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Message
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| 221888 |
47501357 |
दिव्यध्वनि समयसंघ 5 |
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? दिव्यध्वनि समयसंघ ?
मुनि महाराज, आर्यिका संघ के दर्शन अब घर बैठे।
? प्रतिदिन 1 शॉर्ट रील
? आचार्य श्री समय सागर जी के मंगल दर्शन
? लाइव प्रवचन + आहार-विहार अपडेट
धर्म लाभ के लिए आज ही जुड़ें ?
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यश जैन भोपाल 9755012468
नमन जैन कुंभराज 7999886085
निखिल जैन मुंबई 7014449861
आयुष सोधिया महाराजपुर 9752438683
?? दिव्यध्वनि समयसंघ ?? |
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2026-06-11 12:39:31 |
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| 221889 |
47501357 |
दिव्यध्वनि समयसंघ 5 |
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? दिव्यध्वनि समयसंघ ?
मुनि महाराज, आर्यिका संघ के दर्शन अब घर बैठे।
? प्रतिदिन 1 शॉर्ट रील
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नमन जैन कुंभराज 7999886085
निखिल जैन मुंबई 7014449861
आयुष सोधिया महाराजपुर 9752438683
?? दिव्यध्वनि समयसंघ ?? |
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2026-06-11 12:39:31 |
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| 221886 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-11 12:39:00 |
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| 221887 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-11 12:39:00 |
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| 221884 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-11 12:38:58 |
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| 221885 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-06-11 12:38:58 |
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| 221883 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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*?दूध के जले - छाछ में सतर्क ?*
11-6-2026 गुरुवार
________________________
*मैं धरती की सबसे पुण्यशाली माँ होने का गौरव प्राप्त कर चुकी थी, मेरा मन सारी दुनिया को विद्यासमय की गाथा को सुनाने का है, यह सब एक कालचक्र द्वारा रचित वह जीवंत अद्भुत संस्मरण हैं जहाँ हम कदम कदम पर नियति के नियोजन के दर्शन कर रहे थे,*
_चलिए मैं आपको पुनः पचपन वर्ष पीछे ले चलती हूँ, विद्या के सागर तो विद्या के सागर थे ही अब उसमें समय का भी विलय हो गया था, विद्या एवं समय का एक लघु संघ अद्भुत था, भारत वर्ष नें केवल युवा मुनियों की कहानियाँ सुनी थी, पहली बार दो नवयुवक अपनी इन्द्रियों को जीत विजेता बन दिगंबर स्वरूप में भ्रमण करके सभी को आश्चर्य एवं श्रद्धा से भर रहे थे, द्रोणगिरी के जंगलो में ज़ब आप दोनों खड़े होकर घंटो ध्यान लगाते थे तब आपमें भगवान बाहुबली का व्यक्तित्व झलक आता था!_
