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220899 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/aJskFJkviA0" target="_blank">https://youtu.be/aJskFJkviA0</a> 2026-06-11 06:10:55
220898 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/aJskFJkviA0" target="_blank">https://youtu.be/aJskFJkviA0</a> 2026-06-11 06:10:54
220897 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *वाह ज़िन्दगी केवल संपन्न व्यक्तियों पर ही नहीं, बल्कि शारीरिक या आर्थिक रूप से कमजोर उन प्रतिभाओं पर भी फिल्म बनाता है जिन्होंने अपनी मेहनत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। साथ ही असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले प्रतिभाशाली बच्चों पर भी फिल्म बना कर जैन रत्न के रूप में प्रस्तुत करता है।* *"Essence Presents देश दुनिया के जैन धुरंधर" सीरीज के Part-5 में जल्द ही ऐसे ही 15 प्रेरणादायक जैन रत्नों से मिलिए। तब तक Waah Zindagi YouTube Channel को सब्सक्राइब करें और इस संदेश को अधिक से अधिक ग्रुपों में साझा करें।* *ललित सरावगी जैन, वाह ज़िन्दगी, कोलकाता 9331722031* 2026-06-11 06:09:36
220896 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *वाह ज़िन्दगी केवल संपन्न व्यक्तियों पर ही नहीं, बल्कि शारीरिक या आर्थिक रूप से कमजोर उन प्रतिभाओं पर भी फिल्म बनाता है जिन्होंने अपनी मेहनत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। साथ ही असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले प्रतिभाशाली बच्चों पर भी फिल्म बना कर जैन रत्न के रूप में प्रस्तुत करता है।* *"Essence Presents देश दुनिया के जैन धुरंधर" सीरीज के Part-5 में जल्द ही ऐसे ही 15 प्रेरणादायक जैन रत्नों से मिलिए। तब तक Waah Zindagi YouTube Channel को सब्सक्राइब करें और इस संदेश को अधिक से अधिक ग्रुपों में साझा करें।* *ललित सरावगी जैन, वाह ज़िन्दगी, कोलकाता 9331722031* 2026-06-11 06:09:35
220895 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सभी को जय जिनेन्द्* ? एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में* *सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. ....... आज का दिन मंगलमय हो ।। * शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये। * सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है । * त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं। * रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है * नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है। 11 जून 2026 दिन: गुरुवार "" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *काजू* खाने का त्याग है और *श्री श्रेयांसनाथ चालीसा* पढ़ने का नियम है...."’’ ?? शहर में विराजित साधू ‰संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें। अगर आप आज 11-06-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।! ******************************* *श्री श्रेयांसनाथ चालीसा* निज मन में करके स्थापित, पंच परम परमेष्ठी को । लिखूं श्रेयांसनाथ चालीसा, मन में बहुत ही हर्षित हो ।। जय श्रेयांसनाथ श्रुत ज्ञायक हो, जय उत्तम आश्रय दायक हो । माँ वेणु पिता विष्णु प्यारे, तुम सिंहपुर में अवतारे ।। जय ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी प्यारी, शुभ रत्न वृष्टि होती भारी। जय गर्भकल्यानोत्सव अपार, सब देव करें नाना प्रकार ।। जय जन्म जयंती प्रभु महान, फाल्गुन एकादशी कृष्ण जान । जय जिनवर का जन्माभिषेक, शत अष्ट कलश से करे नेक ।। शुभ नाम मिला श्रेयांसनाथ, जय सत्य परायण सद्यजात । निश्रेयस मार्ग के दर्शायक, जन्मे मति श्रुत अवधि धारक ।। आयु चौरासी लक्ष प्रमाण, तन तुंग धनुष अस्सी महान । प्रभु वर्ण सुवर्ण सम्मान पीत, गए पूरब इक्कीस लक्ष बीत ।। हुआ ब्याह महा मंगलकारी, सब सुख भोगे आनंदकारी । जब हुआ ऋतू का परिवर्तन, वैराग्य हुआ प्रभु को उत्पन्न ।। दिया राजपाट सूत श्रेयस्कर, तजा मोह त्रिभुवन भास्कर । सुर लाए विमलप्रभा शिविका, उद्यान मनोहर नगरी का ।। वह जा कर केश लोंच कीने, परिग्रह ब्रह्मन्तर तज दिने । गए शुद्ध शिला तल पर विराज, ऊपर रहा तुम्बुर वृक्ष साज ।। किया ध्यान वह स्थिर हॊकर, हुआ ज्ञान मनः पर्यय सत्वर । हुए धन्य सिद्धार्थ नगर भूप, दिया पात्र दान जिनने