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Chat Name
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Message
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50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-12 15:56:31 |
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| 80321 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-12 15:56:30 |
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| 80320 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
?????????
*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
?????????
*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
?????????
*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
?????????
*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
??????
??
*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
??????????
*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
??????????
*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:34 |
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| 80319 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
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*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
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*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
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*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
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*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:33 |
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| 80317 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
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*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
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*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
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*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
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*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
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*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
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*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
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*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
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2026-04-12 15:53:31 |
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| 80318 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*महा नगर रीवा मध्य प्रदेश में भव्य मंगल प्रवेश*
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*आज दिनांक12/4/2026 दिन रविवार को*
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*आज दिनांक 12/4/2026 की* *आहार चर्या रीवा महिला मण्डल के चोके में संपन्न हुई*
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*अहिंसा पद यात्रा की प्रभावना के वढते कदम*
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*इन रास्तों पर आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का मंगल बिहार पहली बार हो रहा है*
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*वाराणसी मजमा मिर्जापुर में हुई धर्म प्रभावना के वाद रीवा शहर में भव्य मंगल प्रवेश*
?????????
*सप्त भंग व्याख्याता वात्सल्य मूर्ति श्रवण संस्कृति के उन्नायक अध्यात्म शिरोमणि स्वाध्याय महोदधि तन्मोदय तीर्थ निर्माता सूरिमंत्र प्रदाता तीर्थंकर उपदिष्ट मुनि मुद्रा धारी पग बिहारी णमोकार मंत्र रथ प्रवर्तक अविचल ज्ञान विलक्षण साधक तिलक पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश रीवा शहर में संपन्न*
?????????
*पट्टाचार्य तन्मय सागर जी महाराज की अगवानी हेतु नगर के गणमान्य श्रीमान धीमान नागरिक महिला मण्डल बालिका युवा वर्ग आदि श्रृद्धालु श्रावक उपस्थित हुए भव्य स्वागत किया*
?♦️?♦️?♦️?♦️?
*आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज का भव्य मंगल आशीर्वाद आशीर्वाद*
✋?✋?✋?✋?✋?✋
*गया जी से सतना तक की व्यवस्था गया समाज द्वारा*
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*निवेदक*
*जय कुमार जैन बिहार ब्यावस्थापक तन्मय गुरु देव*
??❤️??❤️??❤️??❤️??
*पोस्ट राज़ जैन संघ ब्याबस्थापक*
??????????
*रीवा शहर से अमर पाटन महियर कटनी पनागर जबलपुर मढिया जी की ओर वडते कदम*
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*इस मैसेज को सोशल मीडिया में शेयर अवश्य करें जन-जन तक पहुंचाना है*
जय जिनेन्द्र ?जय जिनेन्द्र
❤️????❤️????❤️ओ |
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2026-04-12 15:53:31 |
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| 80316 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जब मार्गदर्शक ही भटक जाएं — जैन समाज के वर्तमान हालात पर एक सरल चिंतन*
