| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 9308 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*विषय;- संचालक ( एडमिन) की पहचान के लिए विशेष रंग,चिन्ह या और कोई सुविधा हो जिससे पहचान सके कि ये संचालक जी की प्रतिक्रिया है।ताकि विवाद बढ़ ना पाए।जैसे आपने संचालकों को ऑल डिलिट करने का सुझाव मान्य किया था।*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच ने आपकी व्हाॅट्स एप कंपनी टीम से आग्रह किया था कि पोस्ट को ऑल डिलिट करने का अधिकार संचालकों को भी मिले ताकि अनुचित,असामाजिक, असामयिक, ,विवादित अश्लील,संविधान से विपरीत पोस्ट को ऑल डिलिट करने के लिए पोस्ट कर्ता कहना ना पड़ें ।और संबंधित को पहली गलती में रिमूव करना ना पडे़।आपने ऐसा सुधार किया धन्यवाद।वैसे ही ;- संचालक ( एडमिन) की पहचान के लिए विशेष रंग,चिन्ह या और कोई सुविधा हो जिससे पहचान सके कि ये संचालक जी की प्रतिक्रिया है।ताकि विवाद बढ़ ना पाए।जैसे आपने संचालकों को ऑल डिलिट करने का विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच भारत का हमारा सुझाव मान्य किया था।यह एक बड़ी उपलब्धी होगी।जैसे भारत में शाकाहार है या मांसाहार उसके लिए खाद्य पदार्थ पर ही हरा ,लाल ऐसा निशान होता है जिससे बिना पूछताछ के ज्ञात हो जाता है।आपके जवाब के राह में आपका ही*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच भारत धन्यवाद*
*WhatsApp Support इसपर ईमेल करते ही पांच मिनट के भीतर जवाब आ गया ।आप सभी इस ईमेल आय डी पर ऊपर का विषय का हम समर्थन करते हैं जन हित में अपने भ्रमण दूर ध्वनि नंबर +91 लगाकर भेजिए धन्यवाद।* |
|
2026-02-18 20:02:38 |
|
| 9307 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*जैन के सभी पंथों के साधुसाध्वी दीक्षा के वक्त आभूषण शृंगार का त्याग करते हैं पर फिर भी भगवंत से कम त्यागी और छोटे ही होते हैं।भगवान बड़े।यदि भगवान की भक्ति आभूषण शृंगार से कर सकते हैं वे लेते नहीं भक्त भक्ति करते हैं तो वैसे ही साधु-साध्वी की भक्ति भक्त दीक्षा के बाद भी आभूषण शृंगार के द्वारा क्यों नहीं करते❓यदि भक्त भी करें वैसी भक्ति तो भी परिग्रह माना जाता हो तो वैसे भगवान को भी दूर से भक्ति संभव है पर अंगोंपांगोंपर अंगी आभूषण लगाकर भक्ति करना आसादना महादोष महाव्रत खंडित करने का है।* |
|
2026-02-18 20:02:37 |
|
| 9306 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
<a href="https://youtu.be/zGDloFNaySc?si=jt6acRt41bZHx2iH" target="_blank">https://youtu.be/zGDloFNaySc?si=jt6acRt41bZHx2iH</a>
*सुदान सत्पात्र को ही दिए बिना जैनत्व की रक्षा संभव नहीं।*
*समर्थक,प्रचारक:-*
*?विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच,?*
*?विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट,⛱️*
*?️विघ्नहर जैन बैंक ।?* |
|
2026-02-18 20:02:35 |
|
| 9305 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*ब्र. अजय जी शिरपुरवाले विधानाचार्य,मुनि भक्त द्वारा सुखद समाज हित में पहल*
