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40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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2026-06-12 20:50:06 |
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| 225423 |
40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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मुंबई में सफेद लाइन पर बवाल, जैनों पर उठते कई सवाल ? #MumbaiNews
#WhiteLineControversy
#JainCommunity
#channelmahalaxmi
#MumbaiBawal
JainSamaj
MumbaiUpdate |
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2026-06-12 20:50:04 |
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| 225424 |
40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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मुंबई में सफेद लाइन पर बवाल, जैनों पर उठते कई सवाल ? #MumbaiNews
#WhiteLineControversy
#JainCommunity
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#MumbaiBawal
JainSamaj
MumbaiUpdate |
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2026-06-12 20:50:04 |
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| 225422 |
40449694 |
तन्मय आराधना ग्रुप |
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Ep. 3745 अयोध्या, काशी, मथुरा के बाद अब मस्जिद के भीतर जैन तीर्थंकर, सफेद लाइन पर FIR
<a href="https://youtu.be/Z5BWl8CpF80" target="_blank">https://youtu.be/Z5BWl8CpF80</a>
?700 वर्ष के बंद भरूच जामा मस्जिद के तहखाने में मिली 19वें तीर्थंकर श्री मल्लिनाथ की अति प्राचीन प्रतिमा, शिलालेख पर लिखा वि.सं 1213 के प्रमाण
?मस्जिद के मुख्य दरवाजे को प्रशासन ने किया सील, सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जैन मंदिर के अवशेषों से बनी मस्जिद
?क्या सरकार प्रशासन वैसी ही कार्यवाही करेगा, जैसी अयोध्या, काशी मथुरा में की ?
?मुंबई में सड़कों पर सफेद लाइन पर बड़ा बवाल, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले- जैन जिहाद और हिन्दू कैंसर के खिलाफ भाजपा कारपोरेटर ने कराई FIR
अब धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचे, किसकी मां के पास
?तालाब खुदाई में मिली फिर, प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमा कहां ?
?220 साल पुराने नये मंदिर में नहीं आज भी लाइट
?दाहोद में 19 जून को, क्या होगा?
?कृपया सभी जैन भाई इस पहले फेस में अपनी स्व गणना तत्काल भरे : साइट लिंक: se.census.gov.in जनगणना अवधि के दौरान जनगणना अधिकारी अगर आपके घर पर नहीं आता है, तो 1855 पर शिकायत जरूर करें।
?चैनल महालक्ष्मी का आप सभी से अनुरोध अगर आपके आसपास तीर्थ या प्रतिमा पर कोई अतिक्रमण हो रहा है, तो आप कृपया फोटो, वीडियो के प्रमाण सहित तत्काल सूचित करें,
?अगर आपके पास भी कोई प्रमाणिक जैन तीर्थ या जैनहित में कोई जानकारी हो, तो आप अपने नाम पते के साथ 99106 90823 पर व्हाट्सएप भेज सकते हैं।
?जैन धर्म, संस्कृति, विरासत, समाज से संबंधित हर समाचार और विचार से अपडेट रहने के लिए ग्रुप से जुड़िये
<a href="https://chat.whatsapp.com/FgO0Un6tEaVJuK6ggdyRcu" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/FgO0Un6tEaVJuK6ggdyRcu</a>
?यदि आप जैन धर्म को बढ़ावा देने में भागीदार बनना चाहते हैं, तो अपना नाम, फोटो और पता और विवरण भेजें कि आप जैन धर्म को कैसे बढ़ावा देना चाहते हैं, व्हाट्सएप पर +91 9910690823 पर भेजें।
?जैन समुदाय का प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्र सांध्य महालक्ष्मी भाग्योदय पढ़ें - शुक्रवार को, अधिक जानकारी के लिए व्हाट्सएप
करें 9910690825 |
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2026-06-12 20:49:16 |
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तन्मय आराधना ग्रुप |
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Ep. 3745 अयोध्या, काशी, मथुरा के बाद अब मस्जिद के भीतर जैन तीर्थंकर, सफेद लाइन पर FIR
<a href="https://youtu.be/Z5BWl8CpF80" target="_blank">https://youtu.be/Z5BWl8CpF80</a>
?700 वर्ष के बंद भरूच जामा मस्जिद के तहखाने में मिली 19वें तीर्थंकर श्री मल्लिनाथ की अति प्राचीन प्रतिमा, शिलालेख पर लिखा वि.सं 1213 के प्रमाण
?मस्जिद के मुख्य दरवाजे को प्रशासन ने किया सील, सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जैन मंदिर के अवशेषों से बनी मस्जिद
?क्या सरकार प्रशासन वैसी ही कार्यवाही करेगा, जैसी अयोध्या, काशी मथुरा में की ?
