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79739 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-12 12:00:56
79740 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-12 12:00:56
79738 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन *जैनों को हिंदू में विलय की चल रही बड़ी साजिश* ॰ जैन मंचों पर दिखे बड़े संकेत ॰ तीन दिन, तीन मंच, जिनमें दो जैन मंच ॰ जैनों को अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने की कोशिशें ॰ जैन मंत्री मांगे माफी ॰ 8वीं सदी की तरह 21वीं सदी में क्या चल रही सल्तनत की चाल *जैन चैनल को जॉइन करें-* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b</a> इस बार तो इंतहा हो गई, जब जैन मंचों का उपयोग, जैन धर्म के विलय की कथित साजिशों के लिये किया गया और उसमें शामिल एक राज्य के कैबिनेट मंत्री भी। संकेत अब दिखने लगे हैं कि कहीं न कहीं आरएसएस और भाजपा की एक लॉबी इस पर तेजी से होमवर्क कर रही है और उसके सूत्रधार पदों पर बैठे जैनों को बनाया जा रहा है। मुंबई में 31 मार्च को महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कैबिनेट जैन मंत्री मंगत प्रभात लोढा जी ने कहा कि ‘यह जो आज चल रहा है कि जैन अल्पसंख्यक है, कहां तक उचित है। समाज के बहुत बड़े तबके की मांग है क्या बोलते हैं। यह भारत हिंदुओं का देश है। हमारी जन्म पद्धति और धर्म पद्धति जैन हो सकती है, पर हम हिंदुओं के सामने नहीं पड़ेंगे, हम हिंदुओं के बीच रहना चाहते हैं। यह जो राजनीति का षड्यंत्र करके हमें अल्पसंख्यक बना दिया गया था, अब बाहर आने का वक्त आ गया। मुझे गुरुदेव का इशारा है, हां करो। पहले जो गल्तियां हुई थी, अब उन गल्तियों से बाहर, आने का वक्त आ गया। सबकी सहमति होने पर, इस पर कानून बनाने पर विचार करेंगे। ’ जैनों के आक्रोश को बढ़ाने के बाद महाराष्ट्र जैन मंत्री नहीं रुके बल्कि अगले ही दिन आर एस एस के संस्थापक केशव बलीराम हेडगेवार की जयंती के कार्यक्रम में कुछ और आगे निकल गये और बोले ‘भारत में हिंदू धर्म है, हम सब हिंदू हैं, ऐसा हमें बेसिकली मानना चाहिए, हमारी जैन पद्धति है, हमारा धर्म जैन हैं। पर हम हिंदू नहीं है, यह कहने के बाद दक्षिण भारत में हम कितना सिमट गये हैं। कब तक यह कहना है कि हिंदू अलग हैं, हम अलग हैं। हम अल्पसंख्यक हैं, हम हिंदू नहीं है, इससे क्या निर्माण होता है।’ एक मंत्री के रूप में ये दोनों मंचों पर बोल एक राजनीतिज्ञ के हो सकते हैं, पर जैन सिद्धांतों पर चलने वाले एक नेक व्यक्ति के नहीं। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के राकेश जैन गोहिल ने सही टिप्पणी दी कि आपको यह स्मरण दिलाना आवश्यक है कि जैन समाज को यह दर्जा किसी खैरात में नहीं मिला है, बल्कि समाजजनों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। यह अधिकार हमारी धार्मिक अस्मिता की ढाल है। जैन धर्म किसी अन्य विचारधारा की शाखा नहीं, बल्कि एक अनादि और स्वतंत्र धर्म है। हमारी विशिष्ट पहचान को मिटाने की आपकी या अन्य किसी की कोशिशों को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। अल्पसंख्यक दर्जा हमारे शिक्षण संस्थानों और पवित्र तीर्थक्षेत्रों को अतिक्रमण और अन्य बाहरी हस्तक्षेपों से बचाने का कानूनी सुरक्षा कवच है। यह देश की औद्योगिक राजधानी मुम्बई में ही नहीं, दिल्ली में भी हुआ। 