अनूप ।। महिमा अचिन्त्य हैं पात्र दान, सुर करते पंच अचरज महान । वन को तत्काल ही लौट गए, पुरे दो साल वे मौन रहे ।। आई जब अमावस माघ मास, हुआ केवल ज्ञान सुप्रकाश । रचना शुभ समवशरण सुजान, करते धनदेव तुरंत आन ।। प्रभु की दिव्य ध्वनि होती विकीर्ण, होता कर्मो का बांध क्षीर्ण । उत्सर्पिणी अवसर्पिणी विशाल, ऐसे दो भेद बताये काल ।। एक सौ अड़तालीस बीत जाये, जब हुन्द अवसर्पिणी कहाय । सुखमा सुखमा हैं प्रथम काल, जिसमे सब जीव रहे खुशहाल ।। दूजा दिखलाते सुखमा काल, तीजा सुखमा दुखमा सुकाल । चौथा सुखमा दुखमा सुजान, दुखमा हैं पंचम मान ।। दुखमा दुखमा छट्टम महान, छट्टम छट्टा एक ही समान । यह काल परिणति ऐसी ही, होती भरत ऐरावत में ही ।। रहे क्षेत्र विदेह में विध्यमान, बस काल चतुर्थ ही वर्तमान । सुन काल स्वरुप को जान लिया, भविजनो का कल्याण हुआ ।। हुआ दूर दूर प्रभु का विहार, वह दूर हुआ सब शिथिलाचार । फिर गए प्रभु गिरिवर सम्मेद, धरे सुयोग विभु बिना खेद ।। हुई पूर्णमासी श्रावण शुक्ला, प्रभु को शाश्वत निजरूप मिला । पूजे सुर संकुल कूट आन, निर्वाणोत्सव करते महान ।। प्रभुवर के चरणों का शरणा, जो भविजन लेते सुखदाय । उन पर होती प्रभु की करुणा, अरुणा मनवांछित फल पाय ।। ******************************* 2026-06-11 06:07:36
220894 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सभी को जय जिनेन्द्* ? एवम् परम पूज्य गुरूदेव विभंजन सागर जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद * आपके परिवार में* *सुख , शांति, शक्ति, सम्पति, स्वरुप, संयम, सादगी, सफलता, समृध्दि, साधना, संस्कार और स्वास्थ्य की वृद्धि हो*. ....... आज का दिन मंगलमय हो ।। * शास्त्रों में लिखा है हमे रोज़ एक नियम/त्याग लेना ही चाहिये। * सभी धर्मो में त्याग /नियम को बहुत महत्व दिया गया है । * त्याग / नियम कितना भी छोटा क्यों न हो (सिर्फ 10 मिनिट का भी) बहुत अशुभ कर्म नष्ट होते हैं। * रोज़ कुछ त्याग करने से बुरे कर्मो की निर्ज़रा (क्षय होना) होती है * नरक आयु का बंध अगर हमारा हो चुका है तो हम किसी भी तरह के नियम जीवन में नहीं ले पाते है। 11 जून 2026 दिन: गुरुवार "" आप चाहे तो सिर्फ के लिये त्याग/नियम भी ले सकते हैं या और कोई भी नियम अपने अनुसार ले सकते है। नियम- आज *काजू* खाने का त्याग है और *श्री श्रेयांसनाथ चालीसा* पढ़ने का नियम है...."’’ ?? शहर में विराजित साधू ‰संतो के दर्शन की और निरंतराय आहार की भावना रखे और हो सके तो दर्शन करके आहार भी दें। अगर आप आज 11-06-2026 एक दिन का संकल्प करना चाहते है तो आप "नियम है।! ******************************* *श्री श्रेयांसनाथ चालीसा* निज मन में करके स्थापित, पंच परम परमेष्ठी को । लिखूं श्रेयांसनाथ चालीसा, मन में बहुत ही हर्षित हो ।। जय श्रेयांसनाथ श्रुत ज्ञायक हो, जय उत्तम आश्रय दायक हो । माँ वेणु पिता विष्णु प्यारे, तुम सिंहपुर में अवतारे ।। जय ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी प्यारी, शुभ रत्न वृष्टि होती भारी। जय गर्भकल्यानोत्सव अपार, सब देव करें नाना प्रकार ।। जय जन्म जयंती प्रभु महान, फाल्गुन एकादशी कृष्ण जान । जय जिनवर का जन्माभिषेक, शत अष्ट कलश से करे नेक ।। शुभ नाम मिला श्रेयांसनाथ, जय सत्य परायण सद्यजात । निश्रेयस मार्ग के दर्शायक, जन्मे मति श्रुत अवधि धारक ।। आयु चौरासी लक्ष प्रमाण, तन तुंग धनुष अस्सी महान । प्रभु वर्ण सुवर्ण सम्मान पीत, गए पूरब इक्कीस लक्ष बीत ।। हुआ ब्याह महा मंगलकारी, सब सुख भोगे आनंदकारी । जब हुआ ऋतू का परिवर्तन, वैराग्य हुआ प्रभु को उत्पन्न ।। दिया राजपाट सूत श्रेयस्कर, तजा मोह त्रिभुवन भास्कर । सुर लाए विमलप्रभा शिविका, उद्यान मनोहर नगरी का ।। वह जा कर केश लोंच कीने, परिग्रह ब्रह्मन्तर तज दिने । गए शुद्ध शिला तल पर विराज, ऊपर रहा तुम्बुर वृक्ष साज ।। किया ध्यान वह स्थिर हॊकर, हुआ ज्ञान मनः पर्यय सत्वर । हुए धन्य सिद्धार्थ नगर भूप, दिया पात्र दान जिनने अनूप ।। महिमा अचिन्त्य हैं पात्र दान, सुर करते पंच अचरज महान । वन को तत्काल ही लौट गए, पुरे दो साल वे मौन रहे ।। आई जब अमावस माघ मास, हुआ केवल ज्ञान सुप्रकाश । रचना शुभ समवशरण सुजान, करते धनदेव तुरंत आन ।। प्रभु की दिव्य ध्वनि होती विकीर्ण, होता कर्मो का बांध क्षीर्ण । उत्सर्पिणी अवसर्पिणी विशाल, ऐसे दो भेद बताये काल ।। एक सौ अड़तालीस बीत जाये, जब हुन्द अवसर्पिणी कहाय । सुखमा सुखमा हैं प्रथम काल, जिसमे सब जीव रहे खुशहाल ।। दूजा दिखलाते सुखमा काल, तीजा सुखमा दुखमा सुकाल । चौथा सुखमा दुखमा सुजान, दुखमा हैं पंचम मान ।। दुखमा दुखमा छट्टम महान, छट्टम छट्टा एक ही समान । यह काल परिणति ऐसी ही, होती भरत ऐरावत में ही ।। रहे क्षेत्र विदेह में विध्यमान, बस काल चतुर्थ ही वर्तमान । सुन काल स्वरुप को जान लिया, भविजनो का कल्याण हुआ ।। हुआ दूर दूर प्रभु का विहार, वह दूर हुआ सब शिथिलाचार । फिर गए प्रभु गिरिवर सम्मेद, धरे सुयोग विभु बिना खेद ।। हुई पूर्णमासी श्रावण शुक्ला, प्रभु को शाश्वत निजरूप मिला । पूजे सुर संकुल कूट आन, निर्वाणोत्सव करते महान ।। प्रभुवर के चरणों का शरणा, जो भविजन लेते सुखदाय । उन पर होती प्रभु की करुणा, अरुणा मनवांछित फल पाय ।। ******************************* 2026-06-11 06:07:35
220892 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? 2026-06-11 06:05:49
220893 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? 2026-06-11 06:05:49
220890 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *लोभ और भय* *राजा भोज के दरबार में बड़े पंडित थे, बड़े ज्ञानी थे और कभी कभी वे उनकी परीक्षा भी लिया करते थे। एक दिन वे अपना तोता राजमहल से ले आये दरबार में। तोता एक ही रट लगाता था, एक ही बात दोहराता था बार बार : 'बस एक ही भूल है, बस एक ही भूल है, बस एक ही भूल है।'* *राजा ने अपने दरबारियों से पूछा, "यह कौन सी भूल की बात कर रहा है तोता?"* *पंडित बड़ी मुश्किल में पड़ गए। और राजा ने कहा, "अगर ठीक जवाब न दिया तो फांसी, ठीक जबाब दिया तो लाखों के पुरस्कार और सम्मान।"* *अब अटकलबाजी नहीं चल सकती थी, खतरनाक मामला था। ठीक जवाब क्या हो? तोते से तो पूछा भी नहीं जा सकता। तोता कुछ और जानता भी नहीं। तोता इतना ही कहता है, तुम लाख पूछो, वह इतना ही कहता है : 'बस एक ही भूल है।'* *सोच विचार में पड़ गए पंडित। उन्होंने मोहलत मांगी, खोजबीन में निकल गए। जो राजा का सब से बड़ा पंडित था दरबार में, वह भी घूमने लगा कि कहीं कोई ज्ञानी मिल जाए। अब तो ज्ञानी से पूछे बिना न चलेगा। शास्त्रों में देखने का अब कुछ अर्थ नहीं है। अनुमान से भी अब काम नहीं होगा। जहां जीवन खतरे में हो, वहां अनुमान से काम नहीं चलता। तर्क इत्यादि भी काम नहीं देते। तोते से कुछ राज़ निकलवाया नहीं जा सकता। वह अनेकों के पास गया लेकिन कहीं कोई जवाब न दे सका कि तोते के प्रश्न का उत्तर क्या होगा।* *बड़ा उदास लौट रहा था राजमहल की तरफ कि एक चरवाहा मिल गया। उसने पूछा, "पंडित जी, बहुत उदास हैं? जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो आप के ऊपर, कि मौत आनेवाली हो, इतने उदास! बात क्या है?"* *तो पंडित ने अपनी अड़चन कही, दुविधा कही। उस चरवाहे ने कहा, "फिक्र न करें, मैं हल कर दूंगा। मुझे पता है। लेकिन एक ही उलझन है। मैं चल तो सकता हूँ लेकिन मैं बहुत दुर्बल हूँ और मेरा यह जो कुत्ता है इसको मैं अपने कंधे पर रखकर नहीं ले जा सकता। इसको पीछे भी नहीं छोड़ सकता। इससे मेरा बड़ा लगाव है।"* *पंडित ने कहा, "तुम फिक्र छोड़ो। मैं इसे कंधे पर रख लेता हूँ।"* *उन ब्राह्मण महाराज ने कुत्ते को कंधे पर रख लिया। दोनों राजमहल में पहुंचे। तोते ने वही रट लगा रखी थी कि एक ही भूल है, बस एक ही भूल है। चरवाहा हंसा उसने कहा, "महाराज, देखें भूल यह खड़ी है।" वह पंडित कुत्ते को कंधे पर लिए खड़ा था।* *राजा ने कहा, "मैं समझा नहीं।"* *उसने कहा कि "शास्त्रों में लिखा है कि कुत्ते को पंडित न छुए और अगर छुए तो स्नान करे और आपका महापंडित कुत्ते को कंधे पर लिए खड़ा है। लोभ जो न करवाए सो थोड़ा है। बस, एक ही भूल है : लोभ और भय। लोभ का ही दूसरा हिस्सा है भय, नकारात्मक हिस्सा। यह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक तरफ भय, एक तरफ लोभ।"* *ये दोनों बहुत अलग अलग नहीं हैं। जो भय से धार्मिक है वह डरा है दंड से, नर्क से, वह धार्मिक नहीं है। और जो लोभ से धार्मिक है, जो लोलुप हो रहा है वह वासनाग्रस्त है स्वर्ग से, वह भी धार्मिक नहीं है।* *फिर धार्मिक कौन है?* *धार्मिक वही है जिसे न लोभ है, न भय। जिसे कोई चीज लुभाती नहीं और कोई चीज डराती भी नहीं। जो भय और प्रलोभन के पार उठा है वही सत्य को देखने में समर्थ हो पाता है।