| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 74060 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
|
|
अगर कोई तुम्हारी *बात* नहीं समझता..!!
तो समझाओ ही मत..!!
क्योंकि कुछ बातें *समझने* से नहीं,
खुद पर *बीतने* पर समझ आती हैं..!!"
।। जय जिनेन्द्र, जय गुरुदेव, सुप्रभात।। |
|
2026-04-10 08:23:39 |
|
| 74059 |
40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
|
|
अगर कोई तुम्हारी *बात* नहीं समझता..!!
तो समझाओ ही मत..!!
क्योंकि कुछ बातें *समझने* से नहीं,
खुद पर *बीतने* पर समझ आती हैं..!!"
।। जय जिनेन्द्र, जय गुरुदेव, सुप्रभात।। |
|
2026-04-10 08:23:38 |
|
| 74057 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
|
|
*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
|
2026-04-10 08:23:25 |
|
| 74058 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
|
|
*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
|
2026-04-10 08:23:25 |
|
| 74056 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
?✨ *भक्ति और साधना का सुंदर संगम* ✨?
*श्रमदान एवं अपनापन* ?
हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र, बुढ़गांव [कारोपानी], डिंडोरी
? जहां *छात्र एक साथ बैठकर*
भगवान की आराधना में लीन हैं…
वहां केवल शिक्षा ही नहीं,
बल्कि *संस्कारों का भी निर्माण* होता है।
? *ध्यान, अनुशासन और आत्मशुद्धि*
— यही है हमारी सच्ची पूंजी
? *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित*
यह पावन प्रकल्प
नई पीढ़ी को *संस्कार और स्वावलंबन* दोनों दे रहा है ???
✨ आइए, इस दिव्य वातावरण से जुड़ें
और *संस्कारमय भारत* के निर्माण में अपना योगदान दें
#श्रमदान_एवं_अपनापन #संस्कार #भक्ति #हथकरघा #आत्मशुद्धि #भारत |
|
2026-04-10 08:20:08 |
|
| 74055 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
?✨ *भक्ति और साधना का सुंदर संगम* ✨?
*श्रमदान एवं अपनापन* ?
हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र, बुढ़गांव [कारोपानी], डिंडोरी
? जहां *छात्र एक साथ बैठकर*
भगवान की आराधना में लीन हैं…
वहां केवल शिक्षा ही नहीं,
बल्कि *संस्कारों का भी निर्माण* होता है।
? *ध्यान, अनुशासन और आत्मशुद्धि*
— यही है हमारी सच्ची पूंजी
? *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित*
यह पावन प्रकल्प
नई पीढ़ी को *संस्कार और स्वावलंबन* दोनों दे रहा है ???
✨ आइए, इस दिव्य वातावरण से जुड़ें
और *संस्कारमय भारत* के निर्माण में अपना योगदान दें
#श्रमदान_एवं_अपनापन #संस्कार #भक्ति #हथकरघा #आत्मशुद्धि #भारत |
|
2026-04-10 08:20:07 |
|
| 74054 |
40449740 |
अनेकांत सागर जी विहार |
|
|
?? |
|
2026-04-10 08:19:58 |
|
| 74053 |
40449740 |
अनेकांत सागर जी विहार |
|
|
?? |
|
2026-04-10 08:19:57 |
|
| 74052 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
|
|
*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
|
2026-04-10 08:18:49 |
|
| 74051 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
|
|
*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
|
2026-04-10 08:18:48 |
|