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Message
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Status
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| 74479 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरवे नमो नमः?
?आचार्य गुरवे विद्यासागराय नमः?
??जयजिनेंद्रजी?
? *आज का नियम* ?
? *ऊँ ह्रीं अर्हम श्री शीतलनाथ जिनेंद्राय नमो नमः इस मंत्र की १ माला करें और रात्रि में अनाज ग्रहण करने का त्याग*?
?सपरिवार नियम पालन करने वालों को विशेष धन्यवाद ?
?भूषण जैन?
?छोटे से नियम मुक्ति कीं आशा ?
?मोक्ष जाने कीं तीव्र अभिलाषा ?
*?आज का नियम पालन करने वाले कृपया नियम हैं लिखकर ग्रृप में भेजे?*
*तिथि-वैशाख कृष्ण अष्टमी (८)*
*नोट:?एक नियम भी पालन कर सकते है* |
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2026-04-10 11:30:58 |
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| 74480 |
40449721 |
माँ विशुद्ध भक्त परिवार?6 |
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2026-04-10 11:30:58 |
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| 74475 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जयजिनेन्द्रजी?
*रिश्तो की पाठशाला वही चलती है,जहाँ राजनीति और गणित के विषय नहीं होते।*
सुप्रभात?
??इंडिया नहीं भारत बोलों?? |
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2026-04-10 11:30:52 |
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| 74476 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जयजिनेन्द्रजी?
*रिश्तो की पाठशाला वही चलती है,जहाँ राजनीति और गणित के विषय नहीं होते।*
सुप्रभात?
??इंडिया नहीं भारत बोलों?? |
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2026-04-10 11:30:52 |
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| 74474 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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✨ आचार्य श्री उमास्वामी द्विसहस्रावदी महोत्सव एवं तत्त्वार्थसूत्र वर्ष - ✨
? "सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः" ?
पूरे भारतवर्ष में गूंजेगा एक ही स्वर— "हर घर चर्चा, तत्त्वार्थ सूत्र की!"
आचार्य उमास्वामी महाराज के महान उपकार को समर्पित, जैन धर्म के प्राण 'तत्त्वार्थसूत्र' के 2000 वर्ष पूर्ण होने पर अपने नगर में भव्य शिविर एवं महोत्सव का आयोजन करें।
? महोत्सव अवधि:
प्रारंभ: 19 जून 2026 (श्रुत पंचमी)
समापन: 9 जून 2027 (श्रुत पंचमी)
? शिविर की मुख्य गतिविधियाँ:
✍️ सूत्र लेखन एवं वाचन
? गहन स्वाध्याय एवं संगोष्ठी
? चित्रकला एवं सूत्र कथा प्रतियोगिता
तत्त्वार्थसूत्र व्रत एवं उपवास
भव्य तत्त्वार्थसूत्र विधान
? विशेष परीक्षा एवं प्रतियोगिताएं
? विशेष आकर्षण:
सभी सफल परीक्षार्थियों को कुंदकुंद ज्ञानपीठ परीक्षा बोर्ड, इंदौर द्वारा आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
? अपील:
सभी स्थानीय विद्वान, महिला मंडल और मंदिर कमेटियाँ अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षण शिविर आयोजित कर धर्म प्रभावना में अपना योगदान दें।
? संपर्क एवं पंजीकरण हेतु:
संयोजक: ब्र. अनिल कुमार जैन (अधिष्ठाता, श्री दि. जैन उदासीन आश्रम, इंदौर) - 9770872087
ब्र.संदीप भैया सरल
ब्र.प्रदीप भैया पीयूष
ब्र. सुनील भैया इंदौर
अध्यक्ष: श्री अमित जी कासलीवाल
प्रबंधक : अरविंद जी जैन
राष्ट्रीय प्रचारक: श्री पंकज शास्त्री, सलूंबर - 7372937019
नोट: इस ज्ञान दान के महोत्सव में सभी विद्वान.विदुषी। अपने स्तर पर प्रभारी बनकर इस महोत्सव की प्रभावना करे
व्हाट्सप्प ग्रुप विद्वत समूह
<a href="https://chat.whatsapp.com/JOKoClGSkKN3RtXcTJecJM?mode=gi_t" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/JOKoClGSkKN3RtXcTJecJM?mode=gi_t</a> |
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2026-04-10 11:30:20 |
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| 74473 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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✨ आचार्य श्री उमास्वामी द्विसहस्रावदी महोत्सव एवं तत्त्वार्थसूत्र वर्ष - ✨
? "सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः" ?