05 अप्रैल को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के कार्यक्रम में आमंत्रित भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद राधा मोहन अग्रवाल ने भी जैन मंच का इस्तेमाल मानो जैनों के विरोध और विलय के लिये ही किया। उन्होंने कहा कि ‘जैन समाज, अगर संख्या के आधार पर इस देश में अपना स्थान बना रहा होता, तो आपकी जनसंख्या इतनी कम है कि आपकी पहचान ही नहीं होती। अगर आपकी जनसंख्या सही भी हो जायेगी, तो कितनी हो जायेगी। 2011 की जनसंख्या में आप तकरीबन साढ़े 44 लाख के आसपास पूरे देश में थे। आप जागरूक वर्ग से हैं। आपने जनसंख्या नियंत्रण के सभी प्रावधानों को सर्वाधिक सफलता के साथ उपयोग किया है। जनसंख्या वृद्धि आपकी सोच और परिकल्पना में नहीं रही है। त्रिलोकीनाथ हरि के बगीचे में सारे धर्म फैले हुए हैं, उनमें से एक जैन धर्म है और आपकी संख्या इसलिये घट रही है, क्योंकि समस्त हिंदू धर्म ने आपको हृदय में अपना लिया है। आज आप हिंदू धर्म से अलग होने की लाख कोशिश कर लें, हिंदू धर्म आपको अपने से अलग नहीं करने वाला।’ उनके इन शब्दों से चैनल महालक्ष्मी ही नहीं, पूरा सभागार स्तब्ध रह गया। आदिनाथ चैनल के डायरेक्टर श्री पवन जैन गोधा जी ने पहली कतार में बैठे हमें टोका भी, क्यों चुप हैं, तब यही कहा, यह आपका मंच है, अगर अनुमति दें तो यहीं जवाब, इसी मंच से दे दें। तभी मंच पर आसीन आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी ने उन्हीं सांसद को पास बुलाकर मानो अलग अंदाज में जवाब देते हुए कह ही दिया कि इस भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू ही है, जो हिंसा से दूर है। हिंदू का अर्थ होता है, जो हिंसा से दूर होता है, लेकिन जो हिंसा करता है, वह नाम का हिंदू है तो भी हिंदू नहीं है। असली हिंदू तो जैन ही है। हिंसा से दूर है और अहिंसा को अपने अंदर रखते हैं, ऐसे हम हिंदू हैं और ये हिंदू इतने विशाल हैं कि जिनमें तीर्थंकर 63 श्लाका पुरुष सभी समाविष्ट हो जाते है। हमारा दुर्भाग्य है कि प्राचीन इतिहास हमारा चाइना ने लिखा, इधर-उधर घूमा और लिख दिया। अगर दोबारा भारतीय इतिहास लिखा जाएगा तो पहला शब्द भी जैन होगा और अंतिम शब्द भी जैन होगा। इसकी जड़-जड़ में इतना पुरातत्व, इतनी संस्कृति, इतने संस्कार है। अभी नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि हमारा जैन धर्म की संस्कृति, संस्कार अब हमें उस जड़ में और जग में दोनों तक पहुंचना है। इसी कार्यक्रम में महासभा द्वारा 25 होनहार जैन प्रतिभावान को सम्मानित किया गया, साथ ही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसंर्स को भी पुरस्कृत किया गया। दो जगह, तीन दिन, दो बड़े भाजपा दिग्गज उनमें एक जैन भी, तीन कार्यक्रमों में जो मंच से कहा उसने स्पष्ट संकेत कर दिया है कि राजनीतिक स्तर पर जैनों के खिलाफ एक गंभीर सियासती चाल विलय की और अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने, प्राचीन जैन इतिहास को मिटाने और हिंदू ही भारत है, जैसी चालों से जैन को खत्म करने की कोशिशें हैं, जो 8वीं-9वीं सदी में देखी गई थी। तब हजारों संतों और जैनों का संहार हुआ था, सैकड़ों तीर्थों को बदला गया। क्या अब उसे दोहराने की कोशिशें हैं, इस बार विलय के रूप में, अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करके? 2026-04-12 11:58:44
