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Chat Name
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Message
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Status
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Date |
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| 72997 |
40449751 |
Akola Vishistashri Mataji Vihar |
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स्वर्गीय श्रीमान राजेंद्र जी गुमानमलजी बाकलिवाल
साबके 11 वे स्मृति वर्ष प्रसंग पर भावपूर्ण श्रध्दांजली.
श्रीमान स्वर्गीय राजेंद्रजी बाकलिवाल जी के स्मृति प्रीत्यर्थ उनकी धर्म पत्नी श्रीमती मीनादेवी तथा पुत्र किशोर जी एवं पुत्रवधू वर्षा जी बाकलिवाल
परिवार ने आज खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत के तत्त्वावधान में जो नूतन भूमि हेतु जो भूमिदान योजना चल रही है उस योजना में आपनी परिवार के द्वारा
1,08,000 / रुपये राशि पंचायत को प्रदान कर अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया,
बाकलिवाल परिवार के इस बहुमूल्य सहयोग के प्रति उनका आत्मिक धन्यवाद....
साथियों,
सभी समाज का यदि इसी प्रकार का सहयोग मिला तो पंचायत नूतन भूमि की खरेदी खत की प्रक्रिया जल्द ही पूर्ण करने जा रही है
यह कार्य समाज के सहयोग के बिना पूर्ण नहीं हो सकता है
अतएव सभी खंडेलवाल दिगंबर जैन समाज बंधुओं से प्रार्थना पूर्वक निवेदन है कि शीघ्र आती शीघ्र इस कार्य में सहयोग प्रदान करे
यह भूमि समाज हित में अत्यंत महत्वपूर्ण ऐसी भूमि है
आप अवश्य सहयोग करे यह पुन्ह निवेदन.
मंदिर जी बाकी जिस परिवार पर भी बाकी है वे आवश्य जमा करके भी अपना सहयोग प्रदान कर सकते है.
धन्यवाद
आपका अपना
खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर छत्रपती संभाजी नगर.
???????? |
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2026-04-09 20:05:12 |
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| 72998 |
40449726 |
साहुं शरणं नवग्रह तीर्थ वरुर आचार्य श्री गुणधरनंदीजी महाराज |
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2026-04-09 20:05:12 |
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| 72999 |
40449751 |
Akola Vishistashri Mataji Vihar |
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स्वर्गीय श्रीमान राजेंद्र जी गुमानमलजी बाकलिवाल
साबके 11 वे स्मृति वर्ष प्रसंग पर भावपूर्ण श्रध्दांजली.
श्रीमान स्वर्गीय राजेंद्रजी बाकलिवाल जी के स्मृति प्रीत्यर्थ उनकी धर्म पत्नी श्रीमती मीनादेवी तथा पुत्र किशोर जी एवं पुत्रवधू वर्षा जी बाकलिवाल
परिवार ने आज खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत के तत्त्वावधान में जो नूतन भूमि हेतु जो भूमिदान योजना चल रही है उस योजना में आपनी परिवार के द्वारा
1,08,000 / रुपये राशि पंचायत को प्रदान कर अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया,
बाकलिवाल परिवार के इस बहुमूल्य सहयोग के प्रति उनका आत्मिक धन्यवाद....
साथियों,
सभी समाज का यदि इसी प्रकार का सहयोग मिला तो पंचायत नूतन भूमि की खरेदी खत की प्रक्रिया जल्द ही पूर्ण करने जा रही है
यह कार्य समाज के सहयोग के बिना पूर्ण नहीं हो सकता है
अतएव सभी खंडेलवाल दिगंबर जैन समाज बंधुओं से प्रार्थना पूर्वक निवेदन है कि शीघ्र आती शीघ्र इस कार्य में सहयोग प्रदान करे
यह भूमि समाज हित में अत्यंत महत्वपूर्ण ऐसी भूमि है
आप अवश्य सहयोग करे यह पुन्ह निवेदन.
मंदिर जी बाकी जिस परिवार पर भी बाकी है वे आवश्य जमा करके भी अपना सहयोग प्रदान कर सकते है.
