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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 71858 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-04-09 11:52:58 |
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| 71857 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-04-09 11:52:57 |
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| 71856 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
|
|
मेरे सभी नियम है जी
????
आप भी अपनी-अपनी
सुविधानुसार
1,2,34,5,6,7,8,9,10,11,
या सारे नियम ले सकते है जी
?????? |
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2026-04-09 11:51:20 |
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| 71855 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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मेरे सभी नियम है जी
????
आप भी अपनी-अपनी
सुविधानुसार
1,2,34,5,6,7,8,9,10,11,
या सारे नियम ले सकते है जी
?????? |
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2026-04-09 11:51:19 |
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| 71853 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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जय जिनेन्द्र जी सभी को
आज णमोकार महामंत्र का चालिसा पढने का नियम है जी
*?9/4/2026*
*एक छोटा सा नियम ही मोक्षमार्ग का कारण बनेगा हम सभी के लिए ??*
*??णमोकार चालीसा??*
सब सिद्धो को नमन कर,सरस्वती को ध्याय,
चालीसा नवकार का, लिखूं त्रियोग लगाय ||
महामंत्र नवकार हमारा,
जन जन को प्राणों से प्यारा १
मंगलमय यह प्रथम कहा हैं,
मंत्र अनधि निधन महा हैं २
षटखंडागम में गुरुवर ने,
मंगलाचरण लिखा प्राकृत में ३
यही से ही लिपिबद्ध हुआ हैं,
भविजन ने डर धार लिया हैं ४
पांचो पद के पैतीस अक्षर,
अट्ठावन मात्राए हैं सुखकर ५
मंत्र चौरासी लाख कहाए,
इससे ही निर्मित बतलाए ६
अरिहंतो को नमन किया हैं,
मिथ्यातम का वमन किया हैं ७
सब सिद्धो को वन्दन करके,
झुक जाते भावों में भरकर ८
आचार्यों की पद भक्ति से,
जीव उबरते निज शक्ति से ९
उपाध्याय गुरुओं का वन्दन,
मोह तिमिर का करता खंडन १०
सर्व साधुओ को मन में लाना,
अतिशयकारी पुण्य बढ़ाना ११
मोक्षमहल की नीव बनाता,
अतः मूल मंत्र कहलाता १२
स्वर्णाक्षर में जो लिखवाता,
सम्पति से टूटे नहीं नाता १३
णमोकार की अद्भुत महिमा,
भक्त बने भगवन ये गरिमा १४
जिसने इसको मन से ध्याया,
मनचाहा फल उसने पाया १५
अहंकार जब मन का मिटता,
भव्य जीव तब इसको जपता १६
मन से राग द्वेष मिट जाता,
समता बाव ह्रदय में आता १७
अंजन चोर ने इसको ध्याया,
बने निरंजन निज पद पाया १८
पार्श्वनाथ ने इसको सुनाया,
नाग-नागिनी सुर पद पाया १९
चारुदत्त ने अज की दीना,
बकरा भी सुर बना नवीना २०
सूली पर लटके कैदी को,
दिया सेठ ने आत्मशुद्धि को २१
हुई शांति पीड़ा हरने से,
देव बना इसको पढ़ने से २२
पदमरुची ने बैल को दीना,
उसने भी उत्तम पद लीना २३
श्वान ने जीवन्धर से पाया,
मरकर वह भी देव कहाया २४
प्रातः प्रतिदिन जो पढ़ते हैं,
अपने दुःख संकट हराते हैं २५
जो नवकार की भक्ति करते,
देव भी उनकी सेवा करते २६
जिस जिसने भी इसे जपा हैं,
