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Message
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40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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<a href="https://www.youtube.com/live/pU9XsvbY2dg?si=Z3HcYzIHSc9wBmWb" target="_blank">https://www.youtube.com/live/pU9XsvbY2dg?si=Z3HcYzIHSc9wBmWb</a>
*आज की लाइव लिंक*
आचार्य महाराज के प्रवचन प्रारंभ हो गए हैं |
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2026-04-06 09:08:35 |
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| 68554 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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<a href="https://www.youtube.com/live/pU9XsvbY2dg?si=Z3HcYzIHSc9wBmWb" target="_blank">https://www.youtube.com/live/pU9XsvbY2dg?si=Z3HcYzIHSc9wBmWb</a>
*आज की लाइव लिंक*
आचार्य महाराज के प्रवचन प्रारंभ हो गए हैं |
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2026-04-06 09:08:35 |
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| 68552 |
40449750 |
107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
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_सिविल सेवा (IAS/IPS) की तैयारी करने वाले छात्र ध्यान दें_
*फ़ॉर्म भरने और परीक्षा की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं*?
? *JATF आपके सिविल सेवा में शामिल होकर देश की सेवा करने के सपने को पूरा करने के लिए CET-2026* परीक्षा आयोजित करा रहा है। ?
*JITO एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग फाउंडेशन (JATF)* उन सभी ग्रेजुएट्स (या ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष/सेमेस्टर के छात्रों) को आमंत्रित करता है, जो भारतीय सिविल सेवा में शामिल होकर देश के प्रभावशाली नीति निर्माता (Policy Makers) बनना चाहते हैं।
*योग्यता (Eligibility):*
*उम्र:* 20 से 28 वर्ष के बीच।
*शिक्षा:* मेधावी स्नातक (Graduates) या वे छात्र जो इस साल फाइनल ईयर की परीक्षा दे रहे हैं।
*चयन प्रक्रिया:* लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से।
*महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates):*
?️ *आवेदन की अंतिम तिथि:* *शनिवार, 25 अप्रैल 2026*
?️ *CET-2026 परीक्षा की तिथि:* *रविवार, 03 मई 2026*
*रजिस्ट्रेशन/फ़ॉर्म भरने (नि: शुल्क) के लिए हमारी वेबसाइट :*
? <a href="https://jatf.in" target="_blank">https://jatf.in</a>
*ट्रेनिंग सेंटर:* दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, इंदौर, पुणे
*प्रस्तावित ट्रेनिंग सेंटर (Proposed):* अहमदाबाद (गुजरात) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
*_मिलने वाली सुविधाएं_*
?*नि: शुल्क भोजन एवं आवास*
पूर्णत: जैन भोजन और 4 स्टार आवासीय परिसर।
?*कोचिंग और अध्ययन*
देश की बेहतरीन कोचिंग संस्थाओं से कोचिंग और वरिष्ठ एवं अनुभवी मेंटर्स द्वारा मार्गदर्शन।
?*विशेष* वरिष्ठ सिविल सेवकों द्वारा व्यक्तिगत काउंसलिंग और संवाद
?*वातावरण* जैन संस्कृति से परिपूर्ण एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक माहौल
?*लाइब्रेरी* पूर्णतः अपडेटेड एवं डिजिटल लाइब्रेरी
?*और भी बहुत कुछ*
संपर्क सूत्र
011-40046246/47/48
011-45678318
_तो इस सुनहरे अवसर का पूर्ण लाभ उठाइए और आज ही फॉर्म भरिए_ |
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2026-04-06 09:08:23 |
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| 68551 |
40449750 |
107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
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_सिविल सेवा (IAS/IPS) की तैयारी करने वाले छात्र ध्यान दें_
*फ़ॉर्म भरने और परीक्षा की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं*?
