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77323 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *प्रतिदिन की तरह तपती कडक धूप में तपस्या के सम्राट साधना महोदधि अंतर्मना गुरुदेव आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी सामायिक ,तप,जाप, साधना करते हूए* *11 अप्रेल 2026, शनिवार,* *, सांबला,जिला-डूंगरपुर, राजस्थान* ?????????? *हर मास एक उपवास* 2026-04-11 14:23:40
77324 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *प्रतिदिन की तरह तपती कडक धूप में तपस्या के सम्राट साधना महोदधि अंतर्मना गुरुदेव आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी सामायिक ,तप,जाप, साधना करते हूए* *11 अप्रेल 2026, शनिवार,* *, सांबला,जिला-डूंगरपुर, राजस्थान* ?????????? *हर मास एक उपवास* 2026-04-11 14:23:40
77322 48925761 आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 _*सही अहिंसा को समझें*_ ???? *कृषक से बढ़कर और कौन अहिंसक होगा।* - आचार्य श्री समयसागर जी - 10/4/26, नागपुर ??? *'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a> _(देखें 26.26 से 29.35 तक)_ ???? अघ्नन् अपि भवेत् पापी, निघ्नन् अपि न पापभाक्। अविध्यान विशेषेण, यथा धीवरकर्षकौ॥ _*संकल्पी हिंसा के परिणाम (अशुभ भाव)* होने के कारण *मछुआरा* बिना मारे भी पापी होता है, और *आरम्भी हिंसा के परिणाम (शुभ भाव)* होने के कारण *किसान* मारते हुए भी पापी नहीं होता॥_ ??? पापार्जन तन मन वच से हो पाप तनक ही तन से हो। विदित रहे यह सब को, तनसे पाप अधिक वाचन से हो॥ *कहूँ कहां तक मन की स्थिति में* *पाप मेरु सम मन से हो।* *करें नियंत्रण मन को हम सब* *धर्म कार्य बस मन से हो॥४८॥* - _सुनीति शतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-11 14:23:34
77321 48925761 आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 _*सही अहिंसा को समझें*_ ???? *कृषक से बढ़कर और कौन अहिंसक होगा।* - आचार्य श्री समयसागर जी - 10/4/26, नागपुर ??? *'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर *मंगल प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=BX8zUh20cNvutx5j</a> _(देखें 26.26 से 29.35 तक)_ ???? अघ्नन् अपि भवेत् पापी, निघ्नन् अपि न पापभाक्। अविध्यान विशेषेण, यथा धीवरकर्षकौ॥ _*संकल्पी हिंसा के परिणाम (अशुभ भाव)* होने के कारण *मछुआरा* बिना मारे भी पापी होता है, और *आरम्भी हिंसा के परिणाम (शुभ भाव)* होने के कारण *किसान* मारते हुए भी पापी नहीं होता॥_ ??? पापार्जन तन मन वच से हो पाप तनक ही तन से हो। विदित रहे यह सब को, तनसे पाप अधिक वाचन से हो॥ *कहूँ कहां तक मन की स्थिति में* *पाप मेरु सम मन से हो।* *करें नियंत्रण मन को हम सब* *धर्म कार्य बस मन से हो॥४८॥* - _सुनीति शतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-11 14:23:33
77319 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 14:22:57
77320 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 14:22:57
77317 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा आवश्यकता एक प्रतिष्ठित एनजीओ हेतु— डाटा एंट्री ऑपरेटर, सहायक प्रबंधकz मैरिज ब्यूरो हेतु महिला प्रबंधक (अनुभवी को प्राथमिकता) वेतन : योग्यता अनुसार संपर्क : +91 91655 36915 इच्छुक अभ्यर्थी शीघ्र संपर्क करें। 2026-04-11 14:22:50
77318 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा आवश्यकता एक प्रतिष्ठित एनजीओ हेतु— डाटा एंट्री ऑपरेटर, सहायक प्रबंधकz मैरिज ब्यूरो हेतु महिला प्रबंधक (अनुभवी को प्राथमिकता) वेतन : योग्यता अनुसार संपर्क : +91 91655 36915 इच्छुक अभ्यर्थी शीघ्र संपर्क करें। 2026-04-11 14:22:50
77316 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 14:22:44
77315 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 14:22:43