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Message
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?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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<a href="https://youtube.com/shorts/QqODWPgx5lg?si=2vMlnY5Aoevla5Is" target="_blank">https://youtube.com/shorts/QqODWPgx5lg?si=2vMlnY5Aoevla5Is</a> |
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2026-06-11 10:26:15 |
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| 221557 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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<a href="https://youtube.com/shorts/QqODWPgx5lg?si=2vMlnY5Aoevla5Is" target="_blank">https://youtube.com/shorts/QqODWPgx5lg?si=2vMlnY5Aoevla5Is</a> |
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2026-06-11 10:26:15 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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<a href="https://youtube.com/shorts/QNyiru-Vm8w?si=b0IPU2C6YZ2zueyW" target="_blank">https://youtube.com/shorts/QNyiru-Vm8w?si=b0IPU2C6YZ2zueyW</a> |
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2026-06-11 10:24:13 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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<a href="https://youtube.com/shorts/QNyiru-Vm8w?si=b0IPU2C6YZ2zueyW" target="_blank">https://youtube.com/shorts/QNyiru-Vm8w?si=b0IPU2C6YZ2zueyW</a> |
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2026-06-11 10:24:13 |
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| 221552 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*"वस्तु के स्वभाव में भूल नहीं है, भूल मात्र दृष्टि में है"*
*"जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि भाषित होगी"*
*1. वस्तु में भूल नहीं - वो तो त्रिकाल शुद्ध है*
*तस्वीर + वचन का सार*:
_आत्मा मैली नहीं है, ज्ञायक ही है_। _कर्म कर्म है, आत्मा आत्मा है_। _राग पर्याय में है, द्रव्य में नहीं_।
_कल पढ़ा न? "वत्थु सहावो धम्मो" - वस्तु का स्वभाव ही धर्म है_। _आग कभी शीतल नहीं होगी, आत्मा कभी अज्ञानी नहीं होगी_।
*तो बदलना किसे है?* _वस्तु को नहीं, दृष्टि को_।
_सीसा गंदा है तो चेहरा धुंधला दिखेगा_ → _चेहरा साफ करो या सीसा?_ _सीसा यानी दृष्टि_।
*2. दृष्टि की 2 अवस्था - मिथ्या vs सम्यक*
**मिथ्या दृष्टि** **सम्यक दृष्टि**
"मैं शरीर हूँ, मैं कर्ता हूँ" "अहमेक्को खल्लु शुद्धों, मैं ज्ञायक हूँ"
परद्रव्य में सुख ढूंढे निज वैभव में रमे
पर्याय को देखे, द्रव्य भूले द्रव्य को देखे, पर्याय साक्षी से जाने
सृष्टि = दुःख, बंधन, दौड़ सृष्टि = ज्ञान-दर्शन, निज आनंद
_कल आत्म संबोधन में पढ़ा: जीव बाहर सुख ढूंढ रहा है, जबकि सुख आत्मा का स्वभाव है_।
_यही दृष्टि की भूल है_।
*3. दृष्टि बदलते ही सृष्टि बदल जाती है - यही जादू है*
*उदाहरण*:
*पहले*: _बेटा परीक्षा में फेल_ → _दृष्टि_: "मेरा बेटा निकम्मा है" → _सृष्टि_: _क्रोध, टेंशन, झगड़ा_।
*बाद में*: _वही घटना_ → _दृष्टि_: "पर्याय क्रमबद्ध है, मैं ज्ञायक साक्षी हूँ, बेटा ज्ञानस्वरूप है" → _सृष्टि_: _शांति, उपादेय-बोध, करुणा_।
*घटना वही रही, वस्तु वही रही* → _बदली सिर्फ दृष्टि_ → _सृष्टि पूरी बदल गई_।
_भगवान के सामने भक्त हाथ जोड़ते हैं_ → _वही दृष्टि है: "मैं पराधीन, आप स्वाधीन"_।
_ज्ञानी दृष्टि पलटते ही कहता है: "मैं भी ज्ञायक, आप भी ज्ञायक - बस पर्याय का भेद"_।
*आज दृष्टि बदलने का 1 प्रयोग*
*जब भी दुःख, क्रोध, चिंता आए, 3 सेकंड रुक कर पूछो*:
_"वस्तु में भूल है या दृष्टि में?"_
*जवाब खुद मिलेगा*: _वस्तु तो क्रमबद्ध चल रही है, भूल तो मेरी दृष्टि की है जो पर-सन्मुख हो गई_।
*तुरंत पलटो*: _"मैं दृष्टा हूँ, मैं ज्ञायक हूँ"_।
_दृष्टि पलटी = राग लंगड़ा = पर-सन्मुख प्रवाह रुका = स्व-सन्मुख प्रवाह शुरू_।
*सार: 7 दिन की पूरी कड़ी का निचोड़*
_मिथ्यात्व छोड़ा_ → _निमित्ताधीन दृष्टि हटाई_ → _क्रमबद्ध मानी_ → _"अहमेक्को शुद्धों" धुनी_
→ _वत्थु सहावो धम्मो_ → _निज वैभव जाना_ → _यथार्थ निर्णय किया_ → _आज: दृष्टि बदली_
_वस्तु त्रिकाल शुद्ध है_ → _तुम भी त्रिकाल ज्ञायक हो_ → _बीच में भूल सिर्फ दृष्टि की थी_।
_आत्मा को कभी मत बेचना - न दृष्टि बदलने के डर से_।
_क्योंकि दृष्टि बदलते ही सृष्टि बदल जाएगी, और सृष्टि बदलते ही मोक्ष_।
_पूर्णता के लक्ष से ही धर्म की शुरुआत होती है_।
_स्वयंकी ओर देखते हुये स्वयंमें मग्न हुआ वही सच्चा निज-दर्शन हैं_ ?