* *सत्य को देखने के लिए लोभ और भय से मुक्ति चाहिए। सत्य की पहली शर्त है अभय क्योंकि जब तक भय तुम्हें डांवाडोल कर रहा है तब तक तुम्हारा चित्त ठहरेगा ही नहीं। भय कंपाता है, भय के कारण कंपन होता है। तुम्हारी भीतर की ज्योति कंपती रहती है। तुम्हारे भीतर हजार तरंगें उठती हैं लोभ की, भय की..!!* **************************************** (2) *कहानी* ।। *दिल को छू लेने वाली कहानी* ।। गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्नेका रस पीकर काम पर जाता हूँ।एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !! वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी- छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था , इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है ! मैंने रस का आर्डर दिया , मेरी नजर पास में ही फूलों की दुकान पे गयी , वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले फूलों के हार बनाने का आर्डर दिया , तभी उस व्यक्ति के पिछे से एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस की पिलाने की गुजारिश की !! पहले उस व्यक्ति का बच्चे के तरफ ध्यान नहीं था , जब देखा....तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए" चल हट ...."कहते हुए भगाने की कोशिश की !! . उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया !! . वो भीख नहीं मांग रहा था , लेकिन उस व्यक्ति के दिल में दया नहीं आयी !! . बच्चे की आँखें कुछ भरी और सहमी हुई थी, भूख और प्यास से लाचार दिख रहा था !! इतने में मेरा आर्डर दिया हुआ रस आ गया !! . मैंने और एक रस का आर्डर दिया उस बच्चे को पास बुलाकर उसे भी रस पीलाया !! बच्चे ने रस पीया और मेरी तरफ बडे प्यार से देखा और मुस्कुराकर चला गया !! उस की मुस्कान में मुझे भी खुशी और संतोष हुआ.......लेकिन. ....वह व्यक्ति मेरी तरफ देख रहा था, जैसे कि उसके अहम को चोट लगी हो !! . फिर मेरे करीब आकर कहा"आप जैसे लोग ही इन भिखारियों को सिर चढाते है"मैंने मुस्कराते हुए कहा आपको मंदिर के अंदर इंसान के व्दारा बनाई पत्थर की मूर्ति में ईश्वर नजर आता है, लेकिन ईश्वर द्वारा बनाए इंसान के अंदर ईश्वर नजर नहीं आता है..........मुझे नहीं पता आपके 500 रूपये के हार से आपका मंदिर का भगवान मुस्करायेगा या नहीं, लेकिन मेरे 10 रूपये के चढावे से मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा है । **************************************** (3) *कहानी* काश ये सब हमारी प्राथमिक शिक्षा की पद्धति में शामिल होता दूध ना पचे तो ~ सोंफ दही ना पचे तो ~ सोंठ छाछ ना पचे तो ~जीरा व काली मिर्च अरबी व मूली ना पचे तो ~ अजवायन कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता, तैल, घी, ना पचे तो ~ कलौंजी... पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा, भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल केला ना पचे तो ~ इलायची ख़रबूज़ा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें... 1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी । 6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी । 8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें । 10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें । 11. जम्भाई- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है । 16. अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं । 17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा । 18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं । 19. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है । 21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें । 22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 23. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है । 24. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा । 25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें । 26. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है । 27. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है । 28. वात के असर में नींद कम आती है । 29. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है । 30. कफ के असर में पढाई कम होती है । 31. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है । 33. आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है । 