WhatsApp Messages Dashboard

Total Records in Table: 15080

Records Matching Filters: 15080

From: To: Global Search:

Messages

ID Chat ID
Chat Name
Sender
Phone
Message
Status
Date View
74881 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? *?जिनागम पंथ जयवंत हो?* *परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (35 पिच्छी) का श्री मंशापूर्ण महावीर जिनालय ,मुरादनगर में हुआ…!* *?भव्य मंगल प्रवेश?* . 2026-04-10 15:04:28
74882 40449675 ?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? *?जिनागम पंथ जयवंत हो?* *परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (35 पिच्छी) का श्री मंशापूर्ण महावीर जिनालय ,मुरादनगर में हुआ…!* *?भव्य मंगल प्रवेश?* . 2026-04-10 15:04:28
74879 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share</a> 2026-04-10 15:02:18
74880 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share</a> 2026-04-10 15:02:18
74877 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-10 15:01:42
74878 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-10 15:01:42
74876 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/kOxdt5qVBYU" target="_blank">https://youtu.be/kOxdt5qVBYU</a> 2026-04-10 15:01:00
74875 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/kOxdt5qVBYU" target="_blank">https://youtu.be/kOxdt5qVBYU</a> 2026-04-10 15:00:59
74873 40449692 7 धर्म का मर्म *सावधान* कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे - णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है, - प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है - इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार - हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं, - "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है - अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता - अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है - यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे - अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी - यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है, - यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो - यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं - सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे *धर्म का मर्म* शब्दार्थ णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन कार = पुनः पुनः सही उच्चारण णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमोयारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं पढमं होहि मंगलं 2026-04-10 14:55:41
74874 40449692 7 धर्म का मर्म *सावधान* कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे - णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है, - प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है - इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार - हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं, - "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है - अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता - अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है - यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे - अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी - यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है, - यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो - यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं - सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे *धर्म का मर्म* शब्दार्थ णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन कार = पुनः पुनः सही उच्चारण णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमोयारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं पढमं होहि मंगलं 2026-04-10 14:55:41