| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 2106 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
|
|
2026-02-13 13:28:47 |
|
| 2105 |
40449849 |
सकल दिगंबर जैन समाज समिति जिल्हा छत्रपति संभाजिनगर |
|
|
|
|
2026-02-13 13:28:07 |
|
| 2104 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
|
|
|
|
2026-02-13 13:27:29 |
|
| 2103 |
40449671 |
1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज |
|
|
? जय जिनेन्द्र ?
सभी श्रावक-श्राविकाओं को सादर जय जिनेन्द्र ?
अत्यंत हर्ष, श्रद्धा एवं आत्मिक चैतन्य के साथ सूचित किया जाता है कि
दिनांक – *14 फरवरी 2026*, शनिवार
*फाल्गुन कृष्ण द्वादशी* के पावन अवसर पर
हम सभी चिंचवड़ में विराजमान
*चमत्कारी देवाधिदेव, मूलनायक श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान* के
✨ मोक्ष कल्याणक महोत्सव ✨ को भक्ति, उल्लास एवं धर्ममय भावनाओं के साथ मनाने जा रहे हैं।
इस दिव्य अवसर पर हमें प्राप्त होगा
*? पावन मार्गदर्शन एवं मंगल प्रेरणा ?*
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य *मुनिश्री 108 कुंथुसागर जी महाराज* का पावन सान्निध्य।
? कार्यक्रम विवरण ?
⏰ प्रातः 7:00 बजे – भगवान का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा
⏰ प्रातः 8:00 बजे – भगवान का निर्वाण कल्याणक लाडू अर्पण
⏰ प्रातः 8:30 बजे – मुनिश्री 108 कुंथुसागर जी के मंगल प्रवचन
⏰ प्रातः 9:30 बजे – प्रभावना वितरण
⏰ प्रातः 9:45 बजे – आहारचर्या
*? आइए, इस पुण्य पर्व पर अपने अंतर्मन के धार्मिक चैतन्य को जागृत करते हुए अधिकाधिक संख्या में उपस्थित हों, धर्म लाभ प्राप्त करें एवं* जीवन को धन्य बनाएं। ?
निवेदक:
? अरिहंत दिगंबर जैन ट्रस्ट, चिंचवड़ – पुणे ?
?️ जय जिनेन्द्र • धर्म ही जीवन का सच्चा प्रकाश ?️ |
|
2026-02-13 13:25:34 |
|
| 2102 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
?️ *जिन देशना | आत्मबोध* ?
? *दुर्लभ मानव-जीवन की सार्थकता का उद्घोष* ?
यह *जिन देशना आत्मबोध का सशक्त संदेश* है। जैन दर्शन के अनुसार *मनुष्य भव अत्यंत दुर्लभ* ? है। अनंत काल से जीव जन्म–मरण ? के चक्र में भटकता आया है, किंतु *सम्यक् दर्शन ?️, सम्यक् ज्ञान ? और सम्यक् चारित्र* ?♂️—इन तीनों रत्नों की प्राप्ति का अवसर केवल इसी *मानव जीवन में सुलभ* होता है। इसलिए यह कहना कि
*“अहो! यह मेरा जीवन धन्य है*” ✨—पूर्णतः जैन आगमों की भावना के अनुरूप है।
? जैन सिद्धांत का मूल सत्य
जैन दर्शन स्पष्ट करता है कि *जीव स्वयं अपने भाग्य का निर्माता* है ?।
न कोई ईश्वर कृपा से मोक्ष देता है ?♂️,
न कोई बाहरी शक्ति बंधन से मुक्त करती है।
जब कहा जाता है—
“आज सब ओर से अवसर आ चुका है, प्रकृति भी मेरे अभिनंदन में खड़ी* है” ??—
तो इसका तात्पर्य यह है कि देश ?, *काल ⏳, भाव ? और पुरुषार्थ ?—चारों अनुकूल* हो चुके हैं।
जैन दर्शन में इसे *उपादान की परिपक्वता* ? कहा गया है।
⚠️ ऐसा अवसर बार-बार नहीं आता।
⏰ प्रमाद से सावधान!
यहाँ यह कहना कि *“अवसर चूकने जैसा नहीं है”* अत्यंत सारगर्भित है, क्योंकि जिनवाणी ? बार-बार चेताती है—
? *प्रमाद ही आत्मा* का सबसे बड़ा शत्रु है।
प्रमाद = विलंब ?️ + असावधानी ?
