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230845 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?1 -प्रश्न - भव्य किसे कहते हैं ? ?उत्तर - जसके सम्यग्दर्शनादि प्राप्त होने की योग्यता हो अर्थात् मोक्ष जाने की योग्यता हो उसे भव्य कहते हैं। ?2-प्रश्न- मोक्ष में कौन से भाव रहते हैं ? ?उत्तर - "अन्यत्र केवलसम्यक्त्त्वज्ञानदर्शनसिद्धत्वेभ्यः" केवलसम्यक्त्व, केवलज्ञान, केवलदर्शन और सिद्धत्व इन भावों को छोड़कर मोक्ष में अन्य भावों का अभाव हो जाता है। ?3-प्रश्न- समस्त कर्मों का क्षय हो जाने के बाद जीव कहाँ जाता है ? ?उत्तर - "तदनन्तरमूध्वं गच्छत्यालोकान्तात्" समस्त कर्मों का क्षय होने के बाद मुक्त जीव लोक के अन्त भाग पर्यंत ऊपर को जाता है। ?4-प्रश्न- मुक्त जीव के ऊध्वगमन करने का क्या कारण है ? ?उत्तर-पूर्वप्रयोगादसङ्गत्वाद्बन्धच्छेदात्तथागतिपरिणामाच्च" पूर्व प्रयोग (पूर्वसंस्कार) से सङ्गरहित होने से, कर्म बन्धन के नष्ट होने से और तथागतिपरिणाम अर्थात् ऊध्वगमन का स्वभाव होने से मुक्त जीव ऊध्वगमन करना है। ?5- प्रश्न-उक्त पूर्वप्रयोग आदि चारों कारणों में कौन से दृष्टांत दिये गए हैं ? ?उत्तर - "आविध्दकुलालचक्रवद्वयपगतलेवालाबुवदेरण्डबीजवदग्निशिखावच्च"। घुमाये गये कुम्हार के चक्र के समान, लेप से मुक्त हुई तुमड़ी के समान, एरण्ड के बीज के समान और अग्नि की शिखा के समान। ?6-प्रश्न-मुक्तजीव लोक के अन्त भाग से ऊपर क्यों नहीं जाते हैं ? ?उत्तर - "धर्मास्तिकायाभावात्" धर्म द्रव्य का अभाव होने से मुक्त जीव लोक के अग्रभाग के आगे नहीं जा सकते हैं। ?7-प्रश्न-लोक के अग्रभाग पर क्या है जहाँ मुक्त जीव ठहर जाते हैं ? ?उत्तर - लोक के अंत में (अग्रभाग में) ४५ लाख योजन विस्तार वाली सिद्धशिला है मुक्त जीव उसी के ऊपर तनुवातवलय में ठहर जाते हैं। ?8-प्रश्न-लोक के बाहर क्या है ? ?उत्तर - लोक के बाहर अलोकाकाश है। 2026-06-15 04:03:17
230843 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ??आपका सम्पूर्ण दिवस मंगलमय एवं आनंदमय हो?? 2026-06-15 04:02:34
230844 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ??आपका सम्पूर्ण दिवस मंगलमय एवं आनंदमय हो?? 2026-06-15 04:02:34
230841 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-06-15 04:02:19
230842 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-06-15 04:02:19
230840 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ??सादर जय जिनेन्द्र?? 2026-06-15 04:01:43
230839 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? ??सादर जय जिनेन्द्र?? 2026-06-15 04:01:42
230838 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??️ *आत्म संबोधन* ?️? ✨ *वीतरागता ही आत्मकल्याण का मार्ग है* ✨ जो पुरुष वीतराग (राग-द्वेष से रहित), निजानन्दस्वरूप (आत्मिक आनन्द में स्थित) तथा *शुद्ध आत्मतत्त्व की भावना* में लीन रहता है, वह राग-द्वेष का पूर्ण त्याग कर देता है। ? ऐसा महापुरुष *केवल ज्ञान ? और दर्शन* ? के आधार पर समस्त जीवों को समान दृष्टि से देखता है। वह समभाव ? में स्थित होकर शीघ्र ही शिवपुर (मोक्षधाम) ?️ को प्राप्त करता है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *समभाव का लक्षण* ? समभाव का अर्थ है— ⚖️ *जीवन और मृत्यु को समान समझना।* ⚖️ *लाभ और अलाभ (हानि) में सम रहना।* ⚖️ *सुख और दुःख में विचलित न होना।* ⚖️ *अनुकूलता और प्रतिकूलता में समचित्त बने रहना।* ? जो सिद्ध परमात्मा हो चुके हैं और जो भविष्य में सिद्ध होंगे, उनकी महानता का मूल कारण यही *समभाव* है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ?