| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 72808 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
<a href="https://www.instagram.com/reel/DW3ggwyieHj/?igsh=MjBncDQ0YWM1Y200" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW3ggwyieHj/?igsh=MjBncDQ0YWM1Y200</a>
❣️_*बच्चों का मासिक बल इतना कमजोर क्यों ?*_❣️
????????
?..प. पू. मुनि श्री 108 *प्रमाण सागर जी* महाराज..? |
|
2026-04-09 18:23:19 |
|
| 72807 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
<a href="https://www.instagram.com/reel/DW3ggwyieHj/?igsh=MjBncDQ0YWM1Y200" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DW3ggwyieHj/?igsh=MjBncDQ0YWM1Y200</a>
❣️_*बच्चों का मासिक बल इतना कमजोर क्यों ?*_❣️
????????
?..प. पू. मुनि श्री 108 *प्रमाण सागर जी* महाराज..? |
|
2026-04-09 18:23:18 |
|
| 72806 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
|
|
*??आज की कहानी??* *??जिसे दुनिया ने गुनहगार कहा, उसे भग्यवान ने नेक लिखा??* एक राजा की आदत थी—वह भेस बदलकर अपने राज्य की गलियों में निकलता और लोगों का हालचाल जानता। एक दिन वह अपने मंत्री के साथ शहर के किनारे पहुँचा, तभी उसकी नज़र सड़क के किनारे पड़े एक आदमी पर पड़ी। राजा ने पास जाकर उसे हिलाया… पर शरीर ठंडा पड़ चुका था। वह आदमी मर चुका था। आस-पास से लोग गुज़र रहे थे, पर कोई भी उसकी ओर देखने तक को तैयार नहीं था। राजा ने आवाज़ दी— “कोई है? इसे उठाने में मदद करो!” लेकिन कोई आगे नहीं... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183808428?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183808428?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
|
2026-04-09 18:22:40 |
|
| 72805 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
|
|
*??आज की कहानी??* *??जिसे दुनिया ने गुनहगार कहा, उसे भग्यवान ने नेक लिखा??* एक राजा की आदत थी—वह भेस बदलकर अपने राज्य की गलियों में निकलता और लोगों का हालचाल जानता। एक दिन वह अपने मंत्री के साथ शहर के किनारे पहुँचा, तभी उसकी नज़र सड़क के किनारे पड़े एक आदमी पर पड़ी। राजा ने पास जाकर उसे हिलाया… पर शरीर ठंडा पड़ चुका था। वह आदमी मर चुका था। आस-पास से लोग गुज़र रहे थे, पर कोई भी उसकी ओर देखने तक को तैयार नहीं था। राजा ने आवाज़ दी— “कोई है? इसे उठाने में मदद करो!” लेकिन कोई आगे नहीं... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183808428?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183808428?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
|
2026-04-09 18:22:39 |
|
| 72803 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:20:39 |
|
| 72804 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:20:39 |
|
| 72801 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:20:06 |
|
| 72802 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:20:06 |
|
| 72799 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:19:24 |
|
| 72800 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
|
|
_*दान क्यों करना चाहिए ❓❓❓*_
✨✨✨
*धन के सद्भाव में धर्म संभव नहीं*
- आचार्य श्री समयसागर जी
- 7/4/26, नागपुर
???
*पूरा प्रवचन-*
<a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a>
_(देखें 7.44 से 9.51 तक)_
????
रहा *मनोबल* मुक्ति-मार्ग में
साधकतम है गुरुतम है।
तथा *वचन बल* तरतमता से
आवश्यक है कुछ कम है॥
*तन बल* तो बस रहा सहायक
निश्चय के वह साथ सही।
*किन्तु सुनो ! तुम मुक्तिमार्ग में*
*धनबल का कुछ हाथ नहीं॥*
- _४७, सुनीति शतक_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
|
2026-04-09 18:19:24 |
|