“जहाँ बन्दरों के हाथों में बन्दूकें आ जाती हैं।
रोटी के बँटवारे में खुद बिल्ली खाई जाती है।
पुच्छल तारे जब अम्बर को ज्ञान सिखाने लगते हैं।
तो जुगनू चन्दा मामा में दोष गिनाने लगते हैं।।”
आज का समय बहुत विचित्र हो गया है। कभी जिस जैन धर्म की पहचान त्याग, संयम और आत्मशुद्धि से होती थी, आज उसी के नाम पर कई स्थानों पर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं जो मन को विचलित कर देती हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि एक साधारण अनुभव है जिसे समाज का हर सजग व्यक्ति कहीं न कहीं महसूस कर रहा है।
उपरोक्त पंक्तियाँ वर्तमान हालात को बेहद सरल और सटीक रूप में समझा देती हैं। जब बन्दरों के हाथ में बन्दूक आ जाती है, तो वह शक्ति का सही उपयोग नहीं करता, बल्कि अनर्थ की संभावना बढ़ जाती है। आज कुछ स्थानों पर यही स्थिति दिखाई देती है। जो व्यक्ति स्वयं साधना और अनुशासन में परिपक्व नहीं हैं, वे समाज का मार्गदर्शन करने लगते हैं। परिणाम यह होता है कि दिशा देने के बजाय भ्रम फैलता है।
साधु का जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन जब वही जीवन दिखावे और भीड़ जुटाने का माध्यम बन जाए, तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। समाज के कर्णधार, जो व्यवस्था और मर्यादा के रक्षक माने जाते हैं, जब वे भी स्वार्थ और प्रतिष्ठा की दौड़ में शामिल हो जाते हैं, तब स्थिति और गंभीर हो जाती है। धर्मस्थल, जो शांति और साधना के केंद्र होने चाहिए, वे कई बार प्रबंधन, प्रभाव और आर्थिक संतुलन के संघर्ष का मैदान बन जाते हैं।
आजकल एक और प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—दिखावा। प्रवचन, जो आत्मचिंतन का माध्यम होना चाहिए था, वह कई बार लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ाने का साधन बन गया है। शंका समाधान, जो जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है, वह भी कई बार मंचीय प्रदर्शन जैसा प्रतीत होने लगता है। जब ज्ञान का स्थान प्रदर्शन ले लेता है, तब गहराई स्वतः समाप्त हो जाती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि समाज स्वयं भी कई बार बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हो जाता है। साधु का मूल्य उसके वेश या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उसके आचरण और संयम से होना चाहिए, लेकिन आज कई बार इसका उल्टा होता दिखता है। भीड़ देखकर हम प्रभावित हो जाते हैं, जबकि सच्चाई अक्सर शांति और सादगी में छिपी होती है।
यह स्थिति पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। आज भी अनेक सच्चे साधु और संत हैं जो पूरी निष्ठा से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। वे प्रचार से दूर रहकर साधना में लीन हैं और समाज को सही दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि समाज उन्हें पहचाने और उनके मार्गदर्शन को महत्व दे।
समाधान बहुत कठिन नहीं है, लेकिन उसके लिए ईमानदारी चाहिए। हमें साधु और नेता दोनों का मूल्यांकन उनके कार्य और आचरण से करना होगा। प्रश्न पूछना गलत नहीं है, लेकिन वह मर्यादा और विवेक के साथ होना चाहिए। अंधभक्ति और अंधविरोध दोनों ही हानिकारक हैं। सही मार्ग बीच का है—जहाँ सम्मान भी हो और सत्य की खोज भी।
अंततः धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं होता। धर्म अपने मूल सिद्धांतों में स्थिर रहता है—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो कोई भी परिस्थिति हमें विचलित नहीं कर सकती।
आज आवश्यकता है जागरूकता की, न कि आलोचना की; सुधार की, न कि केवल विरोध की। यदि समाज स्वयं सजग हो जाए, तो कोई भी गलत प्रवृत्ति लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 15:53:24 |
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| 80315 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*जब मार्गदर्शक ही भटक जाएं — जैन समाज के वर्तमान हालात पर एक सरल चिंतन*
“जहाँ बन्दरों के हाथों में बन्दूकें आ जाती हैं।
रोटी के बँटवारे में खुद बिल्ली खाई जाती है।
पुच्छल तारे जब अम्बर को ज्ञान सिखाने लगते हैं।
तो जुगनू चन्दा मामा में दोष गिनाने लगते हैं।।”
आज का समय बहुत विचित्र हो गया है। कभी जिस जैन धर्म की पहचान त्याग, संयम और आत्मशुद्धि से होती थी, आज उसी के नाम पर कई स्थानों पर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिल रही हैं जो मन को विचलित कर देती हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि एक साधारण अनुभव है जिसे समाज का हर सजग व्यक्ति कहीं न कहीं महसूस कर रहा है।
उपरोक्त पंक्तियाँ वर्तमान हालात को बेहद सरल और सटीक रूप में समझा देती हैं। जब बन्दरों के हाथ में बन्दूक आ जाती है, तो वह शक्ति का सही उपयोग नहीं करता, बल्कि अनर्थ की संभावना बढ़ जाती है। आज कुछ स्थानों पर यही स्थिति दिखाई देती है। जो व्यक्ति स्वयं साधना और अनुशासन में परिपक्व नहीं हैं, वे समाज का मार्गदर्शन करने लगते हैं। परिणाम यह होता है कि दिशा देने के बजाय भ्रम फैलता है।
