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गिरनार की अस्मिता पर इंदौर का महा-शंखनाद! मुनि श्री पूज्य सागर जी के सानिध्य में गूंजा संकल्प—"18 जुलाई को इंदौर से २५०० तीर्थरक्षक करेंगे गिरनार कूच!"
इंदौर, १५ जून २०२६:
जिस गिरनार महातीर्थ की कंदराओं से ७२ करोड़ मुनिराजों और हमारे २२वें तीर्थंकर देवाधिदेव भगवान नेमिनाथ की दीक्षा और केवलज्ञान कल्याणक की पावन रज बिखरी है, उस **पांचवीं टोंक के साक्षात अस्तित्व और श्रवण संस्कृति की रक्षा के लिए कल इंदौर की धरा पर एक अभूतपूर्व इतिहास रच दिया गया!
कल शाम **श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम, इंदौर** में सकल जैन समाज, दिगंबर जैन सामाजिक संसद, विश्व जैन संगठन एवं इंदौर के समस्त जैन संगठनों की एक ऐसी ऐतिहासिक 'गिरनार समर्पण बैठक' संपन्न हुई, जिसने पूरे देश के जैन समाज में शौर्य और चेतना का संचार कर दिया है।
यह महा-बैठक **परम पूज्य मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज** के मंगल सानिध्य में आयोजित की गई। मुनि श्री की ओजस्वी साक्षी में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में अपनी धरोहर को बचाने का अदम्य संकल्प साफ दिखाई दे रहा था। बैठक का चरम क्षण तब आया, जब सकल समाज ने एक सुर में हुंकार भरते हुए आगामी २० जुलाई २०२६ को गिरनार जी सिद्धक्षेत्र पर २५०० साधर्मीजनों (तीर्थरक्षकों) को इंदौर से ले जाने का महा-संकल्प लिया!
### ? ९ जुलाई को मालवा देखेगा शौर्य और भक्ति का सैलाब!
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी *९ जुलाई २०२६** को जब 'श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा' इंदौर नगर की पावन सीमा में प्रवेश करेगी, तब उसका ऐसा अकल्पनीय, भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा जो मालवा के इतिहास में कभी न देखा गया हो। फूलों से नहीं, बल्कि इंदौर के हर एक जैन नागरिक के पुरुषार्थ और उपस्थिति से यह अगवानी होगी। इसके पश्चात, १८ जुलाई को यह विशाल संघ पूरे लाव-लश्कर के साथ गिरनार महातीर्थ की ओर मंगल प्रस्थान करेगा।
मंच से प्रबुद्ध वक्ताओं ने समाज को झकझोरते हुए कहा कि सदियों पुराने हमारे सांस्कृतिक इतिहास को मिटाने की कुत्सित कोशिशें की जा रही हैं। भगवान नेमिनाथ के पावन चरण चिह्नों और जैन संस्कृति के प्राचीन प्रतीकों के मूल रूप को रंग-रोगन करके बदलने का दुस्साहस किया गया है। लेकिन जैन समाज का मौन अब टूट चुका है। वक्ताओं ने गरजते हुए कहा— जैन समाज अपनी इस प्राचीन विरासत, धरोहर और पांचवीं टोंक के गौरव को अक्षुण्ण रखने के लिए, अपने पुरखों की निशानी को सहेजने के लिए पूरी श्रद्धा और हक के साथ वापस आएगा।"* **"आप आये, सभी तीर्थरक्षकों को भी लाये"** के महा-मंत्र के साथ युवाओं को इस धर्मयुद्ध की अग्रिम पंक्ति में आने का आह्वान किया गया।
इस धर्मसभा में इंदौर के सामाजिक, राजनैतिक और प्रशासनिक क्षेत्र के कर्णधारों ने अपनी एकजुटता की ताकत दिखाई। बैठक में मुख्य रूप से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे:
* विश्व जैन संगठन के महेंद्र जैन भैयन, दिगंबर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, पिंकेश टोंग्या, ब्र जिनेश जी मलैया,वरिष्ठ मार्गदर्शक टीके वेद, कैलाश वेद, नकुल पाटोदी, जेनेश झांझरी, अनिल जैनको। डीएसपी डीके जैन, राहुल जैन (स्पोर्ट्स), मनीष नायक, महेंद्र पहाड़िया, संजय जैन (काका), अनिल सेठी, जितेन्द्र सेठ, सत्येन्द्र जैन एड., अमित जैन, अनिल जैन, कोषाध्यक्ष ओम पाटोदी, संतोष जैन, अशोक सामरिया, विशाल जैन, मुकेश जैन,एडवोकेट शुभम पहाड़िया, मयूर जैन, ओमप्रकाश जैन, सचिन जैन, मयंक जैन, जितेश जैन, गौरव जैन, चक्रेश जैन, सुरेश कुमार जैन, वैभव जैन, दीपक पाटनी, सुनील जैन, सुदीप जैन, एडवोकेट प्रिया जैन, शुभम जैन, मोनू जैन,मंत्री शैलेंद्र सोगानी , महावीर जैन, जय कुमार जैन, राजू सुगन, रश्मि सेठी, राजेश सेठी, सुदीप जैन, श्रीकांत जैन, देवेंद्र जैन, आनंद सराफ, राजीव जैन, अभिषेक जैन, पंकज जैन, राजेश जैन, संजय जैन, प्रेरणा जैन। व्यवस्था घनश्याम जैन, महामंत्री एड. पारस जैन, संजीव जैन,मंत्री आकाश जैन ने संभाली।
इस पूरी महा-बैठक में अपनी ओजस्वी वाणी से ऊर्जा फूंकने का काम इंदौर संगठन के अध्यक्ष मयंक जैन ने अपने कुशल संचालन के माध्यम से किया, एवं आभार राजेश जैन दद्दू ने व्यक्त किया।
गिरनार पुकार रहा है, और इंदौर तैयार है! |
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2026-06-15 16:30:09 |
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