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236 40449752 ?3 विद्यांजलि ब्रॉडकास्ट ? <a href="https://youtu.be/Ug-hLHCs8eY?si=ywX-BnC8p-cvJ982" target="_blank">https://youtu.be/Ug-hLHCs8eY?si=ywX-BnC8p-cvJ982</a> *क्या आपमें से किसी को भी ऐसा नहीं लगता कि कम से कम मंदिर जी में तो पशु चर्बी व हानिकारक रसायनों से मुक्त विद्यांजलि निर्दोष वाशिंग पाउडर, लिक्विड,बार, डिशवाॅशिंग लिक्विड, पाउडर, बाथरूम क्लीनर, फ्लोर क्लीनर का ही उपयोग होना चाहिए*... ??? *आश्चर्य ❗ ❗ ❗* <a href="https://wa.me/c/919928200660" target="_blank">https://wa.me/c/919928200660</a> *यदि लगता है तो उत्पाद शीघ्र ? कार्ट में एड करके लिस्ट मैसेज कर दीजिए* *मंदिर जी में उपयोग हेतु... वाशिंग पाउडर /लिक्विड, डिशवाॅशिंग पाउडर /लिक्विड आज ही मंगवाएंँ* *यदि उचित लगे तो... अधिक से अधिक लोगों को शेयर कीजिएगा ?* 2026-02-12 08:08:24
235 40449729 माँ विशुद्ध भक्त परिवार?7 *? स्वस्तिधाम प्रणेत्री ⛴️* 2026-02-12 08:07:13
234 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-02-12 08:06:03
233 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/Mgi3agGLybM" target="_blank">https://youtu.be/Mgi3agGLybM</a> 2026-02-12 08:05:57
232 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *आर्यिका मां विज्ञानमति माताजी द्वारा रचित सम्यक्त्व मञ्जूषा एवं सच्चे देव का स्वरूप* *देवों में सम्यक्त्व उत्पत्ति के चार कारण कहे गए है -* _१- जिनमहिमा दर्शन २- धर्म श्रवण ३- जाति स्मरण और ४- देव ऋद्धि दर्शन_ *सम्यग्दर्शन की प्राप्ति कैसे होती है* _जब देशना लब्धि और काल लब्धि आदि बहिरंग कारण तथा करण लब्धि रूप अन्तरंग कारण सामग्री प्राप्त होती है, तभी यह भव्य प्राणी विशुद्ध सम्यग्दर्शन का धारक हो सकता है।_ *(मल्लिपुराण ९/११६)* _क्षयोपशम लब्धि, विशुद्ध लब्धि, देशना लब्धि तथा प्रायोग्य लब्धि ये चार लब्धियां तो अभव्य जीवों के भी हो सकती है लेकिन करण लब्धि को प्राप्त कर लेने पर नियम से सम्यग्दर्शन होता है।_ *(धवला जी ६/२०३-५)* _तीनों कारणों के अंतिम समय में सम्यक्त्व की उत्पत्ति होती है। इस सूत्र के द्वारा क्षयोपशम लब्धि,विशुद्धि लब्धि, देशना लब्धि और प्रायोग्य लब्धि इन चारों लब्धियों की प्ररुपणा की गई है।_ *(धवला जी ६/२०४)* _दर्शन मोह का उपशम करने वाला (करण लब्धि में प्रवेश करने के लिए) जीव उपद्रव व उपसर्ग आने पर भी उसका उपशम किए बिना नहीं रहता है।_ *(धवला ६)* _अर्थात् वह निश्चित रूप से सम्यक्त्व प्राप्त कर लेता है।_ *?️ अनादि मिथ्या दृष्टि भव्य के कर्मों के उदय से प्राप्त कलुषता के रहते हुए उपशम सम्यक्त्व कैसे होता हैं ⁉️* _?️ अनादिकाल से मिथ्यात्व में पड़ा हुआ जीव भी काल लब्धि आदि कारणों के मिलने पर सम्यक्त्व को प्राप्त कर लेता है। उसमें एक लब्धि यह है कि कर्मों से घिरे हुए भव्य जीव के संसार भ्रमण का काल अधिक से अधिक अर्धपुद्गल परावर्तन प्रमाण बाकी रहने पर वह प्रथमोपशम सम्यक्त्व को ग्रहण करने का पात्र होता है। यदि उसके परिभ्रमण का काल अर्द्धपुद्गल परावर्तन से अधिक शेष होता है तो प्रथम सम्यक्त्व को ग्रहण करने के योग्य नहीं होता है।