वही स्वर्ण सम खूब तपा हैं२७
तप-तप कर कुंदन बन जाता,
अंत में मोक्ष परम पद पाता २८
जो भी कंठहार कर लेता,
उसको भव-भव में सुख देता २९
जिसने इसको शीश पर धारा,
उसने ही रिपु कर्म निवारा ३०
विश्वशान्ति का मूल मंत्र हैं,
भेदज्ञान का महामंत्र हैं ३१
जिसने इसका पाठ कराया,
वचन सिद्धि को उसने पाया ३२
खाते-पीते-सोते जपना,
चलते-फिरते संकट हरना ३३
क्रोध अग्नि का बल घट जावे,
मंत्र नीर शीतलता लावे ३४
चालीसा जो पढ़े पढावे,
उसका बेडा पार हो जावे ३५
क्षुल्लकमणि शीतलसागर ने,
प्रेरित किया लिखा ‘अरुण’ ने ३६
तीन योग से शीश नवाऊ,
तीन रतन उत्तम पा जाऊं ३७
पर पदार्थ से प्रीत हटाऊं,
शुद्धातम के ही गुण गाऊ ३८
हे प्रभु! बस यही वर चाहूँ,
अंत समय नवकार ही ध्याऊ ३९
एक-एक सीढ़ी चढ़ जाऊं,
अनुक्रम से निजपद पा जाऊं ४०
पंच परम परमेष्ठी हैं, जग में विख्यात |
नमन करे जो भाव से,शिव सुख पा हर्षात || |
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2026-04-09 11:51:17 |
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| 71854 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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जय जिनेन्द्र जी सभी को
आज णमोकार महामंत्र का चालिसा पढने का नियम है जी
*?9/4/2026*
*एक छोटा सा नियम ही मोक्षमार्ग का कारण बनेगा हम सभी के लिए ??*
*??णमोकार चालीसा??*
सब सिद्धो को नमन कर,सरस्वती को ध्याय,
चालीसा नवकार का, लिखूं त्रियोग लगाय ||
महामंत्र नवकार हमारा,
जन जन को प्राणों से प्यारा १
मंगलमय यह प्रथम कहा हैं,
मंत्र अनधि निधन महा हैं २
षटखंडागम में गुरुवर ने,
मंगलाचरण लिखा प्राकृत में ३
यही से ही लिपिबद्ध हुआ हैं,
भविजन ने डर धार लिया हैं ४
पांचो पद के पैतीस अक्षर,
अट्ठावन मात्राए हैं सुखकर ५
मंत्र चौरासी लाख कहाए,
इससे ही निर्मित बतलाए ६
अरिहंतो को नमन किया हैं,
मिथ्यातम का वमन किया हैं ७
सब सिद्धो को वन्दन करके,
झुक जाते भावों में भरकर ८
आचार्यों की पद भक्ति से,
जीव उबरते निज शक्ति से ९
उपाध्याय गुरुओं का वन्दन,
मोह तिमिर का करता खंडन १०
सर्व साधुओ को मन में लाना,
अतिशयकारी पुण्य बढ़ाना ११
मोक्षमहल की नीव बनाता,
अतः मूल मंत्र कहलाता १२
स्वर्णाक्षर में जो लिखवाता,
सम्पति से टूटे नहीं नाता १३
णमोकार की अद्भुत महिमा,
भक्त बने भगवन ये गरिमा १४
जिसने इसको मन से ध्याया,
मनचाहा फल उसने पाया १५
अहंकार जब मन का मिटता,
भव्य जीव तब इसको जपता १६
मन से राग द्वेष मिट जाता,
समता बाव ह्रदय में आता १७
अंजन चोर ने इसको ध्याया,
बने निरंजन निज पद पाया १८
पार्श्वनाथ ने इसको सुनाया,
नाग-नागिनी सुर पद पाया १९
चारुदत्त ने अज की दीना,
बकरा भी सुर बना नवीना २०
सूली पर लटके कैदी को,
दिया सेठ ने आत्मशुद्धि को २१
हुई शांति पीड़ा हरने से,
देव बना इसको पढ़ने से २२
पदमरुची ने बैल को दीना,
उसने भी उत्तम पद लीना २३
श्वान ने जीवन्धर से पाया,
मरकर वह भी देव कहाया २४
प्रातः प्रतिदिन जो पढ़ते हैं,
अपने दुःख संकट हराते हैं २५
जो नवकार की भक्ति करते,
देव भी उनकी सेवा करते २६
जिस जिसने भी इसे जपा हैं,
वही स्वर्ण सम खूब तपा हैं२७
तप-तप कर कुंदन बन जाता,
अंत में मोक्ष परम पद पाता २८
जो भी कंठहार कर लेता,
उसको भव-भव में सुख देता २९