*भोपाल भानपुर जैन मंदिर में वात्सल्य रत्न पूज्य मुनि श्री निर्वेगसागरजी जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य चौमासे हेतु विराजमान हैं।उनकी सहमति आशीर्वाद से ब्र अजय जी शिरपुरवाले द्वारा समाज के अध्यक्ष आदि के समक्ष बात रखी कि नशामुक्त, अंधश्रध्दा, मिथ्यात्वमुक्त सत्पात्र अक्षम जैनी विधवा, विकलांग, पढ़ाई बीमारी, कर्जमुक्ति,रोजगार,राशन,घर किराया ,विवाह आदि के लिए मदद की आवश्यकता होती है ।पर आर्थिक मदद के अभाव में कुपोषण,आत्महत्या,संकट ,बेरोजगार,धर्मांतरण ,पलायन आदि की समस्या आए दिन आ रही है ।उसके निवारण हेतु मंदिर जी में सत्पात्र मदद पेटी गुल्लक ( गुड़ लक) रखी जाए तो कुछ संकट निवारण हो सकता है।*
*साधर्मी रक्षा बिना साधु-साध्वी,मंदिर,तीर्थ,जैन धर्म की रक्षा संभव नहीं इसलिए भले हम संख्या बढ़ा न पाए पर संख्या कम न हो ,अकालमरण ना हो या मदद से संख्या भी बढ़ सकती है पर किसी को ११०० रू मदद के लिए भी कहो तो बहाने आनाकानी,दुकान ठप्प है आवक नहीं,खर्च अधिक है ,आए दिन चंदा लेने आते हैं तो किस किसको देवे ठगी नशायुक्त,अंधश्रध्दा युक्त भी होते हैं उनको देने में दोष भी लगता है या जैनी गरीब होता ही नहीं,होता भी हो तो मिलते नहीं ,मिल भी जाए तो वे लेते नहीं या कोई देते नहीं लंबा भाषण मिल जाता है।अधिक पैसे देने में ऑंखो में भी आता है ।*
*पर मंदिर कि गुप्त भण्डार पेटी से मदद करें तो भी लेनदेनेवाले को दोष लगता है इसलिए सत्पात्र मदद नाम की पेंटी हर मंदिर तीर्थ पर रखी जाए तो बिना दबाव सहजता से लोग ५ या १० रू भी डाले तो बूंद बूंद से घट भरता है। जो व्यक्ति ११०० रू देने में आनाकानी करता है या राशि बड़ी लगती है वह व्यक्ति सालभर में १० रू रोज भी डाले तो ३६०० रू सहज में दे सकता है जो ऑंखों में भी नहीं आता।भार भी नहीं पड़ता है ।और बड़ी राशि एकत्रित हो जाएगी।बड़े बड़े चौमासे होते हे या बड़े बढ़े मंदिरों में भीड़ होती है तो उस प्रवचन के मंड़प में या मंदिर धर्मशाला में भी गुल्लक रखी जाए तो गुड़ लक अच्छा भाग्य जग सकता है अक्षम लोगों का। नशामुक्त,अंधश्रध्दा मिथ्यात्व मुक्त हो तो ठीक अन्यथा जब जागे तब सबेरा के अनुसार भले ये उक्त बुराई ना हो तो भी संकल्प बिना पुण्यार्जन पापक्षय,संवर होता नहीं इसलिए संकल्पित होना अनिवार्य से जैसे बैंक में पैसे रखे बिना खुद मैनेजर हो तो भी व्याज ले नहीं सकते वैसे त्याग बिना पुण्यरूपी व्याज नहीं मिलता। पुण्य से ही अनेक संकट कटते हैं।*
*मुनि श्री की कृपा से ब्र की सलाह से मंदिर जी में सत्पात्र मदद पेटी रखी गयी ऐसी हर जगह शुरूआत हो। और जो भी राशि आवे वह उस मंदिर जी की कमेटी निर्णय लेने का किस सत्पात्र जैनी को ही देना है।ना कोई लाभार्थी मिले तो मंच,ट्रस्ट की मदद सलाह लें सकते हैं ।*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच ,विघ्नहर विश्व सत्पात्र सहायता ट्रस्ट,विघ्नहर जैन बैंक की ओर से मंच ट्रस्ट समाज उन्नति के इस अभियान में सहभागी होने से हार्दिक धन्यवाद।आभार, बधाई।??⛱️?️????✌️✈️??* |
|
2026-02-18 20:02:20 |
|
| 9304 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*धान लगाकर किसान*
*या बनोगे*
*ध्यान लगाकर भगवान ❓*
*कवि- मुनि समाधिसागर*
*' विद्यासागरदास"*
*क्षेत्रपाल ललितपुर*
*०१/०९/२००६*
*उत्तम सत्य धर्म*
*खेत में किसान*
*करता है काम*
*लगाता है धान*
*ताला का नहीं नाम*
