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6776 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ असली शांति मनुष्य के अंदरः योग सागर महाराज <a href="https://jansamachar24.com/?p=82450" target="_blank">https://jansamachar24.com/?p=82450</a> 2026-02-17 06:47:34
6775 45644158 +120363403286452801 *✊ जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) प्रकोष्ठ, विश्व जैन संगठन ?* जैन समाज के सभी जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) साधर्मी बंधु जन को सादर जय जिनेन्द्र ?? *सर्व विदित है कि,* जैन समाज एक प्रबुद्ध वर्ग है और उसमें जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सदैव अपने प्रोफेशन के माध्यम से समाज के लिए भी कार्य करते रहते हैं। यह सबके मानस में है कि आज जैन समाज अनेकों कानूनी विसंगतियों का सामना कर रहा अतः इस प्रकोष्ठ की आवश्यकता महसूस हुई। *मुख्य तो सभी जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) को एक मँच पर लाना है और अन्य,* *▫️ इस फील्ड में करियर बनाने के इच्छुक जैन युवाओं को करियर काउंसलिंग* *▫️ समाज के मुद्दों जैसे तीर्थ रक्षा आदि में कानूनी सलाह लेना* *▫️ समाज संबंधी विषयों पर और न्यायिक प्रक्रिया में आपसी सहयोग* *▫️ विवादित मामलों में सलाह* *▫️धर्म, तीर्थ, समाज की रक्षा हेतु कानूनी जागरूकता* ▪️अतः आपसे निवेदन है कि, यदि *आप खुद जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) हैं* तो नीचे दी गई जानकारी भरकर संलग्न नंबर पर भेज दें अथवा *आपके परिचय में कोई जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) बंधु हों* तो उन तक यह पोस्ट भेज दीजिए। *ताकि उनको जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) प्रकोष्ठ विश्व जैन संगठन वॉट्सएप ग्रुप* से जोड़ा जा सके आपकी अति कृपा होगी ?। *?नाम -* *?प ता -* *? क्षेत्र (किस प्रकार के मामलों में विशेषज्ञता है)* *? मोबाइल नंबर (व्हाट्सएप) -* ▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️ *?ऊपर दी गई जानकारी भरकर इस नंबर पर भेज दीजिए ?* ? *वॉट्सएप नंबर - 7496838795* Follow the ? जैन इकोसिस्टम (Jain Ecosystem) ? channel on WhatsApp: <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VbBUKYtBVJlC8SdeP60f" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VbBUKYtBVJlC8SdeP60f</a> 2026-02-17 06:47:07
6774 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-17 06:46:47
6773 42709912 विद्या के कुन्थु (Vidya ke Kunthu) <a href="https://youtu.be/usldiqozhWc?si=NpJOSrtQz2MAZ02i" target="_blank">https://youtu.be/usldiqozhWc?si=NpJOSrtQz2MAZ02i</a> 2026-02-17 06:46:40
6772 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ?????????? ?? कल्याणक ?? ?भाग्यशाली आज अमावस है ✨ ? आज श्री वासुपूज्य स्वामी भगवान का ?दीक्षा कल्याणक? दिन है? ?आज के दर्शन ?? ?श्री वासुपूज्य भगवान? ?श्री चंपानगरी तीर्थ? ?? चंपानगरी, भागलपुर, बिहार ?भागलपुर स्टेशन के निकट गंगा नदी किनारे चंपा नाला के पास जिसे चम्पानगर (चम्पापुरी ) कहते है। ?