34. शाम को वात -नाशक चीजें खानी चाहिए । 35. प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए । 36. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है । 37. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए । 38. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए । 39. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं । 40. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास(लंघन) से बुखार शांत होता है । 41. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है । 42. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं । 44. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए । 45.छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है । 46. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है । 47.मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 48.सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें । 49. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 50.भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 51. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है 52. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है । 53. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है । 54.रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं । 55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है । 56. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे । 57. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 58. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं । 59. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें । 60. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 61. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है । 62. गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है । 63. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 64. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें । 65. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है। 66.मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें । 67.रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है । 68.भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है । 69.भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा । 70.अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 71.अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 72. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 73. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 74. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है । 75. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है । 76.स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है । 77.भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है । 78.सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए । 79. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 80. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 81.मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 82. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है । 83. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए । 84.एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 85. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 86 .रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 87 .छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 88. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 89.बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 90. चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है । 91.गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें । 92. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है । 93. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 94. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए। 95.जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 96.सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 97.स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। 98 .तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है 99. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना । 100. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके। ?????? ??????????? ? ??????????? ✍️ जनहित सर्वोपरि समझकर सारे ग्रुपों में सेण्ड करें जी? ✍️परहित बसे जिनके मन माही ✍️ताको जग दुर्लभ कछु नाही . *********************************** 2026-06-11 06:05:06