*वतन की बढ़ती शान*
*कहलाता है यह भारत*
*कृषि प्रधान हिंदुस्तान ।*
*तीर्थ क्षेत्र में इन्सान*
*रहता है निष्काम*
*लगाता है ध्यान*
*भाला का नहीं नाम*
*चेतन की बढ़ती शान*
*कहलाता है यह भारत*
*ऋषि प्रधान हिंदुस्तान ।*
*खेत का धान*
*तन धन वृध्दि की खान*
*प्रयत्न से जमता है*
*किस्मत से खपता है*
*कहलाता है लगानेवाला धान*
*वह वीर देश की शान*
*जो भोला भाला किसान*
*आगे देता है जीवनदान*
*करता है तन का कल्याण ।*
*तीर्थ क्षेत्र का ध्यान*
*मन वचन शुध्दि की खान*
*त्रय रत्न में रमता है*
*हिम्मत से जपता है*
*कहलाता है लगानेवाला ध्यान*
*वह भ.महावीर संदेश की शान*
*जो भोला भाला इन्सान*
*आगे बनता है भगवान*
*करता है चेतन का कल्याण ।*
*अरे ❗खेत अरु क्षेत्र में*
*अन्तर इतना जान*
*धान लगत है खेत में*
*लगत क्षेत्र में ध्यान ।*
*धान लगा कृषि करोगे*
*या फिर*
*ध्यान लगा ऋषि बनोगे*
*अतः कहो मित्रों ❗धान ❓*
*या लगाओगे ध्यान ❓*
*बोलो भव्यों ❗ किसान*
*या बनोगे भगवान*
*जी हाॅं इतना जरूर कहूॅंगा कि*
*हे जवान ❗दे जबान ❗ ले सम्मान ❗*
*कि* *व्यसनी,आतंकवादी,गौहत्यारा*
*महावीर स्वामी के देश को*
*न था ,न है , न होगा प्यारा*
*जीओ और जीने दो का नारा*
*था ..., है ...,रहेगा हमारा*
*फिर देखो सुख शांति से*
*रहेगा अखण्ड भारत* |
|
2026-02-18 20:02:18 |
|
| 9302 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
Check out this video from this search, राजीव दीक्षित चाय के बारे में <a href="https://share.google/9NHTUX7ULMiLRxixo" target="_blank">https://share.google/9NHTUX7ULMiLRxixo</a>
*चाय छोड़ने से ९० हजार करोड़ रू बचेंगे भारत के तथा किसान खेती समृद्ध कैसे होगी सुनियेगा दीक्षित जी को।*
*अदरक अभक्ष कंदमूल होने से नरक का द्वार है।चीनी में अम्लीय गुण होते हैं पर गुड़ में क्षारिय लाभदायक इसलिए गुड़ की चाय पी सकते हैं।या उकाली।*
*चाय छोड़ों अभियानक:- विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
|
2026-02-18 20:02:16 |
|
| 9303 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*सकृद्वारे नमस्कारे ,परदेवकृते सति*
*परदारेषु लक्षेषु ,तस्मात् चतुर्गुणं पापं*
*कुदेवादि को एक बार ही नमन करने से परस्त्री सेवन का जो पाप लगता उससे चौगुना पाप लगता है ।*
*जिस दर पर सर ना झुके*
*वह सच्चा दर नाही*
*जो सर हर दर पर झुके*
*वह सच्चा सर नाही ।*
*कच्चा सर भाई*
*अच्छा सर नाही*
*सम्यग्दर्शन से जीव ना तो नारकी , मानव ,तिर्यंच भी नहीं होता। या तो देव या मोक्ष ।जिनको दुर्गति से बचना है वे कुदेवादि से दूर रहे ।ऐसा जैनागम है जी ।*
*पहले मनुष्या, तिर्यंच ,नरक आयु का बंध हो जाए और बाद में सम्यक्त्व हो तो वह उत्तम भोगभूमि का मानव या तिर्यंच ही होगा और नरकायु का बंध हो तो सातवे नरक से आयु कम करके प्रथमादि में आ जाएगा जैसे श्रेणिक राजा की सातवे नरक की तेतीस सागर की आयु थी क्षायिक सम्यक्त्व होनेपर प्रथम नरक की केवल चौरासी हजार वर्ष की आयु रह गयी । यह फायदा है केवल जैन धर्म को ही मानने का ।*
*सागर का परिमाण*
