_कर्त्तव्य और अकर्तव्य के ज्ञान को विवेक कहते है। अहंकार विवेक को ठीक उसी प्रकार ग्रस लेता है, जैसे अस्ताचल सूर्य को ग्रस लेता है। सूर्यास्त के उपरांत अंधकार के प्रसारित होने पर तमचर विचरण करते हैं तथा मनुष्य को समीचीन मार्ग नहीं सूझता। उसी प्रकार जब मनुष्य के विवेक को अहंकार ग्रसित कर लेता है,तब मनुष्य में मोहान्धकार बढ़ जाता है। मनुष्य की मति मारी जाती है। यही कारण है कि अहंकार मनुष्य को कुमार्गगामी बनाता है। अहंकार के उदय में मनुष्य ऐसे अनिर्वचनीय पाप का बन्ध करता है, जिसके उदय के अधीन होकर चिरकाल तक नीच गति में होने वाले अपमान रुपी ज्वर के वेग को भोगना पड़ता है।_
_जैसे विषवल्लिका अपने समीपस्थ पौधों का जीवन नष्ट कर देती है,उसी प्रकार मान जीवन की समृद्धि, सौन्दर्य को देखने वाली दृष्टि, प्रेम के विस्तार की ललक, कुछ नवीन सीखने की पात्रता और सर्व जीव मैत्री की भावना का गला घोंट देता है।_
_मान का वमन करने के लिए साधक को प्रतिसमय अपने मन में विचार करना चाहिए -_
_१- जो वैभव भौतिक सुख का कारण है, वह विनश्वर है।_
_२- उच्च कुल, प्रतिष्ठा, बल और धन आदि की प्राप्ति का कारण पूर्वकृत शुभकर्म है। कर्मोदय सदैव एक-सा नहीं रहता।_
_३- मेरा ज्ञान केवलज्ञान रुपी विशाल मेरु पर्वत के समक्ष एक तिल के बराबर भी नहीं है।_
_४- यदि मैं अनुकूल परिस्थितियों में मान करूंगा तो प्रतिकूल परिस्थिति आने पर मुझे दुःख का अनुभव अधिक होगा।_
_धन, बल, रूप, ज्ञानादिक का मद नष्ट करने का सरलतम उपाय यह है कि मनुष्य अपने से अधिक धनी अथवा ज्ञानी को देखता रहे। सज्जनों की संगति अथवा पूज्य पुरुषों का विनय भी मान कषाय का हरण करता है।_
??????? |
|
2026-02-13 06:01:44 |
|
| 1457 |
40449670 |
SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE |
|
|
?️ *श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर विल्सन गार्डन* ?
साधर्मी महानुभावों....सादर जयजिनेद्र!
1️⃣3️⃣*फरवरी* 2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
✍️ *आज ग्यारहवें तीर्थंकर देवादिदेव श्री १००८ श्रेयांसनाथ भगवान का जप-तप कल्याणक पर्व है*
*ॐॐॐॐॐॐअर्घॐॐॐॐॐॐ*
जल मलय तन्दुल सुमन चरु दीप धूप फलावती।
करि अर्घ चरचों चरन जुग प्रभु मोहि तार उतावली॥
श्रेयांस नाथ जिनन्द त्रिभुवन चन्द आनन्द कन्द हैं।
दुख दंद फंद निकंद पूरन चन्द ज्योति अमन्द हैं।
*दिन_शुक्रवार*
*मास_फाल्गुन_कृष्ण पक्ष (बदी)*
*तिथि_ग्यारस*
*मोक्ष स्थान_श्री कैलाश पर्वत*
*वीर निर्वाण संवत् २५५२*
*विक्रम संवत् २०८२*
*चिन्ह:-गैंडा ?*
️?? *श्री खण्डेलवाल दिगंबर जैन समाज, बैंगलोर* ?? |
|
2026-02-13 06:01:24 |
|
| 1456 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
<a href="https://youtu.be/PXpYZvaw84U?si=BJDO8JMaXWLJ34Xl" target="_blank">https://youtu.be/PXpYZvaw84U?si=BJDO8JMaXWLJ34Xl</a> |
|
2026-02-13 05:57:27 |
|