_मैं देख रही थी विद्या अनुगामी मुनि श्री समयसागर जी के रूप में आने वाला समय स्वर्णिम होने वाला था, जैन धर्म का यह विशाल आकाश कभी बिना सूर्य के रह न पाए, नियति का यह प्रयोजन समय दीक्षा से आज पूर्ण हो गया था!_
_उस वक़्त गुरु का अवलम्बन पाकर तुम नितांत अशरण होकर भी शरण पा गए थे, मानो तुम खुद को खोकर खुद को पा गए थे, आज देखती हूँ तुम आध्यत्मिक आकाश में इतने ऊँचे पहुंच गए हो की मैं चाहकर भी अब तुम्हारी समीपता नहीं पा सकती_
_*मैं देखकर विस्मित हूँ की दूध का जला छाछ को फूँक - फूँक कर पीता है, यह कहावत कभी समयसागर जी पर चरितार्थ नहीं हुई, क्युकी वो कभी दूध से जले ही नहीं, कोई गलती उन्होंने की ही नहीं, अपितु दूसरों को दूध से जला देखकर स्वयं छाछ फूँककर पीने की कला तुममें बचपन से आ चुकी थी, तुम्हारे जेष्ठ भ्राता नें तुम्हें यह घर में ही समझा दिया था की अपनी गलतियों से सीखने के लिए जीवन लम्बा नहीं है, समझदार वही है जो दूसरों की गलतियों से सीख ले लें!*_
_मुनि समयसागर जी उन्ही समझदारों में से थे, जिन्होंने कभी गुरु आदेश की प्रतीक्षा नहीं की अपितु उनके उपदेश को ही आदेश मानकर स्वयं को चर्यारत कर लिया, मुझे ध्यान है तुमने घर में भी वह कार्य कभी नहीं किया जिससे तुम्हारे माता -पिता -भाई को क्षोभ हो, पीड़ा हो, और मैं साक्षी हूँ की तुमने मुनिपद में कभी गुरु को रंच मात्र भी विकल्प नहीं दिए_
_मैंने देखा ज़ब 1981 में स्वाध्याय की कक्षा में किसी शिष्य नें आचार्य श्री जी से जिज्ञासा प्रकट की तब गुरु नें कहा *"चिंतन करो" बस तुमने अन्य साधक के लिए कहे गए गुरु वचन अपने लिए सूत्र बना लिए, उसके बाद तुमने भी कभी कोई जिज्ञासा गुरु से प्रकट नहीं की, ज़ब भी कोई प्रश्न तुम्हारे मन में आते और "चिंतन करो" का सूत्र तुम्हें मार्गदर्शन स्वयं देता रहा। तुम ज्ञान का पूरा सागर पी जाना चाहते थे मगर कैसे पिलाना है ये तुम्हारे गुरु जानते थे, आचार्य श्री जी से महान ग्रंथो को पढ़कर तुम अमृत ज्ञान को पीने का प्रयास करते और ज़ब कठिन विषय तुम्हें समझ नहीं आता तब भी तुम मौन रहते केवल पुस्तक की ओर ढल जाते थे, तुम्हारी मुख मुद्रा का संकेत पाकर स्वयं गुरु पूंछते की नहीं समझे?* तब काँपकर पुनः पन्ने पलटने लगना तुम्हारा हमें आज भी हर्ष से भर देता है, किसी चर्चा के समय ज़ब पूरा संघ एवं गुरु मुस्कुराते थे तब भी तुम्हारा मुस्काराना दुर्लभ था, क्यूंकि तुम गुरु को साक्षात अरिहंत मानते थे, और अरिंहतों के समक्ष हँसना भी तुम्हारे लिए कठिन परीक्षा थी_
_सदैव एक दम शांत चित्त, निर्विकल्प, नत -नेत्र, गहरे मौन में डूबे तुम सदा गुरु चरणों में बैठे रहते, कभी नजर उठाकर गुरु को देखने का साहस भी तुम जुटा नहीं पाए,_
