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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 77686 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*निषेध! निषेध!!निषेध!!!*
*यह सार्वजनिक निषेध दर्ज कर रहे हैं कि:*
हाल ही में मंत्री मंगलप्रभात जी लोढ़ा द्वारा जैन धर्म के संबंध में दिए गए बयान पूरी तरह से गलत ❌, भ्रामक ⚠️ और जैन समाज की भावनाओं को आहत करने वाले हैं ?।
?️ *जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन और स्वतंत्र धर्म है, जिसके सिद्धांत अन्य किसी भी धर्म से अलग और विशिष्ट हैं*।
☮️ जैन धर्म एक अहिंसावादी धर्म है और यह सभी जीवों के प्रति करुणा ❤️, संयम ? और सत्य ✔️ के सिद्धांतों पर आधारित है।
? लाखों वर्षों की परंपरा वाले इस धर्म का किसी अन्य धर्म में विलय करने की बात करना अत्यंत निंदनीय है ❗
? इस प्रकार के बयान जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का स्पष्ट इरादा दर्शाते हैं, और इसे जैन समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
? धन्यवाद ??♾️??️? |
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2026-04-11 16:01:09 |
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| 77685 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*निषेध! निषेध!!निषेध!!!*
*यह सार्वजनिक निषेध दर्ज कर रहे हैं कि:*
हाल ही में मंत्री मंगलप्रभात जी लोढ़ा द्वारा जैन धर्म के संबंध में दिए गए बयान पूरी तरह से गलत ❌, भ्रामक ⚠️ और जैन समाज की भावनाओं को आहत करने वाले हैं ?।
?️ *जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन और स्वतंत्र धर्म है, जिसके सिद्धांत अन्य किसी भी धर्म से अलग और विशिष्ट हैं*।
☮️ जैन धर्म एक अहिंसावादी धर्म है और यह सभी जीवों के प्रति करुणा ❤️, संयम ? और सत्य ✔️ के सिद्धांतों पर आधारित है।
? लाखों वर्षों की परंपरा वाले इस धर्म का किसी अन्य धर्म में विलय करने की बात करना अत्यंत निंदनीय है ❗
? इस प्रकार के बयान जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का स्पष्ट इरादा दर्शाते हैं, और इसे जैन समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
? धन्यवाद ??♾️??️? |
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2026-04-11 16:01:08 |
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| 77683 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*217. प्रभु आत्म संदेश.*
जब तक अंतर्मन की ध्वनि नहीं सुनोगे तब तक शांति का वेदन संभव नहीं । लौकिक सफलता की भी यदि चाह है तो अंतर्मन की ध्वनि को सुनना शुरू करो।
बाहर में सिर्फ कोलाहल है,जो कि मात्र कलह को बढ़ावा देगा। जबकि अंतर्मन की आवाज में छिपा है सुकून,आनंद और परम शांति का वेदन...
तो आप भी रुकिए नहीं आज से शुरू कीजिए अपने अंतर्मन की आवाज तक पहुंचने का प्रयत्न...हटिए बाह्य कोलाहल से दूर और जुड़िए अपने अंतरंग अंतर्मन से...और अनुभव कीजिए सिर्फ शांति एवं सुकून का...
*विचारना...* |
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2026-04-11 15:56:43 |
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| 77684 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*217. प्रभु आत्म संदेश.*
जब तक अंतर्मन की ध्वनि नहीं सुनोगे तब तक शांति का वेदन संभव नहीं । लौकिक सफलता की भी यदि चाह है तो अंतर्मन की ध्वनि को सुनना शुरू करो।
बाहर में सिर्फ कोलाहल है,जो कि मात्र कलह को बढ़ावा देगा। जबकि अंतर्मन की आवाज में छिपा है सुकून,आनंद और परम शांति का वेदन...
तो आप भी रुकिए नहीं आज से शुरू कीजिए अपने अंतर्मन की आवाज तक पहुंचने का प्रयत्न...हटिए बाह्य कोलाहल से दूर और जुड़िए अपने अंतरंग अंतर्मन से...और अनुभव कीजिए सिर्फ शांति एवं सुकून का...
*विचारना...* |
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2026-04-11 15:56:43 |
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| 77681 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-11 15:55:59 |
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| 77682 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-11 15:55:59 |
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| 77679 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-11 15:55:46 |
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| 77680 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-11 15:55:46 |
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| 77678 |
40449682 |
तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप |
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2026-04-11 15:55:11 |
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| 77677 |
40449682 |
तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप |
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2026-04-11 15:55:10 |
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