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81739 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• <a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a> विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। 2026-04-13 07:43:04
81740 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• <a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a> विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। 2026-04-13 07:43:04
81738 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• 2026-04-13 07:43:03
81737 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• 2026-04-13 07:43:02
81735 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• 2026-04-13 07:43:01
81736 40449733 •परम गुरू ज्ञान संघ• 2026-04-13 07:43:01
81734 40449671 1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज ? *<a href="https://youtube.com/shorts/-dkRURX3SE4*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/-dkRURX3SE4*</a> 2026-04-13 07:41:55
81733 40449671 1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज ? *<a href="https://youtube.com/shorts/-dkRURX3SE4*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/-dkRURX3SE4*</a> 2026-04-13 07:41:54
81731 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *218. प्रभु आत्म संदेश.* आपको जब लगे कि आप अंदर से टूट रहे है, तो उस समय आप अपने गर्भ एवं जन्म के समय की अवस्था के बारे में सोचिए। आप सोचिए कि मेरे गर्भ एवं जन्म के काल में ,यदि मेरी जन्मदात्री मां अंदर से टूट गई होती तो आज मैं इस दुनियां में न होता। मैं आज जो दुनियां में हूं वो मेरी मां के अंदर से न टूटने की ताकत का सुफल है। आप भी यदि अपना सुनहरा भविष्य चाहते है,तो अपने अंदर की ताकत को पहचाने एवं खुद को कभी टूटने न दे। देखना आप भी आनंद एवं सफलता को प्राप्त होंगे। *विचारना...* 2026-04-13 07:41:23
81732 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *218. प्रभु आत्म संदेश.* आपको जब लगे कि आप अंदर से टूट रहे है, तो उस समय आप अपने गर्भ एवं जन्म के समय की अवस्था के बारे में सोचिए। आप सोचिए कि मेरे गर्भ एवं जन्म के काल में ,यदि मेरी जन्मदात्री मां अंदर से टूट गई होती तो आज मैं इस दुनियां में न होता। मैं आज जो दुनियां में हूं वो मेरी मां के अंदर से न टूटने की ताकत का सुफल है। आप भी यदि अपना सुनहरा भविष्य चाहते है,तो अपने अंदर की ताकत को पहचाने एवं खुद को कभी टूटने न दे। देखना आप भी आनंद एवं सफलता को प्राप्त होंगे। *विचारना...* 2026-04-13 07:41:23