*स्वाध्याय परम निर्दोष तप है। आज दिन भर याद रखो: "वस्तु शुद्ध है, दृष्टि सुधारनी है"* ?✨
*सर्वज्ञ शासन जयवंत वर्ते*
*शुद्ध आगम वाणी* |
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2026-06-11 10:23:37 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*"वस्तु के स्वभाव में भूल नहीं है, भूल मात्र दृष्टि में है"*
*"जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि भाषित होगी"*
*1. वस्तु में भूल नहीं - वो तो त्रिकाल शुद्ध है*
*तस्वीर + वचन का सार*:
_आत्मा मैली नहीं है, ज्ञायक ही है_। _कर्म कर्म है, आत्मा आत्मा है_। _राग पर्याय में है, द्रव्य में नहीं_।
_कल पढ़ा न? "वत्थु सहावो धम्मो" - वस्तु का स्वभाव ही धर्म है_। _आग कभी शीतल नहीं होगी, आत्मा कभी अज्ञानी नहीं होगी_।
*तो बदलना किसे है?* _वस्तु को नहीं, दृष्टि को_।
_सीसा गंदा है तो चेहरा धुंधला दिखेगा_ → _चेहरा साफ करो या सीसा?_ _सीसा यानी दृष्टि_।
*2. दृष्टि की 2 अवस्था - मिथ्या vs सम्यक*
**मिथ्या दृष्टि** **सम्यक दृष्टि**
"मैं शरीर हूँ, मैं कर्ता हूँ" "अहमेक्को खल्लु शुद्धों, मैं ज्ञायक हूँ"
परद्रव्य में सुख ढूंढे निज वैभव में रमे
पर्याय को देखे, द्रव्य भूले द्रव्य को देखे, पर्याय साक्षी से जाने
सृष्टि = दुःख, बंधन, दौड़ सृष्टि = ज्ञान-दर्शन, निज आनंद
_कल आत्म संबोधन में पढ़ा: जीव बाहर सुख ढूंढ रहा है, जबकि सुख आत्मा का स्वभाव है_।
_यही दृष्टि की भूल है_।
*3. दृष्टि बदलते ही सृष्टि बदल जाती है - यही जादू है*
*उदाहरण*:
*पहले*: _बेटा परीक्षा में फेल_ → _दृष्टि_: "मेरा बेटा निकम्मा है" → _सृष्टि_: _क्रोध, टेंशन, झगड़ा_।
*बाद में*: _वही घटना_ → _दृष्टि_: "पर्याय क्रमबद्ध है, मैं ज्ञायक साक्षी हूँ, बेटा ज्ञानस्वरूप है" → _सृष्टि_: _शांति, उपादेय-बोध, करुणा_।
*घटना वही रही, वस्तु वही रही* → _बदली सिर्फ दृष्टि_ → _सृष्टि पूरी बदल गई_।
_भगवान के सामने भक्त हाथ जोड़ते हैं_ → _वही दृष्टि है: "मैं पराधीन, आप स्वाधीन"_।
_ज्ञानी दृष्टि पलटते ही कहता है: "मैं भी ज्ञायक, आप भी ज्ञायक - बस पर्याय का भेद"_।
*आज दृष्टि बदलने का 1 प्रयोग*
*जब भी दुःख, क्रोध, चिंता आए, 3 सेकंड रुक कर पूछो*:
_"वस्तु में भूल है या दृष्टि में?"_
*जवाब खुद मिलेगा*: _वस्तु तो क्रमबद्ध चल रही है, भूल तो मेरी दृष्टि की है जो पर-सन्मुख हो गई_।
*तुरंत पलटो*: _"मैं दृष्टा हूँ, मैं ज्ञायक हूँ"_।
_दृष्टि पलटी = राग लंगड़ा = पर-सन्मुख प्रवाह रुका = स्व-सन्मुख प्रवाह शुरू_।
*सार: 7 दिन की पूरी कड़ी का निचोड़*
_मिथ्यात्व छोड़ा_ → _निमित्ताधीन दृष्टि हटाई_ → _क्रमबद्ध मानी_ → _"अहमेक्को शुद्धों" धुनी_
→ _वत्थु सहावो धम्मो_ → _निज वैभव जाना_ → _यथार्थ निर्णय किया_ → _आज: दृष्टि बदली_
_वस्तु त्रिकाल शुद्ध है_ → _तुम भी त्रिकाल ज्ञायक हो_ → _बीच में भूल सिर्फ दृष्टि की थी_।
_आत्मा को कभी मत बेचना - न दृष्टि बदलने के डर से_।
_क्योंकि दृष्टि बदलते ही सृष्टि बदल जाएगी, और सृष्टि बदलते ही मोक्ष_।
_पूर्णता के लक्ष से ही धर्म की शुरुआत होती है_।
_स्वयंकी ओर देखते हुये स्वयंमें मग्न हुआ वही सच्चा निज-दर्शन हैं_ ?
*स्वाध्याय परम निर्दोष तप है। आज दिन भर याद रखो: "वस्तु शुद्ध है, दृष्टि सुधारनी है"* ?✨
*सर्वज्ञ शासन जयवंत वर्ते*
*शुद्ध आगम वाणी* |
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40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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40649233 |
Mumukshu mandal?♂️ |
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Mumukshu mandal?♂️ |
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