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232619 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ का मंगल विहार काकोरी लखनऊ पंचकल्याणक के लिए चल रहा है* *24 से 29 जून 2026* <a href="https://www.instagram.com/p/DZmtcU1OaPG/?igsh=bG1hZWp0eHNjaTl6" target="_blank">https://www.instagram.com/p/DZmtcU1OaPG/?igsh=bG1hZWp0eHNjaTl6</a> *आज 15/06/26 का रात्रि विश्राम कोमिल सिंघ शांतिदेवी मेमोरियल कालेज शाहनगर उमरड़ा में होगा* 11km <a href="https://maps.app.goo.gl/j7jm4HRkgTvBghtE9?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/j7jm4HRkgTvBghtE9?g_st=aw</a> *कल 16/06/26 की आहार चर्या सुखरानी देवी रामेश्वर दयाल इंटर कॉलेज तिर्वागंज से समपन्न होगी* 12.5km <a href="https://maps.app.goo.gl/F2SiPawvDiu6pn1v9?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/F2SiPawvDiu6pn1v9?g_st=aw</a> --------------&amp;&amp;--------------- ? *16/06/26 का रात्रि विश्राम आशा पब्लिक स्कुल वैसापुरा पट्टी उत्त्तरप्रदेश में होगा* <a href="https://maps.app.goo.gl/9wqUUVB1SWy1sXp57?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/9wqUUVB1SWy1sXp57?g_st=aw</a> ? *17/06/26 की आहार चर्या महावीर जैन मंदिर इत्रों की नगरी कन्नौज उत्तरप्रदेश से समपन्न होगी* <a href="https://maps.app.goo.gl/iyRaRgRU79wCtYVE7?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/iyRaRgRU79wCtYVE7?g_st=ac</a> *? आगे का मंगल विहार गैसागंज , संडीला होते हुते काकोरी लखनऊ के लिए होगा* ? विशुद्ध देशना प्रसारण केंद्र वैभब जैन बड़ामलहरा &amp; पनिराज हेगड़े कर्नाटक जुड़े:- <a href="https://linktr.ee/Vishuddhdeshna" target="_blank">https://linktr.ee/Vishuddhdeshna</a> 2026-06-15 17:32:08
232617 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? गुटका खाने वाले व्यसनी हमेशा भीख मागंते है :- आचार्य विशुद्ध सागर जी 2026-06-15 17:32:06
232618 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? गुटका खाने वाले व्यसनी हमेशा भीख मागंते है :- आचार्य विशुद्ध सागर जी 2026-06-15 17:32:06
232615 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *? धार्मिक कार्य बिल्कुल PURE होना चाहिए : आचार्य भगवन श्री १०८ समयसागर जी महामुनिराज* ???? <a href="https://youtube.com/shorts/5XlSf_lafvw" target="_blank">https://youtube.com/shorts/5XlSf_lafvw</a> *? समयोदय विद्यासंघ ~ Aacharya Shri 108 Samay Sagar Ji Maharaj* <a href="https://chat.whatsapp.com/FcsSOqv4fMLEjhCFEadwAD" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/FcsSOqv4fMLEjhCFEadwAD</a> ••••••••••••••••••••••••••••• *?श्री समयगुरु चरणों में समर्पित* *☀️?समयोदय विद्यासंघ?☀️* 2026-06-15 17:29:41
232616 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *? धार्मिक कार्य बिल्कुल PURE होना चाहिए : आचार्य भगवन श्री १०८ समयसागर जी महामुनिराज* ???? <a href="https://youtube.com/shorts/5XlSf_lafvw" target="_blank">https://youtube.com/shorts/5XlSf_lafvw</a> *? समयोदय विद्यासंघ ~ Aacharya Shri 108 Samay Sagar Ji Maharaj* <a href="https://chat.whatsapp.com/FcsSOqv4fMLEjhCFEadwAD" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/FcsSOqv4fMLEjhCFEadwAD</a> ••••••••••••••••••••••••••••• *?श्री समयगुरु चरणों में समर्पित* *☀️?समयोदय विद्यासंघ?☀️* 2026-06-15 17:29:41
232613 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म वन्दामि माताजी 2026-06-15 17:27:23
232614 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म वन्दामि माताजी 2026-06-15 17:27:23
232612 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 17:22:31
232611 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-06-15 17:22:30
232610 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त ♨️ *?आज का प्रेरक प्रसंग?* ♨️ *?!! तीन मूर्तियाँ !!?* एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह देश-विदेश से सुंदर मूर्तियाँ लाकर अपने महल में सजाता था। उन सभी में से तीन मूर्तियाँ उसे सबसे अधिक प्रिय थीं। एक दिन सफाई करते समय एक सेवक के हाथ से एक मूर्ति टूट गई। यह देखकर राजा अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने सेवक को तुरंत मृत्युदंड सुना दिया। सजा सुनते ही सेवक ने बाकी दोनों मूर्तियाँ भी तोड़ दीं। यह देखकर सभी हैरान रह गए। राजा ने क्रोध में पूछा — *“तुमने ऐसा क्यों किया?”* सेवक ने शांत भाव से उत्तर दिया — *"महाराज! ये मूर्तियाँ नश्वर हैं, आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में किसी और से यह गलती होती, तो वह भी अकारण मृत्युदंड का भागी बनता। मैंने दो निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह किया है।"* यह सुनकर राजा स्तब्ध रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सेवक को क्षमा कर दिया। राजा ने फिर पूछा — *"मृत्यु सामने होने पर भी तुम इतने शांत और निडर कैसे रहे?"* सेवक बोला — *"महाराज, मैं पहले एक सेठ के यहाँ काम करता था। एक दिन सेठ ने मुझे कड़वी ककड़ी दी, और मैंने उसे प्रसाद समझकर खा लिया। जब रोज़ मीठा मिलता है, तो एक दिन कड़वा भी स्वीकार करना चाहिए। उसी प्रकार, ईश्वर जीवन में सुख और दुःख दोनों देता है — हमें दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।"* *शिक्षा:-* ? न्याय करते समय भावनाओं नहीं, विवेक से निर्णय लेना चाहिए। ? हर वस्तु नश्वर है, लेकिन मानव जीवन अनमोल है। ? सच्चा मनुष्य वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी परहित का सोचता है। ? सुख-दुःख को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है। *?सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *?जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* *? आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?* *? आपका जीवन मंगलमय हो ?* ♨️ *विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है* ♨️ <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188808438?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER</a> 2026-06-15 17:19:57