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226876 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? *वंदामी माताजी* ?? ?? *इच्छामी माताजी* ?? ? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? 2026-06-13 10:46:58
226874 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर मुनि श्री 108 मेघदत्त सागर एवं मुनि श्री वृषभ दत्त सागर महाराज का मंगल विहार ग्वालियर की ओर 2026-06-13 10:46:57
226873 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर मुनि श्री 108 मेघदत्त सागर एवं मुनि श्री वृषभ दत्त सागर महाराज का मंगल विहार ग्वालियर की ओर 2026-06-13 10:46:56
226872 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-06-13 10:46:34
226871 40449689 ? विद्या शरणम ०१ ? 2026-06-13 10:46:33
226870 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? 2026-06-13 10:45:58
226869 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? 2026-06-13 10:45:57
226867 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर मेरे सभी नियम है जी ???? आप भी अपनी-अपनी सुविधानुसार 1,2,34,5,6,7,8,9,10,11, या सारे नियम ले सकते है जी ?????? 2026-06-13 10:45:37
226868 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर [12/06, 10:21] dipikadilkushjain❤️??: ?????????? ? *जिनवाणी--स्तुति*? ************************************* *भाव मे कषाय के* *विभाव को जो नाश करे* *सांचे अर्थो मे तो* *वो ही जिन वाणी है* *चेतना से चेतन को* *ज्ञान भानु भान हुआ* *ज्ञान हुआ चेतना का* *वो ही जिन वाणी है* *द्रव्य भाव कर्म नाश* *भव्यता का हो विकास* *देने बाली हो प्रकाश* *वो ही जिन वाणी है* *नित्य "नेमी" सिर नवाय* *स्वाध्याय मे चित्त रमाय* *भवसागर तर जाये* *ऐ ही उर आनी है* ? *दोहा--*? ************************************* *जिनवाणी को नित नमो* *मन विकार धुल जाऐ* *ज्ञान ज्ञेय ज्ञाता बनूँ* *निज वैभव को पाय* ?? *पं नेमीचंद सिद्धांत चक्रवर्ती*?? ?????????? *?जिनवाणी माता की जय?* ???????????????????? [12/06, 10:22] dipikadilkushjain❤️??: (दोहा) वीतराग वन्दौं सदा, भाव सहित सिर नाय | कहूं काण्ड निर्वाण की, भाषा सुगम बनाये || (चौपाई) अष्टापद आदीश्वर स्वामि, वासुपूज्य चम्पापुरि नामि | नेमिनाथ स्वामी गिरनार, वन्दौं भाव भगति उर धार ||1|| चरम तीर्थकर चरम शरीर, पावापुरि स्वामि महावीर | शिखर समेद जिनेसुर बीस, भावसहित वन्दौं निश दीस ||2|| वरदत्तराय रु इन्द मुनिंद, सायरदत्त आदि गुणवृन्द | नगर तारवर मुनि उठकोडी, वन्दौं भाव सहित कर जोडी ||3|| श्रीगिरनार शिखर विख्यात, कोडी बहत्तर अरु सौ सात | सम्बु प्रद्युम्न कुमर द्वै भाय, अनिरुध आदि नमूं तसु पाय ||4|| रामचन्द्र के सुत द्वै वीर, लाडनरिंद आदि गुणधीर | पांच कोडी मुनि मुक्ति मंझार, पावागिरि वन्दौं निरधार ||5|| पांडव तीन द्रविड़ राजान, आठ कोडी मुनि मुक्ति पयान | श्रीशत्रुंजय के सीस, भावसहित वन्दौं निश दीस ||6|| जे बलभद्र मुक्ति में गये, आठ कोडी मुनि औरहू भये | श्रीगजपन्थ शिखर सुविशाल, तिनके चरण नमूं तिहूँ काल ||7|| राम हणु सुग्रीव सुडील, गव गवाख्य नील महानील | कोडी निन्याणव मुक्ति पयान, तुंगीगिरि वन्दौं धरि ध्यान ||8|| नंग अनंग कुमार सुजान, पांच कोडी अरु अर्ध प्रमान | मुक्ति गये सोनागिरि शीस, ते वन्दौं त्रिभुवन पति ईस ||9|| रावण के सुत आदिकुमार, मुक्ति गये रेवा तट सार | कोटि पंच और लाख पचास, ते वन्दौंधरि परम हुलास ||10|| रेवानदी सिद्धवर कूट, पश्चिम दिशा देह जहँ छूट | द्वे चक्री दश कामकुमार, उठकोडी वन्दौं भव पार ||11|| बडवानी बडनयर सुचंग, दक्षिण दिशि गिरि चूल उतंग | इन्द्रजीत अरु कुम्भ जो कर्ण, ते वन्दौं भव सागर तरण ||12|| सुवरणभद्र आदि मुनि चार, पावागिरि वर शिखर मंझार | चेलना नदी तीर के पास, मुक्ति गये नित वन्दौं नित तास ||13|| फलहोडी बडगाम अनूप, पश्चिम दिशा द्रोणगिरि रूप | गुरुदत्तादी मुनिसुर जहाँ, मुक्ति गये वन्दौं नित तहां ||14|| बाल महाबाल मुनि दोय, नागकुमार मिले त्रय होय | श्रीअष्टापद मुक्ति मंझार, ते वन्दौं नित सुरत सँभार ||15|| अचलापुर की दिश ईसान, तहां मेढगिरि नाम प्रधान | साढ़े तीन कोडी मुनिराय, तिनके चरण नमूं चित लाय ||16|| वंसस्थल वन के ढिग होय, पश्चिम दिशा कुंथुगिरी सोय | कुलभूषण दिशिभूषण नाम, तिनके चरणनि करूं प्रणाम ||17|| जसरथ राजा के सुत कहे, देश कलिंग पांच सौ लहे | कोटिशिला मुनि कोडी प्रमान, वन्दन करूं जोरि जग पान ||18|| समवशरण श्री पार्श्व जिनन्द, रेसिन्दीगिरि नयनानंद | वरदत्तादि पंच ऋषिराय, ते वन्दौं नित धरम जिहाज ||19|| मथुरा पुर पवित्र उद्यान, जंबूस्वामी जी निर्वाण । चरम केवली पंचम काल। ते बंदो नित दीन दयाल।।20।। तीन लोक ते तीरथ जहाँ, नित प्रति वन्दन कीजै तहां | मन-वच-काय सहित सिर नाय, वन्दन करहिं भविक गुण गाय ||20|| संवत सतरह सौ इकताल, आश्विन सुदि दशमी सुविशाल | भक्त वन्दन करहिं त्रिकाल, जय निर्वाणकांड गुणमाल ||21 2026-06-13 10:45:37
226865 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर मेरे सभी नियम है जी ???? आप भी अपनी-अपनी सुविधानुसार 1,2,34,5,6,7,8,9,10,11, या सारे नियम ले सकते है जी ?????? 2026-06-13 10:45:36