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72969 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ? *कल अष्टमी है* ? *समस्त धर्म प्रेमी बंधुओं को सूचित किया जाता है कि कल दिनांक 10/04/ 2026 शुक्रवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी है* अतः *आपसे निवेदन है की अभिषेक ,शांति धारा एवं पूजन करे और *णमोकार मंत्र* की माला फेरे एवं भक्तामर् का संस्कृत में पाठ करे *ओम ह्रीं क्लीं श्रीं अर्हं श्री वृषभनाथ तीर्थंकराय नमः की माला फेरे* *ब्रह्मचर्य व्रत धारण करे* *रात्रि भोजन का त्याग करें* *जमीन कंद का त्याग करें* *होटल की बनी खाद्य सामग्री का त्याग करें* *एक दिन के लिए और भी कुछ नियम ले, त्याग करे* *??जय जिनेंद्र* *अशोक जैन मामा सुसनेर* *9425935206* 2026-04-09 19:47:20
72970 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ? *कल अष्टमी है* ? *समस्त धर्म प्रेमी बंधुओं को सूचित किया जाता है कि कल दिनांक 10/04/ 2026 शुक्रवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी है* अतः *आपसे निवेदन है की अभिषेक ,शांति धारा एवं पूजन करे और *णमोकार मंत्र* की माला फेरे एवं भक्तामर् का संस्कृत में पाठ करे *ओम ह्रीं क्लीं श्रीं अर्हं श्री वृषभनाथ तीर्थंकराय नमः की माला फेरे* *ब्रह्मचर्य व्रत धारण करे* *रात्रि भोजन का त्याग करें* *जमीन कंद का त्याग करें* *होटल की बनी खाद्य सामग्री का त्याग करें* *एक दिन के लिए और भी कुछ नियम ले, त्याग करे* *??जय जिनेंद्र* *अशोक जैन मामा सुसनेर* *9425935206* 2026-04-09 19:47:20
72967 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? भावपूर्ण श्रद्धांजली ? ओम् शांती शांती शांती: ???????? 2026-04-09 19:46:43
72968 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? भावपूर्ण श्रद्धांजली ? ओम् शांती शांती शांती: ???????? 2026-04-09 19:46:43
72965 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ??? आर्यिका श्री 105ज्ञानमती माताजी। 2026-04-09 19:44:05
72966 40449701 ??संत शिरोमणि अपडेट?? ??? आर्यिका श्री 105ज्ञानमती माताजी। 2026-04-09 19:44:05
72964 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtube.com/live/SJVKI0QY5ro?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/SJVKI0QY5ro?feature=share</a> _*?54#शुद्धोपयोग भावना के सामर्थसे अत्यन्त नीरस होते हुए ही कर्म पुद्गलोंका एकदेश खिर जाना।?आगम वचन के रहस्य?-पं.अनिलजी,पुणे।*_ *#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।* *#एकदेश शुद्धनिश्चयनय?(१)आगमभाषासे रत्नत्रय की एकदेश व्यक्तता (गु ४ से गु १४)=भव्यत्व पारिणामिक- -भावकी व्यक्तता/प्रगटता &amp; (२)अध्यात्म- -भाषासे-द्रव्यशक्तिरुप शुद्धपारिणामिक भावकी भावना= निर्विकल्प समाधि= शुद्धोपयोग।* *#ध्यान=भावना=नित्यानित्यार्थक्रिया? सादिसांत= विनाशीक &amp; ध्येयरुप शुद्ध पारिणामिक -भाव द्रव्यरुप होनेसे अविनाशी/अनादि-अनंत ? इस आगम टीका वचन से 'ध्यान का ध्येय अत्यन्त शुद्ध नित्यार्थक्रिया- रहित संयुक्त ही होता हैं, अन्यथा अशुद्ध' होता हैं ऐसा आचार्य भगवान क्यौं संकेत कर रहे हैं?* *#जीव और पुद्गल के संयोगपरिणामरुप विभावपर्याय से उत्पन्न?आस्त्रव,बंध, पुण्य और पाप।* *#संवर,निर्जरा, मोक्ष, पुण्यानुबंधी पुण्य?जीव और पुद्गल के संयोगपरिणामरुप विभावपर्याय के विनाश से उत्पन्न की कालप्रत्यासत्ति त्रिकाली गुणों की पर्यायगत स्वभावपर्यायमय नित्यानित्यार्थक्रिया के साथ नियम से कैसे होती हैं?