जो जीव अवसर पाकर भी पुरुषार्थ नहीं करता, वह स्वयं अपने कल्याण का हनन करता है ❌।
? *बुद्धिपूर्वक पुरुषार्थ*
बुद्धिपूर्वक पुरुषार्थ ही जैन दर्शन का मूल मंत्र है ?♂️।
पुरुषार्थ केवल बाह्य क्रियाएँ नहीं, बल्कि *आत्मा को कर्मों से मुक्त करने का सजग प्रयास* ✨ है।
जब कहा गया—
*“अपने उपयोग में सूक्ष्मता को वृद्धि प्रदान कर”* ?—
तो यह उपयोग की शुद्धता की ओर संकेत करता है।
जैन दर्शन में उपयोग *(चेतना का प्रवाह) जितना सूक्ष्म और सजग* होता है,
? उतनी ही तेजी से कर्मों का क्षय होता है ?।
? *जैन साधना के तीन स्तंभ*
? संयम ?
*इंद्रियों और मन पर नियंत्रण,* जिससे नए कर्मों का बंध रुकता है — संवर ?
? वैराग्य ?
*संसार के प्रति आसक्ति* का क्षय, जिससे पुराने कर्म झरते हैं — निर्जरा ?
? समाधि ?️
*आत्मा में स्थिरता, जहाँ राग-द्वेष का पूर्ण अभाव* होता है
यह कहना कि—
*“आज हमें संयम, वैराग्य और समाधि धारण करने की लायकात प्राप्त है”* ?
यह दर्शाता है कि आत्मा अब परिपक्व अवस्था में प्रवेश कर चुकी है।
जैन दर्शन में इसे भाव-लिंग की सिद्धि ? कहा गया है,
जो मोक्ष-मार्ग का प्रवेश द्वार है ?️।
? *संदेश*
“समय न गंवाकर पुरुषार्थी बन”—
यह जैन सिद्धांत का सबसे करुण ❤️ और सबसे कठोर ⚔️ संदेश है।
समय का हर एक क्षण
? *या तो कर्म बंधन का कारण बनता है* ⛓️
? *या मोक्ष का द्वार खोलता* है ?️
जो *जीव जाग्रत होकर पुरुषार्थ* करता है ?,
वही परमानंद को प्राप्त करता है—
अर्थात *आत्मा का स्वभावगत सुख* ?,
जो इंद्रियजन्य नहीं, बल्कि
*अनंत ज्ञान ?, अनंत दर्शन ?️, अनंत शक्ति ⚡ और अनंत सुख* ?
से युक्त सिद्ध अवस्था का प्रतीक है।
✍️ *राजेश जैन, मैनपुरी*
? इस प्रकार यह विषय केवल प्रेरणात्मक नहीं,
बल्कि जैन दर्शन के *संवर–निर्जरा–मोक्ष सिद्धांत* का
एक *सजीव जिन देशना* है,
जो जीव को झकझोर कर कहता है—
? *“अब नहीं जागे, तो फिर कब?”* ?✨ |
|
2026-02-13 13:23:17 |
|
| 2101 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
आज शुक्रवार पदमावती देवी का वार ??❤️ |
|
2026-02-13 13:22:43 |
|
| 2100 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
|
|
श्री १००८ आदिनाथ भगवान का केवलज्ञान महोत्सव दिन पर पंचामृत अभिषेक पूजन पुष्प आराधना आणि शुक्रवार पदमावती देवी के जाप अनुष्ठान गुलाब पुष्प के जाप दिले ??❤️?? |
|
2026-02-13 13:21:05 |
|
| 2099 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
|
|
गुनैर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कब है |
|
2026-02-13 13:20:15 |
|
| 2098 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
|
|
_सामायिक पूर्व *भक्ति पाठ*, मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र, 13/2/26_
???
_जिन शासन चक्रवर्ती, परम वीतरागी, वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज* (ससंघ) का वर्तमान प्रवास स्थान..._
_? सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि जी, जिला - बैतूल (म.प्र.)_
<a href="https://maps.app.goo.gl/9rVzjx9dn8wHipUR7" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/9rVzjx9dn8wHipUR7</a>
? *दैनिक अपडेट के लिए जुड़ें*
<a href="https://chat.whatsapp.com/GlPQM3FI6Pr6k0nP0T6wd8?mode=gi_c" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/GlPQM3FI6Pr6k0nP0T6wd8?mode=gi_c</a> |
|
2026-02-13 13:19:18 |
|
| 2097 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
|
|
|
|
2026-02-13 13:19:01 |
|