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40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
???????
_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
???????
दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
??????
आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:43:00 |
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| 82643 |
40449691 |
गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
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_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
???????
दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
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आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:42:59 |
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40449690 |
गुरु आर्जव वाणी New 1️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
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_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
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दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
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आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:42:50 |
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40449690 |
गुरु आर्जव वाणी New 1️⃣ |
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*आचार्य श्री ससंघ की हुई भींडर में भव्य मंगल आगवानी**
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_13 अप्रैल 2026, सोमवार_
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_आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ की मंगल आगवानी से भींडर नगर की सम्पूर्ण समाज में हुआ हर्षोल्लास_
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दिनांक 13 अप्रैल 2026 को भींडर जिला उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की गई। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि यह भींडर नगर और यहां की जनता की गुरुभक्ति, परमेष्ठी के प्रति लगन और उत्साह आज हमें देखने को मिली। यहां के भव्य प्राचीन जिनालय में भगवान आदिनाथ सहित शांतिनाथ, पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमा को देखकर बड़ा ही आनंद हुआ। यह भगवान और ऐसा अतिशयकारी विशाल मंदिर मिलना बड़े ही पुण्य की बात है। हमने अनंत काल से पूरा विश्व घुमा परंतु आज तक अपने निज स्वरूप को नहीं जाना। अपने आत्म तत्व को नहीं पहचाना। हमने अपने निज घर को आज तक नहीं जाना। हम थोड़ी देर को भगवान के सामने आते हैं। अपनी थकान को भूल जाते हैं। कुछ भी ध्यान नहीं आता। हम विचार करते हैं कि हे भगवान आप से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। अब आपकी शरण को छोड़कर हमें कहीं नहीं जाना। इस प्रकार भगवान के दरबार में जब सब कुछ भूल जाते हैं तो अपने निज स्वरूप का ध्यान स्वतः ही हो जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि अतिथि वे होते हैं जिनकी आने की तिथि निश्चित नहीं होती। वे गुरु, साधु ,मुनि भी इसी तरह होते हैं। इसलिए बंधुओं! जब जब आपको संत समागम मिलता है, उनका सानिध्य मिलता है तब तब उसका ठीक तरह से लाभ ले लेना चाहिए।
*सच्चा जन्म तो धर्म के माध्यम से ही होता है...*
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आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने कहा कि । जीवन में धर्म की उपलब्धि बहुत ही दुर्लभ है। जीवन में गुरुओं के समागम से हमारे कदम संसार से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
उन गुरुओं से हमारे अन्तरचक्षु नेत्र खुलकर हमें अपूर्व शांति व सुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यहां के लोगों में देव शास्त्र गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हैं। यह भक्ति ही बताती है कि आप सभी इस विशाल मंदिर का , संत निवास आदि जीर्णोद्धार कराकर हमारे गुरू भाइयों के ससंघ का भी समागम पाएंगे।
धर्म से ही जीवन सुखी होता है और इह और परलोक सुधर जाता है। जो तीर्थ को करते हैं वे तीर्थंकर कहलाते हैं।तीर्थंकर की वाणी आचार्य के महान प्रसाद से हमें प्राप्त होती हैं। ऐसे आचार्य असंख्यात पुण्य आत्माओं का कल्याण कर सकते हैं। अगर वे आचार्य ना होते तो हमें ऐसे गुरु, ऐसे मुनि ,ऐसे साधु और उनका उपदेश नहीं मिल पाता। अतः गुरु हमारे कल्याण करने वाले होते हैं। असली मैं तो धर्म से ही सच्चा जन्म होता है। अगर धर्म नहीं तो सच्चा धर्म नहीं है।
हमें परस्पर में उपकार की भावना भानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति भले ही आज हमारे प्रति पकार करें, परंतु हमें उसके उपकार की, कल्याण की भावना भानी चाहिए। क्योंकि कहते हैं कि" सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कमी ना घबरावे "।प्रकृति भी हमें उपकार करना सिखाती हैं। यह उपकार ही हमारा धर्म है। हम किसी का उपकार करेंगे तो उसका उपकार भी धर्म रूपी कार्य है। यही धर्म है।बंधुओं! एक दूसरे का उपकार करोगे तो अपने आप जन्म जन्मांतर तक तुम्हारे उपकार को बिसराया नहीं जा सकेगा। यह उपकार हमें महान बनाएगा। अतः सभी जीवो के अंदर मोक्ष पाने की शक्ति है। इसलिए सभी जीव को समान समझ कर समान देखो, भेदभाव नहीं करो।
