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2086 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी आवश्यक सूचना ? यह बिटिया जिसका नाम कनिका शर्मा है पिता का नाम राजवीर शर्मा जी है कल 11/02/2026, बुधवार से संत नगर बुराड़ी से दोपहर 12:30 बजे लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए गई थी और वापस घर नहीं लौटी है कृपया मैसेज को तुरंत ज्यादा से ज्यादा सर्कुलेट करें ताकि यह बच्ची अपने माता-पिता को सब कुशल मिल सके तुरंत संपर्क करें श्री राजवीर शर्मा जी (पिता) 9899560410 हेड कांस्टेबल जलदीप जी 9910547364 ?? 2026-02-13 13:11:02
2085 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है *??आज की कहानी??* *??देवताओं की अंतिम परीक्षा??* प्राचीन काल में देवलोक में एक आश्चर्यजनक घटना घटी। देवताओं के स्वर्ग में रहते हुए भी उनकी शक्तियाँ धीरे-धीरे कम होने लगी थीं। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है—न शक्ति, न तेज, न आनंद। देवेंद्र इन्द्र ने तुरंत देवताओं की सभा बुलाई। सभा में सभी देवता चिंतित थे—अग्नि, वायु, वरुण, सूर्य, सभी के चेहरे पर परेशानी झलक रही थी। तभी ब्रह्मा ने कहा, “शक्ति बाहर से नहीं, भीतर से आती है। हो सकता है तुम सबने अपने कर्तव्य को हल्का सम... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179295140?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179295140?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-13 13:10:13
2084 40449759 ?ಸ್ವಾಧ್ಯಾಯ स्वाध्याय?swadhyay <a href="https://youtube.com/shorts/-6lI4RVYopI?si=TNca4QHkysx3F8T8" target="_blank">https://youtube.com/shorts/-6lI4RVYopI?si=TNca4QHkysx3F8T8</a> 2026-02-13 13:08:56
2083 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? ????परम पूज्य उपाध्याय श्री 108 विनिश्चल सागर जी महाराज के उपाध्याय पदारोहण दिवस पर कोटि कोटि नमन?????? ??नमोस्तु गुरुदेव ?? 2026-02-13 13:08:05
2082 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? ????परम पूज्य उपाध्याय श्री 108 विनिश्चल सागर जी महाराज के उपाध्याय पदारोहण दिवस पर कोटि कोटि नमन?????? ??नमोस्तु गुरुदेव ?? 2026-02-13 13:07:36
2081 40449749 जिनोदय?JINODAYA *पद नहीं, आचरण देखिए—यही सच्चा मापदंड है* ऊँची कुर्सी पर बैठा इंसान भी गिरा हुआ हो सकता है—यह वाक्य केवल शब्द नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कठोर सच्चाई है। आज हमने विश्वास करने की आदत बना ली है पद देखकर, ओहदे देखकर, वस्त्र देखकर। किसी ने साधु का वेश धारण कर लिया, किसी ने समाज की किसी संस्था में ऊँचा पद पा लिया, तो हम बिना सोचे-समझे उसे श्रद्धा, सम्मान और भरोसा सौंप देते हैं। परंतु इतिहास और वर्तमान—दोनों गवाह हैं कि पद ऊँचा होने से आचरण अपने आप ऊँचा नहीं हो जाता। सच्चाई यह है कि कुर्सी जितनी ऊँची होती है, गिरावट उतनी ही गहरी हो सकती है। साधु हो या समाजसेवी, ट्रस्टी हो या अध्यक्ष—यदि आचरण में सत्य, संयम, करुणा और जिम्मेदारी नहीं है, तो पद केवल दिखावा बनकर रह जाता