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Chat ID
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Message
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Date |
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40449712 |
72. वात्सल्य वारिधि |
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2026-02-18 15:14:56 |
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| 9047 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*ईन्सान जानता है कि समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ भी मिलने वाला नहीं। ईन्सान यह भी जानता है कि जो समय निकल गया वह समय वापस लौट कर नहीं आता। जो होना है वो होकर रहेगा। क्या लेकर आया? क्या लेकर जायेगा? दो दिन की जिंदगी है सब यहाँ पर ही रह जाएगा। ईन्सान सब जानता है फिर भी जो बीत गया उसे याद रखता है। आने वाले समय की चिंता नहीं करता। वर्तमान की तो सोचता ही नहीं है।*
*रिश्ते ही रिश्ते - सम्पर्क करें*
*हनुमान जैन गोलछा*
*नया बाजार दिल्ली*
*9811261971 व 8860741557* |
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2026-02-18 15:14:45 |
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| 9045 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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एक जैन भाई ने अपनी ही शादी में *चोवीहार* कंपलसरी कर दिया,
उसके बाद जानिए लोगों की प्रतिक्रियाए......???? |
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2026-02-18 15:14:43 |
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| 9046 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*विवाह किसे कहते है?*
*क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं, क्या दारू पीकर हुल्लड़ मचाने को विवाह कहते हैं, क्या रिश्तेदारों और दोस्तों को इकट्ठा करके दारु की पार्टी को विवाह कहते हैं ? डी जे बजाने को विवाह कहते हैं, नाचते हुए लोगों पर पैसा लुटाने को विवाह कहते हैं, घर में सात आठ दिन धूम मची रहे उसको विवाह कहते हैं? किसको विवाह कहते हैं?*
*विवाह उसे कहते हैं जो बेदी के ऊपर मंडप के नीचे पंडित जी द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आवाहन करके विवाह की वैदिक रस्मों को संपन्न कराने को विवाह कहते हैं।*
*लोग कहते हैं कि हम आठ 8 महीने से विवाह की तैयारी कर रहे हैं और पंडित जी जब सुपारी मांगते हैं तो कहते हैं अरे वह तो भूल गए जो सबसे जरूरी काम था वह आप भूल गए विवाह की सामग्री भूल गए और वैसे आप 8 महीने से विवाह की कौन सी तैयारी कर रहे थे।*
*विवाह कि नहीं साहब आप दिखावे की तैयारी कर रहे थे, कर्जा ले लेकर दिखावा कर रहे हो, हमारे ऋषियों ने कहा है जो जरूरी काम है वह करो । ठीक है अब तक लोगों की पार्टियां खाई है तो खिलानी भी पड़ेगी समय के साथ रीति रिवाज बदल गए हैं मगर दिखावे से तो बचे।*
*मैं कहना चाहता हूं आज आप दिखावा करना चाहते हो करो खूब करो मगर जो असली काम है जिसे सही मायने में विवाह कहते हैं वह काम गौण ना हो जाऐ, 6 घंटे नाचने में लगा देंगे, 4 घंटे मेहमानो से मिलने में लगा देंगे', 3 घंटे जयमाला में लगा देंगे, 4 घंटे फोटो खींचने में लगा देंगे और पंडित जी के सामने आते ही कहेंगे पंडित जी जल्दी करो जल्दी करो , पंडित जी भी बेचारे क्या करें वह भी कहते है सब स्वाहा स्वाहा जब तुम खुद ही बर्बाद होना चाहते हो तो पूरी रात जगना पंडित जी के लिए जरूरी है क्या? उन्हें भी अपना कोई दूसरा काम ढूंढना है उन्हें भी अपनी जीविका चलानी है, मतलब असली काम के लिए आपके पास समय नहीं है। मेरा कहना यह है कि आप अपने सभी नाते, रिश्तेदार, दोस्त ,भाई, बंधुओं को कहो कि आप जो यह फेरों का काम है वह पवित्र मन और हृदय से किसी पवित्र स्थान पर करें ।*
*जहां दारू पी गई हों .. क्या उस मैरिज हाउस उस पैलेस, कंपलेक्स में देवता आएंगे,? आशीर्वाद देने के लिए! आप हृदय से सोचिए क्या देवता वहां आपको आशीर्वाद देने आऐंगे, आपको नाचना कूदना, खाना-पीना जो भी करना है वह विवाह के बाद में करे मगर विवाह का कोई एक मुहूर्त निश्चित करके विवाह से संबंधित रीति रिवाज वैदिक विधि विधान से पवित्र मन से संपन्न करना चाहिए , और यह शुभ कार्य किसी पवित्र स्थान पर करें। जिसमें गुरु जन आवें, घर के बड़े बुजुर्गों का जिसमें आशीर्वाद मिले ।*
*आप खुद विचार करिये हमारे घर में कोई मांगलिक कार्य है जिसमें सब आये और अपने ईश्वर को भूल जाऐं अपने भगवान को भूल जाऐं अपने कुल देवताओं को भूल जाये।*
*मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि विवाह नामकरण,मुंडन उपनयन इत्यादि जो भी धार्मिक उत्सव है वह शराब के साथ संपन्न ना हो उन में उन विषय वस्तुओं को शामिल ना करें जो धार्मिक कार्यों में निषेध है ।*
*ऐसा करने से आपका सदैव कल्याण होगा।*
*जय जिनेन्द्र* |
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2026-02-18 15:14:43 |
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| 9044 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*विवाह संबंधी आवश्यक विचारणीय तथ्य और सत्य*
?*सिर्फ बायोडाटा देखकर रिश्ते नहीं बनते* – संवाद शुरू करें, पहल करें, कॉल करें।
? *फोन की प्रतीक्षा न करें* – स्वयं संपर्क करें, रिश्तों में पहल ज़रूरी है।
? *मंगल कभी अमंगल नहीं होता* – विवाह एक शुभ कार्य है।
? *यदि आपकी बेटी स्टार है, तो दामाद भी सुपरस्टार होगा* – समान दृष्टिकोण रखें।
? *संपूर्णता की खोज में न उलझें* – 90% लोग हमारी तरह ही हैं, सर्वगुण संपन्न कोई नहीं होता।
? *समय रहते विवाह करें* – करियर और पढ़ाई के चलते उम्र बढ़ाने से बचें, बच्चों का जीवन सेट करें, कोई गैजेट नहीं खरीदना।