?मुंबई में सड़कों पर सफेद लाइन पर बड़ा बवाल, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले- जैन जिहाद और हिन्दू कैंसर के खिलाफ भाजपा कारपोरेटर ने कराई FIR
अब धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचे, किसकी मां के पास
?तालाब खुदाई में मिली फिर, प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमा कहां ?
?220 साल पुराने नये मंदिर में नहीं आज भी लाइट
?दाहोद में 19 जून को, क्या होगा?
?कृपया सभी जैन भाई इस पहले फेस में अपनी स्व गणना तत्काल भरे : साइट लिंक: se.census.gov.in जनगणना अवधि के दौरान जनगणना अधिकारी अगर आपके घर पर नहीं आता है, तो 1855 पर शिकायत जरूर करें।
?चैनल महालक्ष्मी का आप सभी से अनुरोध अगर आपके आसपास तीर्थ या प्रतिमा पर कोई अतिक्रमण हो रहा है, तो आप कृपया फोटो, वीडियो के प्रमाण सहित तत्काल सूचित करें,
?अगर आपके पास भी कोई प्रमाणिक जैन तीर्थ या जैनहित में कोई जानकारी हो, तो आप अपने नाम पते के साथ 99106 90823 पर व्हाट्सएप भेज सकते हैं।
?जैन धर्म, संस्कृति, विरासत, समाज से संबंधित हर समाचार और विचार से अपडेट रहने के लिए ग्रुप से जुड़िये
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?यदि आप जैन धर्म को बढ़ावा देने में भागीदार बनना चाहते हैं, तो अपना नाम, फोटो और पता और विवरण भेजें कि आप जैन धर्म को कैसे बढ़ावा देना चाहते हैं, व्हाट्सएप पर +91 9910690823 पर भेजें।
?जैन समुदाय का प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्र सांध्य महालक्ष्मी भाग्योदय पढ़ें - शुक्रवार को, अधिक जानकारी के लिए व्हाट्सएप
करें 9910690825 |
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2026-06-12 20:49:12 |
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तन्मय आराधना ग्रुप |
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आस्था की अमर मशाल: दानवीर सेठ माणिकचंद और तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125 पावन वर्ष <a href="https://www.channelmahalaxmi.com/teerthshetra-committee-9/" target="_blank">https://www.channelmahalaxmi.com/teerthshetra-committee-9/</a> via @Channel Mahalaxmi
आस्था का सवा सौ साल पुराना पहरा और मौन साधना की अनकही कहानी... भाग- 2
‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी’ के गौरवमयी 125 वर्ष के इतिहास की अनकही गौरव गाथा की परतें खोलते हुए एक-एक करके सान्ध्य महालक्ष्मी आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही है। भाग-1 में आपने पढ़ा किस प्रकार तीर्थक्षेत्र कमेटी का सन् 1902 में जन्म हुआ और 31 सदस्यों की एक नामवली पर सहर्ष मंजूरी हुई। प्रस्तुत है आज दूसरी भावपूर्ण कड़ी:
संकल्प से सिद्धि तक, अनन्य तीर्थ-भक्ति और महापुरुषों के त्याग की गौरव-गाथा
22 अक्टूबर 2026 की यह पावन बेला, कालचक्र के पन्नों पर कोई साधारण तारीख नहीं है। यह ‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी’ के 125वें स्वर्णिम वर्ष (शतकोत्तर रजत महोत्सव) का मंगल शंखनाद है। आइए, आज इतिहास के झरोखे से उस पवित्र नींव को नमन करें, जिसे किसी सांसारिक धन से नहीं, बल्कि निस्वार्थ भक्ति और अटूट श्रद्धा के पसीने से सींचा गया था।
