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Chat ID
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Chat Name
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Message
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Status
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Date |
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| 224312 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*एक शब्द और रिश्ते की कीमत तभी पता चलती है,*
*ज़ब वो दोनों निकल जाते हैं....*
*एक मुंह से और दूसरा जिन्दगी से।*
*??जय जिनेन्द्र ??* |
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2026-06-12 11:39:13 |
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| 224310 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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?जय ?जिनेंद्र ? ? *प्रयत्न करने से कभी न चूकें..!*
*हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं,*
*विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं..!!*?
? *जो पानी में भीगेगा*
*वो सिर्फ लिबास बदल सकता है*
*लेकिन जो पसीने में भीगता है वो*
*इतिहास बदल सकता है.*?
? *सुप्रभात*? |
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2026-06-12 11:39:12 |
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| 224309 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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?जय ?जिनेंद्र ? ? *प्रयत्न करने से कभी न चूकें..!*
*हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं,*
*विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं..!!*?
? *जो पानी में भीगेगा*
*वो सिर्फ लिबास बदल सकता है*
*लेकिन जो पसीने में भीगता है वो*
*इतिहास बदल सकता है.*?
? *सुप्रभात*? |
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2026-06-12 11:39:11 |
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| 224308 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*?? *–किसी को बहस में जीतने की बजाय मौन से पराजित करो क्योंकि जो आपके साथ सदा बहस करने के लिए तत्पर रहता है वह आपके मौन को सहन नहीं कर पाएगा।*
*–संसार का सबसे सुरक्षित बीमा है परमात्मा का भरोसा, बस याद रखें अच्छे कर्मों की किश्त समय पर भरते रहें।*
*–जो बदल जाए उसके लिए कभी दुखी मत होना क्योंकि पत्तों ने जब भी रंग बदला है हमेशा जमीन पर आकर ही गिरे हैं।
*
?? दोस्तों ??
अधिकतर ऐसा होता है, कि हम सच्चाई जाने बिना अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं, कि हम ही सही हैं, और बाकी सब गलत है।
लेकिन कई बार ऐसा होता है, कि हम केवल सिक्के का एक ही पहलू देख रहे होते है, हमे जरूरत है, सिक्के के दोनो पहलुओं को देखकर समझने की, इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए, और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए।
वेद पुराणों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है, इसलिए यदि जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा, कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ सिर्फ एक पहलू हो, और बाकी पहलू किसी और के पास हैं।
?? जय श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास जी |
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2026-06-12 11:39:10 |
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| 224307 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*?? *–किसी को बहस में जीतने की बजाय मौन से पराजित करो क्योंकि जो आपके साथ सदा बहस करने के लिए तत्पर रहता है वह आपके मौन को सहन नहीं कर पाएगा।*
*–संसार का सबसे सुरक्षित बीमा है परमात्मा का भरोसा, बस याद रखें अच्छे कर्मों की किश्त समय पर भरते रहें।*
*–जो बदल जाए उसके लिए कभी दुखी मत होना क्योंकि पत्तों ने जब भी रंग बदला है हमेशा जमीन पर आकर ही गिरे हैं।
*
?? दोस्तों ??
अधिकतर ऐसा होता है, कि हम सच्चाई जाने बिना अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं, कि हम ही सही हैं, और बाकी सब गलत है।
लेकिन कई बार ऐसा होता है, कि हम केवल सिक्के का एक ही पहलू देख रहे होते है, हमे जरूरत है, सिक्के के दोनो पहलुओं को देखकर समझने की, इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए, और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए।
वेद पुराणों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है, इसलिए यदि जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा, कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ सिर्फ एक पहलू हो, और बाकी पहलू किसी और के पास हैं।
?? जय श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास जी |
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2026-06-12 11:39:09 |
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| 224306 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-06-12 11:39:08 |
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| 224305 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-06-12 11:39:07 |
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| 224303 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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> परिवार केवल एक घर में रहने वाले लोगों का समूह नहीं होता, बल्कि वह प्रेम, त्याग, सम्मान और अपनापन की वह डोर है जो हर कठिनाई को आसान बना देती है। जिस घर में आपसी प्रेम और समझ बनी रहती है, वहाँ अभाव भी अधिक दिनों तक टिक नहीं पाता। धन से बड़ा यदि कोई सुख है, तो वह है परिवार का साथ और मनों का मेल।
कहा भी गया है —
*“जहाँ प्रेम होता है, वहाँ परमात्मा का वास होता है।”*
*आओ कहानी सुने*
*रिश्तों में मिठास*
एक बार एक सुनार से लक्ष्मी जी रूठ गईं। जाते समय उन्होंने सुनार से कहा —
“मैं जा रही हूँ और मेरी जगह अब नुकसान (हानि) आने वाला है। अपने आप को तैयार कर लो। लेकिन जाने से पहले मैं तुम्हें एक अंतिम वरदान देना चाहती हूँ, माँगो क्या चाहते हो?”