है। जैन दर्शन ने कभी भी व्यक्ति को उसके पद से नहीं, उसके आचरण से मापा है। पंच महाव्रत केवल ग्रंथों में पढ़ने या मंच से बोलने के लिए नहीं हैं, वे जीवन में उतरने के लिए हैं। सत्य महाव्रत का अर्थ है बात और व्यवहार में एकरूपता; जो कहें वही करें, और जो करें उसकी जिम्मेदारी लें। यदि कोई साधु या पदाधिकारी आज कुछ कहे और कल उससे पलट जाए, यदि प्रश्न पूछने वालों को धमकियाँ दी जाएँ, कानूनी नोटिस भेजे जाएँ, दबाव बनाया जाए—तो समझ लेना चाहिए कि वहाँ पद तो है, पर आचरण नहीं। समाज की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह चमक से प्रभावित हो जाता है और चरित्र को देखना भूल जाता है। हमें यह समझना होगा कि संस्था का नाम बड़ा होने से उसमें बैठा व्यक्ति स्वतः ही महान नहीं हो जाता। महान वही है जो सत्ता, पद और प्रभाव के बावजूद विनम्र रहे, पारदर्शी रहे, और किसी एक परिवार, व्यक्ति या समाज के साथ अन्याय न होने दे। यदि किसी के निर्णयों से परिवार उजड़ते हैं, विश्वास टूटते हैं, और धर्म की आड़ में स्वार्थ पनपता है, तो वहाँ श्रद्धा नहीं, सतर्कता आवश्यक है। इसलिए आँख बंद कर विश्वास करना बंद कीजिए। प्रश्न पूछिए, आचरण परखिए, और याद रखिए—धर्म पद से नहीं, चरित्र से जीवित रहता है। ऊँची कुर्सी पर बैठा हर व्यक्ति आदर्श हो, यह जरूरी नहीं; पर समाज का दायित्व है कि वह आदर्श को ही आदर दे। यही चेतना हमें पतन से बचा सकती है और यही सच्ची भक्ति, सच्ची श्रद्धा और सच्चा समाज निर्माण है। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-02-13 13:07:00
2080 40649233 Mumukshu mandal 1 *आत्मा का हित उसके स्वभाव के बाहर है ही नहीं।* 2 *ईच्छा अर्थात दर दर की ठोकरें खिलाने वाला परिणाम।* 3 *अपने को आत्मा मानने वाले परिणाम को ही परिणाम का सुधरना कहते हैं।* 4 *जीवन को मुसीबत में न डालना हो तो मोह की बातों में मत आओ।* 5 *उदय अच्छों अच्छों को दिन में तारे दिखा देता है अतः इतराना नहीं चाहिए।* 6 *बात बात पर बुरा मानने वाले अपना बहुत बुरा करते हैं।* 7 *जिनको धर्म सुहाता है उनको संसार नहीं भाता है।* 8 *सही समझ में आना ही ज्ञान होना है।* 9 *नकारात्मक सोच व्यक्ति को अधीर करती है।* 10 *दुनियां की नहीं मात्र जिनवाणी की सुनो।*       (श्रेणिक जैन जबलपुर 13-2-26) 2026-02-13 13:06:46
2079 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-13 13:04:24
2078 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-13 13:04:23
2077 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *दिगम्बर जैन महासमिती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक जी - आशाजी बड़जात्या* के पुण्यार्जन से 15 बस णमोकार धाम पंचकल्याणक में प्रथम महामस्तकाभिषेक व तीर्थो की यात्रा हेतू *सामाजिक संसद के अध्यक्ष विनय जी बाकलीवाल व महासमिती के कार्याध्यक्ष सुरेन्द्रजी जैन बाकलीवाल* एवं समाज श्रेष्ठियों द्वारा पंचरंगी ध्वज दिखाकर रवाना की जाएगी । सामाजिक संसद व महासमिती के प्रतिनिधियों से उपस्थित रहने का निवेदन है? 13 फरवरी शाम 5:30 बजे नेमिनगर जैन कालोनी जिनालय 2026-02-13 13:04:20