पूरे भारतवर्ष में गूंजेगा एक ही स्वर— "हर घर चर्चा, तत्त्वार्थ सूत्र की!"
आचार्य उमास्वामी महाराज के महान उपकार को समर्पित, जैन धर्म के प्राण 'तत्त्वार्थसूत्र' के 2000 वर्ष पूर्ण होने पर अपने नगर में भव्य शिविर एवं महोत्सव का आयोजन करें।
? महोत्सव अवधि:
प्रारंभ: 19 जून 2026 (श्रुत पंचमी)
समापन: 9 जून 2027 (श्रुत पंचमी)
? शिविर की मुख्य गतिविधियाँ:
✍️ सूत्र लेखन एवं वाचन
? गहन स्वाध्याय एवं संगोष्ठी
? चित्रकला एवं सूत्र कथा प्रतियोगिता
तत्त्वार्थसूत्र व्रत एवं उपवास
भव्य तत्त्वार्थसूत्र विधान
? विशेष परीक्षा एवं प्रतियोगिताएं
? विशेष आकर्षण:
सभी सफल परीक्षार्थियों को कुंदकुंद ज्ञानपीठ परीक्षा बोर्ड, इंदौर द्वारा आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
? अपील:
सभी स्थानीय विद्वान, महिला मंडल और मंदिर कमेटियाँ अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षण शिविर आयोजित कर धर्म प्रभावना में अपना योगदान दें।
? संपर्क एवं पंजीकरण हेतु:
संयोजक: ब्र. अनिल कुमार जैन (अधिष्ठाता, श्री दि. जैन उदासीन आश्रम, इंदौर) - 9770872087
ब्र.संदीप भैया सरल
ब्र.प्रदीप भैया पीयूष
ब्र. सुनील भैया इंदौर
अध्यक्ष: श्री अमित जी कासलीवाल
प्रबंधक : अरविंद जी जैन
राष्ट्रीय प्रचारक: श्री पंकज शास्त्री, सलूंबर - 7372937019
नोट: इस ज्ञान दान के महोत्सव में सभी विद्वान.विदुषी। अपने स्तर पर प्रभारी बनकर इस महोत्सव की प्रभावना करे
व्हाट्सप्प ग्रुप विद्वत समूह
<a href="https://chat.whatsapp.com/JOKoClGSkKN3RtXcTJecJM?mode=gi_t" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/JOKoClGSkKN3RtXcTJecJM?mode=gi_t</a> |
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2026-04-10 11:30:19 |
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| 74472 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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???
*प्रार्थना सदा*
*कुछ माँगने के लिए* *नहीं*
*अपितु*
*ईश्वर ने जो कुछ दिया है*
*उसके प्रति आभार*
*व्यक्त करने के लिए होनी चाहिए* !
?? |
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2026-04-10 11:27:19 |
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| 74471 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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???
*प्रार्थना सदा*
*कुछ माँगने के लिए* *नहीं*
*अपितु*
*ईश्वर ने जो कुछ दिया है*
*उसके प्रति आभार*
*व्यक्त करने के लिए होनी चाहिए* !
