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40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य आर्जवसागर का अभिवंदन ग्रंथ*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
अध्यात्म योगी, कठोर साधक, अनेक चैतन्य मूर्तियों को प्रकट करने वाले, अनेक युवाओं के शिरोधार्य, समाज प्रचारक, तीर्थोधारक, राष्ट्रहित प्रचारक, बहुभाषी, महान विद्वान, दिगम्बर संत आचार्य श्री 108 आर्जवसागर जी महामुनिराज जिन्होनें हिन्दी ही नहीं तमिल, कन्नड़, मराठी, अंग्रेजी , संस्कृत, प्राकृत आदि अनेक भाषाओं में अपनी साहित्यिक रचना में समाज को दिशा निर्देश दिये हैं। दिशा निर्देश देकर समाज में फैली हुई कुरीतियों को समाप्त करने का प्रयास किया है।
वर्तमान में प्रसिद्धि प्राप्त आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं अपनी त्याग, तपस्या, और साधना के बल से आप बहुचर्चित हैं। जिनकी ओजस्वी वाणी से हम नित प्रतिदिन अपने जीवन में सुधार की दृष्टि को अवलोकित करते हैं।
गुरुदेव अभी तक चौदह प्रदेशों में सन् 1984 से वर्तमान तक प्रतिवर्ष 500 से 1500 कि.मी. तक पद विहार करते हुए लगभग 15000 से 20000 कि.मी. नंगे पैर पद विहार की यात्रा कर चुके हैं। वे अपनी सरल, सहज, सुबोधितमयी वाणी से और वाणी मात्र ही नहीं शिक्षा, संस्कार, और अहिंसा के विभिन्न विषयों पर समाज को समय-समय पर सचेत करते रहते हैं।
गुरुदेव का वात्सल्य तो अमूल्य है ही; उनकी विद्वत्ता भी देखने योग्य है। इस रूप में गुरुदेव नें अभी तक करीब 25 पुस्तकों के द्वारा शताधिक साहित्यिक रचनाओ को कर जन-जन को प्रभावित किया है गुरुदेव के साहित्य पर विभिन्न विषयों के माध्यम से अनेक विश्वविद्यालयों में शोधार्थी PHD कर चुके हैं और कर रहे हैं। सभी शोधार्थियों को गुरुदेव का मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहता है। गुरुदेव द्वारा रचित कई कृतियों का प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ दिल्ली से भी हो चुका है।
वर्तमान में गुरुदेव का आयुर्वेद की प्रणाली को प्रचारक के रूप में बहुत बड़ा योगदान है | गुरुदेव योग को भी अपना जीवन मानते हैं। ॐ योग ध्यान एवं सम्यक् ध्यान के द्वारा आप जन जन को ध्यान एवं योग की प्रेरणा देते हैं।आपके सान्निध्य में अनेकों बार डॉक्टर्स सम्मलेन; जिनमें एलोपैथी एवं आयुर्वेदिक दवाओं पर विचार विमर्श हुआ है |एवं अनेकों अखिल भारतीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठियाँ संपन्न हुई हैं। आपके द्वारा रचित संपूर्ण साहित्य पर भी कई बार संगोष्ठीयां संपन्न हुई हैं।
अभी तक गुरुदेव के माध्यम से अनेकों विद्यालय, महाविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान, NGO आदि में और जेल , आश्रम आदि में गुरुदेव के व्याख्यानों का लाभ अनेक विद्यार्थियों सहित जन-जन को प्राप्त हुआ है।
गुरुदेव के अभी तक हुए 42 चातुर्मास से जैन समाज के धर्माबलम्बी ही नहीं अपितु नेतागण और अन्य जैनेत्तर लोग भी गुरुदेव के प्रवचनों के अंश को ग्रहण कर वर्तमान युग में अपने सामाजिक प्लेटफार्म पर अपने प्रचार प्रसार में संलग्न हैं। गुरुदेव के माध्यम से प्रतिवर्ष संगोष्ठी एवं पाठशाला सम्मेलन भी आयोजित कराये जाते हैं। जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के साथ साथ विद्वानों को गुरुदेव का मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहता है।
आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है कि गुरुदेव रचित बहुचर्चित कृति "तीर्थोदय काव्य" का विमोचन सन् 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय बाबूलाल जी गौर द्वारा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तथा "प्रभावना" कृति का विमोचन सन् 2024 में भारत के कृषि और किसान कल्याण मंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा विदिशा में किया गया है; जो की एक गौरव की बात है। सन 2025 में इंदौर में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी गुरुदेव का पाद प्रक्षलन कर आचार्य भगवन का आशीर्वाद ग्रहण किया.
