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Message
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40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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2026-02-12 09:07:04 |
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43516760 |
Divya_tapasvi-2 |
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<a href="https://www.youtube.com/live/F5wuXlaFgVk?si=OYYIwJQI2k4caDt9" target="_blank">https://www.youtube.com/live/F5wuXlaFgVk?si=OYYIwJQI2k4caDt9</a> |
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2026-02-12 09:06:35 |
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40449770 |
1दिगजैनविकी All India Grp |
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नाम में ही जिनके धर्म था..
भोलापन ही जिनका मर्म था..
*धर्मशिरोमणि गुणानुवाद अमृत महोत्सव*
तिथि - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी दिनांक - *24 फरवरी 2026* स्थान - बाड़ा पदमपुरा (जयपुर)
पावन सान्निध्य - पंचम पट्टाचार्य वात्सल्य वारिधि 108 *श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ* |
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2026-02-12 09:04:06 |
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40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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नाम में ही जिनके धर्म था..
भोलापन ही जिनका मर्म था..
*धर्मशिरोमणि गुणानुवाद अमृत महोत्सव*
तिथि - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी दिनांक - *24 फरवरी 2026* स्थान - बाड़ा पदमपुरा (जयपुर)
पावन सान्निध्य - पंचम पट्टाचार्य वात्सल्य वारिधि 108 *श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ* |
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2026-02-12 09:03:04 |
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40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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2026-02-12 09:02:21 |
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40449715 |
?श्रमणरत्न सुप्रभसागरजी? |
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गर्भ कल्याणक.. श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, पंधराखेडी, पांढुरना (म. प्र.)...... |
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2026-02-12 08:59:30 |
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40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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???????????
*?॥ श्री तीर्थंकराय नम ॥?*
???????????
*? प्रथमानुयोग*
*? सोलह कारण भावना–72*
*? 7. शक्तितस्तप भावना ?*
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<a href="https://quizzory.in/id/6989c8afb99438eb7a030336" target="_blank">https://quizzory.in/id/6989c8afb99438eb7a030336</a>
*इस लिंक के द्वारा कथा में आए प्रश्नों को 24 घंटे मैं हल किया जा सकता है*
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तप दोषों की निवृत्ति के लिए परम आवश्यक है। मिट्टी भी अग्नि की तपन को पार कर पात्र का रूप धारण करती है तभी आदर प्राप्त कर पाती है। पहले कष्ट फिर लाभ ही होता है।
जिस भू-तल पर हम रहते हैं, यह जो नर पर्याय है यह एक जंक्शन है। प्रत्येक दिशा में यहीं से लाइन जाती है। यहाँ से नरक, स्वर्ग, तिर्यञ्च योनि को प्राप्त किया जा सकता है और इसी पर्याय से परमात्म पद भी प्राप्त किया जा सकता है। शरीर के बिना रत्नत्रय धर्म नहीं होता है रत्नत्रय धर्म के बिना कर्मों का नाश नहीं होता इसीलिए अपने प्रयोजन के लिए विषयों में आसक्ति रहित होकर सेवक के समान योग्य भोजन देकर यथाशक्ति जिनेंद्र के मार्ग से विरोध रहित काय क्लेशादि रूप तप करना योग्य है तप से कर्मों की निर्जरा होती है अतः तप श्रेष्ठ है
*चंड चांडाल कथा*
??????
