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76340 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:47:42
76339 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:47:41
76338 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:47:40
76337 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:47:39
76335 40449749 जिनोदय?JINODAYA आवश्यक संदेश हर रविवार को आप मंदिर में पहुंचने की आदत डालें जिस तरह ईसाई रविवार को चर्च जरूर जाता है। और मुसलमान शुक्रवार को मस्जिद जरूर जाता है। हमें भी रविवार का दिन तय करना पड़ेगा बल और बुद्धि का दिवस शक्ति का दिवस पार्श्वनाथ जी का दिवस। आप सभी को शिकायत होती है कि जैन कभी जैन के लिए खड़ा नहीं होता। कैसे होगा क्या आपने ऐसा कोई नियम बना रखा है जिसमें आप कम से कम सप्ताह में एक बार एक दूसरे से मिले। आइए हम अपने वीरान पड़े मंदिरों को शक्ति और संगठन स्थल के रूप में विकसित करें। हर रविवार सुबह या शाम को 7:00 से 7:30 के बीच आप चाहे कहीं भी है मंदिर अवश्य पहुंचे । भक्तामर पाठ एवं आरती का समय यही होता है। आप अपने घर पर हैं तो घर के पास के मंदिर में ।दुकान पर है तो दुकान के पास के मंदिर में ऑफिस में है तो ऑफिस के पास किसी मंदिर में ।अगर आप यात्रा पर भी हैं तो आप जहां भी हैं वहां पर आसपास किसी भी मंदिर में हर रविवार 7:00 से 7:30 के बीच जरूर पहुंचे। कल्पना कीजिए भारतवर्ष में लाखों लाखों मंदिर है अगर हर मंदिर में सिर्फ *50 से 100 लोग भी पहुंचेंगे और एक साथ उनके घंटों की और आरती की आवाजें गूंज आएगी तो एक मिश्रित संगीत जब *पूरे भारतवर्ष में हर रविवार ठीक 7:00 से 7:30* के बीच में गूंजेगा तो यह आवाज पूरी दुनिया में जाएगी इसका असर बहुत ही दूरगामी होगा। विश्वास कीजिए आज की सभी समस्याएं कपूर की तरह उड़ जाएगी इतनी बड़ी संख्या में जब जैन अपने मंदिरों में पहुंचेगा वह भी हर सप्ताह तो किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं होगी कि जैन को छेड़ सके। हो सके तो अपने साथ अपने बीवी बच्चों को भी लेकर मंदिर जाए जब आप इस तरह से नियमित रूप से हर रविवार मंदिर पहुंचेंगे तो वहां आपके आस पड़ोस में एक ही जो लोग हैं वह भी आपसे मिलेंगे आपकी जान पहचान बढ़ेगी आपस में संबंध बढ़ेंगे और फिर आप एक दूसरे के सुख दुख में भी शामिल होंगे इसी तरह से हम सभी एकता के सूत्र में बंध जाएंगे। अगर संदेश पसंद आया है तो इसे सभी ग्रुपों में प्रसारित करें। और आज ही प्रण करें चाहे हम कुछ भी कर रहे हैं *हर रविवार 7:00 से 7:30* के बीच हम मंदिर जरूर पहुंचेंगे अपने लिए नहीं अपने समाज और अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए। ध्यान रहे अब यह आवश्यक हो चुका है अगर आप इसे अभी भी टालते रहे तो बहुत बड़े खतरे में आप पड़ने वाले हैं। जितना शीघ्र आप इसे शुरू करेंगे इतना जल्दी आप एक दूसरे से एकता के सूत्र में बंध जाएंगे। *जय आदिनाथ* ? *जय जिनेन्द्र* ? *इस संदेश को कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे* मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे* 2026-04-11 07:46:38
76336 40449749 जिनोदय?JINODAYA आवश्यक संदेश हर रविवार को आप मंदिर में पहुंचने की आदत डालें जिस तरह ईसाई रविवार को चर्च जरूर जाता है। और मुसलमान शुक्रवार को मस्जिद जरूर जाता है। हमें भी रविवार का दिन तय करना पड़ेगा बल और बुद्धि का दिवस शक्ति का दिवस पार्श्वनाथ जी का दिवस। आप सभी को शिकायत होती है कि जैन कभी जैन के लिए खड़ा नहीं होता। कैसे होगा क्या आपने ऐसा कोई नियम बना रखा है जिसमें आप कम से कम सप्ताह में एक बार एक दूसरे से मिले। आइए हम अपने वीरान पड़े मंदिरों को शक्ति और संगठन स्थल के रूप में विकसित करें। हर रविवार सुबह या शाम को 7:00 से 7:30 के बीच आप चाहे कहीं भी है मंदिर अवश्य पहुंचे । भक्तामर पाठ एवं आरती का समय यही होता है। आप अपने घर पर हैं तो घर के पास के मंदिर में ।दुकान पर है तो दुकान के पास के मंदिर में ऑफिस में है तो ऑफिस के पास किसी मंदिर में ।अगर आप यात्रा पर भी हैं तो आप जहां भी हैं वहां पर आसपास किसी भी मंदिर में हर रविवार 7:00 से 7:30 के बीच जरूर पहुंचे। कल्पना कीजिए भारतवर्ष में लाखों लाखों मंदिर है अगर हर मंदिर में सिर्फ *50 से 100 लोग भी पहुंचेंगे और एक साथ उनके घंटों की और आरती की आवाजें गूंज आएगी तो एक मिश्रित संगीत जब *पूरे भारतवर्ष में हर रविवार ठीक 7:00 से 7:30* के बीच में गूंजेगा तो यह आवाज पूरी दुनिया में जाएगी इसका असर बहुत ही दूरगामी होगा। विश्वास कीजिए आज की सभी समस्याएं कपूर की तरह उड़ जाएगी इतनी बड़ी संख्या में जब जैन अपने मंदिरों में पहुंचेगा वह भी हर सप्ताह तो किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं होगी कि जैन को छेड़ सके। हो सके तो अपने साथ अपने बीवी बच्चों को भी लेकर मंदिर जाए जब आप इस तरह से नियमित रूप से हर रविवार मंदिर पहुंचेंगे तो वहां आपके आस पड़ोस में एक ही जो लोग हैं वह भी आपसे मिलेंगे आपकी जान पहचान बढ़ेगी आपस में संबंध बढ़ेंगे और फिर आप एक दूसरे के सुख दुख में भी शामिल होंगे इसी तरह से हम सभी एकता के सूत्र में बंध जाएंगे। अगर संदेश पसंद आया है तो इसे सभी ग्रुपों में प्रसारित करें। और आज ही प्रण करें चाहे हम कुछ भी कर रहे हैं *हर रविवार 7:00 से 7:30* के बीच हम मंदिर जरूर पहुंचेंगे अपने लिए नहीं अपने समाज और अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए। ध्यान रहे अब यह आवश्यक हो चुका है अगर आप इसे अभी भी टालते रहे तो बहुत बड़े खतरे में आप पड़ने वाले हैं। जितना शीघ्र आप इसे शुरू करेंगे इतना जल्दी आप एक दूसरे से एकता के सूत्र में बंध जाएंगे। *जय आदिनाथ* ? *जय जिनेन्द्र* ? *इस संदेश को कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे* मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे* 2026-04-11 07:46:38
76334 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:45:43
76333 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 07:45:42
76331 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 07:45:40
76332 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 07:45:40