_*गुरु से दो शब्द "चिंतन करो!" सुनकर कभी कुछ पूंछा नहीं, "जो आज्ञा गुरु जी" के अतिरिक्त कभी कुछ बोला नहीं, इन चार शब्दों में ही गुरु के निकट रहकर जिनकी साधना निखर निखर कर खिली, इन चार शब्दों से ही जिन्होंने जीवन को समयसार बना लिया, ऐंसे महान तपस्वी वीतरागी साधक आचार्य समयसिंधु को यह माँ, यह लेखनी और यह वसुंधरा प्रणाम करती है.....*_
_____________________
✍️आशीष श्री जी 11-6-2026
(आप भी पढ़कर सभी को भेज सकते हैं ) |
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2026-06-11 12:38:56 |
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| 221882 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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*?दूध के जले - छाछ में सतर्क ?*
11-6-2026 गुरुवार
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*मैं धरती की सबसे पुण्यशाली माँ होने का गौरव प्राप्त कर चुकी थी, मेरा मन सारी दुनिया को विद्यासमय की गाथा को सुनाने का है, यह सब एक कालचक्र द्वारा रचित वह जीवंत अद्भुत संस्मरण हैं जहाँ हम कदम कदम पर नियति के नियोजन के दर्शन कर रहे थे,*
_चलिए मैं आपको पुनः पचपन वर्ष पीछे ले चलती हूँ, विद्या के सागर तो विद्या के सागर थे ही अब उसमें समय का भी विलय हो गया था, विद्या एवं समय का एक लघु संघ अद्भुत था, भारत वर्ष नें केवल युवा मुनियों की कहानियाँ सुनी थी, पहली बार दो नवयुवक अपनी इन्द्रियों को जीत विजेता बन दिगंबर स्वरूप में भ्रमण करके सभी को आश्चर्य एवं श्रद्धा से भर रहे थे, द्रोणगिरी के जंगलो में ज़ब आप दोनों खड़े होकर घंटो ध्यान लगाते थे तब आपमें भगवान बाहुबली का व्यक्तित्व झलक आता था!_
_मैं देख रही थी विद्या अनुगामी मुनि श्री समयसागर जी के रूप में आने वाला समय स्वर्णिम होने वाला था, जैन धर्म का यह विशाल आकाश कभी बिना सूर्य के रह न पाए, नियति का यह प्रयोजन समय दीक्षा से आज पूर्ण हो गया था!_
_उस वक़्त गुरु का अवलम्बन पाकर तुम नितांत अशरण होकर भी शरण पा गए थे, मानो तुम खुद को खोकर खुद को पा गए थे, आज देखती हूँ तुम आध्यत्मिक आकाश में इतने ऊँचे पहुंच गए हो की मैं चाहकर भी अब तुम्हारी समीपता नहीं पा सकती_
_*मैं देखकर विस्मित हूँ की दूध का जला छाछ को फूँक - फूँक कर पीता है, यह कहावत कभी समयसागर जी पर चरितार्थ नहीं हुई, क्युकी वो कभी दूध से जले ही नहीं, कोई गलती उन्होंने की ही नहीं, अपितु दूसरों को दूध से जला देखकर स्वयं छाछ फूँककर पीने की कला तुममें बचपन से आ चुकी थी, तुम्हारे जेष्ठ भ्राता नें तुम्हें यह घर में ही समझा दिया था की अपनी गलतियों से सीखने के लिए जीवन लम्बा नहीं है, समझदार वही है जो दूसरों की गलतियों से सीख ले लें!*_