जम्बुदीप के भीतर पूर्व विदेह में एक पुष्कलावती नामक देश व उसमें पुंडरीकिणी नगरी है। वहाँ राजा श्रीपाल और वसुपाल राज्य करते थे। एक समय उस नगर के बाहर शिवंकर उद्यान में भीम नामक केवली का समवसरण स्थित हुआ। वहाँ खचरवती (सुखावती), सुभगा, रतिसेना और सुसिमा नाम की चार व्यन्तर देवियाँ आईं। इन्होंने केवली से पूछा कि हमारा पति कौन होगा? केवली भगवान की वाणी में आया कि इसी नगर में पहले एक चण्ड नाम का चांडाल उत्पन्न हुआ था। उसे वसुपाल राजा ने विद्युत वैग चोर के साथ लाख के घर में रखकर मार डाला था। उसके एक अर्जुन नाम का पुत्र था। उसके शरीर में उदुम्बर कुष्ठ रोग हो गया था। इससे कुष्ठी मानकर उसे घर से निकाल दिया था। वह घर से निकलकर इस समय सुरगिरि पर्वत के ऊपर कृष्ण गुफा में सन्यास के साथ स्थित है। वह पाँचवें दिन शरीर को छोड़कर तुम्हारा पति होगा। इसको सुनकर वे चारों व्यन्तर देवियाँ उस सुरगिरि पर्वत पर गईं और उस अर्जुन से बोलीं कि हे प्रभो! तुम पाँचवें दिन शरीर को छोड़कर हम चारों के पति होओगे, यह हमें भीम केवली भगवान के समवशरण में बताया है। इसलिए तुम परीषह से पीड़ित होकर भी संक्लेश न करना। इस प्रकार से उसे सम्बोधित करती हुई वे चारों उसके पास स्थित हो गईं।
उस समय कुबेरपाल नामका राजपुत्र वहाँ क्रीड़ा के लिये आया। उनको देखकर उसने क्रोध के आवेश से कहा कि यह चाण्डाल कोढ़ी है, इसलिए इस निकृष्ट को छोड़कर तुम मुझसे अनुराग करो। उन्होंने उत्तर दिया कि हम देवियाँ हैं और तुम हो मनुष्य, इसलिए तुम यह असम्बद्ध बात क्यों बोलते हो? यदि तुम भोगों की अभिलाषा रखते हो तो तुम धर्म में नीरत हो जाओ। इससे हम लोगों की तो बात ही क्या, तुम्हें सौधर्मादि स्वर्गों में हमसे भी विशिष्ट देवियाँ प्राप्त हो सकेंगी। तब वह वहाँ से चला गया।
तत्पश्चात वहाँ नागदत्त सेठ का पुत्र भवदत्त आया। उसने भी उनको देखकर वैसा ही कहा। तब उन सबने उसे भी वही उत्तर दिया जो कि कुबेरपाल के लिये दिया था। तत्पश्चात वह कामज्वर से मरकर अपने पिता के द्वारा बनवाये गये नागभवन में उत्पल नाम का व्यन्तर हुआ। वह अर्जुन उन बहुत-सी देवियों का सुरदेव नाम का देव उत्पन्न हुआ। वह परिवार के साथ भीम केवली भगवान की वंदना के लिये आया। उसको देखकर और उसके वृत्तान्त को जानकर भीम केवली भगवान की समवसरण सभा में स्थित कितने ही जीव प्रोषध मैं नीरत हो गए । इस प्रकार अनेक प्राणियों की हिंसा करनेवाला वह चाण्डाल उपवास के प्रभाव से जब देव उत्पन्न हुआ है तब अन्य भव्य जीव क्या उसके फल से समृद्धि को प्राप्त नहीं होंगे अवश्य होंगे
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*✍️ संकलन*
*?️ पं. मुकेश शास्त्री*
*? सुसनेर*
*? 9425935221*
*? 12.02.2026*
??????????? |
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2026-02-12 08:57:53 |
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| 293 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*_।।करणानुयोग।।_*
*!! श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नमः !!*
_{श्रीमद्-नेमिचंद्र-आचार्यदेव-प्रणीत}_
*॥श्री गोम्मटसार-जीवकांड॥*
मूल प्राकृत गाथा,
_आभार : ब्र०पं०रतनचंद मुख्तार_
_(मङ्गलाचरण )_
*सिद्ध सुद्ध पणमिय जिणिदवरणेमिचंदमकलंकं ।*
*गुणरयण भूसणुदयं जीवस्स परूवणं वोच्छं ।।*
_जन्मों और योनियों के परस्पर सम्बन्ध का कथन_
*उववादे अच्चितं गब्भे मिस्सं तु होबि सम्मुच्छे ।*
*सच्चित्तं अच्चित्तं मिस्सं चय होदि जोणी हु ।। ८५।।*
