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6859 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन <a href="https://youtu.be/do_7P6QULPU?si=vHI6iSD-K1UE14Ct" target="_blank">https://youtu.be/do_7P6QULPU?si=vHI6iSD-K1UE14Ct</a> <a href="https://youtu.be/do_7P6QULPU?si=vHI6iSD-K1UE14Ct" target="_blank">https://youtu.be/do_7P6QULPU?si=vHI6iSD-K1UE14Ct</a> 2026-02-17 07:21:56
6857 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन <a href="https://youtu.be/GxQn3XZd3NQ?si=wzifn9EQESfRiUU6" target="_blank">https://youtu.be/GxQn3XZd3NQ?si=wzifn9EQESfRiUU6</a> <a href="https://youtu.be/GxQn3XZd3NQ?si=wzifn9EQESfRiUU6" target="_blank">https://youtu.be/GxQn3XZd3NQ?si=wzifn9EQESfRiUU6</a> 2026-02-17 07:21:55
6856 40449677 तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन <a href="https://youtu.be/wa7TGZg6Ee0?si=jyiXWU1TsQUou93L" target="_blank">https://youtu.be/wa7TGZg6Ee0?si=jyiXWU1TsQUou93L</a> <a href="https://youtu.be/wa7TGZg6Ee0?si=jyiXWU1TsQUou93L" target="_blank">https://youtu.be/wa7TGZg6Ee0?si=jyiXWU1TsQUou93L</a> 2026-02-17 07:21:51
6855 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Wandami mataji 2026-02-17 07:21:46
6854 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *प्यास* एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा, कितने पैसे में? लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे। सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या? यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे, जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्करा कर मौन रहा। जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा। महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे- पीछे गए। बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों? वह लड़का बोला, महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी। वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे। महात्मा ने पूछा - लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया - महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता। वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है। फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं? पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना होती है, वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते। पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते. अगर भगवान नहीं है तो उसका ज़िक्र क्यो?? और अगर भगवान है तो फिर फिक्र क्यों ??? : " मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।। हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता.. अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ... तो बेशक कहना... जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो रब/गुरु की मेहरबानी थी! खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच मैं ज्यादा मैं मांगता नहीं और वो कम देता नही.... जन्म अपने हाथ में नहीं ; मरना अपने हाथ में नहीं ; पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है ; मस्ती करो मुस्कुराते रहो ; सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं और जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से, इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो. ..बस यही सच्चा जीवन है.. निस्वार्थ भाव से कर्म करें जी . **************************************** (2) *कहानी* *भगवान की मरजी* एक बादशाह था, वह जब पूजा के लिए मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते! दाईं तरफ़ वाला कहता: “ए भगवान! तूने बादशाह को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे!” बाईं तरफ़ वाला कहता: “ऐ बादशाह! भगवान ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे!” दाईं तरफ़ वाला भिखारी बाईं तरफ़ वाले से कहता: “भगवान से माँग! निसंदेह वही सबसे अच्छा सुनने वाला है!” बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: “चुप कर बेवक़ूफ़”। एक