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76481 40449685 ?2️⃣Pragya Shraman network? *#प्रज्ञाश्रमण_वाणी* 2026-04-11 08:30:39
76482 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ ज़िंदगी में ऐसा कुछ करो कि काम दोनों का चलता रहे… हवा भी चलती रहे और दीया भी जलता रहे... शुक्र करो - फिक्र ना करो!! ।। जय जिनेन्द्र, जय गुरदेव, सुप्रभात।। 2026-04-11 08:30:39
76477 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ 11,/4/26 ನಮ್ಮ ಶರ್ಮಿಷ್ಟ ಗೃಹ ಚೈತ್ಯಾಲಯದಲ್ಲಿ ಭಗವಾನ್ ಆದಿನಾಥ ತೀರ್ಥಂಕರ ಜನ್ಮಕಲ್ಯಾಣಕಮತ್ತು ದೀಕ್ಷಾ ಕಲ್ಯಾಣಕ ಪ್ರಯುಕ್ತ ವಿಶೇಷ ಪೂಜೆ ಹಾಗೂ ಪರಿವಾರ ದೇವತೆಗಳಿಗೆ ಲೋಕ ಕಲ್ಯಾಣರ್ಥ ಅರ್ಚಿಸಲಾಯಿತು ಇಂತಿ ವಿದ್ಯಾ ವಾಚಸ್ಪತಿ ಡಾ ಮೋಹನಕುಮಾರ ಶಾಸ್ತ್ರಿ ಮೈಸೂರು 2026-04-11 08:30:02
76478 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ 11,/4/26 ನಮ್ಮ ಶರ್ಮಿಷ್ಟ ಗೃಹ ಚೈತ್ಯಾಲಯದಲ್ಲಿ ಭಗವಾನ್ ಆದಿನಾಥ ತೀರ್ಥಂಕರ ಜನ್ಮಕಲ್ಯಾಣಕಮತ್ತು ದೀಕ್ಷಾ ಕಲ್ಯಾಣಕ ಪ್ರಯುಕ್ತ ವಿಶೇಷ ಪೂಜೆ ಹಾಗೂ ಪರಿವಾರ ದೇವತೆಗಳಿಗೆ ಲೋಕ ಕಲ್ಯಾಣರ್ಥ ಅರ್ಚಿಸಲಾಯಿತು ಇಂತಿ ವಿದ್ಯಾ ವಾಚಸ್ಪತಿ ಡಾ ಮೋಹನಕುಮಾರ ಶಾಸ್ತ್ರಿ ಮೈಸೂರು 2026-04-11 08:30:02
76476 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 08:30:00
76475 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 08:29:59
76473 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 08:29:58
76474 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-11 08:29:58
76471 40449666 निर्यापक समय सागर जी भक्त जितना अनुराग विषयों में करता है- मित्र,पुत्र,स्त्री,धन और शरीर में करता है,उतनी रुचि,श्रद्धा प्रतीति भाव स्वरूप में तथा पंच परम गुरु में करे तो मोक्ष अति सुगम हो जाय। जैसे सांध्य कालीन लाल सूर्यास्त होने का कारण है और प्रभात की लालिमा सूर्योदय करती है,वैसे ही परम गुरु के बिना शरीरादि का राग केवलज्ञान के अस्त होने का कारण है और पंच परम गुरु का राग केवलज्ञान के उदय का कारण है। ऐसा तप रूपी राग ज्ञान,ध्यान गुरु राग है। श्री अनुभव प्रकाश जी???जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183918521?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183918521?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-04-11 08:29:54
76472 40449666 निर्यापक समय सागर जी भक्त जितना अनुराग विषयों में करता है- मित्र,पुत्र,स्त्री,धन और शरीर में करता है,उतनी रुचि,श्रद्धा प्रतीति भाव स्वरूप में तथा पंच परम गुरु में करे तो मोक्ष अति सुगम हो जाय। जैसे सांध्य कालीन लाल सूर्यास्त होने का कारण है और प्रभात की लालिमा सूर्योदय करती है,वैसे ही परम गुरु के बिना शरीरादि का राग केवलज्ञान के अस्त होने का कारण है और पंच परम गुरु का राग केवलज्ञान के उदय का कारण है। ऐसा तप रूपी राग ज्ञान,ध्यान गुरु राग है। श्री अनुभव प्रकाश जी???जय जिनेंद्र जी??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183918521?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183918521?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-04-11 08:29:54