*गाथार्थ* - उपपाद जन्म में अचित्तयोनि होती है, गर्भजन्म में मिश्रयोनि होती है और सम्मूर्च्छन जन्म में सचित्त, अचित्त एवं मिश्र तीनों प्रकार की योनियाँ होती हैं ।।८५।।
*विशेषार्थ* - सम्मूर्च्छन-गर्भ-उपपाद जन्मों में सचित्तादि योनियों का विभाजन इसप्रकार है-
उपपादजन्मवाले देव-नारकियों में सम्पुट शय्या व ऊँट मुखाकार आदि उत्पत्ति-बिल-स्थान विवक्षित जीवोत्पत्ति से पूर्व अचित्त ही हैं, क्योंकि वे योनियाँ अन्य जीवों से अनाश्रित हैं, अथवा इनके उपपादप्रदेशों के पुद्गल अचेतन हैं। उपपादजन्म में सचित्त व मिश्रयोनि नहीं होती । गर्भजन्म में मिश्रयोनि ही होती है, क्योंकि पुरुषशरीर से गलित अचित्त शुक्र का स्त्री के सचित्त शोणित के साथ मिश्रण होने से मिश्रयोनि होती है। केवल अचित्त शुक्र के या केवल सचित्त स्त्रीशोणित के योनिपना सम्भव नहीं है। अथवा माता के उदर में अचेतन वीर्य व रज से चेतन आत्मा का मिश्रण होने से मिश्रयोनि है। सम्मूर्च्छन जन्म में सचित्त, अचित्त और मिश्र तीनों ही प्रकार की योनियाँ होती हैं। एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक सम्मूर्च्छन जन्मवालों में किन्हीं की योनियाँ सचित्त होती हैं, किन्हीं की योनियाँ अचित्त होती हैं और किन्हीं की सचित्त-अचित्त-मिश्र होती हैं। साधारण शरीर वाले निगोदिया सम्मूर्च्छन जीवों के सचित्तयोनि होती है। शेष सम्मूर्च्छनों में किसी के अचित्तयोनि और किसी के मिश्रयोनि होती है।' अन्यत्र (मूलाचार में) भी उपर्युक्त कथन का विषय एक गाथा के द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
??????? ? |
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2026-02-12 08:56:48 |
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40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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ಮಹಾರಾಷ್ಟ್ರದಲ್ಲಿನ ಣಮೋಕಾರ್ ತೀರ್ಥ ಬೃಹತ್ ಪಂಚಕಲ್ಯಾಣ ನೇರ ಪ್ರಸಾರ
Day 7
Kevalgyan kalyan
महाराष्ट्र के णमोकार तीर्थ पर विशाल पंचकल्याणक का सीधा प्रसारण
மகாராஷ்டிராவில் உள்ள நமோகர் தீர்த்தத்தில் பிரம்மாண்டமான பஞ்சகல்யாணத்தின் நேரடி ஒளிபரப்பு
మహారాష్ట్రలోని నమోకర్ తీర్థంలో గ్రాండ్ పంచకల్యాణక్ మహోత్సవం ప్రత్యక్ష ప్రసారం
മഹാരാഷ്ട്രയിലെ നമോകർ തീർത്ഥ ഗ്രാൻഡ് പഞ്ചകല്യാണത്തിൻ്റെ തത്സമയ സംപ്രേക്ഷണം
<a href="https://youtube.com/live/Ql6mZ7B09kw?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/Ql6mZ7B09kw?feature=share</a>
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Thank you??
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2026-02-12 08:55:07 |
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40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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⛳⭕〽️ *जय जिनेन्द्र*
?????? *सुप्रभात*
⛱️ *गुरुवार*
?️? *12-02-2026* ?️?
*पृथ्वी पर ऐसा कोई मनुष्य नहीं*
*जिसके जीवन में समस्या न हो*..
*और ऐसी कोई समस्या नहीं*
*जिसका समाधान न हो*....
*समस्या पर सोचो तो बहाने मिलते हैं समाधान पर सोचो तो रास्ते खुलते हैं*....
*जिंदगी को आसान बनाने की नहीं*
*खुद को मजबूत बनाने की जरूरत है*...
*उत्तम समय कभी नहीं आता*
*समय को उत्तम बनाना पड़ता है*....*!!!*
?? *सुप्रभात* ?? |
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2026-02-12 08:54:58 |
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