बार बादशाह ने अपने वज़ीर को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो भिखारी बैठता है, वह हमेशा भगवान से मांगता है। तो निसंदेह भगवान उसकी ज़रूर सुनेगा। लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है, वह हमेशा मुझसे विनती करता रहता है। तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उस में अशर्फियाँ डाल दो और वह उसको दे आओ! वज़ीर ने ऐसा ही किया। अब वह भिखारी मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे भिखारी को चिड़ाता हुआ बोला: “हुह… बड़ा आया ‘भगवान देगा। यह देख बादशाह से माँगा, तो मिल गया ना?” खाने के बाद जब उस का पेट भर गया, तो उस ने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे भिखारी को दे दिया। और कहा: “ले पकड़… तू भी खाले,बेवक़ूफ़! अगले दिन जब बादशाह पूजा के लिए मंदिर आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला भिखारी तो आज भी वैसे ही बैठा है। लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है! बादशाह ने चौंक कर उससे पूछा: “क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला?” भिखारी: “जी मिला था हुजूर, क्या शानदार खीर थी। मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी!” बादशाह: फिर? भिखारी: “फ़िर वह जो दूसरा भिखारी यहाँ बैठता है, मैंने उसको दे दी। बेवक़ूफ़ हमेशा कहता रहता था: ‘भगवान देगा, भगवान देगा!’ बादशाह मुस्कुरा कर बोला: “बेशक, भगवान ने उसे दे ही दिया!” इसी तरह हमें भी उस भगवान से ही विनती करनी चाहिए। वही हमें देने वाला है, दुनिया के जीव तो एक जरिया है। बाकी उसकी मर्जी से ही मिलता है। इसलिए उस कुल मालिक को हमेशा याद रखो। हर रोज भजन बंदगी सिमरन करो, तब जाकर हमारा परमार्थ और स्वार्थ दोनों बन पाएंगे। उस मालिक को याद करते रहो, वह सब जानता है। उस से कुछ नही छिपा है। ********************************** (3) *कहानी* *आस्था का चमत्कार* ✍️मासूम गुड़िया बिस्तर से उठी और अपना गुल्लक ढूँढने लगी… अपनी तोतली आवाज़ में उसने माँ से पूछा, “माँ, मेला गुल्लक कहाँ गया?” माँ ने आलमारी से गुल्लक उतार कर दे दिया और अपने काम में व्यस्त हो गयी. मौका देखकर गुड़िया चुपके से बाहर निकली और पड़ोस के मंदिर जा पहुंची. सुबह-सुबह मंदिर में भीड़ अधिक थी…. हाथ में गुल्लक थामे वह किसी तरह से बाल-गोपाल के सामने पहुंची और पंडित जी से कहा, “बाबा, जला कान्हा को बाहल बुलाना!” “अरे बेटा कान्हा अभी सो रहे हैं… बाद में आना..”,पंडित जी ने मजाक में कहा. “कान्हा उठो.. जल्दी कलो … बाहल आओ…”, गुड़िया चिल्ला कर बोली. हर कोई गुड़िया को देखने लगा. “पंडित जी, प्लीज… प्लीज कान्हा को उठा दीजिये…” “क्या चाहिए तुमको कान्हा से?” “मुझे चमत्काल चाहिए… और इसके बदले में मैं कान्हा को अपना ये गुल्लक भी दूँगी… इसमें 100 लूपये हैं …कान्हा इससे अपने लिए माखन खरीद सकता है. प्लीज उठाइए न उसे…इतने देल तक कोई छोता है क्या???” “ चमत्कार!, किसने कहा कि कान्हा तुम्हे चमत्कार दे सकता है?” “मम्मा-पापा बात कल लहे थे कि भैया के ऑपरेछन के लिए 10 लाख लूपये चाहिए… पल हम पहले ही अपना गहना… जमीन सब बेच चुके हैं…और नाते-रिश्तेदारों ने भी फ़ोन उठाना छोड़ दिया है…अब कान्हा का कोई चमत्काल ही भैया को बचा सकता है…” पास ही खड़ा एक व्यक्ति गुड़िया की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था, उसने पूछा, “बेटा क्या हुआ है तुम्हारे भैया को?” “ भैया को ब्लेन ट्यूमल है…” “ब्रेन ट्यूमर???” “जी अंकल, बहुत खतल्नाक बिमाली होती है…” व्यक्ति मुस्कुराते हुए बाल-गोपाल की मूर्ती निहारने लगा…उसकी आँखों में श्रद्धा के आंसूं बह निकले…रुंधे गले से वह बोला, “अच्छा-अच्छा तो तुम वही लड़की हो… कान्हा ने बताया था कि तुम आज सुबह यहाँ मिलोगी… मेरा नाम ही चमत्कार है… लाओ ये गुल्लक मुझे दे दो और मुझे अपने घर ले चलो…” वह व्यक्ति लन्दन का एक प्रसिद्द न्यूरो सर्जन था और अपने माँ-बाप से मिलने भारत आया हुआ था. उसने गुल्लक में पड़े मात्र सौ रुपयों में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कर दिया और गुड़िया के भैया को ठीक कर दिया.?? ✍️सचमुच, अगर आपमें अटूट श्रद्धा हो और आप कोई नेक काम करना चाहते हैं तो कृष्णा किसी न किसी रूप में आपकी मदद ज़रूर करते हैं! यही है आस्था का चमत्कार!?? ✍️मित्रों, *भले