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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
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| 233918 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आज के अमृत- वचन पढ़िए,,, जय जिनेन्द्र,,,??*
*पांच इन्द्रिय और मनके बिना भी सम्यग्दर्शन नहीं होगा और पांचो इन्द्रिय और मनके विश्रामके बिना भी सम्यग्दर्शन नहीं होगा _ पारसमणी।*
*ये पांचों इन्द्रिय नहीं ये ऋद्धिया है इनको उपयोग लोकिक प्रयोजन में नहीं , आत्महित में कीजिए,,,*
*शुद्ध आगम वाणी*
*श्रुत आगम वाणी* |
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2026-06-16 07:58:24 |
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| 233919 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आज के अमृत- वचन पढ़िए,,, जय जिनेन्द्र,,,??*
*पांच इन्द्रिय और मनके बिना भी सम्यग्दर्शन नहीं होगा और पांचो इन्द्रिय और मनके विश्रामके बिना भी सम्यग्दर्शन नहीं होगा _ पारसमणी।*
*ये पांचों इन्द्रिय नहीं ये ऋद्धिया है इनको उपयोग लोकिक प्रयोजन में नहीं , आत्महित में कीजिए,,,*
*शुद्ध आगम वाणी*
*श्रुत आगम वाणी* |
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2026-06-16 07:58:24 |
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| 233916 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*स्वास्थ्य संवाद - 1605*
*************************
*16) रक्तदान - जीव(न)दान - (11)*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*दि.14 जून - जागतिक रक्तदान दिन..*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*साक्षात् जीवनदायी असणा-या " रक्तं जीव इति स्थिती |" असणा-या रक्त आणि रक्तदान यासंबंधी माहिती जाणून घेऊया अन् पात्र रक्तदात्यांनी ऐच्छिक रक्तदानासाठी पुढे येऊया..*
*=> रक्तात कोणकोणते घटक असतात ?*
=> रक्त बाहेर परीक्षानळीत काढून ठेवले तर काही वेळात, परीक्षा नळीतील रक्ताचे दोन भाग झालेले दिसून येतात..
1) वरच्या बाजूला पिवळसर पाण्यासारखा तरल असा एक द्रवरूप भाग असतो, त्याला *प्लाझ्मा / plasma* असे म्हणतात. आपल्या रक्तामध्ये साधारण 55% इतक्या प्रमाणात हा प्लाझ्मा असतो. यामध्ये प्रामुख्याने जलीय अंश, ग्लुकोज, मिनरल्स, स्राव इ. असतात.
2) परीक्षा नळीच्या खालील बाजूला लालसर, चॉकलेटी रंगाचा काहीसा दाट असा जो भाग असतो, त्याला *पॅक सेल व्हॉल्यूम / pack cell volume / PCV* असे म्हणतात. यामध्ये प्रामुख्याने लाल पेशी / red blood corpuscules / RBC, पांढ-या पेशी / white blood corpuscules / WBC , प्लेटलेटस् असतात.
*( क्रमशः ) ( दि.16/06/2026)*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
( ए.9892/वै.1605) |
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2026-06-16 07:58:18 |
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| 233917 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*स्वास्थ्य संवाद - 1605*
*************************
*16) रक्तदान - जीव(न)दान - (11)*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*दि.14 जून - जागतिक रक्तदान दिन..*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*साक्षात् जीवनदायी असणा-या " रक्तं जीव इति स्थिती |" असणा-या रक्त आणि रक्तदान यासंबंधी माहिती जाणून घेऊया अन् पात्र रक्तदात्यांनी ऐच्छिक रक्तदानासाठी पुढे येऊया..*
*=> रक्तात कोणकोणते घटक असतात ?*
=> रक्त बाहेर परीक्षानळीत काढून ठेवले तर काही वेळात, परीक्षा नळीतील रक्ताचे दोन भाग झालेले दिसून येतात..
1) वरच्या बाजूला पिवळसर पाण्यासारखा तरल असा एक द्रवरूप भाग असतो, त्याला *प्लाझ्मा / plasma* असे म्हणतात. आपल्या रक्तामध्ये साधारण 55% इतक्या प्रमाणात हा प्लाझ्मा असतो. यामध्ये प्रामुख्याने जलीय अंश, ग्लुकोज, मिनरल्स, स्राव इ. असतात.
2) परीक्षा नळीच्या खालील बाजूला लालसर, चॉकलेटी रंगाचा काहीसा दाट असा जो भाग असतो, त्याला *पॅक सेल व्हॉल्यूम / pack cell volume / PCV* असे म्हणतात. यामध्ये प्रामुख्याने लाल पेशी / red blood corpuscules / RBC, पांढ-या पेशी / white blood corpuscules / WBC , प्लेटलेटस् असतात.