धन्यवाद
आपका अपना
खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर छत्रपती संभाजी नगर.
???????? |
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2026-04-09 20:05:12 |
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| 73000 |
40449726 |
साहुं शरणं नवग्रह तीर्थ वरुर आचार्य श्री गुणधरनंदीजी महाराज |
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2026-04-09 20:05:12 |
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| 72995 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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??? |
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2026-04-09 20:01:55 |
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| 72996 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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|
??? |
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2026-04-09 20:01:55 |
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| 72994 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*ಜೈನ ಸುದ್ದಿಗಳು & ಇತಿಹಾಸ*
*JAIN NEWS & HISTORY*
*ದ್ವಿತೀಯ ಪಿಯುಸಿ ಪರೀಕ್ಷೆಯಲ್ಲಿ ಡಿಸ್ಟಿಂಗ್ಷನ್ ಅಂಕ ಪಡೆದು ಉತ್ತೀರ್ಣ*
ಕಾರವಾರ ಜಿಲ್ಲೆಯ ಹಳಿಯಾಳ ತಾಲೂಕಿನ ಹವಗಿ ಗ್ರಾಮದ ಶ್ರೀ ಮಹಾವೀರ ಅಪ್ಪಾಜಿ ಉಪಾಧ್ಯೆ ಇವರ ಸುಪುತ್ರ , ಕಾರ್ಕಳದ ಕ್ರಿಯೇಟಿವ ಕಾಲೇಜಿನ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿ ಕು. ಸುಮೇರು ಮಹಾವೀರ ಉಪಾಧ್ಯೆ ಇವನು ೬೦೦ ಕ್ಕೆ ೫೭೬ ಅಂಕ ಪಡೆದು ಡಿಸ್ಟಿಂಗ್ಷನ್ ನಲ್ಲಿ ಪಾಸಾಗಿದ್ದಾನೆ . ಅವನಿಗೆ ಸಮಸ್ತ ಜೈನ ಸಮಾಜದ ಪರವಾಗಿ ಹಾರ್ದಿಕ ಶುಭಾಶಯಗಳು.
ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ |
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2026-04-09 20:00:42 |
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| 72992 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share</a>
_*?53#शुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त, सिद्धभगवान अपने२ शुद्धपर्याय के कर्ता और परमशुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त-सिद्धप्रभु सहित सभी जीव अकर्ता-इस स्यात् कर्ता-अकर्ता रुप अनेकान्त से नित्यार्थक्रियाका अभाव निजध्रुवशुद्धप्रभु में कैसे सिद्ध होता हैं? इस अनेकान्त के सम्यक् परिज्ञान से ही मुक्तीसुंदरी की प्राप्ति सहज सुलभ कैसे?-पं.अनिलजी, पुणे।*_
*#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।*
*#अनादि-अनंत अविनश्वर निजध्रुवशुद्ध प्रभु में नित्यार्थक्रिया की कल्पना वाले जीव नियमसे परम आनंदमय सुखामृतके रसास्वादसे पराङ्गमुख बहिरात्मा ही होते हैं। ?वे आस्त्रव,बंध, पाप और पापानुबंधी पुण्यादि के अनुपचरित असद्भूत व्यवहार नयसे कर्ता हैं।*
*#अन्तरात्मा-उक्त बहिरात्मा से विलक्षण लक्षणवाले सम्यग्दृष्टि जीव को द्रव्यरुप, संवर, निर्जरा और मोक्ष पदार्थका कर्तृत्व अनुपचरित असद्भूत व्यवहारनयसे हैं, और जीवभाव पर्यायरुप संवर-निर्जरा-मोक्ष पदार्थोंका कर्तृत्व विवक्षित एकदेश शुद्धनिश्चयनयसे है।*