जब तिजोरी खाली थी, पर संकल्पों में हिमालय जैसी ऊंचाई थी
विक्रम संवत 1959 का वह ऐतिहासिक पल... जब तीर्थों की रक्षा के लिए कमेटी की स्थापना का विचार तो जन्मा, पर कार्य शुरू करने के लिए समाज के पास कोई ‘फंड’ नहीं था। लेकिन जहाँ अडिग आस्था हो, वहाँ भला संसाधनों की कमी कब आड़े आती है?
बम्बई के गौरव, दानवीर सेठ माणिकचंद जवेरी की आँखों में तीर्थ-सेवा का ऐसा अनुराग था कि उन्होंने फंड का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपनी पूरी पूंजी और अपनी आत्मा इस भगीरथ कार्य में झोंक दी।
दुकान से शुरू हुई साधना: शुरूआत किसी आलीशान दफ़्तर से नहीं, बल्कि सेठ जी ने अपनी दुकान से प्रांतिक सभा के माध्यम से की। वहीं बैठकर उन्होंने पाई-पाई का हिसाब रखा।
हीराबाग का ऐतिहासिक दीवानखाना: जैसे-जैसे आस्था का कारवां बढ़ा, अगस्त 1906 में बम्बई की सुप्रसिद्ध हीराबाग धर्मशाला का वह दीवानखाना कमेटी का पहला आधिकारिक और ऐतिहासिक कार्यालय बना।
सांसों की अंतिम आहुति तक तीर्थ-सेवा का महाव्रत
सेठ माणिकचंद जी के हृदय में चौबीसों घंटे बस एक ही लौ जलती थी—हमारे अनादिकालीन तीर्थों की सुरक्षा। वे सिर्फ योजनाएं नहीं बनाते थे, जहाँ भी तीर्थों पर संकट देखा, वहाँ खुद ढाल बनकर खड़े हो गए।
लक्ष्मी का सार्थक समर्पण: उन्होंने अपने ट्रस्ट फंड से 7 प्रतिशत (लगभग 2000 वार्षिक, जो उस दौर में एक बहुत बड़ी राशि थी) कमेटी के कार्यालय खर्च के लिए हमेशा के लिए समर्पित कर दिया।
महामंत्री का अमर दायित्व: सन् 1906 में उन्होंने महामंत्री का पद संभाला और अपनी अंतिम सांस तक तीर्थों के संवर्धन के लिए खुद को चंदन की तरह घिस दिया।
कर्णधार बदलते रहे, पर कर्तव्य की गंगा बहती रही
कमेटी का यह सवा सौ साल का सफर उन दिग्गज महापुरुषों की त्याग-गाथा है, जिन्होंने इस धर्म-रथ को कभी रुकने नहीं दिया:
शुरूआती पहरेदार: सबसे पहले इस तीर्थ विभाग की कमान को सेठ जवेरचन्द जी ने संभाला और इसे गति दी।
संकट के बादल और संबल: सेठ माणिकचंद जी के देवलोकगमन के बाद का. भागमल प्रमुदयाल जी ने मंत्रित्व का कांटों भरा ताज पहना, पर नियति के क्रूर प्रहार से उनका आकस्मिक निधन हो गया। इस वज्रपात के समय सहायक मंत्री सेठ बल्लुभाई लखमीचन्द जी चौकसी संकटमोचक बनकर सामने आए और व्यवस्था को संभाला।
1920 का ऐतिहासिक मोड़: इंदौर के सूर्य, सर सेठ हुकुमचंद जी की अध्यक्षता में जब ऐतिहासिक जनरल मीटिंग हुई, तो समाज की पुकार पर सेठ चुन्नीलाल हेमचंद जरीवाले और नई पीढ़ी ने इस महान दायित्व को अपने कंधों पर उठा लिया और दशकों तक इस विरासत की आरती उतारी।
आज का यह 125वां वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन युगपुरुषों के चरणों में हमारी कृतज्ञता के अश्रु-पूर्ण सुमन हैं, जिन्होंने हर झंझावात को सहकर अदालतों से लेकर समाज की गलियों तक हमारे पावन धामों की अस्मिता को अक्षुण्ण रखा।
पुकारती है तीर्थों की माटी... चलो मथुरा!