_मुनि समयसागर जी उन्ही समझदारों में से थे, जिन्होंने कभी गुरु आदेश की प्रतीक्षा नहीं की अपितु उनके उपदेश को ही आदेश मानकर स्वयं को चर्यारत कर लिया, मुझे ध्यान है तुमने घर में भी वह कार्य कभी नहीं किया जिससे तुम्हारे माता -पिता -भाई को क्षोभ हो, पीड़ा हो, और मैं साक्षी हूँ की तुमने मुनिपद में कभी गुरु को रंच मात्र भी विकल्प नहीं दिए_
_मैंने देखा ज़ब 1981 में स्वाध्याय की कक्षा में किसी शिष्य नें आचार्य श्री जी से जिज्ञासा प्रकट की तब गुरु नें कहा *"चिंतन करो" बस तुमने अन्य साधक के लिए कहे गए गुरु वचन अपने लिए सूत्र बना लिए, उसके बाद तुमने भी कभी कोई जिज्ञासा गुरु से प्रकट नहीं की, ज़ब भी कोई प्रश्न तुम्हारे मन में आते और "चिंतन करो" का सूत्र तुम्हें मार्गदर्शन स्वयं देता रहा। तुम ज्ञान का पूरा सागर पी जाना चाहते थे मगर कैसे पिलाना है ये तुम्हारे गुरु जानते थे, आचार्य श्री जी से महान ग्रंथो को पढ़कर तुम अमृत ज्ञान को पीने का प्रयास करते और ज़ब कठिन विषय तुम्हें समझ नहीं आता तब भी तुम मौन रहते केवल पुस्तक की ओर ढल जाते थे, तुम्हारी मुख मुद्रा का संकेत पाकर स्वयं गुरु पूंछते की नहीं समझे?* तब काँपकर पुनः पन्ने पलटने लगना तुम्हारा हमें आज भी हर्ष से भर देता है, किसी चर्चा के समय ज़ब पूरा संघ एवं गुरु मुस्कुराते थे तब भी तुम्हारा मुस्काराना दुर्लभ था, क्यूंकि तुम गुरु को साक्षात अरिहंत मानते थे, और अरिंहतों के समक्ष हँसना भी तुम्हारे लिए कठिन परीक्षा थी_
_सदैव एक दम शांत चित्त, निर्विकल्प, नत -नेत्र, गहरे मौन में डूबे तुम सदा गुरु चरणों में बैठे रहते, कभी नजर उठाकर गुरु को देखने का साहस भी तुम जुटा नहीं पाए,_
_*गुरु से दो शब्द "चिंतन करो!" सुनकर कभी कुछ पूंछा नहीं, "जो आज्ञा गुरु जी" के अतिरिक्त कभी कुछ बोला नहीं, इन चार शब्दों में ही गुरु के निकट रहकर जिनकी साधना निखर निखर कर खिली, इन चार शब्दों से ही जिन्होंने जीवन को समयसार बना लिया, ऐंसे महान तपस्वी वीतरागी साधक आचार्य समयसिंधु को यह माँ, यह लेखनी और यह वसुंधरा प्रणाम करती है.....*_
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✍️आशीष श्री जी 11-6-2026
(आप भी पढ़कर सभी को भेज सकते हैं ) |
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2026-06-11 12:38:55 |
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| 221880 |
40449685 |
?2️⃣Pragya Shraman network? |
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*64 ऋद्धि नाम अर्घ्य*
01)- प्रथमेश जैन सुपुत्र रजत जा जैन महक जैन- सोनीपत
02)- मुकेश जैन- सोनीपत
03)- मधु जैन- सोनीपत
04)- आश्वी जैन सुपुत्री श्री शुभम आयुष जैन
05)- रजत जैन, महक जैन- सोनीपत
06)- श्री शुभम जैन, आयुषी जैन,
07)- श्री संजय जैन, श्री त्रिभुवन जैन-कानपुर
08)- श्री मनोज जैन, शालु जैन ,हीरा रानी जैन,शांतला जैन, अनुत्तर जैन लखनऊ
09)- श्रीमती सीमा जैन, राजेश जैन-आगरा
10)- अर्चित जैन, मेघा जैन- फिरोजाबाद
