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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 69832 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*ज्ञान का पतन और अज्ञान का उत्थान — वर्तमान समाज का कटु यथार्थ*
महिमा घटते ज्ञान की, बढ़ते मूढ़ अजान। पूजत भूत पिशाच सब, पंडित बैठ मसान।। यह दोहा आज के समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जिसे हम रोज देखते तो हैं, लेकिन स्वीकार करने से बचते हैं। एक समय था जब ज्ञान, विवेक और सत्य को सर्वोपरि माना जाता था। विद्वानों का सम्मान उनके आचरण, त्याग और सच्चे ज्ञान के कारण होता था। परंतु आज स्थिति बिल्कुल उलटती दिखाई दे रही है। ज्ञान की महिमा दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है और अज्ञान, अंधविश्वास तथा दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। आज मूर्खता को भीड़ का समर्थन मिल रहा है और सच्चा ज्ञानी उपेक्षित होकर किनारे बैठा है। समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो सत्य और तर्क की बजाय चमत्कार, ढोंग और भ्रम में विश्वास करने लगे हैं। भूत-प्रेत, पिशाच और काल्पनिक शक्तियों की पूजा करने वाले लोग बढ़ रहे हैं, जबकि सच्चा ज्ञान देने वाले पंडित, आचार्य और विद्वान उपेक्षा का शिकार होकर जैसे श्मशान में बैठे प्रतीत होते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज और जीवन के हर क्षेत्र में फैल चुकी है। आज लोग दिखावे और बाहरी आडंबर में इतने उलझ चुके हैं कि उन्हें सच्चाई और असल ज्ञान में कोई रुचि ही नहीं रही। जो व्यक्ति जितना अधिक भ्रम फैलाता है, उतना ही अधिक लोकप्रिय हो जाता है, और जो सच्चाई बोलता है, उसे विरोध और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि समाज धीरे-धीरे अपनी मूल जड़ों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं समझा गया तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है, जहाँ ज्ञान पूरी तरह हाशिये पर चला जाएगा और अज्ञान ही समाज का मार्गदर्शक बन जाएगा। आवश्यकता है कि हम स्वयं जागरूक बनें, सच्चे ज्ञान की पहचान करें और अंधविश्वास तथा ढोंग से दूर रहें। तभी हम एक सशक्त, जागरूक और संतुलित समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ ज्ञान को उसका वास्तविक सम्मान मिल सके।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-06 19:02:28 |
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| 69831 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*ज्ञान का पतन और अज्ञान का उत्थान — वर्तमान समाज का कटु यथार्थ*
महिमा घटते ज्ञान की, बढ़ते मूढ़ अजान। पूजत भूत पिशाच सब, पंडित बैठ मसान।। यह दोहा आज के समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जिसे हम रोज देखते तो हैं, लेकिन स्वीकार करने से बचते हैं। एक समय था जब ज्ञान, विवेक और सत्य को सर्वोपरि माना जाता था। विद्वानों का सम्मान उनके आचरण, त्याग और सच्चे ज्ञान के कारण होता था। परंतु आज स्थिति बिल्कुल उलटती दिखाई दे रही है। ज्ञान की महिमा दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है और अज्ञान, अंधविश्वास तथा दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। आज मूर्खता को भीड़ का समर्थन मिल रहा है और सच्चा ज्ञानी उपेक्षित होकर किनारे बैठा है। समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो सत्य और तर्क की बजाय चमत्कार, ढोंग और भ्रम में विश्वास करने लगे हैं। भूत-प्रेत, पिशाच और काल्पनिक शक्तियों की पूजा करने वाले लोग बढ़ रहे हैं, जबकि सच्चा ज्ञान देने वाले पंडित, आचार्य और विद्वान उपेक्षा का शिकार होकर जैसे श्मशान में बैठे प्रतीत होते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज और जीवन के हर क्षेत्र में फैल चुकी है। आज लोग दिखावे और बाहरी आडंबर में इतने उलझ चुके हैं कि उन्हें सच्चाई और असल ज्ञान में कोई रुचि ही नहीं रही। जो व्यक्ति जितना अधिक भ्रम फैलाता है, उतना ही अधिक लोकप्रिय हो जाता है, और जो सच्चाई बोलता है, उसे विरोध और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि समाज धीरे-धीरे अपनी मूल जड़ों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं समझा गया तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है, जहाँ ज्ञान पूरी तरह हाशिये पर चला जाएगा और अज्ञान ही समाज का मार्गदर्शक बन जाएगा। आवश्यकता है कि हम स्वयं जागरूक बनें, सच्चे ज्ञान की पहचान करें और अंधविश्वास तथा ढोंग से दूर रहें। तभी हम एक सशक्त, जागरूक और संतुलित समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ ज्ञान को उसका वास्तविक सम्मान मिल सके।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-06 19:02:27 |
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| 69830 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/QUR8wGJ9B7E" target="_blank">https://youtu.be/QUR8wGJ9B7E</a> |
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2026-04-06 19:02:11 |
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| 69829 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/QUR8wGJ9B7E" target="_blank">https://youtu.be/QUR8wGJ9B7E</a> |
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2026-04-06 19:02:10 |