भींडर के अतिशयकारी भगवान बड़े ही मनमोहक एवं मन को आनंद की अनुभूति प्रदान करने वाले हैं।श्री आदिनाथ दि.जैन बड़ा मंदिर कमेटी एवं सम्पूर्ण जैन समाज ने आचार्य श्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट कर आचार्य श्री से ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु निवेदन किया। |
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2026-04-13 13:42:50 |
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| 82640 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/ILS92r0vDn4?si=RW1uA3GjdBxMupy2" target="_blank">https://youtu.be/ILS92r0vDn4?si=RW1uA3GjdBxMupy2</a>
_*?5a.2#ध्यान पिडस्थ- अ.धा[हिन्दी+मराठी]-प.पू. १०८अपूर्व चैतन्य ऋध्दिधारी, परम दिगंबर मुनिराज, अभिष्ण ज्ञानोपयोगी, अध्यात्मयोगी श्री वीरसागरजी महाराज।*_
? *IMP e-books pdf & All Charts pdf ?* <a href="https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf" target="_blank">https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf</a>
*? जैन सिद्धान्त प्रवेशिका [हिन्दी]_ नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- पं.अनिलजी दुरुगकर,पुणे.* Link---<a href="https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share</a>
*??#समयसार[तात्पर्यवृत्ति]-हिन्दी भावानुवाद [भाषा टीका]-मुनिवर श्री वीरसागरजी- प्रवक्ता:- पं.अनिलजी, पुणे.?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY</a>
*? आलाप-पध्दति ( हिन्दी)-आ.पं.श्री. अनिलजी दुरुगकर, पुणे प्रवचन Link ?*: <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy</a>
*?#अध्यात्म न्यायदीपिका (हिंदी) आ.पं.श्री.अनिलजी दुरुगकर, पुणे:* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN</a>
*? _Please forward for Jinvani Seva_*
*ॐ?कृपया <a href="https://youtube.com/@108Veersagarji" target="_blank">https://youtube.com/@108Veersagarji</a> Channel को Subscribe करके Bell Icon दबाए, जिससे नित्य आपको नूतन पोस्ट के Notification आते रहेंगे,धन्यवाद.ॐ*
*?"हिन्दी प्रवचन _अत्यन्त २ महत्वके प्रमाण नय निक्षेपादि विषयपर"_प्रवक्ता प.पू.१०८श्री वीरसागरजी महाराज Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze</a>
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*?न्यायदीपिका प्रवचन अध्याय १,२,३ -प्रवक्ता: प.पू.अपूर्व चैतन्य ऋद्धिधारी १०८ श्री वीरसागरजी महाराज प्रवचन Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU</a>
*?ध्यान लिंक?# DhyanLink?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI</a>
*?प्रवचनसार & पंचास्तिकाय Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31</a>
*?समयसार प्रवचन. Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=</a>
? *ASHTSAHASTRI? :* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0</a>
*?भक्ति अमृत धारा ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ</a> |
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2026-04-13 13:39:32 |
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| 82639 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/ILS92r0vDn4?si=RW1uA3GjdBxMupy2" target="_blank">https://youtu.be/ILS92r0vDn4?si=RW1uA3GjdBxMupy2</a>
_*?5a.2#ध्यान पिडस्थ- अ.धा[हिन्दी+मराठी]-प.पू. १०८अपूर्व चैतन्य ऋध्दिधारी, परम दिगंबर मुनिराज, अभिष्ण ज्ञानोपयोगी, अध्यात्मयोगी श्री वीरसागरजी महाराज।*_
? *IMP e-books pdf & All Charts pdf ?* <a href="https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf" target="_blank">https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf</a>
*? जैन सिद्धान्त प्रवेशिका [हिन्दी]_ नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- पं.अनिलजी दुरुगकर,पुणे.* Link---<a href="https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share</a>
*??#समयसार[तात्पर्यवृत्ति]-हिन्दी भावानुवाद [भाषा टीका]-मुनिवर श्री वीरसागरजी- प्रवक्ता:- पं.अनिलजी, पुणे.?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY</a>
*? आलाप-पध्दति ( हिन्दी)-आ.पं.श्री. अनिलजी दुरुगकर, पुणे प्रवचन Link ?*: <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy</a>
*?#अध्यात्म न्यायदीपिका (हिंदी) आ.पं.श्री.अनिलजी दुरुगकर, पुणे:* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN</a>
*? _Please forward for Jinvani Seva_*
*ॐ?कृपया <a href="https://youtube.com/@108Veersagarji" target="_blank">https://youtube.com/@108Veersagarji</a> Channel को Subscribe करके Bell Icon दबाए, जिससे नित्य आपको नूतन पोस्ट के Notification आते रहेंगे,धन्यवाद.ॐ*