11)- विनय , उर्मिला पाटनी अजमेर
12)- सिद्धार्थ प्रगति , सिद्धांत ,श्रेया पाटनी अजमेर
13)- चन्द्रप्रकाश जैन, कोटला
14) मंजू रानीवाला,मुंबई
15) वीरेंद्र भावना बाकलीवाल अजमेर
16)- सीमा जैन, उज्ज्वल जैन, आर्ची जैन, निशांत जैन, विभव नगर
17)- माला जैन, सुमनलता जैन, उदयपुर
18)- ममता जैन, दिलीप जैन शिकोहाबाद
19)- नेहा जैन, तरूण जैन, आर्या जैन, झांसी
20)- दीपक जैन, प्रिया, अरिहंत, आदित्य जैन बल्लभगढ़
21)- राहुल जैन, प्रभावना,संयम, सार्थक जैन(पाटोदी)किशनगढ़
22)- तनु जैन, पारस जैन, आगरा
23)- श्री मनीष , सपना जैन, जयपुर
24)- अशोक, पुष्पा कासलीवाल जयपुर
25)- प्रदीप, कल्पना , अंकुर , पायल विनायका किशनगढ़
26)- सुशील, लीला बाकलीवाल अजमेर
27)- श्री अनिल जैन, रतन जैन, शिकोहाबाद
28) देवेन्द्र कुमार, आशारानी बाकलीवाल पंचशील नगर अजमेर
29)- श्रीमती सुदेश जैन, कुलदीप जैन दिल्ली (सोनीपत)
30)- श्री मनीष जैन, श्वेता जैन, सम्यक जैन, आन्या जैन, जयपुर
31)- श्रीमान इंद्रकुमार जैन, LIC, फिरोजाबाद
32)- श्री पवन जैन, जयेश जैन, अनुज जैन, इंदौर
33)- बालेश जैन, जयपाल जैन सोनीपत
34)- सुरेंद्र कुमार, सरला बाकलीवाल पंचशील, अजमेर
35)- महिमा जैन, विभोर जैन, सोनीपत
36)- श्री सुनील जैन, सुमन जैन, सोनीपत
37)- श्री विजय जैन, अंकुर जैन, दिल्ली
38)- प्रकाश चंद्र जैन, इटावा
39)- श्रीमती रेखा जैन, गोपाल जैन, शिकोहाबाद
40)- श्रीमती प्रवीणा जैन, डूंगरपुर
41)- श्रीमान राजू जैन, सोनीपत
42)- श्री अशोक कुमार जैन सेठ जी, शिकोहाबाद
43)- कु. मिताली जैन, कु. सौम्या जैन, फिरोजाबाद
44)- श्री राजू भैया, गुड़गांव
45)- श्यामा रानीवाला, जयपुर
46)- स्व० रमेश चंद्र जैन दूध वाले, इटावा
47)- श्रीमती सुषमा जैन, निरंजन जैन, दिल्ली
48)- श्रीमती मीना जैन, अनिल जैन, गुड़गांव
49)- श्री रामपाल बाबा जी, सोनीपत
50)- श्रीमती ज्योति मित्तल, अरविंद मित्तल, फिरोजाबाद
51)- एकता जैन, गाजियाबाद
52)- कविता जैन, गाजियाबाद
53)- चन्द्रशेखर जैन, एटा
54)- इंद्र जैन, पवन जैन, सोनीपत
55)- श्रीमती डेजी जैन, राजेश जैन, भरूच
56)- श्री राजेश कुमार जैन कचौड़ी वाले, शिकोहाबाद
57)- श्रीमती श्रीमती जैन, श्री नितिन जैन, आगरा
58)- अनिष्का, अनीश, रितू, नीरज, सोनीपत
59)- सौ प्रणिता अनंतलाल दोशी
फलटण, महाराष्ट्र.
60)- श्रीमती अंजली जैन धर्मपत्नी श्री विकास जैन
61)- श्रीमान सम्मेद पाटिल, इचलकरची
62)-
63)-
64)- |
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2026-06-11 12:36:49 |
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| 221881 |
40449685 |
?2️⃣Pragya Shraman network? |
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*64 ऋद्धि नाम अर्घ्य*
01)- प्रथमेश जैन सुपुत्र रजत जा जैन महक जैन- सोनीपत
02)- मुकेश जैन- सोनीपत
03)- मधु जैन- सोनीपत
04)- आश्वी जैन सुपुत्री श्री शुभम आयुष जैन