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*योग्यता (Eligibility):*
*उम्र:* 20 से 28 वर्ष के बीच।
*शिक्षा:* मेधावी स्नातक (Graduates) या वे छात्र जो इस साल फाइनल ईयर की परीक्षा दे रहे हैं।
*चयन प्रक्रिया:* लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से।
*महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates):*
?️ *आवेदन की अंतिम तिथि:* *शनिवार, 25 अप्रैल 2026*
?️ *CET-2026 परीक्षा की तिथि:* *रविवार, 03 मई 2026*
*रजिस्ट्रेशन/फ़ॉर्म भरने (नि: शुल्क) के लिए हमारी वेबसाइट :*
? <a href="https://jatf.in" target="_blank">https://jatf.in</a>
*ट्रेनिंग सेंटर:* दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, इंदौर, पुणे
*प्रस्तावित ट्रेनिंग सेंटर (Proposed):* अहमदाबाद (गुजरात) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
*_मिलने वाली सुविधाएं_*
?*नि: शुल्क भोजन एवं आवास*
पूर्णत: जैन भोजन और 4 स्टार आवासीय परिसर।
?*कोचिंग और अध्ययन*
देश की बेहतरीन कोचिंग संस्थाओं से कोचिंग और वरिष्ठ एवं अनुभवी मेंटर्स द्वारा मार्गदर्शन।
?*विशेष* वरिष्ठ सिविल सेवकों द्वारा व्यक्तिगत काउंसलिंग और संवाद
?*वातावरण* जैन संस्कृति से परिपूर्ण एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक माहौल
?*लाइब्रेरी* पूर्णतः अपडेटेड एवं डिजिटल लाइब्रेरी
?*और भी बहुत कुछ*
संपर्क सूत्र
011-40046246/47/48
011-45678318
_तो इस सुनहरे अवसर का पूर्ण लाभ उठाइए और आज ही फॉर्म भरिए_ |
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2026-04-06 09:08:22 |
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42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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2026-04-06 09:07:48 |
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| 68550 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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2026-04-06 09:07:48 |
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| 68547 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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2026-04-06 09:07:46 |
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| 68548 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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2026-04-06 09:07:46 |
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| 68545 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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2026-04-06 09:07:44 |
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42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*हिन्दू कौन है? हिन्दू शब्द का प्रयोग राजनीति की आवश्यकतानुसार किया गया है* ....संजय जैन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हिन्दू’ शब्द की व्याख्या अपने निर्णयों में की है।
हिन्दू शब्द के विषय में भ्रान्ति में न रहे! हिन्दू शब्द जब हिन्दू धर्म हेतु लिखा गया तब वैदिक धर्म हेतु उपयोग किया गया जब देश हेतु लिखा गया तो भारत के निवासियों हेतु प्रयोग किया गया।
जैनों को ही क्यों जबरन हिंदू धर्म का हिस्सा बताने का प्रयास क्यों किया जाता? सिख और बौद्धों को क्यों नहीं? समझो.....?
*यदि भारत के सभी निवासी हिंदू है तो जैन भी लेकिन यदि धर्म की बात करें और यदि हिन्दू धर्म है तो जैन धर्म इसका हिस्सा नहीं क्योंकि दोनों के सिद्धांत और पूजा पद्धति अलग है।*
राजनीति जैनों को अलग समझती है और जैन तीर्थों पर कब्जे का विरोध नहीं करती?
=> पंडित जवाहर लाल नेहरु ने “हिन्दू / हिंदुत्व” की व्याख्या करते हुए अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Discovery of India" में इस पोस्ट के साथ संलग्न पेज न. 74, 75 व 76 पर लिखा कि “हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु सिन्धु नदी के दूसरी तरफ के भारत के निवासियों हेतु हजार साल पहले से प्रयोग किया गया और सिन्धु नदी के कारण ही हिन्दू व हिन्दुस्तान शब्द प्रचलन में आयें!
“सनातन धर्म” का अर्थ भारत में प्राचीन समय से प्रचलित धर्मो से है! भारतीय विचारों का शत प्रतिशत उत्पाद और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा जैन धर्म व बौद्ध धर्म निश्चित रूप से वैदिक धर्म से अलग है!
भारतीयता का अर्थ हिन्द, हिंदी व हिंदुस्तान से है! हिंदी से धर्म का कोई सम्बन्ध नहीं है! पश्चिम एशिया के देशो, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान द्वारा हिन्द शब्द आज भी भारत हेतु प्रयोग किया जाता है!
मुस्लिम व ईसाई भी भारत का एक नागरिक होने के कारण हिंदी है! अमेरिकन भी यदि भारत निवासी को हिंदी / हिन्दू कहे तो कुछ गलत नहीं!
