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40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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<a href="https://youtu.be/-I9OnYh1OhU" target="_blank">https://youtu.be/-I9OnYh1OhU</a> |
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2026-02-12 18:22:40 |
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| 967 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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<a href="https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8" target="_blank">https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8</a> |
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2026-02-12 18:21:42 |
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40449669 |
दिगंबर जैन मुनि विहार समूह 4 |
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विहार अपडेट
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? *आर्यिका गुरुमां 105 श्री प्रशममति माताजी (ससंघ)*
⚫ *विहार केशवरायपटन* की ओर चल रहा है।
?*रात्रि विश्राम : स्वासा* |
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2026-02-12 18:20:45 |
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| 965 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://www.youtube.com/live/HGtdmYrVXoE?si=IeuVuX4qd6LUkQCu" target="_blank">https://www.youtube.com/live/HGtdmYrVXoE?si=IeuVuX4qd6LUkQCu</a> |
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2026-02-12 18:20:22 |
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40449669 |
दिगंबर जैन मुनि विहार समूह 4 |
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*iG Vidhya samay guru ke diwane*
*मंगल विहार अमरकंटक की ओर ..!!*
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*वन्दनीय आर्यिकारत्न श्री तपोमति माता जी ससंघ* का मंगल विहार , मडिया जी जबलपुर से सर्वोदय तीर्थ अमरकंटक की ओर हुआ।
*आज रात्रि विश्राम:* गढ़ा में होगा
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*?️सूचना साभार अर्पित जैन विनम्र किराना परिवार टहरौली*
*अधिक जानकारी follow pej*
<a href="https://www.instagram.com/vidhya_samay_guru_ke_diwane?igsh=MThxMGp1MjZjenAxaQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/vidhya_samay_guru_ke_diwane?igsh=MThxMGp1MjZjenAxaQ==</a> |
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2026-02-12 18:19:54 |
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40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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<a href="https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8" target="_blank">https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8</a> |
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2026-02-12 18:19:51 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8" target="_blank">https://youtu.be/oII_sEgsDRI?si=EziCdXKgBE3PRnu8</a> |
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2026-02-12 18:19:31 |
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40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*धर्म, राजनीति और दलाली: समाज के टूटते सूत्रों की एक साधारण-सी बात*
धर्म मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने के लिए आया था। उसका मूल उद्देश्य करुणा, संयम, सत्य और आपसी विश्वास को मजबूत करना था। धर्म ने हमेशा यह सिखाया कि व्यक्ति पहले इंसान बने, फिर किसी पंथ या विचारधारा का अनुयायी। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे धर्म का मंच बढ़ा, वैसे-वैसे उसके नाम पर स्वार्थ भी पनपने लगे। आज कई जगह धर्म साधना का विषय कम और प्रदर्शन का साधन अधिक बनता जा रहा है। जो जोड़ने का माध्यम था, वही कहीं-कहीं दूरी का कारण बनता दिख रहा है।
राजनीति का जन्म समाज को व्यवस्थित करने के लिए हुआ था। विचार अलग हो सकते हैं, पर उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए था। दुर्भाग्य से आज राजनीति ने विचारों से अधिक पहचान की दीवारें खड़ी कर दी हैं। भाषा, जाति, धर्म, क्षेत्र और दल के नाम पर लोगों को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है। सवाल विकास का नहीं रह गया, बल्कि यह हो गया है कि कौन किसके खिलाफ है। राजनीति जो संवाद सिखाने आई थी, वह टकराव की भाषा बोलने लगी है।
इन दोनों के बीच एक और वर्ग खड़ा हो गया है, जिसे खुलकर कोई नाम नहीं देता, पर समाज उसे अच्छे से पहचानता है। यह वही दलाली है, जो धर्म के नाम पर भी चल रही है और राजनीति के नाम पर भी। जहां श्रद्धा होती है, वहां चंदा और सौदेबाजी शुरू हो जाती है। जहां जनसेवा होनी चाहिए, वहां कमीशन और सिफारिश का खेल चलने लगता है। यह दलाली न किसी सिद्धांत की होती है, न किसी विचार की। इसका एक ही लक्ष्य होता है, अपनी तिजोरियाँ भरना, चाहे समाज टूटे या भरोसा खत्म हो जाए।
सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि आम आदमी भ्रमित हो गया है। वह समझ नहीं पाता कि धर्म की बात करने वाला वास्तव में धर्म के लिए है या अपने लिए, और राजनीति की बात करने वाला देश के लिए सोच रहा है या कुर्सी के लिए। इसी भ्रम का फायदा उठाकर दलाल किस्म के लोग दोनों ओर से मलाई काट लेते हैं। धर्म का नाम लेकर भावनाएँ भुनाई जाती हैं और राजनीति का नाम लेकर डर या लालच पैदा किया जाता है।
समस्या यह नहीं है कि धर्म या राजनीति बुरी है। समस्या यह है कि दोनों को अपने मूल उद्देश्य से भटका दिया गया है। जब धर्म सत्ता का साधन बन जाए और राजनीति सेवा की जगह व्यापार बन जाए, तब समाज का टूटना तय हो जाता है। आज जरूरत इस बात की है कि आम व्यक्ति सवाल पूछे, समझे और आंख बंद करके किसी के पीछे न चले। न हर धार्मिक मंच पवित्र होता है और न हर राजनीतिक नारा जनहित का होता है।
यदि धर्म को फिर से जोड़ने वाला बनना है तो उसे आडंबर से बाहर आना होगा। यदि राजनीति को समाज का भला करना है तो उसे नफरत की भाषा छोड़नी होगी। और यदि दलाली को रोकना है तो समाज को जागरूक होना पड़ेगा। क्योंकि जब तक पूछने वाला चुप रहेगा, तब तक बेचने वाला बेखौफ रहेगा।
यह कोई विद्वतापूर्ण लेख नहीं है, बस एक साधारण-सी बात है, जो हर उस व्यक्ति के मन में है जो समाज को टूटते हुए देख रहा है और फिर भी चाहता है कि इंसान, इंसान से जुड़ा रहे।
नितिन जैन
संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा)
जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल
मोबाइल: 9215635871 |
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2026-02-12 18:19:23 |
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40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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2026-02-12 18:18:50 |
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40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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2026-02-12 18:17:56 |
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