?? |
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2026-04-10 11:27:18 |
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| 74470 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*पाखंड के विरुद्ध आवाज़ या धर्म विरोध? — एक कटु सत्य, जिसे अब अनसुना नहीं किया जा सकता*
हम बार-बार एक ही बात कहते हैं, और पूरे साहस के साथ कहते हैं—हम जैन धर्म के विरोधी नहीं हैं। हम उस पाखंड, उस आडंबर, उस दिखावे के विरोधी हैं, जिसने धीरे-धीरे जैन धर्म की पवित्र आत्मा को जकड़ लिया है। लेकिन जैसे ही कोई इस सड़ांध को उजागर करता है, उसे तुरंत “धर्म विरोधी” घोषित कर दिया जाता है।
और यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज जैन समाज में पाखंड और आडंबर ही धर्म का पर्याय बन चुके हैं? क्या अब सच्चाई बोलना, सवाल पूछना, और गलत को गलत कहना ही अपराध हो गया है? अगर ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार है।
जैन धर्म की नींव त्याग, तप, संयम और सत्य पर रखी गई थी। हमारे तीर्थंकरों ने नंगे पैर तप किया, भूखे रहकर आत्मा को शुद्ध किया, और संसार को यह सिखाया कि धर्म भीतर की यात्रा है, बाहर का प्रदर्शन नहीं। लेकिन आज स्थिति क्या है? आज धर्म के नाम पर मंच सजाए जा रहे हैं, भीड़ इकट्ठा की जा रही है, चंदे के आंकड़े गिनाए जा रहे हैं, और भक्ति को भी प्रतिस्पर्धा बना दिया गया है।
आज अगर कोई साधु या प्रवचनकर्ता सादगी से जीवन जीता है, तो वह पीछे छूट जाता है, और जो आडंबर करता है, प्रचार करता है, वही “महान” बन जाता है। क्या यही जैन धर्म है? क्या यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमारे तीर्थंकरों ने सब कुछ त्याग दिया था?
सच्चाई यह है कि आज धर्म नहीं, “धर्म का व्यापार” चल रहा है। और इस व्यापार को बचाने के लिए, हर उस आवाज़ को दबाया जाता है जो सवाल उठाती है। क्योंकि सवाल उठेगा तो जवाब देना पड़ेगा, और जवाब देने के लिए ईमानदारी चाहिए—जो आज दुर्लभ होती जा रही है।
जब हम लिखते हैं, तो हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाना नहीं होता। हम उस मानसिकता पर प्रहार करते हैं, जिसने धर्म को एक तमाशा बना दिया है। लेकिन दुख इस बात का है कि समाज सच्चाई सुनने के बजाय, सच्चाई कहने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर देता है।
लोग कहते हैं—“आप धर्म के खिलाफ लिखते हैं।”
हम पूछते हैं—“क्या पाखंड ही धर्म है?”
अगर हाँ, तो हम सच में उसके खिलाफ हैं।
लेकिन अगर धर्म सच्चाई, संयम और आत्मशुद्धि का नाम है, तो हम उसी के पक्ष में खड़े हैं—और पूरी ताकत से खड़े हैं।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं है, यह लड़ाई उस आत्मा की है, जो धीरे-धीरे दिखावे के बोझ तले दबती जा रही है। यह संघर्ष उस सत्य का है, जो शोर में कहीं खो गया है।
अब समय आ गया है कि समाज खुद से सवाल पूछे—क्या हम सच में धर्म का पालन कर रहे हैं, या केवल उसका अभिनय कर रहे हैं? क्या हम तीर्थंकरों के मार्ग पर चल रहे हैं, या केवल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं?
अगर आज भी हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। वे पूछेंगी—जब धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ रहा था, तब आप क्या कर रहे थे?