220891 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *कहानी बड़ी सुहानी* (1) *कहानी* *लोभ और भय* *राजा भोज के दरबार में बड़े पंडित थे, बड़े ज्ञानी थे और कभी कभी वे उनकी परीक्षा भी लिया करते थे। एक दिन वे अपना तोता राजमहल से ले आये दरबार में। तोता एक ही रट लगाता था, एक ही बात दोहराता था बार बार : 'बस एक ही भूल है, बस एक ही भूल है, बस एक ही भूल है।'* *राजा ने अपने दरबारियों से पूछा, "यह कौन सी भूल की बात कर रहा है तोता?"* *पंडित बड़ी मुश्किल में पड़ गए। और राजा ने कहा, "अगर ठीक जवाब न दिया तो फांसी, ठीक जबाब दिया तो लाखों के पुरस्कार और सम्मान।"* *अब अटकलबाजी नहीं चल सकती थी, खतरनाक मामला था। ठीक जवाब क्या हो? तोते से तो पूछा भी नहीं जा सकता। तोता कुछ और जानता भी नहीं। तोता इतना ही कहता है, तुम लाख पूछो, वह इतना ही कहता है : 'बस एक ही भूल है।'* *सोच विचार में पड़ गए पंडित। उन्होंने मोहलत मांगी, खोजबीन में निकल गए। जो राजा का सब से बड़ा पंडित था दरबार में, वह भी घूमने लगा कि कहीं कोई ज्ञानी मिल जाए। अब तो ज्ञानी से पूछे बिना न चलेगा। शास्त्रों में देखने का अब कुछ अर्थ नहीं है। अनुमान से भी अब काम नहीं होगा। जहां जीवन खतरे में हो, वहां अनुमान से काम नहीं चलता। तर्क इत्यादि भी काम नहीं देते। तोते से कुछ राज़ निकलवाया नहीं जा सकता। वह अनेकों के पास गया लेकिन कहीं कोई जवाब न दे सका कि तोते के प्रश्न का उत्तर क्या होगा।* *बड़ा उदास लौट रहा था राजमहल की तरफ कि एक चरवाहा मिल गया। उसने पूछा, "पंडित जी, बहुत उदास हैं? जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो आप के ऊपर, कि मौत आनेवाली हो, इतने उदास! बात क्या है?"* *तो पंडित ने अपनी अड़चन कही, दुविधा कही। उस चरवाहे ने कहा, "फिक्र न करें, मैं हल कर दूंगा। मुझे पता है। लेकिन एक ही उलझन है। मैं चल तो सकता हूँ लेकिन मैं बहुत दुर्बल हूँ और मेरा यह जो कुत्ता है इसको मैं अपने कंधे पर रखकर नहीं ले जा सकता। इसको पीछे भी नहीं छोड़ सकता। इससे मेरा बड़ा लगाव है।"* *पंडित ने कहा, "तुम फिक्र छोड़ो। मैं इसे कंधे पर रख लेता हूँ।"* *उन ब्राह्मण महाराज ने कुत्ते को कंधे पर रख लिया। दोनों राजमहल में पहुंचे। तोते ने वही रट लगा रखी थी कि एक ही भूल है, बस एक ही भूल है। चरवाहा हंसा उसने कहा, "महाराज, देखें भूल यह खड़ी है।" वह पंडित कुत्ते को कंधे पर लिए खड़ा था।* *राजा ने कहा, "मैं समझा नहीं।"* *उसने कहा कि "शास्त्रों में लिखा है कि कुत्ते को पंडित न छुए और अगर छुए तो स्नान करे और आपका महापंडित कुत्ते को कंधे पर लिए खड़ा है। लोभ जो न करवाए सो थोड़ा है। बस, एक ही भूल है : लोभ और भय। लोभ का ही दूसरा हिस्सा है भय, नकारात्मक हिस्सा। यह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक तरफ भय, एक तरफ लोभ।"* *ये दोनों बहुत अलग अलग नहीं हैं। जो भय से धार्मिक है वह डरा है दंड से, नर्क से, वह धार्मिक नहीं है। और जो लोभ से धार्मिक है, जो लोलुप हो रहा है वह वासनाग्रस्त है स्वर्ग से, वह भी धार्मिक नहीं है।* *फिर धार्मिक कौन है?* *धार्मिक वही है जिसे न लोभ है, न भय। जिसे कोई चीज लुभाती नहीं और कोई चीज डराती भी नहीं। जो भय और प्रलोभन के पार उठा है वही सत्य को देखने में समर्थ हो पाता है।* *सत्य को देखने के लिए लोभ और भय से मुक्ति चाहिए। सत्य की पहली शर्त है अभय क्योंकि जब तक भय तुम्हें डांवाडोल कर रहा है तब तक तुम्हारा चित्त ठहरेगा ही नहीं। भय कंपाता है, भय के कारण कंपन होता है। तुम्हारी भीतर की ज्योति कंपती रहती है। तुम्हारे भीतर हजार तरंगें उठती हैं लोभ की, भय की..!!* **************************************** (2) *कहानी* ।। *दिल को छू लेने वाली कहानी* ।। गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्नेका रस पीकर काम पर जाता हूँ।एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !! वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी- छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था , इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है ! मैंने रस का आर्डर दिया , मेरी नजर पास में ही फूलों की दुकान पे गयी , वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले फूलों के हार बनाने का आर्डर दिया , तभी उस व्यक्ति के पिछे से एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस की पिलाने की गुजारिश की !! पहले उस व्यक्ति का बच्चे के तरफ ध्यान नहीं था , जब देखा....तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए" चल हट ...."कहते हुए भगाने की कोशिश की !! . उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया !! . वो भीख नहीं मांग रहा था , लेकिन उस व्यक्ति के दिल में दया नहीं आयी !! . बच्चे की आँखें कुछ भरी और सहमी हुई थी, भूख और प्यास से लाचार दिख रहा था !! इतने में मेरा आर्डर दिया हुआ रस आ गया !! . मैंने और एक रस का आर्डर दिया उस बच्चे को पास बुलाकर उसे भी रस पीलाया !! बच्चे ने रस पीया और मेरी तरफ बडे प्यार से देखा और मुस्कुराकर चला गया !! उस की मुस्कान में मुझे भी खुशी और संतोष हुआ.......लेकिन. ....वह व्यक्ति मेरी तरफ देख रहा था, जैसे कि उसके अहम को चोट लगी हो !! . फिर मेरे करीब आकर कहा"आप जैसे लोग ही इन भिखारियों को सिर चढाते है"मैंने मुस्कराते हुए कहा आपको मंदिर के अंदर इंसान के व्दारा बनाई पत्थर की मूर्ति में ईश्वर नजर आता है, लेकिन ईश्वर द्वारा बनाए इंसान के अंदर ईश्वर नजर नहीं आता है..........मुझे नहीं पता आपके 500 रूपये के हार से आपका मंदिर का भगवान मुस्करायेगा या नहीं, लेकिन मेरे 10 रूपये के चढावे से मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा है । **************************************** (3) *कहानी* काश ये सब हमारी प्राथमिक शिक्षा की पद्धति में शामिल होता दूध ना पचे तो ~ सोंफ दही ना पचे तो ~ सोंठ छाछ ना पचे तो ~जीरा व काली मिर्च अरबी व मूली ना पचे तो ~ अजवायन कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता, तैल, घी, ना पचे तो ~ कलौंजी... पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा, भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल केला ना पचे तो ~ इलायची ख़रबूज़ा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें... 1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी । 6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी । 8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें । 10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें । 11. जम्भाई- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है । 16. अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं । 17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा । 18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं । 19. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है । 21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें । 22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 23. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है । 24. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा । 25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें । 26. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है । 27. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है । 28. वात के असर में नींद कम आती है । 29. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है । 30. कफ के असर में पढाई कम होती है । 31. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है । 33. आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है । 34. शाम को वात -नाशक चीजें खानी चाहिए । 35. प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए । 36. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है । 37. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए । 38. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए । 39. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं । 40. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास(लंघन) से बुखार शांत होता है । 41. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है । 42. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं । 44. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए । 45.छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है । 46. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है । 47.मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 48.सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें । 49. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 50.भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 51. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है 52. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है । 53. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है । 54.रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं । 55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है । 56. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे । 57. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 58. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं । 59. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें । 60. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 61. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है । 62. गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है । 63. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 64. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें । 65. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है। 66.मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें । 67.रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है । 68.भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है । 69.भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा । 70.अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 71.अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 72. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 73. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 74. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है । 75. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है । 76.स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है । 77.भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है । 78.सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए । 79. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 80. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 81.मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 82. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है । 83. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए । 84.एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 85. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 86 .रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 87 .छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 88. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 89.बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 90. चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है । 91.गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें । 92. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है । 93. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 94. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए। 95.जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 96.सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 97.स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। 98 .तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है 99. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना । 100. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके। ?????? ??????????? ? ??????????? ✍️ जनहित सर्वोपरि समझकर सारे ग्रुपों में सेण्ड करें जी? ✍️परहित बसे जिनके मन माही ✍️ताको जग दुर्लभ कछु नाही . *********************************** 2026-06-11 06:05:06