*एक हजार मीटर का एक कि. मी. और लगभग एक हजार छह सौ मीटर का एक मैल होता है । दो मैल का एक कोस होता है । चार कोस का एक योजन होता है । एक योजन में आठ मैल लगभग १३ कि .मी . मतलब मवाना शहर से हस्तिनापुर तक गहरा ,लंबा, चौडा गड्ढा उसमें उत्तम भोग भूमि के सात दिन तक के नवजात मेंढे के बाल के उतने टुकडे जिस अंतिम टुकडे का फिर टुकडा ना हो उससे वह गड्ढा भरनेपर उस पर से रूलर मतलब चक्रवर्ती का कटक सेना चली जाए इतना ठोस भर जानेपर हर सौ साल में बाल का एक टुकडा निकाला जाए तबतक जबतक एक योजन का गड्ढा गाली ना हो तबतक खाली करने में जितना समय लगता है उतने समय को एक व्यवहार पल्य कहते है उस व्यवहार पल्य को असंख्यात से गुना करो जो लब्ध आये उसे एक उध्दार पल्य कहते है । उस उध्दार पल्य को असंख्यात से गुना करनेपर एक अध्दापल्य होता है । दस करोड अध्दापल्य को दस करोड अध्दापल्य को गुना करनेपर जो लब्ध आये उसे एक सागर कहते है । इतना करना चाआहे गुना तो आज का कॅलक्युलेटर भी काम न कर पाएगा । ऐसे तेतीस सागर तक सातवे नरक में मारकाट चलती है पर मर नहीं पाता । ऐसे दुखों से सचमुच बचना चाहते हो तो आज से केवल जैन सच्चे देव शास्त्र ,गुरू को ही माने और मिथ्यात्वी अपात्र ,कुपात्र दान देना बंद करेंगे तभी इन दुखों से बचना संभव है जी । व्यावहारिकता छोडे और जैन धर्म को ही माने तभी कल्याण संभव है अन्यथा नहीं ।* |
|
2026-02-18 20:02:16 |
|
| 9301 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
Check out this video from this search, राजीव दीक्षित चाय के बारे में <a href="https://share.google/r1540h5fdFYQ5V60B" target="_blank">https://share.google/r1540h5fdFYQ5V60B</a>
*गधे, कुत्ते आदि भी चाय नहीं पीते केवल मूर्ख मानव ही पीता है।*
*अच्छी चाय विदेश जाती है और जो डस्ट टी धूलमय चाय भारत आती है ।चाय से विदेशी पनप रहे हैं ।दूध पीने से भारतीय पनपेंगे।सोचिए चाय दासों भारत के समर्थक हो या विदेश के।*
*बिना अदरक की गुड़ पानी वाली चाय पत्ती बिन तरल पिए। बढ़े बड़े लोगोंने भी चाय नहीं पी।*
*प्रचारक: विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
|
2026-02-18 20:02:15 |
|
| 9300 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
Check out this video from this search, राजीव दीक्षित चाय के बारे में <a href="https://share.google/p0um9DbQID1dvT2zI" target="_blank">https://share.google/p0um9DbQID1dvT2zI</a>
*उपवास लागू होता नहीं चाय पीने से।*
*गौ रक्षा चाहते हो तो लगाओ सीने से*
*चाय पी क्या दोस्तों बेकार है जीने से*
*चाय पर चलो मतलब घोटाले की बात करने लेन-देन के लिए चलो।*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
|
2026-02-18 20:02:13 |
|
| 9299 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
Check out this video from this search, *
*चाय अहिंसक पिए तो वह शाकाहारी हो ही नहीं सकता ।बल्कि गौहत्या समर्थक होने से पापी है।चाय की हाय मत लेना*
*जैनी जैसे आचरणवाले,बाल ब्रह्मचारी अहिंसक, शाकाहारी,वैज्ञानिक श्री राजीव दीक्षितजी के चाय के बारे में सबूत के साथ सतर्क विचार* <a href="https://share.google/HAqXwOZdJQjTiesRr" target="_blank">https://share.google/HAqXwOZdJQjTiesRr</a>
*निषेधक: विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
|
2026-02-18 20:02:12 |
|