साधु का जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन जब वही जीवन दिखावे और भीड़ जुटाने का माध्यम बन जाए, तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। समाज के कर्णधार, जो व्यवस्था और मर्यादा के रक्षक माने जाते हैं, जब वे भी स्वार्थ और प्रतिष्ठा की दौड़ में शामिल हो जाते हैं, तब स्थिति और गंभीर हो जाती है। धर्मस्थल, जो शांति और साधना के केंद्र होने चाहिए, वे कई बार प्रबंधन, प्रभाव और आर्थिक संतुलन के संघर्ष का मैदान बन जाते हैं।
आजकल एक और प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—दिखावा। प्रवचन, जो आत्मचिंतन का माध्यम होना चाहिए था, वह कई बार लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ाने का साधन बन गया है। शंका समाधान, जो जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है, वह भी कई बार मंचीय प्रदर्शन जैसा प्रतीत होने लगता है। जब ज्ञान का स्थान प्रदर्शन ले लेता है, तब गहराई स्वतः समाप्त हो जाती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि समाज स्वयं भी कई बार बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हो जाता है। साधु का मूल्य उसके वेश या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि उसके आचरण और संयम से होना चाहिए, लेकिन आज कई बार इसका उल्टा होता दिखता है। भीड़ देखकर हम प्रभावित हो जाते हैं, जबकि सच्चाई अक्सर शांति और सादगी में छिपी होती है।
यह स्थिति पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। आज भी अनेक सच्चे साधु और संत हैं जो पूरी निष्ठा से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। वे प्रचार से दूर रहकर साधना में लीन हैं और समाज को सही दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि समाज उन्हें पहचाने और उनके मार्गदर्शन को महत्व दे।
समाधान बहुत कठिन नहीं है, लेकिन उसके लिए ईमानदारी चाहिए। हमें साधु और नेता दोनों का मूल्यांकन उनके कार्य और आचरण से करना होगा। प्रश्न पूछना गलत नहीं है, लेकिन वह मर्यादा और विवेक के साथ होना चाहिए। अंधभक्ति और अंधविरोध दोनों ही हानिकारक हैं। सही मार्ग बीच का है—जहाँ सम्मान भी हो और सत्य की खोज भी।
अंततः धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं होता। धर्म अपने मूल सिद्धांतों में स्थिर रहता है—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो कोई भी परिस्थिति हमें विचलित नहीं कर सकती।
आज आवश्यकता है जागरूकता की, न कि आलोचना की; सुधार की, न कि केवल विरोध की। यदि समाज स्वयं सजग हो जाए, तो कोई भी गलत प्रवृत्ति लंबे समय तक टिक नहीं सकती।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-04-12 15:53:23 |
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| 80314 |
45683126 |
+120363281507952396 |
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? *विहार अपडेट- 12 अप्रैल 2026* ?
●▬▬▬▬?❖✹❖?▬▬▬▬
? _महाकवि, *दादागुरु आचार्य प्रवर श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज* जिनके प्रथम शिष्य *संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज* एवं उनके द्वितीय शिष्य अद्भुत चर्या के धनी *समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री 108 विवेक सागर जी महाराज*_
⭐ _*अभिनवाचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज* के मंगल आशीर्वाद से_
*▫️आर्यिका मां १०५ विज्ञानमति माताजी ससंघ (10 पिच्छी)*
का मंगल विहार 3.45 पे *खातेगांव म प्र* से हुआ....
? रात्रि विश्राम :-
? कल की आहारचर्या :- *सिद्ध क्षेत्र नेमावर म प्र*
▫️ विहार दिशा :- *नेमावर होते हुए सिद्ध क्षेत्र मुक्तगिरि*
*_आर्यिका मां १०५ विज्ञान मति माताजी ससंघ के आहार विहार की समस्त जानकारी के लिए नीचे दी गई सोशल मीडिया पेज से आप जुड़ सकते है_*
? *व्हाट्सएप चैनल की लिंक:* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b</a> |
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2026-04-12 15:46:42 |
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| 80313 |
45683126 |
+120363281507952396 |
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? *विहार अपडेट- 12 अप्रैल 2026* ?
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? _महाकवि, *दादागुरु आचार्य प्रवर श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज* जिनके प्रथम शिष्य *संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज* एवं उनके द्वितीय शिष्य अद्भुत चर्या के धनी *समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री 108 विवेक सागर जी महाराज*_
⭐ _*अभिनवाचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज* के मंगल आशीर्वाद से_
*▫️आर्यिका मां १०५ विज्ञानमति माताजी ससंघ (10 पिच्छी)*
का मंगल विहार 3.45 पे *खातेगांव म प्र* से हुआ....
? रात्रि विश्राम :-
? कल की आहारचर्या :- *सिद्ध क्षेत्र नेमावर म प्र*
▫️ विहार दिशा :- *नेमावर होते हुए सिद्ध क्षेत्र मुक्तगिरि*
*_आर्यिका मां १०५ विज्ञान मति माताजी ससंघ के आहार विहार की समस्त जानकारी के लिए नीचे दी गई सोशल मीडिया पेज से आप जुड़ सकते है_*
? *व्हाट्सएप चैनल की लिंक:* <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VaVQfGP29756FjGIHf0b</a> |
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2026-04-12 15:46:41 |
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