श्री वासुपूज्य भगवान के पांचो कल्याणक इस पावन भूमि में हुए ? ? भगवान श्री आदिनाथ, श्री पार्श्वनाथ व श्री महावीर भगवान का भी यहा पदापर्ण हुआ था| पश्चात प्रभु महावीर के पट्टधर श्री गौतम स्वामी,श्री सुधार्मस्वामी व श्री जम्बूस्वामी ने भी यहा पदापर्ण किया था। गौतम स्वामी के शिष्य साल और महाकाल को इसी नगरी मे केवलज्ञान हुआ था? ?श्री महावीर भगवान का यहां समवसरण भी रचा गया था। भगवान महावीर के परम भक्त श्रावक कामदेव यही के थे। श्री सुदर्शन सेठ, महाराजा श्रीपाल, सती श्री मेनासुदंरी , सती सुभद्रा चंदनबाला,शेठ कुमारनंदी स्वर्णकार (जिन्होंने जीवित महावीर स्वामी की प्रतिमा भरवायी थी) अभयासती भी यहीं पर हुई? ✨ आज का जाप मंत्र ✨ ?ॐ ह्रीं श्रीं वासुपूज्य भगवान नाथाय नमः? ?प्रातः कालीन वंदना? ?अरिहंते, सिद्धे, साहु, शरणं पवजामी केवली पन्नतम धम्मम शरणं पवजामी? ?लोक में विराजित समस्त अरिहंत परमेष्ठीयों को वंदन ? ?लोक के अग्र भाग में सिध्द शिला पर विराजित समस्त सिध्द परमेष्ठीयों को वंदन ? ?ढाई द्वीप में विराजित समस्त आचार्य उपाध्याय साधु परमेष्ठीयों को नमन ? Facebook: fb.com/RajBagrechaa fb.com/JainRajeshBagrecha fb.com/RajeshBagrechaGharMandir Instagram: instagram.com/RajeshBagrecha.Jain.GharMandir Twitter: twitter.com/JainGoldnMandir ✊ "समूह रात्रिभोजन मुक्त जैन शासन" ? सामूहिक रात्रि भोजन त्याग हर जैनी को करना चाहिये ? ?सभी संयमी जीवो का रत्नत्रय सदाकाल उत्तम रहे सभी का दिन मंगलमय हो ? ?????????? 2026-02-17 06:46:18
6771 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं.2533)* **************************** *श्रीतत्त्वार्थसूत्र और मोक्षशास्त्र* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (*179*) *श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण करने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं - *॥ व्दितीय अध्याय ॥* *एकं व्दौ त्रीन्वाSनाहारक ॥* (अध्याय 2 / सूत्र 30) *एक द्वौ त्रीन् वा अनाहारक: ॥ 2/30॥* *अर्थ -* ~~~~~~ =&gt; एक = एक, =&gt; द्वौ = दो, =&gt; त्रीन् = तीन, =&gt; न आहारक = अनाहारक। यानी, *विग्रह गति में जीव / आत्मा एक समय, दो समय या तीन समय तक अनाहारक रहती है।* *=&gt; आहारक किसे कहते हैं?* ○ औदारिक, वैक्रियक, आहारक शरीर और छे पर्याप्तीके ( याने आहार, शरीर, इंद्रिय, श्वासोच्छ्वास, भाषा और मन ) सही पुद् गल परमाणू / पार्टिकल्स को ग्रहण करनेको *आहारक* कहते है । *=&gt; अनाहारक किसे कहते हैं?* ○ (इसके उलट) पुद् गल परमाणु / पार्टिकल्स को न ग्रहण करना / न लेना अनाहारक कहलाता है। *=&gt; जीव / आत्मा कब आहारक और अनाहारक हो सकती है?* ○ *1) अनाहारक -* आत्मा क्रमसे एक, दो या तीन चक्कर/मोड़ों की विग्रह गति में क्रम से एक, दो या तीन समय तक अनाहारक रह सकती है। ○ *2) आहारक -* हालांकि, चौथे समय में, यह ( नियम से ) आहारक हो जाती है। *(क्रमशः) ( ता. 17/02/2026)* *--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9153/आ.3188) 2026-02-17 06:45:44
6770 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ 2026-02-17 06:43:38
6769 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ 2026-02-17 06:43:37
6768 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ 2026-02-17 06:43:35
6767 40449695 www yug marble stone work.Com 2026-02-17 06:38:52