_ *(कार्तिकेय अनुप्रेक्षा टीका ३०८)* जिस प्रकार स्वर्ण पाषाण शोधने की सामग्री के संयोग से शुद्ध स्वर्ण बन जाता है,उसी प्रकार काल आदि लब्धि की प्राप्ति से आत्मा परमात्मा बन जाता है। *(मोक्षपाहुड २४)* _मिथ्यात्व से पुष्ट तथा कर्ममल सहित आत्मा कभी कालादि लब्धि के प्राप्त होने पर क्रम से सम्यग्दर्शन, व्रत दक्षता,कषायों का विनाश और योगनिरोध के द्वारा मुक्ति प्राप्त कर लेता है।_ *(आत्मानुशासन २४१)* _अनादिकाल से चला आया कोई जीव काल आदि लब्धियों का निमित्त पाकर तीनों कारण रूप परिणामों के द्वारा मिथ्यात्वादि सात प्रकृतियों का उपशम करता है तथा संसार की परिपाटी का विच्छेद कर उपशम सम्यग्दर्शन प्राप्त करता है।_ *(मल्लिपुराण ६२/३१४-१५)* _आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी ने तत्त्वार्थसूत्र महाग्रंथ की सर्वप्रथम टीका श्री सर्वार्थसिद्धि ग्रंथ में काल लब्धि का वर्णन करते हुए लिखा है - अनादि मिथ्या दृष्टि के काल लब्धि आदि के निमित्त से इनका उपशम होता है अर्थात् प्रथमोपशम सम्यक्त्व प्राप्त होता है। यहां कार लब्धि को बताते हैं - कर्म युक्त कोई भी भव्य आत्मा अर्द्धपुद्गल परिवर्तन नाम के काल के शेष रहने पर प्रथम सम्यक्त्व को ग्रहण करने के योग्य होता है, इससे अधिक काल के शेष रहने पर नहीं होता है, यह एक काल लब्धि है। दूसरी काल लब्धि का संबंध कर्म स्थिति से हैं। उत्कृष्ट स्थिति वाले कर्मों के शेष रहने पर या जघन्य स्थिति वाले कर्मों के शेष रहने पर प्रथम सम्यक्त्व का लाभ नहीं होता है। जब बंधने वाले कर्मों की स्थिति अन्त:कोड़ाकोड़ी सागर पड़ती है और विशुद्ध परिणामों के वश से सत्ता में स्थित कर्मों की स्थिति संख्यात हजार सागर कम अन्त:कोड़ाकोड़ी सागर प्राप्त होती है,तब यह जीव प्रथम सम्यक्त्व के योग्य होता है। एक अर्थात् तीसरी काल लब्धि भव की अपेक्षा होती है - जो भव्य है,संज्ञी है,पर्याप्तक है और सर्व विशुद्ध है, वह प्रथम सम्यक्त्व को उत्पन्न करता है।_ *(सर्वार्थसिद्धि २/३)* ???????? 2026-02-12 08:01:55
231 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE *जिसे मनाएगा पूरा भारत,* *और फैलेगा हर्ष अपरंपार,* *जिनागमपंथ दिवस यानी* *जिनशासन का सबसे बड़ा त्यौहार।* श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी यतिराज की पावन प्रेरणा से आइए इस 13 फ़रवरी 2026, फाल्गुन कृष्ण एकादशी को तीर्थंकर श्री ऋषभदेव का ज्ञान कल्याणक महोत्सव यानी धर्मतीर्थ प्रवर्तन पर्व को “जिनागम पंथ दिवस” के रूप में उत्साह एवं हर्ष के साथ मनायें। यह महज एक सामान्य दिन नहीं… बल्कि हमारे स्वर्णिम इतिहास का, जिनशासन के सर्वप्रथम शंखनाद का, महापर्व है, महा मंगल दिवस है… जी हाँ ! जिनागमपंथ दिवस है… *☀️ जुड़िए हमारे साथ :* <a href="https://www.instagram.com/jinagampanth?" target="_blank">https://www.instagram.com/jinagampanth?</a> *॥ जिनागमपंथ जयवंत हो ॥* 2026-02-12 08:00:48
230 40449709 जैन युवा सेना? 2026-02-12 07:58:02
229 40449709 जैन युवा सेना? 2026-02-12 07:58:00
228 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी इस वीडियो को एक बार जरूर देखें और ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए 2026-02-12 07:57:59
227 40449749 जिनोदय?JINODAYA <a href="https://www.facebook.com/share/v/1CLLKMEqi2/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/v/1CLLKMEqi2/</a> ?????? श्री पद्मप्रभु जी अभिषेक दर्शन ?????? 2026-02-12 07:57:49