आइए, इस ऐतिहासिक और गौरवमयी महोत्सव का साक्षी बनने के लिए मथुरा की उस पावन धरा पर एकत्रित हों, जहाँ इस शतकोत्तर रजत महोत्सव का शंखनाद होने जा रहा है। अपनी उपस्थिति की आहुति देकर पूर्वजों के इस त्याग को नमन करें! (जारी) |
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2026-06-12 20:49:10 |
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तन्मय आराधना ग्रुप |
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आस्था की अमर मशाल: दानवीर सेठ माणिकचंद और तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125 पावन वर्ष <a href="https://www.channelmahalaxmi.com/teerthshetra-committee-9/" target="_blank">https://www.channelmahalaxmi.com/teerthshetra-committee-9/</a> via @Channel Mahalaxmi
आस्था का सवा सौ साल पुराना पहरा और मौन साधना की अनकही कहानी... भाग- 2
‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी’ के गौरवमयी 125 वर्ष के इतिहास की अनकही गौरव गाथा की परतें खोलते हुए एक-एक करके सान्ध्य महालक्ष्मी आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही है। भाग-1 में आपने पढ़ा किस प्रकार तीर्थक्षेत्र कमेटी का सन् 1902 में जन्म हुआ और 31 सदस्यों की एक नामवली पर सहर्ष मंजूरी हुई। प्रस्तुत है आज दूसरी भावपूर्ण कड़ी:
संकल्प से सिद्धि तक, अनन्य तीर्थ-भक्ति और महापुरुषों के त्याग की गौरव-गाथा
22 अक्टूबर 2026 की यह पावन बेला, कालचक्र के पन्नों पर कोई साधारण तारीख नहीं है। यह ‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी’ के 125वें स्वर्णिम वर्ष (शतकोत्तर रजत महोत्सव) का मंगल शंखनाद है। आइए, आज इतिहास के झरोखे से उस पवित्र नींव को नमन करें, जिसे किसी सांसारिक धन से नहीं, बल्कि निस्वार्थ भक्ति और अटूट श्रद्धा के पसीने से सींचा गया था।
जब तिजोरी खाली थी, पर संकल्पों में हिमालय जैसी ऊंचाई थी
विक्रम संवत 1959 का वह ऐतिहासिक पल... जब तीर्थों की रक्षा के लिए कमेटी की स्थापना का विचार तो जन्मा, पर कार्य शुरू करने के लिए समाज के पास कोई ‘फंड’ नहीं था। लेकिन जहाँ अडिग आस्था हो, वहाँ भला संसाधनों की कमी कब आड़े आती है?
