WhatsApp Messages Dashboard

Total Records in Table: 15130

Records Matching Filters: 15130

From: To: Global Search:

Messages

ID Chat ID
Chat Name
Sender
Phone
Message
Status
Date View
221288 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी अलफ़ाज़ के अंदाज से, अंदाज के प्रभाव से,, प्रभाव में दुर्भाव के,, दुर्भाव के प्रभाव से,, दिल में कसक हो आपके,, मुझ पापी के पाप से,,,, दिल आपका यू दुख गया,, कहे लबज पर रूक गया,, तो नेमि तुम से कह रहा,,, न बिन क्षमा के रह रहा,, धवल ह्रदय से कह रहा,, कि माफ करना आज तुम नयन मेरे आज नम,,, बुद्धि मुझमें बहुत कम,,, अहं से भरपूर हूँ,,, इसलिए सभी से दूर हूँ,, बस क्षमा की चाहना,,, और न कोई चाहना।।। कौन रह गया जो,,,, मैं रह जाऊँगा,,, नेमि इक रोज़ चार कंधो पर मैं भी चला जाऊँ गा।। आप बढे हम छोटे है हम तो सिक्के खोटे है जग में कहीं पर चले नहीं नैतिकता में फले नहीं,, फूल हुए पर फले नही। रिक्त रहे कभी भरे नहीं !!---नेमीचंद विद्यार्थी----!! 9313062282 जिनागम पंथ जयबंत हो 2026-06-11 08:15:30
221289 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी अलफ़ाज़ के अंदाज से, अंदाज के प्रभाव से,, प्रभाव में दुर्भाव के,, दुर्भाव के प्रभाव से,, दिल में कसक हो आपके,, मुझ पापी के पाप से,,,, दिल आपका यू दुख गया,, कहे लबज पर रूक गया,, तो नेमि तुम से कह रहा,,, न बिन क्षमा के रह रहा,, धवल ह्रदय से कह रहा,, कि माफ करना आज तुम नयन मेरे आज नम,,, बुद्धि मुझमें बहुत कम,,, अहं से भरपूर हूँ,,, इसलिए सभी से दूर हूँ,, बस क्षमा की चाहना,,, और न कोई चाहना।।। कौन रह गया जो,,,, मैं रह जाऊँगा,,, नेमि इक रोज़ चार कंधो पर मैं भी चला जाऊँ गा।। आप बढे हम छोटे है हम तो सिक्के खोटे है जग में कहीं पर चले नहीं नैतिकता में फले नहीं,, फूल हुए पर फले नही। रिक्त रहे कभी भरे नहीं !!---नेमीचंद विद्यार्थी----!! 9313062282 जिनागम पंथ जयबंत हो 2026-06-11 08:15:30
221286 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी लेते रहा करो यारों खबर न जाने कब जिंदगी की शाम हो जाए,, न जाने कब संस्कार संसार अहंकार से सदा के लिए आराम हो जाए,,, व्यर्थ में पालकर बैठे हुए हैं बहम,, व्यर्थ में अकड़ कर पाले हुए हैं अहम,, व्यर्थ में छोटी-छोटी परेशानियों से जाते हैं शहम,, जब समय अपनी पारीधी का करेगा अतिक्रमण,, उस समय यमराज भी नहीं करेगा रहम,,,, इसलिए क्यों डरूं किससे डरूं क्यों कर डरूं जब एक बार मरना ही है तो क्यों डर-डर कर बार-बार मरूं । मृत्यु तो सत्य है । उस सत्यता की सत्यता के,, सत्य को क्यों हरूं। कौन रह गया "नेमी " इस जहां में जो हम भी रहजाएंगे एक न एक दिन चार कंधों पर हम भी चले जाएंगे जग में रह जाएंगे कुछ,, रुसवाईयां कुछ अहसास, प्रशंसा और कुछ जग हसांईया कुछ यादें, तो कुछ रहनुमाईयां। यही सत्य है,,, और सत्य की ,, उच्चतम सत्यता,, एहसास करो नेमी" एहसान न करो। परेशान रहो नेमी परेशान न करो।। परेशान करना और ,, परेशानी का बदला लेना परमात्मा का विषय है, तुम्हारा नहीं इसलिए, परेशानी की इंतहा तक ,,,,,इंतजार करो।। ----पं.-नेमीचंद विद्यार्थी--दिलली 9313062282------ 2026-06-11 08:15:28
221287 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी लेते रहा करो यारों खबर न जाने कब जिंदगी की शाम हो जाए,, न जाने कब संस्कार संसार अहंकार से सदा के लिए आराम हो जाए,,, व्यर्थ में पालकर बैठे हुए हैं बहम,, व्यर्थ में अकड़ कर पाले हुए हैं अहम,, व्यर्थ में छोटी-छोटी परेशानियों से जाते हैं शहम,, जब समय अपनी पारीधी का करेगा अतिक्रमण,, उस समय यमराज भी नहीं करेगा रहम,,,, इसलिए क्यों डरूं किससे डरूं क्यों कर डरूं जब एक बार मरना ही है तो क्यों डर-डर कर बार-बार मरूं । मृत्यु तो सत्य है । उस सत्यता की सत्यता के,, सत्य को क्यों हरूं। कौन रह गया "नेमी " इस जहां में जो हम भी रहजाएंगे एक न एक दिन चार कंधों पर हम भी चले जाएंगे जग में रह जाएंगे कुछ,, रुसवाईयां कुछ अहसास, प्रशंसा और कुछ जग हसांईया कुछ यादें, तो कुछ रहनुमाईयां। यही सत्य है,,, और सत्य की ,, उच्चतम सत्यता,, एहसास करो नेमी" एहसान न करो। परेशान रहो नेमी परेशान न करो।। परेशान करना और ,, परेशानी का बदला लेना परमात्मा का विषय है, तुम्हारा नहीं इसलिए, परेशानी की इंतहा तक ,,,,,इंतजार करो।। ----पं.-नेमीचंद विद्यार्थी--दिलली 9313062282------ 2026-06-11 08:15:28
221284 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Wandami mataji ????ichami mataji ?? jai jinendra didi ?? 2026-06-11 08:14:58
221285 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Wandami mataji ????ichami mataji ?? jai jinendra didi ?? 2026-06-11 08:14:58
221282 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji?????? 2026-06-11 08:14:53
221283 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji?????? 2026-06-11 08:14:53
221280 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?Wandami Mataji ? 2026-06-11 08:13:09
221281 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?Wandami Mataji ? 2026-06-11 08:13:09