जिसने इसको शीश पर धारा,
उसने ही रिपु कर्म निवारा ३०
विश्वशान्ति का मूल मंत्र हैं,
भेदज्ञान का महामंत्र हैं ३१
जिसने इसका पाठ कराया,
वचन सिद्धि को उसने पाया ३२
खाते-पीते-सोते जपना,
चलते-फिरते संकट हरना ३३
क्रोध अग्नि का बल घट जावे,
मंत्र नीर शीतलता लावे ३४
चालीसा जो पढ़े पढावे,
उसका बेडा पार हो जावे ३५
क्षुल्लकमणि शीतलसागर ने,
प्रेरित किया लिखा ‘अरुण’ ने ३६
तीन योग से शीश नवाऊ,
तीन रतन उत्तम पा जाऊं ३७
पर पदार्थ से प्रीत हटाऊं,
शुद्धातम के ही गुण गाऊ ३८
हे प्रभु! बस यही वर चाहूँ,
अंत समय नवकार ही ध्याऊ ३९
एक-एक सीढ़ी चढ़ जाऊं,
अनुक्रम से निजपद पा जाऊं ४०
पंच परम परमेष्ठी हैं, जग में विख्यात |
नमन करे जो भाव से,शिव सुख पा हर्षात || |
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2026-04-09 11:51:17 |
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| 71852 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
|
|
*दीपीका दिलखुश जैन?*
*?जय जिनेन्द्र जी सभी को*?
*?♀️जिनागम 1वाणी पाठशालाएं*
??????
*अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठि के* *चरणो में कोटि-कोटि नमन*
?????
*जैन धर्म बढे चलो*
?????
???????
? *सभी दिंगबर जैन साधुओं और माताजी ,ऐलक जी, क्षूलक जी, क्षूलिका जी , त्यागी व्रती, भट्टाकरक जी सभी के निर्विघ्न आहार हो ये भावनाएं भाती हूं जी।*????????
*?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरूवे नमो नमः* ????
*आचार्य श्री संभव सागराय नमः*
????
*आचार्य गुरूदेव विद्यासागराय नमः*
????
*?आर्यिका श्री उदित मति माताजी के चरणों में नमः।*
*?जय जिनेंद्र जी सभी को*
???????
*चौबीस भगवान के चरणों में कोटि-कोटि नमन*
??????
*?♀️ॐ ह्रीं श्रुतज्ञान प्राप्ताये गणिनी श्री प्रमुख ज्ञानमती मात्रे नमः*
*↪️ज्ञानमती माताजी के चरणों में कोटी कोटी नमन बारम्बार प्रणाम*
??????❤️❤️❤️
? *आज के नियम*
*?️?दिए गए सभी नियम आप जब ले रहे तब से 24 घंटे का है जी*
???????
1️⃣आज ? भारत से बाहर जाने का त्याग है जी ।
बीत चीत करने को छोड़कर ।
आज? 100किलोमीटर की यात्रा छोड़कर बाकी सभी दिशाओं का त्याग है जी।
*?जो जो अपने अपने स्थान से बाहर जाते है अपने हिसाब से किलोमीटर का नियम ले सकते हैं जी।*
आज ?देव दर्शन करने का नियम है जी जैसे सुविधाएं उपलब्ध हैं जी।
या
आज ? आहार देने या देखने का नियम है जी।
?आज एक नियम अपने मन से लेवे जी।
मेरा नियम मन से वाला है
? आज ? एक घंटे तक चारों प्रकार का आहार का त्याग है जी।
???♂️?♀️?♂️
2️⃣??आज 20वस्त्र छोड़कर बाकी सभी के त्याग है। आज पहनने के लिए।
???♀️?♂️?♀️?♂️
3️⃣?? आज पांच मिठाई छोड़कर बाकी सभी के त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
4️⃣??आज बीस हरी छोड़कर बाकी सबके त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?
5️⃣??शांति नाथ भगवान जी तीर्थंकर की जाप
*?? ॐ ह्रीं श्री शांतिनाथाय जगत् शांति कराय सर्वोपद्रव शांतिं कुरु कुरु ह्रीं नम: स्वाहा:*
*?नो बार जाप*
*?या एक माला*
*?ॐ ह्रूं णमो आइरियाणं*
*की एक माला करने का नियम है*
*? ॐ ह्रीं अर्हं णमो सव्वसिद्धायदणाणं मनोवांछित सिद्धि दायकं भवतु स्वाहा:*
*?एक माला या नो बार जाप*
???????