79737 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन *जैनों को हिंदू में विलय की चल रही बड़ी साजिश* ॰ जैन मंचों पर दिखे बड़े संकेत ॰ तीन दिन, तीन मंच, जिनमें दो जैन मंच ॰ जैनों को अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने की कोशिशें ॰ जैन मंत्री मांगे माफी ॰ 8वीं सदी की तरह 21वीं सदी में क्या चल रही सल्तनत की चाल *जैन चैनल को जॉइन करें-* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Va9TdEcEquiTnAsleW2b</a> इस बार तो इंतहा हो गई, जब जैन मंचों का उपयोग, जैन धर्म के विलय की कथित साजिशों के लिये किया गया और उसमें शामिल एक राज्य के कैबिनेट मंत्री भी। संकेत अब दिखने लगे हैं कि कहीं न कहीं आरएसएस और भाजपा की एक लॉबी इस पर तेजी से होमवर्क कर रही है और उसके सूत्रधार पदों पर बैठे जैनों को बनाया जा रहा है। मुंबई में 31 मार्च को महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कैबिनेट जैन मंत्री मंगत प्रभात लोढा जी ने कहा कि ‘यह जो आज चल रहा है कि जैन अल्पसंख्यक है, कहां तक उचित है। समाज के बहुत बड़े तबके की मांग है क्या बोलते हैं। यह भारत हिंदुओं का देश है। हमारी जन्म पद्धति और धर्म पद्धति जैन हो सकती है, पर हम हिंदुओं के सामने नहीं पड़ेंगे, हम हिंदुओं के बीच रहना चाहते हैं। यह जो राजनीति का षड्यंत्र करके हमें अल्पसंख्यक बना दिया गया था, अब बाहर आने का वक्त आ गया। मुझे गुरुदेव का इशारा है, हां करो। पहले जो गल्तियां हुई थी, अब उन गल्तियों से बाहर, आने का वक्त आ गया। सबकी सहमति होने पर, इस पर कानून बनाने पर विचार करेंगे। ’ जैनों के आक्रोश को बढ़ाने के बाद महाराष्ट्र जैन मंत्री नहीं रुके बल्कि अगले ही दिन आर एस एस के संस्थापक केशव बलीराम हेडगेवार की जयंती के कार्यक्रम में कुछ और आगे निकल गये और बोले ‘भारत में हिंदू धर्म है, हम सब हिंदू हैं, ऐसा हमें बेसिकली मानना चाहिए, हमारी जैन पद्धति है, हमारा धर्म जैन हैं। पर हम हिंदू नहीं है, यह कहने के बाद दक्षिण भारत में हम कितना सिमट गये हैं। कब तक यह कहना है कि हिंदू अलग हैं, हम अलग हैं। हम अल्पसंख्यक हैं, हम हिंदू नहीं है, इससे क्या निर्माण होता है।’ एक मंत्री के रूप में ये दोनों मंचों पर बोल एक राजनीतिज्ञ के हो सकते हैं, पर जैन सिद्धांतों पर चलने वाले एक नेक व्यक्ति के नहीं। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के राकेश जैन गोहिल ने सही टिप्पणी दी कि आपको यह स्मरण दिलाना आवश्यक है कि जैन समाज को यह दर्जा किसी खैरात में नहीं मिला है, बल्कि समाजजनों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। यह अधिकार हमारी धार्मिक अस्मिता की ढाल है। जैन धर्म किसी अन्य विचारधारा की शाखा नहीं, बल्कि एक अनादि और स्वतंत्र धर्म है। हमारी विशिष्ट पहचान को मिटाने की आपकी या अन्य किसी की कोशिशों को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। अल्पसंख्यक दर्जा हमारे शिक्षण संस्थानों और पवित्र तीर्थक्षेत्रों को अतिक्रमण और अन्य बाहरी हस्तक्षेपों से बचाने का कानूनी सुरक्षा कवच है। यह देश की औद्योगिक राजधानी मुम्बई में ही नहीं, दिल्ली में भी हुआ। 05 अप्रैल को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के कार्यक्रम में आमंत्रित भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद राधा मोहन अग्रवाल ने भी जैन मंच का इस्तेमाल मानो जैनों के विरोध और विलय के लिये ही किया। उन्होंने कहा कि ‘जैन समाज, अगर संख्या के आधार पर इस देश में अपना स्थान बना रहा होता, तो आपकी जनसंख्या इतनी कम है कि आपकी पहचान ही नहीं होती। अगर आपकी जनसंख्या सही भी हो जायेगी, तो कितनी हो जायेगी। 2011 की जनसंख्या में आप तकरीबन साढ़े 44 लाख के आसपास पूरे देश में थे। आप जागरूक वर्ग से हैं। आपने जनसंख्या नियंत्रण के सभी प्रावधानों को सर्वाधिक सफलता के साथ उपयोग किया है। जनसंख्या वृद्धि आपकी सोच और परिकल्पना में नहीं रही है। त्रिलोकीनाथ हरि के बगीचे में सारे धर्म फैले हुए हैं, उनमें से एक जैन धर्म है और आपकी संख्या इसलिये घट रही है, क्योंकि समस्त हिंदू धर्म ने आपको हृदय में अपना लिया है। आज आप हिंदू धर्म से अलग होने की लाख कोशिश कर लें, हिंदू धर्म आपको अपने से अलग नहीं करने वाला।’ उनके इन शब्दों से चैनल महालक्ष्मी ही नहीं, पूरा सभागार स्तब्ध रह गया। आदिनाथ चैनल के डायरेक्टर श्री पवन जैन गोधा जी ने पहली कतार में बैठे हमें टोका भी, क्यों चुप हैं, तब यही कहा, यह आपका मंच है, अगर अनुमति दें तो यहीं जवाब, इसी मंच से दे दें। तभी मंच पर आसीन आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी ने उन्हीं सांसद को पास बुलाकर मानो अलग अंदाज में जवाब देते हुए कह ही दिया कि इस भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू ही है, जो हिंसा से दूर है। हिंदू का अर्थ होता है, जो हिंसा से दूर होता है, लेकिन जो हिंसा करता है, वह नाम का हिंदू है तो भी हिंदू नहीं है। असली हिंदू तो जैन ही है। हिंसा से दूर है और अहिंसा को अपने अंदर रखते हैं, ऐसे हम हिंदू हैं और ये हिंदू इतने विशाल हैं कि जिनमें तीर्थंकर 63 श्लाका पुरुष सभी समाविष्ट हो जाते है। हमारा दुर्भाग्य है कि प्राचीन इतिहास हमारा चाइना ने लिखा, इधर-उधर घूमा और लिख दिया। अगर दोबारा भारतीय इतिहास लिखा जाएगा तो पहला शब्द भी जैन होगा और अंतिम शब्द भी जैन होगा। इसकी जड़-जड़ में इतना पुरातत्व, इतनी संस्कृति, इतने संस्कार है। अभी नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि हमारा जैन धर्म की संस्कृति, संस्कार अब हमें उस जड़ में और जग में दोनों तक पहुंचना है। इसी कार्यक्रम में महासभा द्वारा 25 होनहार जैन प्रतिभावान को सम्मानित किया गया, साथ ही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसंर्स को भी पुरस्कृत किया गया। दो जगह, तीन दिन, दो बड़े भाजपा दिग्गज उनमें एक जैन भी, तीन कार्यक्रमों में जो मंच से कहा उसने स्पष्ट संकेत कर दिया है कि राजनीतिक स्तर पर जैनों के खिलाफ एक गंभीर सियासती चाल विलय की और अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने, प्राचीन जैन इतिहास को मिटाने और हिंदू ही भारत है, जैसी चालों से जैन को खत्म करने की कोशिशें हैं, जो 8वीं-9वीं सदी में देखी गई थी। तब हजारों संतों और जैनों का संहार हुआ था, सैकड़ों तीर्थों को बदला गया। क्या अब उसे दोहराने की कोशिशें हैं, इस बार विलय के रूप में, अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करके? 2026-04-12 11:58:43
79736 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-12 11:55:32
79735 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-12 11:55:31
79734 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? 2026-04-12 11:55:02
79733 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? 2026-04-12 11:55:01
79732 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ? *पहले दिन की पावन झलकियाँ* ? ? *श्री 1008 मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव* ? *आदीश्वरधाम, बाजार गांव पंचकल्याणक, नागपुर* ? *पंचकल्याणक स्थल: तुलसी नगर, नागपुर* *?मंगल सानिध्य?* *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराजजी ससंघ* 2026-04-12 11:55:00
79731 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ? *पहले दिन की पावन झलकियाँ* ? ? *श्री 1008 मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव* ? *आदीश्वरधाम, बाजार गांव पंचकल्याणक, नागपुर* ? *पंचकल्याणक स्थल: तुलसी नगर, नागपुर* *?मंगल सानिध्य?* *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराजजी ससंघ* 2026-04-12 11:54:59