* *#गाथा सूत्र२८?आस्त्रव, बंध, संवर, निर्जरा, मोक्ष, पुण्य और पापरुप जो पदार्थ जीव और अजीव द्रव्यके विशेष हैं, उन्हे भी हम संक्षेपमें कहते हैं।? आस्त्रव=शुभाशुभ परिणाम? इस आगम वचन से शुभोपयोग आस्त्रव का कारण है, संवर का नहीं यह पुन:हा सिद्ध हो गया।, संवर= शुभाशुभ भावकर्म&amp; द्रव्यकर्म के आगमन रोकने में समर्थ स्वानुभवरुप विशुद्ध परिणाम, णिज्जर= शुद्धोपयोग भावना के सामर्थसे अत्यन्त नीरस होते हुए कर्म पुद्गलोंका एकदेश खिर जाना। निर्जरा की व्याख्या में नीरस होते हुए कर्म पुद्गलोंका खिरना इस आगम वचन में कौंन२ से रहस्य छिपे हुए हैं?* *#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७,२८ पृष्ठ क्रं ९६ से ९८।* 2026-04-09 19:43:11
72963 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtube.com/live/SJVKI0QY5ro?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/SJVKI0QY5ro?feature=share</a> _*?54#शुद्धोपयोग भावना के सामर्थसे अत्यन्त नीरस होते हुए ही कर्म पुद्गलोंका एकदेश खिर जाना।?आगम वचन के रहस्य?-पं.अनिलजी,पुणे।*_ *#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।* *#एकदेश शुद्धनिश्चयनय?(१)आगमभाषासे रत्नत्रय की एकदेश व्यक्तता (गु ४ से गु १४)=भव्यत्व पारिणामिक- -भावकी व्यक्तता/प्रगटता &amp; (२)अध्यात्म- -भाषासे-द्रव्यशक्तिरुप शुद्धपारिणामिक भावकी भावना= निर्विकल्प समाधि= शुद्धोपयोग।* *#ध्यान=भावना=नित्यानित्यार्थक्रिया? सादिसांत= विनाशीक &amp; ध्येयरुप शुद्ध पारिणामिक -भाव द्रव्यरुप होनेसे अविनाशी/अनादि-अनंत ? इस आगम टीका वचन से 'ध्यान का ध्येय अत्यन्त शुद्ध नित्यार्थक्रिया- रहित संयुक्त ही होता हैं, अन्यथा अशुद्ध' होता हैं ऐसा आचार्य भगवान क्यौं संकेत कर रहे हैं?* *#जीव और पुद्गल के संयोगपरिणामरुप विभावपर्याय से उत्पन्न?आस्त्रव,बंध, पुण्य और पाप।* *#संवर,निर्जरा, मोक्ष, पुण्यानुबंधी पुण्य?जीव और पुद्गल के संयोगपरिणामरुप विभावपर्याय के विनाश से उत्पन्न की कालप्रत्यासत्ति त्रिकाली गुणों की पर्यायगत स्वभावपर्यायमय नित्यानित्यार्थक्रिया के साथ नियम से कैसे होती हैं?* *#गाथा सूत्र२८?आस्त्रव, बंध, संवर, निर्जरा, मोक्ष, पुण्य और पापरुप जो पदार्थ जीव और अजीव द्रव्यके विशेष हैं, उन्हे भी हम संक्षेपमें कहते हैं।? आस्त्रव=शुभाशुभ परिणाम? इस आगम वचन से शुभोपयोग आस्त्रव का कारण है, संवर का नहीं यह पुन:हा सिद्ध हो गया।, संवर= शुभाशुभ भावकर्म&amp; द्रव्यकर्म के आगमन रोकने में समर्थ स्वानुभवरुप विशुद्ध परिणाम, णिज्जर= शुद्धोपयोग भावना के सामर्थसे अत्यन्त नीरस होते हुए कर्म पुद्गलोंका एकदेश खिर जाना। निर्जरा की व्याख्या में नीरस होते हुए कर्म पुद्गलोंका खिरना इस आगम वचन में कौंन२ से रहस्य छिपे हुए हैं?* *#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७,२८ पृष्ठ क्रं ९६ से ९८।* 2026-04-09 19:43:10
72962 40449697 हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 *शिल्पा दीदी मेरठ वालो ने 5 केश लेप व 5 केश तेल की शिशिया ऑर्डर कर दी है, यदि आप भी बालो के झड़ने से परेशान है तो शीघ्र सम्पर्क करे, विद्यासागर इंटरप्राइजेज, कोटा,9893112665*??? 2026-04-09 19:41:40
72961 40449697 हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 *शिल्पा दीदी मेरठ वालो ने 5 केश लेप व 5 केश तेल की शिशिया ऑर्डर कर दी है, यदि आप भी बालो के झड़ने से परेशान है तो शीघ्र सम्पर्क करे, विद्यासागर इंटरप्राइजेज, कोटा,9893112665*??? 2026-04-09 19:41:39