*?एक माला या नो बार करे जी*
?????????
6️⃣??आज पांच घर जाने की छोडकर बाकी सबके त्याग है।
?आज पांच बिस्तर ,पांच पंलग छोड़कर बाकी सभी के त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
7️⃣??आज दशों दिशा में जितना आवागमन होता है। उसको छोड़कर बाकी बची सभी दिशाओं का आवागमन का त्याग रहेगा ।
???♀️?♂️?♀️?♂️
8️⃣ ??आज 20 मिनट, या 10मिनट स्वाध्याय करने का नियम है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
9️⃣??आज जमीकंद में पांच वस्तुएं छोड़कर बाकी सभी के त्याग है जी।
*? बीस प्रकार के अनाज, धान*
*छोड़कर बाकी सभी के त्याग है जी*
*भूल चूक माफ ।*
???♀️?♂️?♀️?♂️
???20मिनट या 30 मिनट ,या 10, मिनट का मोन का नियम है।
???♀️?♀️?♀️?♂️
1️⃣1️⃣? आज? निर्वाण कांड भाषा पढ़ने का नियम है जी।
या
आज ? णमोकार महामंत्र चालीसा पढने का नियम है जी।
???♀️?♂️?♀️?♂️
??????
*यथा शक्ति नियम पालन करते*??
*आज वैशाख कृष्ण सप्तमी*
??????
सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ?
?छोटे से छोटे से भी नियम मुक्ति मिल सकती ह।
*?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे*
??????
*नोट:? एक नियम भी*
*पालन कर सकते ह जी*
?????
*एडमिन*
*दीपीका दिलखुश जैन*
*बैंगलोर कर्नाटक*
???????
*सानिध्य भी हम सभी का*
*पुरुसार्थ भी हम सभी का*
??????? |
|
2026-04-09 11:51:15 |
|
| 71851 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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*दीपीका दिलखुश जैन?*
*?जय जिनेन्द्र जी सभी को*?
*?♀️जिनागम 1वाणी पाठशालाएं*
??????
*अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठि के* *चरणो में कोटि-कोटि नमन*
?????
*जैन धर्म बढे चलो*
?????
???????
? *सभी दिंगबर जैन साधुओं और माताजी ,ऐलक जी, क्षूलक जी, क्षूलिका जी , त्यागी व्रती, भट्टाकरक जी सभी के निर्विघ्न आहार हो ये भावनाएं भाती हूं जी।*????????
*?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरूवे नमो नमः* ????
*आचार्य श्री संभव सागराय नमः*
????
*आचार्य गुरूदेव विद्यासागराय नमः*
????
*?आर्यिका श्री उदित मति माताजी के चरणों में नमः।*
*?जय जिनेंद्र जी सभी को*
???????
*चौबीस भगवान के चरणों में कोटि-कोटि नमन*
??????
*?♀️ॐ ह्रीं श्रुतज्ञान प्राप्ताये गणिनी श्री प्रमुख ज्ञानमती मात्रे नमः*
*↪️ज्ञानमती माताजी के चरणों में कोटी कोटी नमन बारम्बार प्रणाम*
??????❤️❤️❤️
? *आज के नियम*
*?️?दिए गए सभी नियम आप जब ले रहे तब से 24 घंटे का है जी*
???????
1️⃣आज ? भारत से बाहर जाने का त्याग है जी ।
बीत चीत करने को छोड़कर ।
आज? 100किलोमीटर की यात्रा छोड़कर बाकी सभी दिशाओं का त्याग है जी।
*?जो जो अपने अपने स्थान से बाहर जाते है अपने हिसाब से किलोमीटर का नियम ले सकते हैं जी।*
आज ?देव दर्शन करने का नियम है जी जैसे सुविधाएं उपलब्ध हैं जी।
या
आज ? आहार देने या देखने का नियम है जी।
?आज एक नियम अपने मन से लेवे जी।
मेरा नियम मन से वाला है
? आज ? एक घंटे तक चारों प्रकार का आहार का त्याग है जी।
???♂️?♀️?♂️
2️⃣??आज 20वस्त्र छोड़कर बाकी सभी के त्याग है। आज पहनने के लिए।
???♀️?♂️?♀️?♂️
3️⃣?? आज पांच मिठाई छोड़कर बाकी सभी के त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
4️⃣??आज बीस हरी छोड़कर बाकी सबके त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?