? *उचित मेल-जोल करें* – उन्हीं से संपर्क करें जो आपके अनुकूल हों, अनावश्यक अपेक्षाओं वाले रिश्तों में समय न गवाएं।
? *रूप-रंग से अधिक गुणों को प्राथमिकता दें* – हर व्यक्ति में कुछ खामियां होती हैं, उन्हें स्वीकार करना सीखें।
? *आदर और सम्मान दें* – कॉल करने वालों से शालीनता व विनम्रता से बात करें।
? *रिश्ता पसंद न आने पर विनम्रता से मना करें* – क्योंकि भविष्य में उनके परिवार में कोई उपयुक्त रिश्ता मिल सकता है।
? *अब समय बदल चुका है* – यदि आपको कोई कन्या उपयुक्त लगे, तो स्वयं पहल करें, कॉल करें।
? *उदाहरणों से सीखें –*
✔️ अमिताभ बच्चन से जया 12 इंच छोटी हैं।
✔️ सचिन तेंदुलकर से अंजली 3 साल बड़ी हैं।
✔️ ऐश्वर्या राय मांगलिक थीं, अभिषेक बच्चन नॉन-मांगलिक थे।
? *कोई भी परफेक्ट नहीं होता* – दूसरों में दोष ढूंढने से बेहतर है, अपनी खामियों को देखें।
? *सकारात्मक सोचें* – दहेज, कुंडली में उलझकर अच्छे रिश्तों को न ठुकराएं।
? *समाज में बदलाव लाएं* –
सुंदर शुभकामनाओं सहित… धन्यवाद ? |
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2026-02-18 15:14:41 |
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| 9043 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं। अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।
हमारा समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं।
समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा हैं ! इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।
ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।
सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है। पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक।
पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये।
ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। "संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।
मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।
*सुखी वैवाहिक जीवन जियें*
30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है।
आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा होने के कारण भी कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं।
आप सोच के देखें जिन लोगो के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे।
पंडितों ने पढे लिखे आधुनिक समाज को एक सदी और पीछे धकेल दिया, कुंडली मिलान के चक्कर में अच्छे रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं।
आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच साल व्यतीत हो जाते हैं।
उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है?
खुद का मकान है कि नहीं? अगर है तो फर्नीचर कैसा है? घर में कमरे कितने हैं ? गाडी है कि नहीं? है तो कौनसी है? रहन-सहन, खान-पान कैसा है? कितने भाई-बहन हैं? बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़े हैं? बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं? माँ-बाप का स्वभाव कैसा है? घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं?
बच्चे का कद क्या है?रंग-रूप कैसा है?शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है? लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं? उसके कितने दोस्त हैं? सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है। हालात को क्या कहें माँ-बाप की नींद ही खुलती है 30 की उम्र पर। फिर चार-पाँच साल की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं।
एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।
चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं, दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।
लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।
आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती | यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।
अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 में हो जाये और लड़का 25-26 का हो। सब में सब गुण नहीं मिलते।"
घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है। पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।
*टूट रहे हैं घर परिवार सूख रहा है प्रेम और प्यार।* परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा तमाशा किया है कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी "संस्कार"
समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएं सहमत हो तो अपनी राय जरूर लिखें
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2026-02-18 15:14:40 |
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| 9042 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*मेरी दोस्ती का बाग छोटा है, मगर फूल सारे गुलाब रखताहू!*
*दोस्त कम ज़रूर हैं, मगर जनाब जो रखता हु, लाजवाब रखता हू!!* *??जय जिनेंद्र ??* |
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2026-02-18 15:14:38 |
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| 9041 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-02-18 15:14:36 |
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| 9040 |
40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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2026-02-18 15:14:27 |
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| 9039 |
40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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2026-02-18 15:12:59 |
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