*?"हिन्दी प्रवचन _अत्यन्त २ महत्वके प्रमाण नय निक्षेपादि विषयपर"_प्रवक्ता प.पू.१०८श्री वीरसागरजी महाराज Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze</a>
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*? जैन सिद्धान्त प्रवेशिका प्रवचन_नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- महाराज श्री एवं माताजी द्वय Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQe7kf2eUCOGAFjjjz-FIN3x" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQe7kf2eUCOGAFjjjz-FIN3x</a>
*? न्यायदीपिका शिक्षण शिविर प्रवचन Link?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQerJbZ-kuVnyRrrWG6vZRRB" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQerJbZ-kuVnyRrrWG6vZRRB</a>
*?आ.पं.श्री राजकुमारजी आळंदकर.लिंक# Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQdyhIF8P9rK-bVIa9pb5kKr" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQdyhIF8P9rK-bVIa9pb5kKr</a>
*?आ.बा.ब्र.पं.श्री जितेन्द्रजी चंकेश्वरा प्रवचन लिंक# Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeRhkAe9qs11UQ4bjikeZeR" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeRhkAe9qs11UQ4bjikeZeR</a>
*?प.पू.१०५ सुशिलमति माताजी & प.पू.१०५ सुव्रता माताजी प्रवचन लिंक:?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfRlQ062Bonj_7baEJ8XQL6" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfRlQ062Bonj_7baEJ8XQL6</a>
*?४७ शक्ति आत्मख्याति प्रवचन Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeF4cLxMl2ek3Djjrk3wusz" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeF4cLxMl2ek3Djjrk3wusz</a>
*?न्यायदीपिका प्रवचन अध्याय १,२,३ -प्रवक्ता: प.पू.अपूर्व चैतन्य ऋद्धिधारी १०८ श्री वीरसागरजी महाराज प्रवचन Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU</a>
*?ध्यान लिंक?# DhyanLink?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI</a>
*?प्रवचनसार & पंचास्तिकाय Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31</a>
*?समयसार प्रवचन. Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=</a>
? *ASHTSAHASTRI? :* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0</a>
*?भक्ति अमृत धारा ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ</a> |
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2026-04-13 13:39:31 |
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| 82637 |
40449721 |
माँ विशुद्ध भक्त परिवार?6 |
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<a href="https://youtube.com/shorts/UN5tNPPvj-M?si=mWQx34FEP3jMgSto" target="_blank">https://youtube.com/shorts/UN5tNPPvj-M?si=mWQx34FEP3jMgSto</a> |
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2026-04-13 13:39:22 |
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| 82638 |
40449721 |
माँ विशुद्ध भक्त परिवार?6 |
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<a href="https://youtube.com/shorts/UN5tNPPvj-M?si=mWQx34FEP3jMgSto" target="_blank">https://youtube.com/shorts/UN5tNPPvj-M?si=mWQx34FEP3jMgSto</a> |
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2026-04-13 13:39:22 |
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| 82636 |
40449680 |
श्री हुमड़ जैन समाज, पुणे |
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*श्री सन्मती सेवा दल बहुउद्देशीय अल्पसंख्याक संस्था* आयोजित
*नववा राज्यस्तरीय जैन वधू-वर-पालक परिचय मेळावा २०२६*
*?बारावी विवाह गाठ जुळून आली.*
*?M- 58?*
*?चि. साहिल परेश गांधी, वालचंदनगर*
(श्री परेश पद्मराज गांधी)
*?F-38?*
*?कु. सेजल मोहन दोशी, अकलूज*
(श्री मोहन सुकुमार दोशी)
*यांचा विवाह योग या मेळाव्यात जुळुन आला आहे.*
उभयतांचे अभिनंदन व पुढील भावी आयुष्य वाटचालीस हार्दिक शुभेच्छा. |
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2026-04-13 13:39:02 |
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| 82635 |
40449680 |
श्री हुमड़ जैन समाज, पुणे |
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*श्री सन्मती सेवा दल बहुउद्देशीय अल्पसंख्याक संस्था* आयोजित
*नववा राज्यस्तरीय जैन वधू-वर-पालक परिचय मेळावा २०२६*
*?बारावी विवाह गाठ जुळून आली.*
*?M- 58?*
*?चि. साहिल परेश गांधी, वालचंदनगर*
(श्री परेश पद्मराज गांधी)
*?F-38?*
*?कु. सेजल मोहन दोशी, अकलूज*
(श्री मोहन सुकुमार दोशी)
*यांचा विवाह योग या मेळाव्यात जुळुन आला आहे.*
उभयतांचे अभिनंदन व पुढील भावी आयुष्य वाटचालीस हार्दिक शुभेच्छा. |
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2026-04-13 13:39:01 |
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