5️⃣??शांति नाथ भगवान जी तीर्थंकर की जाप
*?? ॐ ह्रीं श्री शांतिनाथाय जगत् शांति कराय सर्वोपद्रव शांतिं कुरु कुरु ह्रीं नम: स्वाहा:*
*?नो बार जाप*
*?या एक माला*
*?ॐ ह्रूं णमो आइरियाणं*
*की एक माला करने का नियम है*
*? ॐ ह्रीं अर्हं णमो सव्वसिद्धायदणाणं मनोवांछित सिद्धि दायकं भवतु स्वाहा:*
*?एक माला या नो बार जाप*
???????
*?एक माला या नो बार करे जी*
?????????
6️⃣??आज पांच घर जाने की छोडकर बाकी सबके त्याग है।
?आज पांच बिस्तर ,पांच पंलग छोड़कर बाकी सभी के त्याग है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
7️⃣??आज दशों दिशा में जितना आवागमन होता है। उसको छोड़कर बाकी बची सभी दिशाओं का आवागमन का त्याग रहेगा ।
???♀️?♂️?♀️?♂️
8️⃣ ??आज 20 मिनट, या 10मिनट स्वाध्याय करने का नियम है।
???♀️?♂️?♀️?♂️
9️⃣??आज जमीकंद में पांच वस्तुएं छोड़कर बाकी सभी के त्याग है जी।
*? बीस प्रकार के अनाज, धान*
*छोड़कर बाकी सभी के त्याग है जी*
*भूल चूक माफ ।*
???♀️?♂️?♀️?♂️
???20मिनट या 30 मिनट ,या 10, मिनट का मोन का नियम है।
???♀️?♀️?♀️?♂️
1️⃣1️⃣? आज? निर्वाण कांड भाषा पढ़ने का नियम है जी।
या
आज ? णमोकार महामंत्र चालीसा पढने का नियम है जी।
???♀️?♂️?♀️?♂️
??????
*यथा शक्ति नियम पालन करते*??
*आज वैशाख कृष्ण सप्तमी*
??????
सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ?
?छोटे से छोटे से भी नियम मुक्ति मिल सकती ह।
*?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे*
??????
*नोट:? एक नियम भी*
*पालन कर सकते ह जी*
?????
*एडमिन*
*दीपीका दिलखुश जैन*
*बैंगलोर कर्नाटक*
???????
*सानिध्य भी हम सभी का*
*पुरुसार्थ भी हम सभी का*
??????? |
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2026-04-09 11:51:14 |
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| 71850 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
|
|
*हे भगवान संसार के सभी जीव सुखी रहें* *कोई दुखी ना रहें , अनाथ न रहें ,असहाय न, रहें पीड़ित ना रहें ,रोगी ना रहें ,सभी निरोग रहें ।*
*सभी आचार्य,उपाध्याय, सर्व साधु,* *आर्यिका, ऐलक , क्षुल्लक, क्षुल्लिका जी*
*व्रती ,महाव्रती भट्टारक जी के*
*सभी के निरंतराय आहार हों ,सभी* *स्वस्थ रहें ,सभी के द्वारा जिनधर्म की*
*दिन दूनी रात चौगुनी धर्म की प्रभावना हो*
*मैं यही भावना भाती हूंँ।*
*सारे संसार में ,देश में, राष्ट्र में ,समाज में,*
*घर में, परिवार में सुख, शांति, समृद्धि हो मुझे भी ,शक्ति दो ,भक्ति दो ,शांति दो,समृद्धि दो, चारित्र दो ,स्वास्थ्य दो, संकल्प दो जिससे आत्म कल्याण के साथ साथ दूसरों का भी कल्याण कर सकूँ*
*यही भावना भाती हूँ जी।*
??????
???????
???????
अनंतानंत सिद्ध परपेष्ठी के चरणों में मेरा
कोटि-कोटि प्रणाम नमन?????????????