*#परमशुद्धनिश्चयनयसे ? सभी जीव नित्यानित्यार्थक्रियारहित होनेसे ना उत्पन्न होते हैं नाही मरते हैं, तथा नाही बंध-मोक्ष करते हैं। इस वचनसे जन्म, मरण, बंधमोक्ष से रहित हैं।*
*#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७ पृष्ठ क्रं ९५ से ९६।* |
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2026-04-09 20:00:41 |
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| 72993 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*ಜೈನ ಸುದ್ದಿಗಳು & ಇತಿಹಾಸ*
*JAIN NEWS & HISTORY*
*ದ್ವಿತೀಯ ಪಿಯುಸಿ ಪರೀಕ್ಷೆಯಲ್ಲಿ ಡಿಸ್ಟಿಂಗ್ಷನ್ ಅಂಕ ಪಡೆದು ಉತ್ತೀರ್ಣ*
ಕಾರವಾರ ಜಿಲ್ಲೆಯ ಹಳಿಯಾಳ ತಾಲೂಕಿನ ಹವಗಿ ಗ್ರಾಮದ ಶ್ರೀ ಮಹಾವೀರ ಅಪ್ಪಾಜಿ ಉಪಾಧ್ಯೆ ಇವರ ಸುಪುತ್ರ , ಕಾರ್ಕಳದ ಕ್ರಿಯೇಟಿವ ಕಾಲೇಜಿನ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿ ಕು. ಸುಮೇರು ಮಹಾವೀರ ಉಪಾಧ್ಯೆ ಇವನು ೬೦೦ ಕ್ಕೆ ೫೭೬ ಅಂಕ ಪಡೆದು ಡಿಸ್ಟಿಂಗ್ಷನ್ ನಲ್ಲಿ ಪಾಸಾಗಿದ್ದಾನೆ . ಅವನಿಗೆ ಸಮಸ್ತ ಜೈನ ಸಮಾಜದ ಪರವಾಗಿ ಹಾರ್ದಿಕ ಶುಭಾಶಯಗಳು.
ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ |
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2026-04-09 20:00:41 |
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| 72991 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/fYsHq1DKlx8?feature=share</a>
_*?53#शुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त, सिद्धभगवान अपने२ शुद्धपर्याय के कर्ता और परमशुद्धनिश्चयनयसे अर्हन्त-सिद्धप्रभु सहित सभी जीव अकर्ता-इस स्यात् कर्ता-अकर्ता रुप अनेकान्त से नित्यार्थक्रियाका अभाव निजध्रुवशुद्धप्रभु में कैसे सिद्ध होता हैं? इस अनेकान्त के सम्यक् परिज्ञान से ही मुक्तीसुंदरी की प्राप्ति सहज सुलभ कैसे?-पं.अनिलजी, पुणे।*_
*#गाथा सूत्र२७?जितना आकाश अविभागी पुद्गलाणु से रोका जाता है उसे सर्व अणुओंको स्थान देनेमें योग्य प्रदेश जानो।*
*#अनादि-अनंत अविनश्वर निजध्रुवशुद्ध प्रभु में नित्यार्थक्रिया की कल्पना वाले जीव नियमसे परम आनंदमय सुखामृतके रसास्वादसे पराङ्गमुख बहिरात्मा ही होते हैं। ?वे आस्त्रव,बंध, पाप और पापानुबंधी पुण्यादि के अनुपचरित असद्भूत व्यवहार नयसे कर्ता हैं।*
*#अन्तरात्मा-उक्त बहिरात्मा से विलक्षण लक्षणवाले सम्यग्दृष्टि जीव को द्रव्यरुप, संवर, निर्जरा और मोक्ष पदार्थका कर्तृत्व अनुपचरित असद्भूत व्यवहारनयसे हैं, और जीवभाव पर्यायरुप संवर-निर्जरा-मोक्ष पदार्थोंका कर्तृत्व विवक्षित एकदेश शुद्धनिश्चयनयसे है।*
*#परमशुद्धनिश्चयनयसे ? सभी जीव नित्यानित्यार्थक्रियारहित होनेसे ना उत्पन्न होते हैं नाही मरते हैं, तथा नाही बंध-मोक्ष करते हैं। इस वचनसे जन्म, मरण, बंधमोक्ष से रहित हैं।*
*#बृहद-द्रव्यसंग्रह गाथा सूत्र २७ पृष्ठ क्रं ९५ से ९६।* |
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2026-04-09 20:00:40 |
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