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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*कर्तव्य हमेशा समय से नहीं चलता, किन्तु समय उसके साथ हो जाता है।*
युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज
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सीमा न है सहज की, तह है अनन्त,
ऐसे जिनेन्द्र कहते अरहंत सन्त।
है ज्ञानगम्य, अतिरम्य, न शब्दगम्य,
तेजोमयी, अतुलनीय तथा अन्य ।।१४।।
? *निजानुभव शतक* ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज |
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2026-02-20 14:28:45 |
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