पंच परमेष्ठी के चरणों मे कोटी कोटी नमन?????????????
नवदेवता के चरणों में बारम्बार प्रणाम नमन?????????????????????
बारह अंग चौदह पूर्वांग को धारण करने वाली सरस्वती माता को कोटी कोटी नमन
मुझें भी ज्ञानप्रदान करें
????????????
ढाई दीप मे समस्त साधु परमेष्ठि को मेरा नमन कोटि-कोटि नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु????????????????
???????
समस्त आर्यिका श्री को वन्दामि
समस्त ऐलक क्षुल्लक क्षुल्लिका को इच्छामि कोटी नमन
????????????????
त्यागी व्रती भैयाजी और दीदी जी को वंदना ??????
सभी के निरंतराय आहार हो सभी का मंगल हो
सभी को सादर जय जिनेन्द्र जी
?????????????????????
सभी के दिन और रात मंगलमय हों???????????
सुप्रभात हों सभी के ?????????????
??
पंच परमेष्ठी भगवंतों को नमन
?????
संसार में जितने भी सम्यक्तवी आत्मा है उनको मेरा नमन है??????
चराचर जीव जगत के अनंतानंत
?????
जीवात्माओं से उत्तम क्षमा
?? ??? ??? ???
हे भगवान आज का दिन दिखाने के लिए धन्यवाद
धन्यवाद
धन्यवाद???????????
सभी से मेरी मैत्री हो
सभी मेरे मित्र है
????
?????
*हे भगवान!आपकी असीम कृपा से प्रातः काल की ??????*
❤️❤️❤️❤️❤️❤️???* *पावन बेला में ये भावना भाते है* *संसार में जितने भी रत्नत्रय धारी* *आचार्य, उपाध्याय, सर्वसाधु हैं सभी के रत्नत्रय की पूर्णता हो और जो रत्नत्रय धारण करना चाहते हैं उनको रत्नत्रय की प्राप्ती हो जाए तथा शेष जितने जीव हैं*???
*उन सबके योग्यतानुसार क्रम से रत्नत्रय धारण करने के भाव हो जाए यही भगवान से प्रार्थना करती हूँ जी*
??????????
*धन्यवाद* *धन्यवाद* *धन्यवाद*
?????????
मे एक एसा जादू है जो समस्त संसार में प्यार आशीर्वाद बनाए रखता है।
*धन्यवाद*????
उन लोगों का जो मुझसे नफ़रत करते है " क्यो की उन्होंने मुझे मजबूत बनाया "
*धन्यवाद*???
उन लोगों का जो मुझसे प्यार करते है " क्यो की उन्होंने मेरा दिल बड़ा कर दिया "
*धन्यवाद* ????
उन लोगों का जो मेरे लिए परेशान हुए " और मुझे बताया दर असल वो मेरा बहुत ख्याल रखते है "
*धन्यवाद* ???
उन लोगों का जिन्होंने मुझे अपना बनाकर छोड़ दिया " और मुझे अहसास दिलाया की दुनिया में हर चीज आखरी नही "
*धन्यवाद*??
उन लोगों का जो मेरी जिंदगी में शामिल हुए " और मुझे ऐसा बना दिया जैसा सोचा भी ना था "
*और सबसे ज्यादा धन्यवाद मेरे ईश्वर का* ???
जिसने मुझे हालात का सामना करने की हिम्मत दी
????
*धन्यवाद*
आप सभी का जो मुझे आपके साथ रहने का मोका मिला जी
????? |
|
2026-04-09 11:51:12 |
|
| 71849 |
40449684 |
?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
|
|
*हे भगवान संसार के सभी जीव सुखी रहें* *कोई दुखी ना रहें , अनाथ न रहें ,असहाय न, रहें पीड़ित ना रहें ,रोगी ना रहें ,सभी निरोग रहें ।*
*सभी आचार्य,उपाध्याय, सर्व साधु,* *आर्यिका, ऐलक , क्षुल्लक, क्षुल्लिका जी*
*व्रती ,महाव्रती भट्टारक जी के*
*सभी के निरंतराय आहार हों ,सभी* *स्वस्थ रहें ,सभी के द्वारा जिनधर्म की*
*दिन दूनी रात चौगुनी धर्म की प्रभावना हो*
*मैं यही भावना भाती हूंँ।*
*सारे संसार में ,देश में, राष्ट्र में ,समाज में,*
*घर में, परिवार में सुख, शांति, समृद्धि हो मुझे भी ,शक्ति दो ,भक्ति दो ,शांति दो,समृद्धि दो, चारित्र दो ,स्वास्थ्य दो, संकल्प दो जिससे आत्म कल्याण के साथ साथ दूसरों का भी कल्याण कर सकूँ*
*यही भावना भाती हूँ जी।*
??????
