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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Message
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Status
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Date |
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42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-10 08:27:05 |
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| 74065 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*यदि मैने जैन धर्म को बचाने के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया...*
*तब तो मेरा जीवन, जीवन है अन्यथा ऐसे जीवन तो कितनी बार मिले, कितनी बार नष्ट हो जायेंगे...*
*हम किसी का कुछ नहीं लेते, बस हमारा छीनने की कोशिश न करों...*
"भगवान महावीर ने कहा है....तेरा सो तेरा, मेरा सो मेरा" -- मुनि श्री 108 अनुसरण सागर जी महाराज
?? महाराष्ट्र के मंत्री जैन समाज के लोढ़ा जी...
*जैन धर्म भारत का स्वतंत्र धर्म है, अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए तथ्यहीन कुतर्को से जैन समाज को भ्रमित कर जैन धर्म को अन्य धर्म का हिस्सा बनाने की कोशिश न करों, राजनीति को धर्म में मत लाओ*....संजय जैन, विश्व जैन संगठन, व्हाट्सएप: 8800001532 |
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2026-04-10 08:27:04 |
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| 74063 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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Happy birthday beta Tum khush raho mast raho swasth raho?????? |
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2026-04-10 08:26:55 |
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| 74064 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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Happy birthday beta Tum khush raho mast raho swasth raho?????? |
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2026-04-10 08:26:55 |
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| 74062 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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?वंदामी माताजी? |
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2026-04-10 08:23:51 |
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| 74061 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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?वंदामी माताजी? |
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2026-04-10 08:23:50 |
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| 74060 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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अगर कोई तुम्हारी *बात* नहीं समझता..!!
तो समझाओ ही मत..!!
क्योंकि कुछ बातें *समझने* से नहीं,
खुद पर *बीतने* पर समझ आती हैं..!!"
।। जय जिनेन्द्र, जय गुरुदेव, सुप्रभात।। |
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2026-04-10 08:23:39 |
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| 74059 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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अगर कोई तुम्हारी *बात* नहीं समझता..!!
तो समझाओ ही मत..!!
क्योंकि कुछ बातें *समझने* से नहीं,
खुद पर *बीतने* पर समझ आती हैं..!!"
।। जय जिनेन्द्र, जय गुरुदेव, सुप्रभात।। |
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2026-04-10 08:23:38 |
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| 74057 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-10 08:23:25 |
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| 74058 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-10 08:23:25 |
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