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?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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मेरे सभी नियम है जी
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आप भी अपनी-अपनी
सुविधानुसार
1,2,34,5,6,7,8,9,10,11,
या सारे नियम ले सकते है जी
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2026-06-13 10:45:37 |
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?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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[12/06, 10:21] dipikadilkushjain❤️??: ??????????
? *जिनवाणी--स्तुति*?
*************************************
*भाव मे कषाय के*
*विभाव को जो नाश करे*
*सांचे अर्थो मे तो*
*वो ही जिन वाणी है*
*चेतना से चेतन को*
*ज्ञान भानु भान हुआ*
*ज्ञान हुआ चेतना का*
*वो ही जिन वाणी है*
*द्रव्य भाव कर्म नाश*
*भव्यता का हो विकास*
*देने बाली हो प्रकाश*
*वो ही जिन वाणी है*
*नित्य "नेमी" सिर नवाय*
*स्वाध्याय मे चित्त रमाय*
*भवसागर तर जाये*
*ऐ ही उर आनी है*
? *दोहा--*?
*************************************
*जिनवाणी को नित नमो*
*मन विकार धुल जाऐ*
*ज्ञान ज्ञेय ज्ञाता बनूँ*
*निज वैभव को पाय*
?? *पं नेमीचंद सिद्धांत चक्रवर्ती*??
??????????
*?जिनवाणी माता की जय?*
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[12/06, 10:22] dipikadilkushjain❤️??: (दोहा)
वीतराग वन्दौं सदा, भाव सहित सिर नाय |
कहूं काण्ड निर्वाण की, भाषा सुगम बनाये ||
(चौपाई)
अष्टापद आदीश्वर स्वामि, वासुपूज्य चम्पापुरि नामि |
नेमिनाथ स्वामी गिरनार, वन्दौं भाव भगति उर धार ||1||
चरम तीर्थकर चरम शरीर, पावापुरि स्वामि महावीर |
शिखर समेद जिनेसुर बीस, भावसहित वन्दौं निश दीस ||2||
वरदत्तराय रु इन्द मुनिंद, सायरदत्त आदि गुणवृन्द |
नगर तारवर मुनि उठकोडी, वन्दौं भाव सहित कर जोडी ||3||
श्रीगिरनार शिखर विख्यात, कोडी बहत्तर अरु सौ सात |
सम्बु प्रद्युम्न कुमर द्वै भाय, अनिरुध आदि नमूं तसु पाय ||4||
रामचन्द्र के सुत द्वै वीर, लाडनरिंद आदि गुणधीर |
पांच कोडी मुनि मुक्ति मंझार, पावागिरि वन्दौं निरधार ||5||
पांडव तीन द्रविड़ राजान, आठ कोडी मुनि मुक्ति पयान |
श्रीशत्रुंजय के सीस, भावसहित वन्दौं निश दीस ||6||
जे बलभद्र मुक्ति में गये, आठ कोडी मुनि औरहू भये |
श्रीगजपन्थ शिखर सुविशाल, तिनके चरण नमूं तिहूँ काल ||7||
राम हणु सुग्रीव सुडील, गव गवाख्य नील महानील |
कोडी निन्याणव मुक्ति पयान, तुंगीगिरि वन्दौं धरि ध्यान ||8||
नंग अनंग कुमार सुजान, पांच कोडी अरु अर्ध प्रमान |
मुक्ति गये सोनागिरि शीस, ते वन्दौं त्रिभुवन पति ईस ||9||
रावण के सुत आदिकुमार, मुक्ति गये रेवा तट सार |
कोटि पंच और लाख पचास, ते वन्दौंधरि परम हुलास ||10||
रेवानदी सिद्धवर कूट, पश्चिम दिशा देह जहँ छूट |
द्वे चक्री दश कामकुमार, उठकोडी वन्दौं भव पार ||11||
बडवानी बडनयर सुचंग, दक्षिण दिशि गिरि चूल उतंग |
इन्द्रजीत अरु कुम्भ जो कर्ण, ते वन्दौं भव सागर तरण ||12||
सुवरणभद्र आदि मुनि चार, पावागिरि वर शिखर मंझार |
चेलना नदी तीर के पास, मुक्ति गये नित वन्दौं नित तास ||13||
फलहोडी बडगाम अनूप, पश्चिम दिशा द्रोणगिरि रूप |
गुरुदत्तादी मुनिसुर जहाँ, मुक्ति गये वन्दौं नित तहां ||14||
बाल महाबाल मुनि दोय, नागकुमार मिले त्रय होय |
श्रीअष्टापद मुक्ति मंझार, ते वन्दौं नित सुरत सँभार ||15||
अचलापुर की दिश ईसान, तहां मेढगिरि नाम प्रधान |
साढ़े तीन कोडी मुनिराय, तिनके चरण नमूं चित लाय ||16||
वंसस्थल वन के ढिग होय, पश्चिम दिशा कुंथुगिरी सोय |
कुलभूषण दिशिभूषण नाम, तिनके चरणनि करूं प्रणाम ||17||
जसरथ राजा के सुत कहे, देश कलिंग पांच सौ लहे |
कोटिशिला मुनि कोडी प्रमान, वन्दन करूं जोरि जग पान ||18||
समवशरण श्री पार्श्व जिनन्द, रेसिन्दीगिरि नयनानंद |
वरदत्तादि पंच ऋषिराय, ते वन्दौं नित धरम जिहाज ||19||
मथुरा पुर पवित्र उद्यान, जंबूस्वामी जी निर्वाण ।
चरम केवली पंचम काल।
ते बंदो नित दीन दयाल।।20।।
तीन लोक ते तीरथ जहाँ, नित प्रति वन्दन कीजै तहां |
मन-वच-काय सहित सिर नाय, वन्दन करहिं भविक गुण गाय ||20||
संवत सतरह सौ इकताल, आश्विन सुदि दशमी सुविशाल |
भक्त वन्दन करहिं त्रिकाल, जय निर्वाणकांड गुणमाल ||21 |
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?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर |
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मेरे सभी नियम है जी
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आप भी अपनी-अपनी
सुविधानुसार
1,2,34,5,6,7,8,9,10,11,
या सारे नियम ले सकते है जी
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