इस अभिवंदन ग्रंथ में आप अपने
संदेश व सद् विचार अवश्य प्रेषित करें।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️
अतः संपूर्ण जैन समाज आपके संदेश व सद् विचार की आभारी रहेगी। |
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2026-04-13 07:12:01 |
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| 81607 |
40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य आर्जवसागर का अभिवंदन ग्रंथ*
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अध्यात्म योगी, कठोर साधक, अनेक चैतन्य मूर्तियों को प्रकट करने वाले, अनेक युवाओं के शिरोधार्य, समाज प्रचारक, तीर्थोधारक, राष्ट्रहित प्रचारक, बहुभाषी, महान विद्वान, दिगम्बर संत आचार्य श्री 108 आर्जवसागर जी महामुनिराज जिन्होनें हिन्दी ही नहीं तमिल, कन्नड़, मराठी, अंग्रेजी , संस्कृत, प्राकृत आदि अनेक भाषाओं में अपनी साहित्यिक रचना में समाज को दिशा निर्देश दिये हैं। दिशा निर्देश देकर समाज में फैली हुई कुरीतियों को समाप्त करने का प्रयास किया है।
वर्तमान में प्रसिद्धि प्राप्त आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं अपनी त्याग, तपस्या, और साधना के बल से आप बहुचर्चित हैं। जिनकी ओजस्वी वाणी से हम नित प्रतिदिन अपने जीवन में सुधार की दृष्टि को अवलोकित करते हैं।
गुरुदेव अभी तक चौदह प्रदेशों में सन् 1984 से वर्तमान तक प्रतिवर्ष 500 से 1500 कि.मी. तक पद विहार करते हुए लगभग 15000 से 20000 कि.मी. नंगे पैर पद विहार की यात्रा कर चुके हैं। वे अपनी सरल, सहज, सुबोधितमयी वाणी से और वाणी मात्र ही नहीं शिक्षा, संस्कार, और अहिंसा के विभिन्न विषयों पर समाज को समय-समय पर सचेत करते रहते हैं।
गुरुदेव का वात्सल्य तो अमूल्य है ही; उनकी विद्वत्ता भी देखने योग्य है। इस रूप में गुरुदेव नें अभी तक करीब 25 पुस्तकों के द्वारा शताधिक साहित्यिक रचनाओ को कर जन-जन को प्रभावित किया है गुरुदेव के साहित्य पर विभिन्न विषयों के माध्यम से अनेक विश्वविद्यालयों में शोधार्थी PHD कर चुके हैं और कर रहे हैं। सभी शोधार्थियों को गुरुदेव का मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहता है। गुरुदेव द्वारा रचित कई कृतियों का प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ दिल्ली से भी हो चुका है।
वर्तमान में गुरुदेव का आयुर्वेद की प्रणाली को प्रचारक के रूप में बहुत बड़ा योगदान है | गुरुदेव योग को भी अपना जीवन मानते हैं। ॐ योग ध्यान एवं सम्यक् ध्यान के द्वारा आप जन जन को ध्यान एवं योग की प्रेरणा देते हैं।आपके सान्निध्य में अनेकों बार डॉक्टर्स सम्मलेन; जिनमें एलोपैथी एवं आयुर्वेदिक दवाओं पर विचार विमर्श हुआ है |एवं अनेकों अखिल भारतीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठियाँ संपन्न हुई हैं। आपके द्वारा रचित संपूर्ण साहित्य पर भी कई बार संगोष्ठीयां संपन्न हुई हैं।
अभी तक गुरुदेव के माध्यम से अनेकों विद्यालय, महाविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान, NGO आदि में और जेल , आश्रम आदि में गुरुदेव के व्याख्यानों का लाभ अनेक विद्यार्थियों सहित जन-जन को प्राप्त हुआ है।
गुरुदेव के अभी तक हुए 42 चातुर्मास से जैन समाज के धर्माबलम्बी ही नहीं अपितु नेतागण और अन्य जैनेत्तर लोग भी गुरुदेव के प्रवचनों के अंश को ग्रहण कर वर्तमान युग में अपने सामाजिक प्लेटफार्म पर अपने प्रचार प्रसार में संलग्न हैं। गुरुदेव के माध्यम से प्रतिवर्ष संगोष्ठी एवं पाठशाला सम्मेलन भी आयोजित कराये जाते हैं। जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के साथ साथ विद्वानों को गुरुदेव का मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहता है।
आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है कि गुरुदेव रचित बहुचर्चित कृति "तीर्थोदय काव्य" का विमोचन सन् 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय बाबूलाल जी गौर द्वारा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तथा "प्रभावना" कृति का विमोचन सन् 2024 में भारत के कृषि और किसान कल्याण मंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा विदिशा में किया गया है; जो की एक गौरव की बात है। सन 2025 में इंदौर में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी गुरुदेव का पाद प्रक्षलन कर आचार्य भगवन का आशीर्वाद ग्रहण किया.
इस अभिवंदन ग्रंथ में आप अपने
संदेश व सद् विचार अवश्य प्रेषित करें।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️
अतः संपूर्ण जैन समाज आपके संदेश व सद् विचार की आभारी रहेगी। |
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2026-04-13 07:12:00 |
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| 81606 |
40449727 |
GROUP ??दसा नरसिंहपुरा समाज?? |
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2026-04-13 07:11:52 |
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| 81605 |
40449727 |
GROUP ??दसा नरसिंहपुरा समाज?? |
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2026-04-13 07:11:51 |
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| 81604 |
40449756 |
अंतरिक्ष पार्श्वनाथचंडीगढ़ पंजाब हरियाणा 19 |
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2026-04-13 07:10:25 |
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| 81603 |
40449756 |
अंतरिक्ष पार्श्वनाथचंडीगढ़ पंजाब हरियाणा 19 |
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2026-04-13 07:10:24 |
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| 81601 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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Please don't delete without listening. |
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2026-04-13 07:10:08 |
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| 81602 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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Please don't delete without listening. |
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2026-04-13 07:10:08 |
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| 81600 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-04-13 07:10:07 |
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| 81599 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-04-13 07:10:06 |
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