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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 73079 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:53:09 |
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| 73080 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:53:09 |
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| 73078 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:52:18 |
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| 73077 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:52:17 |
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| 73075 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:52:06 |
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| 73076 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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*"सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है*
*संसार का अन्त दिखने लगता है,*
समागम करने वाला भले ही
तुरन्त सन्त-संयत
बने या न बने
इसमें कोई नियम नहीं है,
*किन्तु वह सन्तोषी अवश्य बनता है।*
सही दिशा का प्रसाद ही
सही दशा का प्रासाद है
- _मूकमाटी :: पृ ३५२_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ |
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2026-04-09 20:52:06 |
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| 73074 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
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विश्व के कल्याण हेतु कारगर है णमोकार मंत्र | PNC Group | Agra | Jain Focus
Click Here: <a href="https://www.youtube.com/shorts/LEddM7es21s" target="_blank">https://www.youtube.com/shorts/LEddM7es21s</a> |
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2026-04-09 20:51:15 |
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| 73069 |
47534159 |
Maharstra (kartick) |
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2026-04-09 20:51:14 |
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| 73070 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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*? राजदरबार विशेष रील • प्रथम दिवस • शान्तोदय पंचकल्याणक • जगतपूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ*
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2026-04-09 20:51:14 |
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47534159 |
Maharstra (kartick) |
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2026-04-09 20:51:14 |
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