=> श्री वीर विनायक राव दामोदर राव सावरकर जी ने वर्ष 1905 में अंडमान-निकोबार जेल में रहते हुआ लिखा था कि “Asindhu Sindhu Paryanta yashya Bharat Bhoomika, Pitribhu Punya Bhuschaiva Sa vai Hindu Riti Smritah”
“सिन्धु व हिन्द महासागर के बीच स्तिथ व्यापक क्षेत्र को भारत कहा गया और जो इस पवित्र तीर्थो की जमीन को अपने पुरखों की जमीन स्वीकार करें, वो सभी हिन्दू है!”
वर्ष 1923 में रत्नागिरी जेल में कैद सावरकर जी द्वारा लिखित एक हेंडबिल चोरी से जेल से बाहर लाकर देश में बांटा गया जिसमे उन्होंने “हिंदुत्व” शब्द को किसी धर्म विशेष से न जोडकर अपितु अखंड भारत हेतु प्रयोग किया था!
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि श्री प्रेम चंद गोयल जी ने रतलाम में कहा कि यह लोगो की गलत धारणा है कि हिन्दू एक धर्म है! हिंदुत्व एक जीवन शैली है!”
=> दिनांक 03.12.2006 को संघ के मुख्यपत्र पांचजन्य ने लिखा कि ठाकुर राम सिंह जी ने कहा कि हिन्दुस्तान के निवासियों को हिन्दू कहा गया लेकिन ब्रिटिश लोगो ने हिन्दू को एक संप्रदाय लिखा!
=> डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि हिंदुत्व राष्ट्रीय एकता की पहचान का प्रतीक है!
=> श्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री) ने भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी को हिन्दू कहा!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 19.11.2006 को अम्बाला में “हिन्दू कौन” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व भारत में रहने वाले प्रतिएक आदमी की आत्मा है! हिंदुत्व प्रतिएक भारतीय को बाँधने का एक मंत्र है!
=> संघप्रमुख श्री सुदर्शन जी ने दिनांक 21.12.2006 को चंडीगढ़ में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दू शब्द किसी धर्म विशेष से नहीं अपितु भारत की नागरिकता से सम्बंधित है! (कॉपी संलग्न)
=> I.C.H.R. के पूर्व अध्यक्ष प्रसिद्ध इतिहासकार श्री इरफ़ान ने हबीब इंडिया इंटरनेशनल में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में कहा कि इतिहास अपनेआप में गवाह है कि अरब से आने वालों ने भारत के निवासी प्रतिएक जाति, धर्म के लोगो को हिन्दुस्तानी कहा! हिन्द जो वर्तमान में हिंदुस्तान या हिन्दोस्तान कहा जाता है उसका धर्म व भाषा से कोई सम्बन्ध नहीं! भारत में रहने वाले सभी धर्मो व भाषा के लोग हिन्दुस्तानी है! (दिनांक 22.12.2006 के हिंदुस्तान समाचार पत्र कापी संलग्न)
=> सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों i) Shastri Yagna Purushadji Case {1966(3) SCR 242}, ii) Sridharan Case (1976 SCR 478) में कहा कि “इस संवैधनिक बेंच द्वारा विस्तृत सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी, हिंदुत्व का ठीक प्रकार से उत्तरदायी अर्थ नही निकलता और भारतीय संस्कृति व धरोहर की सामग्री के बिना धर्म की संकीर्ण सीमा में भी कोई सार नहीं निकाला जा सकता!”
=> सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक 14 जनवरी, 1966 को Sastri Yagnapurushadji Vs Muldas Bhudas केस के निर्णय में हिन्दू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि “हिन्दू धर्म अन्य धर्मो के समान किसी धर्म विशेष से सम्बंधित नहीं, न किसी धर्म विशेष का पालन करता, किसी भगवान से सम्बंधित नहीं, किसी धर्म की मान्यताओं की पूर्ति नही करता अपितु जीवन जीने से ज्यादा कुछ नहीं है! भारत के संविधान निर्माताओं को पूर्ण संज्ञान था इसीलिए उन्होंने हिन्दू का अर्थ सिख, जैन व बौद्ध धर्म मानने वालो के सन्दर्भ सहित लिखा! |
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