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| 69828 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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? *कर्मो का प्रतिफल* ? *जब कर्ण के रथ का पहिया जमीन में फंस गया तो वह रथ से उतरकर उसे ठीक करने लगा। वह उस समय बिना हथियार के थे... भगवान कृष्ण ने तुरंत अर्जुन को बाण से कर्ण को मारने का आदेश दिया।*
*अर्जुन ने भगवान के आदेश को मान कर कर्ण को निशाना बनाया और एक के बाद एक बाण चलाए। जो कर्ण को बुरी तरह चुभता हुआ निकल गया और कर्ण जमीन पर गिर पड़े।*
*कर्ण, जो अपनी मृत्यु से पहले जमीन पर गिर गया था, उसने भगवान कृष्ण से पूछा, "क्या यह तुम हो, भगवान? क्या आप दयालु हैं? क्या यह आपका न्यायसंगत निर्णय है! एक बिना हथियार के व्यक्ति को मारने का आदेश?*
*सच्चिदानंदमय भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराए और उत्तर दिया, "अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु भी चक्रव्यूह में निहत्था हो गया था, जब उन सभी ने मिलकर उसे बेरहमी से मार डाला था, आप भी उसमें थे। तब कर्ण तुम्हारा ज्ञान कहाँ था? यह कर्मों का प्रतिफल है. यह मेरा न्याय है।"*
**सोच समझकर काम करें। अगर आज आप किसी सज्जन व्यक्ति को चोट पहुँचाने की नीयत से सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित या मानमर्दन करने की चेष्टा करते हैं, या उनका तिरस्कार करते हैं, तो किसी की सशक्त,सज्जन व्यक्ति की सहजता को कमजोरी मानकर यदि अनुचित फायदा उठाते हैं। भविष्य में वही अनुचित कर्म आपकी प्रतीक्षा कर रहा होगा और शायद वह स्वयं आपको कर्मनुसार ही प्रतिफल देगा! इसलिए ध्यान रखे* *समय बलवान है आप नही*? |
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2026-04-06 19:00:09 |
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| 69827 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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? *कर्मो का प्रतिफल* ? *जब कर्ण के रथ का पहिया जमीन में फंस गया तो वह रथ से उतरकर उसे ठीक करने लगा। वह उस समय बिना हथियार के थे... भगवान कृष्ण ने तुरंत अर्जुन को बाण से कर्ण को मारने का आदेश दिया।*
*अर्जुन ने भगवान के आदेश को मान कर कर्ण को निशाना बनाया और एक के बाद एक बाण चलाए। जो कर्ण को बुरी तरह चुभता हुआ निकल गया और कर्ण जमीन पर गिर पड़े।*
*कर्ण, जो अपनी मृत्यु से पहले जमीन पर गिर गया था, उसने भगवान कृष्ण से पूछा, "क्या यह तुम हो, भगवान? क्या आप दयालु हैं? क्या यह आपका न्यायसंगत निर्णय है! एक बिना हथियार के व्यक्ति को मारने का आदेश?*
*सच्चिदानंदमय भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराए और उत्तर दिया, "अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु भी चक्रव्यूह में निहत्था हो गया था, जब उन सभी ने मिलकर उसे बेरहमी से मार डाला था, आप भी उसमें थे। तब कर्ण तुम्हारा ज्ञान कहाँ था? यह कर्मों का प्रतिफल है. यह मेरा न्याय है।"*
**सोच समझकर काम करें। अगर आज आप किसी सज्जन व्यक्ति को चोट पहुँचाने की नीयत से सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित या मानमर्दन करने की चेष्टा करते हैं, या उनका तिरस्कार करते हैं, तो किसी की सशक्त,सज्जन व्यक्ति की सहजता को कमजोरी मानकर यदि अनुचित फायदा उठाते हैं। भविष्य में वही अनुचित कर्म आपकी प्रतीक्षा कर रहा होगा और शायद वह स्वयं आपको कर्मनुसार ही प्रतिफल देगा! इसलिए ध्यान रखे* *समय बलवान है आप नही*? |
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2026-04-06 19:00:08 |
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| 69825 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?? *प्रेरक वाणी*?
व्यक्ति के अंदर पूर्व संचित संज्ञाये (संस्कार) इतने दृढ़ हैं कदाचित उसे सत्य दिख भी जाए लेकिन स्वीकार नहीं कर पाता। इसमें मूल कारण भय और प्रीति है। अनगिनत परिचित - अपरिचित प्रत्यक्ष विदा होते हुए देखें जाते हैं। इस शाश्वत सत्य को अपनी अनुभूति में लेते ही भयभीत सा होने लगता है। जीवन को निर्भीकता और आनंद के साथ वही व्यक्ति "जी" सकता है जिसे इस बात की दृढ़ प्रतीति है, मेरा यहां का ठहराव मात्र सीमित समय के लिए है।
*जय जिनेंद्र*? |
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2026-04-06 18:58:48 |
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| 69826 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?? *प्रेरक वाणी*?
व्यक्ति के अंदर पूर्व संचित संज्ञाये (संस्कार) इतने दृढ़ हैं कदाचित उसे सत्य दिख भी जाए लेकिन स्वीकार नहीं कर पाता। इसमें मूल कारण भय और प्रीति है। अनगिनत परिचित - अपरिचित प्रत्यक्ष विदा होते हुए देखें जाते हैं। इस शाश्वत सत्य को अपनी अनुभूति में लेते ही भयभीत सा होने लगता है। जीवन को निर्भीकता और आनंद के साथ वही व्यक्ति "जी" सकता है जिसे इस बात की दृढ़ प्रतीति है, मेरा यहां का ठहराव मात्र सीमित समय के लिए है।
*जय जिनेंद्र*? |
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2026-04-06 18:58:48 |
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| 69824 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*? बाप - बेटी का प्रेम ...?* |
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2026-04-06 18:57:25 |
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| 69823 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*? बाप - बेटी का प्रेम ...?* |
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2026-04-06 18:57:24 |
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