बम्बई के गौरव, दानवीर सेठ माणिकचंद जवेरी की आँखों में तीर्थ-सेवा का ऐसा अनुराग था कि उन्होंने फंड का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपनी पूरी पूंजी और अपनी आत्मा इस भगीरथ कार्य में झोंक दी।
दुकान से शुरू हुई साधना: शुरूआत किसी आलीशान दफ़्तर से नहीं, बल्कि सेठ जी ने अपनी दुकान से प्रांतिक सभा के माध्यम से की। वहीं बैठकर उन्होंने पाई-पाई का हिसाब रखा।
हीराबाग का ऐतिहासिक दीवानखाना: जैसे-जैसे आस्था का कारवां बढ़ा, अगस्त 1906 में बम्बई की सुप्रसिद्ध हीराबाग धर्मशाला का वह दीवानखाना कमेटी का पहला आधिकारिक और ऐतिहासिक कार्यालय बना।
सांसों की अंतिम आहुति तक तीर्थ-सेवा का महाव्रत
सेठ माणिकचंद जी के हृदय में चौबीसों घंटे बस एक ही लौ जलती थी—हमारे अनादिकालीन तीर्थों की सुरक्षा। वे सिर्फ योजनाएं नहीं बनाते थे, जहाँ भी तीर्थों पर संकट देखा, वहाँ खुद ढाल बनकर खड़े हो गए।
लक्ष्मी का सार्थक समर्पण: उन्होंने अपने ट्रस्ट फंड से 7 प्रतिशत (लगभग 2000 वार्षिक, जो उस दौर में एक बहुत बड़ी राशि थी) कमेटी के कार्यालय खर्च के लिए हमेशा के लिए समर्पित कर दिया।
महामंत्री का अमर दायित्व: सन् 1906 में उन्होंने महामंत्री का पद संभाला और अपनी अंतिम सांस तक तीर्थों के संवर्धन के लिए खुद को चंदन की तरह घिस दिया।
कर्णधार बदलते रहे, पर कर्तव्य की गंगा बहती रही
कमेटी का यह सवा सौ साल का सफर उन दिग्गज महापुरुषों की त्याग-गाथा है, जिन्होंने इस धर्म-रथ को कभी रुकने नहीं दिया:
शुरूआती पहरेदार: सबसे पहले इस तीर्थ विभाग की कमान को सेठ जवेरचन्द जी ने संभाला और इसे गति दी।
संकट के बादल और संबल: सेठ माणिकचंद जी के देवलोकगमन के बाद का. भागमल प्रमुदयाल जी ने मंत्रित्व का कांटों भरा ताज पहना, पर नियति के क्रूर प्रहार से उनका आकस्मिक निधन हो गया। इस वज्रपात के समय सहायक मंत्री सेठ बल्लुभाई लखमीचन्द जी चौकसी संकटमोचक बनकर सामने आए और व्यवस्था को संभाला।
1920 का ऐतिहासिक मोड़: इंदौर के सूर्य, सर सेठ हुकुमचंद जी की अध्यक्षता में जब ऐतिहासिक जनरल मीटिंग हुई, तो समाज की पुकार पर सेठ चुन्नीलाल हेमचंद जरीवाले और नई पीढ़ी ने इस महान दायित्व को अपने कंधों पर उठा लिया और दशकों तक इस विरासत की आरती उतारी।
आज का यह 125वां वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन युगपुरुषों के चरणों में हमारी कृतज्ञता के अश्रु-पूर्ण सुमन हैं, जिन्होंने हर झंझावात को सहकर अदालतों से लेकर समाज की गलियों तक हमारे पावन धामों की अस्मिता को अक्षुण्ण रखा।
पुकारती है तीर्थों की माटी... चलो मथुरा!
आइए, इस ऐतिहासिक और गौरवमयी महोत्सव का साक्षी बनने के लिए मथुरा की उस पावन धरा पर एकत्रित हों, जहाँ इस शतकोत्तर रजत महोत्सव का शंखनाद होने जा रहा है। अपनी उपस्थिति की आहुति देकर पूर्वजों के इस त्याग को नमन करें! (जारी) |
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