सुनार बहुत समझदार और दूरदर्शी था। उसने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा —
“माँ, यदि नुकसान आना ही है तो आ जाए, मुझे उससे कोई शिकायत नहीं। बस इतना आशीर्वाद दीजिए कि मेरे *परिवार में हमेशा प्रेम, एकता और सम्मान बना रहे* ।”
लक्ष्मी जी मुस्कुराईं और बोलीं — “तथास्तु!”
इतना कहकर वे चली गईं।
कुछ दिनों बाद घर में एक छोटी-सी घटना घटी।
सुनार की सबसे छोटी बहू रसोई में खिचड़ी बना रही थी। उसने खिचड़ी में नमक डाला और किसी दूसरे काम में लग गई। थोड़ी देर बाद दूसरी बहू आई, उसने बिना चखे फिर नमक डाल दिया। इसी प्रकार तीसरी और चौथी बहू ने भी यही किया। अंत में उनकी सास आईं और उन्होंने भी बिना देखे नमक डाल दिया।
शाम को सबसे पहले सुनार भोजन करने बैठा। जैसे ही उसने पहला निवाला मुँह में रखा, उसे समझ आ गया कि खिचड़ी में नमक बहुत अधिक है। उसी क्षण उसे लक्ष्मी जी की बात याद आ गई कि अब घर में “नुकसान” आने वाला है।
लेकिन उसने बिना कुछ कहे चुपचाप खाना खा लिया।
थोड़ी देर बाद बड़ा बेटा खाने बैठा। पहला कौर खाते ही वह समझ गया कि खिचड़ी बहुत नमकीन है। उसने पूछा —
“पिताजी ने खाना खा लिया? उन्होंने कुछ कहा क्या?”
सबने उत्तर दिया —
“हाँ, खा लिया… कुछ नहीं बोले।”
बेटे ने मन ही मन सोचा —
“जब पिताजी ने कुछ नहीं कहा, तो मुझे भी शिकायत नहीं करनी चाहिए।”
वह भी चुपचाप खाना खाकर उठ गया।
इसी प्रकार घर के सभी सदस्य आते गए। हर कोई पहले वालों के बारे में पूछता और बिना शिकायत किए प्रेमपूर्वक भोजन कर लेता। किसी ने किसी को दोष नहीं दिया, किसी ने कटु शब्द नहीं कहे।
रात को अचानक “नुकसान” स्वयं सुनार के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला —
“मैं यहाँ से जा रहा हूँ।”
सुनार ने आश्चर्य से पूछा —
“क्यों? अभी तो तुम आए थे!”
नुकसान बोला —
“जहाँ लोग एक किलो नमक खाकर भी आपस में नहीं झगड़ते, जहाँ परिवार प्रेम और सम्मान से बंधा हो… वहाँ मेरा कोई काम नहीं होता।”
यह कहकर नुकसान वहाँ से चला गया।
> सीख : *जिस परिवार में प्रेम, धैर्य और आपसी सम्मान होता है, वहाँ बड़ी से बड़ी परेशानी भी टिक नहीं पाती। झगड़ा, क्रोध और अहंकार घर की सुख-शांति को नष्ट कर देते हैं, जबकि प्रेम और समझदारी घर को स्वर्ग बना देते हैं।*
> ? “परिवार की असली दौलत धन नहीं, आपसी प्रेम होता है।”
> ? “जहाँ रिश्तों में मिठास होती है, वहाँ जीवन की हर कठिनाई फीकी पड़ जाती है।”
> ? “घर बड़ा होने से नहीं, दिल बड़े होने से परिवार बनता है।” ?? |
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2026-06-12 11:39:06 |
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| 224304 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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> परिवार केवल एक घर में रहने वाले लोगों का समूह नहीं होता, बल्कि वह प्रेम, त्याग, सम्मान और अपनापन की वह डोर है जो हर कठिनाई को आसान बना देती है। जिस घर में आपसी प्रेम और समझ बनी रहती है, वहाँ अभाव भी अधिक दिनों तक टिक नहीं पाता। धन से बड़ा यदि कोई सुख है, तो वह है परिवार का साथ और मनों का मेल।
कहा भी गया है —
*“जहाँ प्रेम होता है, वहाँ परमात्मा का वास होता है।”*
*आओ कहानी सुने*
*रिश्तों में मिठास*
एक बार एक सुनार से लक्ष्मी जी रूठ गईं। जाते समय उन्होंने सुनार से कहा —
“मैं जा रही हूँ और मेरी जगह अब नुकसान (हानि) आने वाला है। अपने आप को तैयार कर लो। लेकिन जाने से पहले मैं तुम्हें एक अंतिम वरदान देना चाहती हूँ, माँगो क्या चाहते हो?”