️ मोक्ष और समभाव ?️ ✨ समभाव से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। ? मोक्षस्थान अत्यन्त अद्भुत, अवर्णनीय एवं अनन्त गुणों से परिपूर्ण है। वहाँ— ? केवलज्ञान ? केवलदर्शन ? अनन्त सुख सदैव विद्यमान रहते हैं। ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *जीवन का संदेश* ? मनुष्य को राग-द्वेष का त्याग करके *शुद्ध आत्मा के अनुभवस्वरूप समभाव* का निरन्तर अभ्यास करना चाहिए। यही आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग का सार है। ? ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *संक्षिप्त सार* ? राग-द्वेष का त्याग ⬇️ ? समभाव की प्राप्ति ⬇️ ?️ आत्मानुभूति ⬇️ ?️ मोक्ष की प्राप्ति ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *निष्कर्ष* ? जो व्यक्ति *सुख-दुःख, लाभ-हानि, जीवन-मरण* आदि सभी परिस्थितियों में समभाव रखता है और अपने शुद्ध आत्मस्वरूप में स्थित रहता है, वही मोक्षमार्ग पर अग्रसर होकर परम कल्याण को प्राप्त करता है। ? "*समभाव ही आत्मा का स्वाभाविक धर्म है, और वही मोक्ष का द्वार है।*" ? ? — *राजेश जैन, मैनपुरी*? 2026-06-15 03:43:19
230837 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ??️ *आत्म संबोधन* ?️? ✨ *वीतरागता ही आत्मकल्याण का मार्ग है* ✨ जो पुरुष वीतराग (राग-द्वेष से रहित), निजानन्दस्वरूप (आत्मिक आनन्द में स्थित) तथा *शुद्ध आत्मतत्त्व की भावना* में लीन रहता है, वह राग-द्वेष का पूर्ण त्याग कर देता है। ? ऐसा महापुरुष *केवल ज्ञान ? और दर्शन* ? के आधार पर समस्त जीवों को समान दृष्टि से देखता है। वह समभाव ? में स्थित होकर शीघ्र ही शिवपुर (मोक्षधाम) ?️ को प्राप्त करता है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *समभाव का लक्षण* ? समभाव का अर्थ है— ⚖️ *जीवन और मृत्यु को समान समझना।* ⚖️ *लाभ और अलाभ (हानि) में सम रहना।* ⚖️ *सुख और दुःख में विचलित न होना।* ⚖️ *अनुकूलता और प्रतिकूलता में समचित्त बने रहना।* ? जो सिद्ध परमात्मा हो चुके हैं और जो भविष्य में सिद्ध होंगे, उनकी महानता का मूल कारण यही *समभाव* है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ?️ मोक्ष और समभाव ?️ ✨ समभाव से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। ? मोक्षस्थान अत्यन्त अद्भुत, अवर्णनीय एवं अनन्त गुणों से परिपूर्ण है। वहाँ— ? केवलज्ञान ? केवलदर्शन ? अनन्त सुख सदैव विद्यमान रहते हैं। ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *जीवन का संदेश* ? मनुष्य को राग-द्वेष का त्याग करके *शुद्ध आत्मा के अनुभवस्वरूप समभाव* का निरन्तर अभ्यास करना चाहिए। यही आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग का सार है। ? ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *संक्षिप्त सार* ? राग-द्वेष का त्याग ⬇️ ? समभाव की प्राप्ति ⬇️ ?️ आत्मानुभूति ⬇️ ?️ मोक्ष की प्राप्ति ━━━━━━━━━━━━━━━ ? *निष्कर्ष* ? जो व्यक्ति *सुख-दुःख, लाभ-हानि, जीवन-मरण* आदि सभी परिस्थितियों में समभाव रखता है और अपने शुद्ध आत्मस्वरूप में स्थित रहता है, वही मोक्षमार्ग पर अग्रसर होकर परम कल्याण को प्राप्त करता है। ? "*समभाव ही आत्मा का स्वाभाविक धर्म है, और वही मोक्ष का द्वार है।*" ? ? — *राजेश जैन, मैनपुरी*? 2026-06-15 03:43:18
230835 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म *??दिन की शुरुआत सत्य और अहिंसा के साथ ??* *?? आप सभी आत्मीय स्नेही स्वजनों को सादर सविनय जय जिनेन्द्र आत्म वंदन नमन ??* *??दिन का समापन आप सभी से उत्तम क्षमा के साथ ??* *सबसे क्षमा ?सबको क्षमा ?* 2026-06-15 03:07:44