???????
???????
अनंतानंत सिद्ध परपेष्ठी के चरणों में मेरा
कोटि-कोटि प्रणाम नमन?????????????
पंच परमेष्ठी के चरणों मे कोटी कोटी नमन?????????????
नवदेवता के चरणों में बारम्बार प्रणाम नमन?????????????????????
बारह अंग चौदह पूर्वांग को धारण करने वाली सरस्वती माता को कोटी कोटी नमन
मुझें भी ज्ञानप्रदान करें
????????????
ढाई दीप मे समस्त साधु परमेष्ठि को मेरा नमन कोटि-कोटि नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु????????????????
???????
समस्त आर्यिका श्री को वन्दामि
समस्त ऐलक क्षुल्लक क्षुल्लिका को इच्छामि कोटी नमन
????????????????
त्यागी व्रती भैयाजी और दीदी जी को वंदना ??????
सभी के निरंतराय आहार हो सभी का मंगल हो
सभी को सादर जय जिनेन्द्र जी
?????????????????????
सभी के दिन और रात मंगलमय हों???????????
सुप्रभात हों सभी के ?????????????
??
पंच परमेष्ठी भगवंतों को नमन
?????
संसार में जितने भी सम्यक्तवी आत्मा है उनको मेरा नमन है??????
चराचर जीव जगत के अनंतानंत
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जीवात्माओं से उत्तम क्षमा
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हे भगवान आज का दिन दिखाने के लिए धन्यवाद
धन्यवाद
धन्यवाद???????????
सभी से मेरी मैत्री हो
सभी मेरे मित्र है
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*हे भगवान!आपकी असीम कृपा से प्रातः काल की ??????*
❤️❤️❤️❤️❤️❤️???* *पावन बेला में ये भावना भाते है* *संसार में जितने भी रत्नत्रय धारी* *आचार्य, उपाध्याय, सर्वसाधु हैं सभी के रत्नत्रय की पूर्णता हो और जो रत्नत्रय धारण करना चाहते हैं उनको रत्नत्रय की प्राप्ती हो जाए तथा शेष जितने जीव हैं*???
*उन सबके योग्यतानुसार क्रम से रत्नत्रय धारण करने के भाव हो जाए यही भगवान से प्रार्थना करती हूँ जी*
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*धन्यवाद* *धन्यवाद* *धन्यवाद*
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मे एक एसा जादू है जो समस्त संसार में प्यार आशीर्वाद बनाए रखता है।
*धन्यवाद*????
उन लोगों का जो मुझसे नफ़रत करते है " क्यो की उन्होंने मुझे मजबूत बनाया "
*धन्यवाद*???
उन लोगों का जो मुझसे प्यार करते है " क्यो की उन्होंने मेरा दिल बड़ा कर दिया "
*धन्यवाद* ????
उन लोगों का जो मेरे लिए परेशान हुए " और मुझे बताया दर असल वो मेरा बहुत ख्याल रखते है "
*धन्यवाद* ???
उन लोगों का जिन्होंने मुझे अपना बनाकर छोड़ दिया " और मुझे अहसास दिलाया की दुनिया में हर चीज आखरी नही "
*धन्यवाद*??
उन लोगों का जो मेरी जिंदगी में शामिल हुए " और मुझे ऐसा बना दिया जैसा सोचा भी ना था "
*और सबसे ज्यादा धन्यवाद मेरे ईश्वर का* ???
जिसने मुझे हालात का सामना करने की हिम्मत दी
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*धन्यवाद*
आप सभी का जो मुझे आपके साथ रहने का मोका मिला जी
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2026-04-09 11:51:11 |
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