सुनार बहुत समझदार और दूरदर्शी था। उसने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा —
“माँ, यदि नुकसान आना ही है तो आ जाए, मुझे उससे कोई शिकायत नहीं। बस इतना आशीर्वाद दीजिए कि मेरे *परिवार में हमेशा प्रेम, एकता और सम्मान बना रहे* ।”
लक्ष्मी जी मुस्कुराईं और बोलीं — “तथास्तु!”
इतना कहकर वे चली गईं।
कुछ दिनों बाद घर में एक छोटी-सी घटना घटी।
सुनार की सबसे छोटी बहू रसोई में खिचड़ी बना रही थी। उसने खिचड़ी में नमक डाला और किसी दूसरे काम में लग गई। थोड़ी देर बाद दूसरी बहू आई, उसने बिना चखे फिर नमक डाल दिया। इसी प्रकार तीसरी और चौथी बहू ने भी यही किया। अंत में उनकी सास आईं और उन्होंने भी बिना देखे नमक डाल दिया।
शाम को सबसे पहले सुनार भोजन करने बैठा। जैसे ही उसने पहला निवाला मुँह में रखा, उसे समझ आ गया कि खिचड़ी में नमक बहुत अधिक है। उसी क्षण उसे लक्ष्मी जी की बात याद आ गई कि अब घर में “नुकसान” आने वाला है।
लेकिन उसने बिना कुछ कहे चुपचाप खाना खा लिया।
थोड़ी देर बाद बड़ा बेटा खाने बैठा। पहला कौर खाते ही वह समझ गया कि खिचड़ी बहुत नमकीन है। उसने पूछा —
“पिताजी ने खाना खा लिया? उन्होंने कुछ कहा क्या?”
सबने उत्तर दिया —
“हाँ, खा लिया… कुछ नहीं बोले।”
बेटे ने मन ही मन सोचा —
“जब पिताजी ने कुछ नहीं कहा, तो मुझे भी शिकायत नहीं करनी चाहिए।”
वह भी चुपचाप खाना खाकर उठ गया।
इसी प्रकार घर के सभी सदस्य आते गए। हर कोई पहले वालों के बारे में पूछता और बिना शिकायत किए प्रेमपूर्वक भोजन कर लेता। किसी ने किसी को दोष नहीं दिया, किसी ने कटु शब्द नहीं कहे।
रात को अचानक “नुकसान” स्वयं सुनार के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला —
“मैं यहाँ से जा रहा हूँ।”
सुनार ने आश्चर्य से पूछा —
“क्यों? अभी तो तुम आए थे!”
नुकसान बोला —
“जहाँ लोग एक किलो नमक खाकर भी आपस में नहीं झगड़ते, जहाँ परिवार प्रेम और सम्मान से बंधा हो… वहाँ मेरा कोई काम नहीं होता।”
यह कहकर नुकसान वहाँ से चला गया।
> सीख : *जिस परिवार में प्रेम, धैर्य और आपसी सम्मान होता है, वहाँ बड़ी से बड़ी परेशानी भी टिक नहीं पाती। झगड़ा, क्रोध और अहंकार घर की सुख-शांति को नष्ट कर देते हैं, जबकि प्रेम और समझदारी घर को स्वर्ग बना देते हैं।*
> ? “परिवार की असली दौलत धन नहीं, आपसी प्रेम होता है।”
> ? “जहाँ रिश्तों में मिठास होती है, वहाँ जीवन की हर कठिनाई फीकी पड़ जाती है।”
> ? “घर बड़ा होने से नहीं, दिल बड़े होने से परिवार बनता है।” ?? |
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2026-06-12 11:39:06 |
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| 224302 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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2026-06-12 11:38:20 |
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