और उस दिन हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा।
इसलिए हम लिखेंगे, बार-बार लिखेंगे, और तब तक लिखेंगे जब तक समाज जाग नहीं जाता। चाहे हमें कुछ भी कहा जाए—“धर्म विरोधी”, “विवादित”, या कुछ और—लेकिन हम सच का साथ नहीं छोड़ेंगे।
क्योंकि हमारे लिए धर्म कोई दिखावा नहीं है, धर्म एक साधना है… और साधना में सत्य से बड़ा कोई आभूषण नहीं होता।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-10 11:24:56 |
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| 74469 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*पाखंड के विरुद्ध आवाज़ या धर्म विरोध? — एक कटु सत्य, जिसे अब अनसुना नहीं किया जा सकता*
हम बार-बार एक ही बात कहते हैं, और पूरे साहस के साथ कहते हैं—हम जैन धर्म के विरोधी नहीं हैं। हम उस पाखंड, उस आडंबर, उस दिखावे के विरोधी हैं, जिसने धीरे-धीरे जैन धर्म की पवित्र आत्मा को जकड़ लिया है। लेकिन जैसे ही कोई इस सड़ांध को उजागर करता है, उसे तुरंत “धर्म विरोधी” घोषित कर दिया जाता है।
और यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज जैन समाज में पाखंड और आडंबर ही धर्म का पर्याय बन चुके हैं? क्या अब सच्चाई बोलना, सवाल पूछना, और गलत को गलत कहना ही अपराध हो गया है? अगर ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार है।
जैन धर्म की नींव त्याग, तप, संयम और सत्य पर रखी गई थी। हमारे तीर्थंकरों ने नंगे पैर तप किया, भूखे रहकर आत्मा को शुद्ध किया, और संसार को यह सिखाया कि धर्म भीतर की यात्रा है, बाहर का प्रदर्शन नहीं। लेकिन आज स्थिति क्या है? आज धर्म के नाम पर मंच सजाए जा रहे हैं, भीड़ इकट्ठा की जा रही है, चंदे के आंकड़े गिनाए जा रहे हैं, और भक्ति को भी प्रतिस्पर्धा बना दिया गया है।
आज अगर कोई साधु या प्रवचनकर्ता सादगी से जीवन जीता है, तो वह पीछे छूट जाता है, और जो आडंबर करता है, प्रचार करता है, वही “महान” बन जाता है। क्या यही जैन धर्म है? क्या यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमारे तीर्थंकरों ने सब कुछ त्याग दिया था?
सच्चाई यह है कि आज धर्म नहीं, “धर्म का व्यापार” चल रहा है। और इस व्यापार को बचाने के लिए, हर उस आवाज़ को दबाया जाता है जो सवाल उठाती है। क्योंकि सवाल उठेगा तो जवाब देना पड़ेगा, और जवाब देने के लिए ईमानदारी चाहिए—जो आज दुर्लभ होती जा रही है।
जब हम लिखते हैं, तो हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाना नहीं होता। हम उस मानसिकता पर प्रहार करते हैं, जिसने धर्म को एक तमाशा बना दिया है। लेकिन दुख इस बात का है कि समाज सच्चाई सुनने के बजाय, सच्चाई कहने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर देता है।
लोग कहते हैं—“आप धर्म के खिलाफ लिखते हैं।”
हम पूछते हैं—“क्या पाखंड ही धर्म है?”
अगर हाँ, तो हम सच में उसके खिलाफ हैं।
लेकिन अगर धर्म सच्चाई, संयम और आत्मशुद्धि का नाम है, तो हम उसी के पक्ष में खड़े हैं—और पूरी ताकत से खड़े हैं।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं है, यह लड़ाई उस आत्मा की है, जो धीरे-धीरे दिखावे के बोझ तले दबती जा रही है। यह संघर्ष उस सत्य का है, जो शोर में कहीं खो गया है।
अब समय आ गया है कि समाज खुद से सवाल पूछे—क्या हम सच में धर्म का पालन कर रहे हैं, या केवल उसका अभिनय कर रहे हैं? क्या हम तीर्थंकरों के मार्ग पर चल रहे हैं, या केवल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं?
अगर आज भी हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। वे पूछेंगी—जब धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ रहा था, तब आप क्या कर रहे थे?
और उस दिन हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा।
इसलिए हम लिखेंगे, बार-बार लिखेंगे, और तब तक लिखेंगे जब तक समाज जाग नहीं जाता। चाहे हमें कुछ भी कहा जाए—“धर्म विरोधी”, “विवादित”, या कुछ और—लेकिन हम सच का साथ नहीं छोड़ेंगे।
क्योंकि हमारे लिए धर्म कोई दिखावा नहीं है, धर्म एक साधना है… और साधना में सत्य से बड़ा कोई आभूषण नहीं होता।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-10 11:24:55 |
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