05)- रजत जैन, महक जैन- सोनीपत
06)- श्री शुभम जैन, आयुषी जैन,
07)- श्री संजय जैन, श्री त्रिभुवन जैन-कानपुर
08)- श्री मनोज जैन, शालु जैन ,हीरा रानी जैन,शांतला जैन, अनुत्तर जैन लखनऊ
09)- श्रीमती सीमा जैन, राजेश जैन-आगरा
10)- अर्चित जैन, मेघा जैन- फिरोजाबाद
11)- विनय , उर्मिला पाटनी अजमेर
12)- सिद्धार्थ प्रगति , सिद्धांत ,श्रेया पाटनी अजमेर
13)- चन्द्रप्रकाश जैन, कोटला
14) मंजू रानीवाला,मुंबई
15) वीरेंद्र भावना बाकलीवाल अजमेर
16)- सीमा जैन, उज्ज्वल जैन, आर्ची जैन, निशांत जैन, विभव नगर
17)- माला जैन, सुमनलता जैन, उदयपुर
18)- ममता जैन, दिलीप जैन शिकोहाबाद
19)- नेहा जैन, तरूण जैन, आर्या जैन, झांसी
20)- दीपक जैन, प्रिया, अरिहंत, आदित्य जैन बल्लभगढ़
21)- राहुल जैन, प्रभावना,संयम, सार्थक जैन(पाटोदी)किशनगढ़
22)- तनु जैन, पारस जैन, आगरा
23)- श्री मनीष , सपना जैन, जयपुर
24)- अशोक, पुष्पा कासलीवाल जयपुर
25)- प्रदीप, कल्पना , अंकुर , पायल विनायका किशनगढ़
26)- सुशील, लीला बाकलीवाल अजमेर
27)- श्री अनिल जैन, रतन जैन, शिकोहाबाद
28) देवेन्द्र कुमार, आशारानी बाकलीवाल पंचशील नगर अजमेर
29)- श्रीमती सुदेश जैन, कुलदीप जैन दिल्ली (सोनीपत)
30)- श्री मनीष जैन, श्वेता जैन, सम्यक जैन, आन्या जैन, जयपुर
31)- श्रीमान इंद्रकुमार जैन, LIC, फिरोजाबाद
32)- श्री पवन जैन, जयेश जैन, अनुज जैन, इंदौर
33)- बालेश जैन, जयपाल जैन सोनीपत
34)- सुरेंद्र कुमार, सरला बाकलीवाल पंचशील, अजमेर
35)- महिमा जैन, विभोर जैन, सोनीपत
36)- श्री सुनील जैन, सुमन जैन, सोनीपत
37)- श्री विजय जैन, अंकुर जैन, दिल्ली
38)- प्रकाश चंद्र जैन, इटावा
39)- श्रीमती रेखा जैन, गोपाल जैन, शिकोहाबाद
40)- श्रीमती प्रवीणा जैन, डूंगरपुर
41)- श्रीमान राजू जैन, सोनीपत
42)- श्री अशोक कुमार जैन सेठ जी, शिकोहाबाद
43)- कु. मिताली जैन, कु. सौम्या जैन, फिरोजाबाद
44)- श्री राजू भैया, गुड़गांव
45)- श्यामा रानीवाला, जयपुर
46)- स्व० रमेश चंद्र जैन दूध वाले, इटावा
47)- श्रीमती सुषमा जैन, निरंजन जैन, दिल्ली
48)- श्रीमती मीना जैन, अनिल जैन, गुड़गांव
49)- श्री रामपाल बाबा जी, सोनीपत
50)- श्रीमती ज्योति मित्तल, अरविंद मित्तल, फिरोजाबाद
51)- एकता जैन, गाजियाबाद
52)- कविता जैन, गाजियाबाद
53)- चन्द्रशेखर जैन, एटा
54)- इंद्र जैन, पवन जैन, सोनीपत
55)- श्रीमती डेजी जैन, राजेश जैन, भरूच
56)- श्री राजेश कुमार जैन कचौड़ी वाले, शिकोहाबाद
57)- श्रीमती श्रीमती जैन, श्री नितिन जैन, आगरा
58)- अनिष्का, अनीश, रितू, नीरज, सोनीपत
59)- सौ प्रणिता अनंतलाल दोशी
फलटण, महाराष्ट्र.
60)- श्रीमती अंजली जैन धर्मपत्नी श्री विकास जैन
61)- श्रीमान सम्मेद पाटिल, इचलकरची
62)-
63)-
64)- |
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2026-06-11 12:36:49 |
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