ये एक काल्पनिक कहानी हो लेकिन कई बार सत्य कल्पना से भी परे होता है और दुनिया में ऐसी हजारों-लाखों घटनाएं हैं जहाँ असंभव सी लगने वाले चीजें भी विश्वास के दम पर संभव बन जाती हैं. इसलिए, ईश्वर में यकीन रखते हुए अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत करिए… क्या पता एक दिन आपके लिए कोई चमत्कार हो जाए या आप किसी और के लिए चमत्कार कर दें*। **************************************** (4) *कहानी* *एक मर्मस्पर्शी कहानी* *बुढापा या अकेलापन* एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाह निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी *माँ* पर उसकी नज़र पड़ी। कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्य चाहिए? शालिनी बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है? यह बात नहीं है शालू...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती। अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी। सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो.. माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।" सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए..... सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।...... सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।" अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी। पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।" अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है। देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है। बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी। पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था। शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली.... हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे..... *पर्ची में लिखा था....* "बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ..... पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी..... *ऐसी ही होती हैं माँ.....* दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।। *कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए* ********************************* 2026-02-17 07:17:22
6853 40449681 JAINAM JAYATI SHASANAM 20 वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागर जी की परंपरा के *द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज का 55 वां समाधि दिवस* एवं *आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का 121 वां जन्म दिवस पर* *शत शत नमन वंदन अर्चन* ???? फाल्गुन कृष्णा अमावस्या (17 फरवरी 2026) 2026-02-17 07:15:01
6852 40449749 जिनोदय?JINODAYA 2026-02-17 07:14:49
6851 40449749 जिनोदय?JINODAYA *?धन्यवाद आभार?* *मध्यप्रदेश के बड़वानी में भटक कर आए महाराष्ट्र के प्रवीण गायकवाड़ को परिजनों से मिलाने में सफ़लता मिली* *1️⃣आशुतोष सूर्यवंशी का [छत्रपति संभाजी नगर के कन्नड से बड़वानी आए प्रवीण गायकवाड़ की सूचना देने हेतु)* *2️⃣बड़वानी नगरपालिका के रेन बसेरे के कर्मचरियों का[राहुल यादव , रितेश वास्कले , सौरभ यादव [समुचित ध्यान रखने हेतु]* *3️⃣दीपक श्रीवास एवं प्रवीण श्रीवास का[रेन बसेरे में आकर प्रवीण की हजामत हेतु]* *4️⃣माँ रेवा शुगर एवं रोटरी क्लब बड़वानी के सदस्य श्री विशाल जी अग्रवाल का[परिजनों के बीच की कड़ी बनने हेतु]* *5️⃣कन्नड के श्री प्रकाश सेठ अग्रवाल जी का[10 मिनिट में प्रवीण के परिजनों से संपर्क हेतु]* *प्रभु कृपा से 241 जनों को परिजनों से मिलाने में सफ़लता मिली* *??अजित जवाहरलाल जैन बड़वानी[MP]??* *?ललित जैन सचिव रोटरी क्लब बड़वानी?* 2026-02-17 07:14:27
6850 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji ????? 2026-02-17 07:13:42
6849 40449789 KSG Jain News Gaurav Patni (1) 20 वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागर जी की परंपरा के *द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज का 55 वां समाधि दिवस* एवं *आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का 121 वां जन्म दिवस पर* *शत शत नमन वंदन अर्चन* ???? फाल्गुन कृष्णा अमावस्या (17 फरवरी 2026) 2026-02-17 07:13:35