*( क्रमशः ) ( दि.16/06/2026)*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
( ए.9892/वै.1605) |
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2026-06-16 07:58:18 |
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| 233915 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - (क्र.2640)*
****************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*250*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेतो आहोत -
*॥ तृतीय अध्याय ॥*
*चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृता गंगासिन्ध्वादयो नद्यः ॥*
( अध्याय 3 / सूत्र 24 )
*चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदयः नद्यः ॥2/24॥*
*विवेचन -*
~~~~~~
गंगा, सिंधू अशा ज्या 14 नद्या आहेत, त्या ( चतुर्दश सहस्त्र =) 14000 उपनद्यांच्या ( परिवृता = ) परिवारांनी युक्त अशा आहेत. त्यानंतर क्रमशः येणाऱ्या सर्व नद्या, उत्तर, दक्षिण या दिशेनुसार, संख्येने दुप्पट दुप्पट नद्यांच्या परिवारांनी युक्त असून, त्या आणि त्यांच्या परिवारातील नद्या पुढीलप्रमाणे आहेत -
*दक्षिणेकडील नद्या -*
~~~~~~~~~~~~
1) गंगा, सिन्धू नद्या - 14 / 14 हजार उपनद्यांनी युक्त,
2) रोहित, रोहितास्या नद्या 28 हजार उपनद्यांनी युक्त,
3) हरित, हरिकांता नद्या 56 हजार उपनद्यांनी युक्त,
4) सीता, सीतोदा नद्या एक लाख 12 हजार उपनद्यांनी युक्त,
*उत्तरेकडील नद्या -*
~~~~~~~~~~~~
5) रक्ता, रक्तोदा नद्या 14000 उपनद्यांनी युक्त,
6) सुवर्णकुला, रुप्यकुला नद्या 28 हजार उपनद्यांनी युक्त,
7) नारी, नरकांता नद्या 56 हजार उपनद्यांनी युक्त.
*( क्रमशः ) ( दि.16/06/2026 )*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9890/आ.3308) |
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2026-06-16 07:58:17 |
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| 233914 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - (क्र.2640)*
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*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*250*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेतो आहोत -
*॥ तृतीय अध्याय ॥*
*चतुर्दशनदीसहस्त्रपरिवृता गंगासिन्ध्वादयो नद्यः ॥*
( अध्याय 3 / सूत्र 24 )
*चतुर्दश नदीसहस्त्रपरिवृता गंगा सिंधू आदयः नद्यः ॥2/24॥*
*विवेचन -*
~~~~~~
गंगा, सिंधू अशा ज्या 14 नद्या आहेत, त्या ( चतुर्दश सहस्त्र =) 14000 उपनद्यांच्या ( परिवृता = ) परिवारांनी युक्त अशा आहेत. त्यानंतर क्रमशः येणाऱ्या सर्व नद्या, उत्तर, दक्षिण या दिशेनुसार, संख्येने दुप्पट दुप्पट नद्यांच्या परिवारांनी युक्त असून, त्या आणि त्यांच्या परिवारातील नद्या पुढीलप्रमाणे आहेत -
*दक्षिणेकडील नद्या -*
~~~~~~~~~~~~
1) गंगा, सिन्धू नद्या - 14 / 14 हजार उपनद्यांनी युक्त,
2) रोहित, रोहितास्या नद्या 28 हजार उपनद्यांनी युक्त,
3) हरित, हरिकांता नद्या 56 हजार उपनद्यांनी युक्त,
4) सीता, सीतोदा नद्या एक लाख 12 हजार उपनद्यांनी युक्त,
*उत्तरेकडील नद्या -*
~~~~~~~~~~~~
5) रक्ता, रक्तोदा नद्या 14000 उपनद्यांनी युक्त,
6) सुवर्णकुला, रुप्यकुला नद्या 28 हजार उपनद्यांनी युक्त,
7) नारी, नरकांता नद्या 56 हजार उपनद्यांनी युक्त.
*( क्रमशः ) ( दि.16/06/2026 )*
*--डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9890/आ.3308) |
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2026-06-16 07:58:16 |
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| 233913 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *सजग रहने का अर्थ है सदा जागृत रहना।*
2 *प्रमाद का मूल अज्ञानता है।*
3 *ज्ञान का सही होना ही पुरुषार्थ है।*
4 *अर्थ अर्थात धन के लिए अनर्थ न करना ही मुमुक्षुता है।*
5 *अन्याय का भोग सुख नहीं देता बल्कि शुकून छीन लेता है।*
6 *योग्यता का विचार व्यक्ति को अशिष्ट नहीं होने देता।*
7 *ज्ञान जानकारी का नहीं,विकारी पर्यायों को दूर करने का नाम है।*
8 *राग में दर्द लगे तो कोई क्यों राग करें?*
9 *कार्य समय पर होता अज्ञानी व्यर्थ ही बोझा ढोता है।*
10 *खुशी खोजने वाले कभी दुखी नहीं रहते अतः सदा खुशी खोजें।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 16-6-26) |
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2026-06-16 07:58:15 |
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| 233912 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *सजग रहने का अर्थ है सदा जागृत रहना।*
2 *प्रमाद का मूल अज्ञानता है।*
3 *ज्ञान का सही होना ही पुरुषार्थ है।*
4 *अर्थ अर्थात धन के लिए अनर्थ न करना ही मुमुक्षुता है।*
5 *अन्याय का भोग सुख नहीं देता बल्कि शुकून छीन लेता है।*
6 *योग्यता का विचार व्यक्ति को अशिष्ट नहीं होने देता।*
7 *ज्ञान जानकारी का नहीं,विकारी पर्यायों को दूर करने का नाम है।*
8 *राग में दर्द लगे तो कोई क्यों राग करें?*
9 *कार्य समय पर होता अज्ञानी व्यर्थ ही बोझा ढोता है।*
10 *खुशी खोजने वाले कभी दुखी नहीं रहते अतः सदा खुशी खोजें।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 16-6-26) |
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2026-06-16 07:58:13 |
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| 233910 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-06-16 07:57:39 |
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| 233911 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-06-16 07:57:39 |
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